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10 जुलाई 2011

सरकारी कर्मचारी तंबाकू के धुएं में उड़ा रहे हैं कानून

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के एक पत्र से प्रदेश भर के सरकारी महकमों के कर्मचारियों में खलबली
डबवाली (लहू की लौ) धूम्रपान के लिए बनाया गया कानून, सरकार के कर्मचारी खुद तोड़ते हैं। यह हम नहीं कह रहे। बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा द्वारा राज्य के सभी सरकारी विभागों के प्रमुखों को जारी एक पत्र कह रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा ने राज्य को धूम्रपान और तंबाकू मुक्त जोन बनाने के लिए कमर कस ली है। महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा पंचकूला ने इस संदर्भ में राज्य के सभी सिविल सर्जन को एक पत्र भेजकर उन्हें निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिला के तहत आने वाले सरकारी विभागों के जिला प्रमुखों को इस संबंधी जागरूक करें। महानिदेशक के निर्देशों पर राज्य के सभी सिविल सर्जन ने पुलिस अधीक्षकों, महाप्रबंधकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला प्राईमरी शिक्षा अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों/चिकित्सा अधिकारियों/प्रभारी, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ब्लाक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को निर्देश जारी करके कहा है कि धूम्रपान रोकने के लिए कानून बना हुआ है। लेकिन बड़े खेद की बात है कि उनके अंतर्गत आने वाले कर्मी खुद ही सिगरेट के धुएं को हवा में उड़ाकर...धूम्रपान संबंधी बने कानून को तोड़ते हैं।
इसकी पुष्टि करते हुए उप सिविल सर्जन (स्वास्थ्य) सिरसा डॉ. आरूष अरोड़ा ने बताया कि जिला सिरसा में भी सिविल सर्जन सिरसा ने धूम्रपान निषेध संबंधी बने कानून की पालना के लिए सरकारी विभागों के जिला प्रमुखों को पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि उनके कार्यालय में कर्मचारी, अधिकारी, चालक एवं परिचालक, अध्यापक तथा पुलिस कर्मचारी खुद धूम्रपान निषेध कानून तोड़ते हैं। उनसे भविष्य में जुर्माना वसूला जाए या कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके अधिनस्थ आने वाली सार्वजनिक संस्थाओं/सरकारी संस्थाओं/स्कूलों में 100 वर्ग मी. के अंदर धूम्रपान एवं तंबाकू मुक्त जोन के अंदर कोई भी  दुकानदार/व्यक्ति तंबाकू एवं धूम्रपान संबंधी सामग्री न बेचता हो। अगर उनके परिसर में धूम्रपान निषेध नियम का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ में यह भी दिशा निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित विभागों के परिसरों के बाहर और भीतर धूम्रपान निषेध के साईन बोर्ड लगाए जाएं।

धर्म लोगों को जोड़ता है तोड़ता नहीं-निराला बाबा

कालांवाली (संजीव सिंगला) संतों का काम लोगों को सही मार्ग पर चलने का संदेश देना है। संत किसी भी धर्म या समाज को नहीं मानते। यह बात ओजस्वी प्रखर वक्ता क्रांतिकारी आचार्य दिव्यानंद विजय महाराज निराले बाबा ने शनिवार को मॉडल टाऊन में इंद्रजीत गोयल के निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमें धीरे-धीरे अपनी पुरानी रूढ़ीवादी सोच को बदलना होगा। लोगों को साथ जोडऩे व जुडऩे के लिए समाजिक कार्यक्रता बनना होगा। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्ेश्य सभी धर्म व वर्ग के लोगों को साथ जोडऩा है और समाजिक कार्यों के लिए जागरूक करना ताकि समाज सेवा के माध्यम से लोक भलाई के कार्य हो सके।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रेरणा से व लोगों के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर 12 गोशालाएं स्थापित हुई हैं। एक स्कूल स्थापित किया है जिसमें बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा कालांवाली मण्डी में कई ऐसे सामाजिक कार्य करने की है जिससे लोगों को फायदा हो। निराले बाबा ने बताया कि हरियाणा में उनका प्रथम चतुर्मास है, जबकि वह पंजाब में 11 व राजस्थान में चतुर्मास कर चुके हैं। इससे पूर्व निराले बाबा का निवास स्थान पहुंचने पर इंद्रजीत गर्ग, अग्रवाल वैश्य समाज के हल्का प्रधान सुरेश गर्ग (बंटू), अशोक टोनी आदि ने उनका स्वागत किया। उनका रविवार को मंडी में चतुर्मास के लिए भव्य नगर प्रवेश होगा।

बडिंगखेड़ा में शुरू हुए क्रिकेट मुकाबले

डबवाली (लहू की लौ) गांव बडिंगखेड़ा में गांव की ओर से आवा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय चौथा क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारम्भ गांव के पूर्व सरपंच दर्शन सिंह भोलू ने रिबन काट कर किया। इसमें पंजाब-हरियाणा की 25 टीमें भाग ले रही हैं।
शनिवार को टूर्नामेंट के पहले दिन 10 टीमों में मुकाबले हुए। टॉस जीत कर पहले खेलते हुए लोहगढ़ की टीम ने सभी विकेट खो कर मात्र रन बनाये। इस लक्ष्य को भेदने के लिए मुकबाले में उतरी नसिंग स्कूल सिंघेवाला की टीम ने बिना 3 विकेट खो कर 4 ओवर में जीत हासिल कर ली। नर्सिंग स्कूल के विक्की को 3 विकेट झटकने तथा 21 रन बनाने पर मैन ऑफ दी मैच घोषित किया गया।
दूसरा मुकाबला घुमियारा और बडिंगखेड़ा की टीम में हुआ। पहले खेलते हुए बडिंगखेड़ा की टीम ने 8 ओवर में एक विकेट खो कर 115 रन बनाये। इस लक्ष्य को भेदने के लिए उतरी घुमियारा की टीम 38 रनों पर ही आलआऊट हो गई। बडिंगखेड़ा की टीम के जसप्रीत सिंह ने इस मुकाबले में 80 रनों का योगदान दिया। जसप्रीत को मैन ऑफ दी मैच घोषित किया गया। तीसरा मुकाबला लौहारा-डबवाली की टीम के बीच में हुआ। लौहारा टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 9 विकेट खो कर 31 रन बनाये। जबकि डबवाली की ने इस लक्ष्य को तीन ओवर में बिना विकेट खोये ही पूरा कर लिया। डबवाली टीम के मलिंगा को 5 विकेट झटकने और 6 रनों के योगदान पर मैन ऑफ दी मैच घोषित किया गया।
चौथा मुकाबला शेरगढ़ और बादल की टीम के बीच हुआ। पहले वैटिंग करते हुए शेरगढ़ टीम ने 8 ओवर में 3 विकेट खो कर 74 रन बनाये। इस लक्ष्य को भेदने के लिए उतरी बादल की टीम 6 ओवर में ही 32 रन बना कर आलआउट हो गई। शेरगढ़ टीम के विक्की को 31 रनों के योगदान के लिए मैन ऑफ दी मैच चुना गया। पांचवां मुकाबला किलियांवाली और बडिंगखेड़ा-बी टीम के बीच हुआ। बडिंगखेड़ा टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 5 विकेट खो कर 52 रन बनायेे जबकि किलियांवाली टीम ने अपनी पारी खेलते हुए 7.5 ओवर में 3 विकेट खो कर इस लक्ष्य को भेदने में सफलता पायी। किलियांवाली टीम के हरमीत को 3 विकेट तथा 15 रनों के योगदान के लिए मैन ऑफ दी मैच घोषित किया गया। क्रिकेट मुकाबले रैफरी गुरसेवक सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरप्यार सिंह, निर्र्मल सिंह की देखरेख में करवाये जा रहे हैं।

बुरी आत्मा ने ली जान

डबवाली (लहू की लौ) कचहरी के पास रहने वाली विवाहित युवती का शव शनिवार सुबह कबीर बस्ती के नजदीक पंजाब क्षेत्र में रेलवे ट्रेक में संदिग्ध हालतों में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव बुरी तरह से कटा हुआ था। मृतका के पति का कहना है कि उसकी पत्नी पर बुरी आत्मा का प्रभाव था। जबकि उसके मामा ने अपनी भानजी की हत्या की आशंका जताई है। जीआरपी बठिंडा पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इंतजार में है।
शनिवार सुबह करीब 5 बजे रेलवे का की-मैन कन्हैया लाल रोजाना की तरह गश्त पर था। कबीर बस्ती के पास उसने रेलवे ट्रेक में एक युवती का शव देखा। उसने तत्काल इसकी सूचना सहायक स्टेशन मास्टर होशियार सिंह को दी। सूचना पाकर मौका पर जीआरपी बठिंडा के एएसआई गुरमेल सिंह पहुंचे। मृतका की पहचान हलीमा बेगम (35) पत्नी अहमद अली निवासी नजदीक कचहरी, डबवाली के रूप में हुई।
मृतका के पति अहमद अली (37) निवासी डबवाली ने बताया कि हलीमा को किसी बुरी आत्मा ने अपने वश में कर रखा था। वह अजीब सी हरकतें करने लगी थी। इसका प्रभाव उसकी मानसिकता पर पड़ा और वह पिछले एक साल से परेशान रहने लगी। इलाज के लिए वे हलीमा को उनकी झोपड़ी के पास ही रहने वाले बाबा त्राव के पास ले गए। बाबा ने बताया कि हलीमा पर बुरी आत्मा की छाया है। बाबा ने उसे एक ताबीज बनाकर दिया। ताबीज गले में डालते ही बुरी आत्मा का प्रभाव खत्म हो गया। इस ताबीज ने ढाई माह तक कार्य किया। इस प्रकार वे हर ढाई माह बाद उसे बाबा के पास लेजाते और नया ताबीज बनाकर उसके गले में डाल देते। लेकिन पिछले तीन माह से बाबा यहां नहीं थे। जिसके कारण वे नया ताबीज नहीं बना पाए। बुरी आत्मा के प्रभाव में मानसिक परेशानी के चलते ही उसकी पत्नी ने रेलगाड़ी के आगे कूदकर आत्महत्या की है। अहमद अली ने यह भी बताया कि वह 20 दिनों से पंजाब में गाय चराने के लिए गया हुआ था। शनिवार सुबह उसे उपरोक्त घटना के बारे में उसके भाई नियामत अली (25) ने सूचित किया। सूचना पाकर वह डबवाली पहुंचा। उसके तीन बच्चे रसमत खान (12), फिरोज उर्फ खनन (10) तथा नजमन खान (8) हैं।
इधर मृतका के मामा मंजूर खान (50) निवासी भागसर (राजस्थान) ने बताया कि उसकी भानजी हलीमा की शादी करीब पंद्रह साल पूर्व बुल्ली खान के बेटे अहमद अली से हुई थी। लेकिन पिछले तीन सालों से उसकी भानजी को दहेज के लिए तंग व परेशान किया जा रहा था। वहीं अहमद अली ने दूसरी शादी भी रचा ली। इस बात का पता लगने पर हलीमा अक्सर परेशान रहा करती। शुक्रवार रात करीब 8 बजे उसके पास हलीमा का फोन आया कि वे उसे यहां से ले जाएं, वरना उसका पति, जेठ बगैरा उसे मार देंगे। शनिवार सुबह करीब 4 बजे उन्हें सूचना मिली कि हलीमा ने गाड़ी तले आकर आत्महत्या कर ली है। मंजूर खान ने आरोप लगाया कि हलीमा ने आत्महत्या नहीं की। बल्कि ससुरालियों ने उसकी हत्या कर शव को रेल ट्रेक पर डाला है। अब सजा के डर से बचने के लिए अहमद अली बुरी आत्मा की झूठी कहानी गढ़ रहा है।
मामले की जांच कर रहे जीआरपी बठिंडा के एएसआई गुरमेल सिंह ने बताया कि फिलहाल पुलिस ने मृतका के पति अहमद अली के ब्यान पर इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई अमल में लाई है। बठिंडा के सरकारी अस्पताल से शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे उसके वारिसों को सौंप दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
एएसआई गुरमेल सिंह ने यह भी बताया कि पुलिस ने मृतका की बेटी 10 वर्षीय फिरोज उर्फ खनन के ब्यान भी दर्ज किए हैं। फिरोज ने बताया कि उसकी माता उसके छोटे भाई को उसके साथ चारपाई पर लेटाकर लघुशंका का बहाना करके चली गई। लेकिन वापिस नहीं लौटी।