युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

15 अप्रैल 2011

बीज न मिलने पर किसान बिफरे, एसडीएम निवास के आगे बैठे


डबवाली (लहू की लौ) पिछले पांच दिनों से बीज के लिए  भटक रहे किसानों के सब्र का पैमाना छलक गया। गुस्साए किसान बुधवार सवेरे उपमण्डलाधीश की गैर मौजूदगी में उनकी कोठी के आगे बैठ गए। सूचना पाकर मौका पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। करीब एक घंटा तक अधिकारियों और किसानों में कशमकश होती रही। बीज मिलने का आश्वासन पाने के बाद ही किसान शांत हुए।
उपमण्डल डबवाली के किसानों को 7 अप्रैल से बीटी कॉटन के बीज मिलने आरंभ हुए हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों को बीज आईडी प्रूफ (राज्य का नागरिक होने पर) के  आधार पर दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। दिन निकलने से पहले ही किसान लाईन बनाकर बीज केंद्र पर जमा हो जाते हैं। बुधवार अल सुबह करीब दो बजे से ही अनाज मण्डी स्थित दुकान नं. 61 पर किसानों की लाईन लगनी शुरू हो गई थी। लेकिन बीज का वितरण आरंभ नहीं हुआ। पिछले पांच दिनों से हाथों में पर्चियां लेकर बीज पाने के लिए धक्के खा रहे किसानों का धैर्य जवाब दे गया। सुबह करीब 9 बजे सैंकड़ों किसान उपमण्डलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल के निवास स्थान के आगे जुट गए। इसकी सूचना पाकर नायब तहसीलदार हरिओम बिश्नोई, उपमण्डल कृषि अधिकारी विजेन्द्र पाल, एडीओ राधेश्याम मौका पर पहुंचे। करीब एक घंटा तक किसानों और उपरोक्त अधिकारियों के बीच बहस होती रही। उपमण्डल कृषि अधिकारी द्वारा बीज उपलब्ध करवाने का आश्वासन मिलने के बाद ही गुस्साए किसान शांत हुए।
किसान अजमेर सिंह मसीतां, लखवीर सिंह सकताखेड़ा, गुरमीत सिंह डबवाली, जगतपाल सिंह रिसालियाखेड़ा, टोनी गिदडख़ेड़ा, साधु सिंह लोहगढ़, दविंद्र सिंह रत्ताखेड़ा, भजन लाल रत्ताखेड़ा, नानक चन्द गिदडख़ेड़ा, भाला राम रत्ताखेड़ा, हरनेक सिंह खुईयांमलकाना, गुरनाम सिंह खुईयांमलकाना ने बताया कि पांच दिन पूर्व उन्हें बीज देने के लिए कृषि विभाग द्वारा पर्चियां काटी गई थी। लेकिन इन पर्चियों को वे हाथ में लिए घूम रहे हैं। सोमवार को बीटी कॉटन का काफी स्टॉफ बीज केंद्रों पर पड़ा था। जबकि मंगलवार को रामनवमी की छुट्टी होने के चलते बीज का वितरण नहीं हुआ। लेकिन आज लाईन में खड़े होने के सात घंटे बाद उन्हें बताया गया कि स्टॉक उपलब्ध नहीं है। किसानों ने सवाल किया कि एक दिन की छुट्टी के बीच स्टॉक कहां गायब हो गया? किसानों के अनुसार मार्किट में बीज 1350 रूपए से लेकर 1800 रूपए तक ब्लैक में बेचा जा रहा है। अगर कंपनी से बीज नहीं आ रहा तो ब्लैक करने वाले लोग बीज कहां से जुटा रहे हैं? किसानों ने आरोप लगाया कि बीज के लिए उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।
इस संदर्भ में उपमण्डल कृषि अधिकारी विजेंद्र पाल ने बताया कि उपमण्डल के किसानों को 7 अप्रैल से बीटी कॉटन के बीज का वितरण शुरू हुआ है। किसानों का रूझान बीटी कॉटन की किस्म 6488, 6588 की ओर ज्यादा है। इन दोनों की किस्मों के अब तक 7500 पैकेट सेल किए जा चुके हैं। जबकि अन्य किस्म बंटी, राघव, लियोकोट, 6304, 6025, 6317, 7007, जयबीटी, मनजीत, ओम3, राशि-134 के भी 7500 पैकेट सेल किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 6488, 6588 की किस्मों का बीज कंपनी की ओर से नहीं आ रहा। शेष सभी किस्मों के करीब 10,000 पैकेट स्टॉक में पड़े हैं। बीज का कालाबाजारी रोकने के लिए बीज विक्रेताओं को रिकॉर्ड दुरूस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ में पंजाब के किसानों को बीज उपलब्ध करवाने पर पाबंदी लगाई हुई है, ताकि राज्य के किसानों को बीज आसानी से मिल सके।  उपमण्डल कृषि अधिकारी के मुताबिक बीटी कॉटन बीज की सभी किस्में एक ही प्रकार की हैं। लेकिन किसान विशेषत: दो किस्मों पर जोर दे रहा है। जिसके चलते बीज वितरण में समस्या सामने आ रही है।

कोई टिप्पणी नहीं: