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30 जनवरी 2011

नशे ने की प्रिंस की हत्या!


बेटे की चिता जल रही थी मां गलियों में घूम रही थी
डबवाली। नशे के लिए जमीन, बर्तन, जुल्ली-बिस्तर तक बेच दिया। अंत में स्वयं नशे का कफन ओढ़कर सो गया। 24 घंटे बाद ही उसकी मौत का खुलासा हो सका। यह किसी हिन्दी फीचर फिल्म की कहानी नहीं है। बल्कि शहर के प्रेमनगर में रह रहे एक परिवार के प्रिंस की दास्तां है।
अतीत के झरोखे से
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित हुए छह भाई लालचंद, गोपाल दास, रामचन्द, लक्ष्मण दास, सोमनाथ, हंसराज अपने परिवारों के साथ उपमण्डल डबवाली के गांव मसीतां में आकर दिहाड़ी मजदूरी करने लगे। इन विस्थापितों पर रहमदिली दिखाते हुए सरकार ने उन्हें पानीपत के गांव रेड़कलां में बीस एकड़ जमीन मुहैया करवाई। लेकिन जमीन पर गांव रेड़कलां के एक व्यक्ति ने अपना हक जता दिया। करीब दो साल तक जमींदार के चक्कर काटने के बाद उन्हें जगह नसीब हुई। जमीन मिलने के बाद लालचंद, गोपाल दास तथा हंसराज वहीं रहने लगे। बाकी तीन भाईयों ने गांव मसीतां में मेहनत करते हुए करियाणा की दुकानें शुरू कर ली। बुरा वक्त बीतने के बाद एक नए दौर की शुरूआत हुई।
मानसिक संतुलन बिगड़ा
भाईयों में तीसरे नंबर पर आने वाले रामचन्द के घर एक बेटा सुरेश और बेटी किरण हुई। शादी के बाद सुरेश गांव मसीतां में  अपनी करियाणा की दुकान चलाने लगा। लम्बी बीमारी के चलते सुरेश की मौत हो गई। साल 2003-04 में सुरेश की पत्नी सविता रानी अपनी दो बेटियों रजनी, नीरू तथा बेटे प्रिंस के साथ डबवाली के प्रेमनगर में आकर रहने लगी। प्रिंस घर पर ही करियाणा की शॉप चलाने लगा। रजनी की शादी के कुछ समय बाद मौत हो गई। पति, फिर बेटी की मौत का सदमा नीरू और सविता सहन नहीं कर पाईं और उनका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया।
सारा सामान बेच डाला
इधर प्रिंस गलत संगत का शिकार हो गया और नशे की दुनियां में खो गया। पानीपत में पड़ी अपनी करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन 15 लाख में बेच दी। सारे पैसे नशे में खर्च कर दिए। पैसे खत्म होने के बाद घर में लगी चौगांठे, दरवाजे तक बेच डाले। नशे की आग यहीं खत्म नहीं हुई घर के बर्तन बेच डाले। मानसिक रूप से पीडि़त सविता के इस प्रिंस को समझाता कौन। सुबह से मां पागलों की तरह शहर की गलियों में घूमने लगती और बेटा नशे के लिए सारा घर बेच रहा था। नशे की तपिश मिटाने के लिए घर के कपड़े तक बेच डाले।
24 घंटे बाद लगा पता
गुरूवार को नशे की हालत में प्रिंस घर आया और आते ही सो गया। शुक्रवार शाम को अचानक प्रिंस की मां सविता गली में आ गई और चिल्लाने लगी कि प्रिंस उठ नहीं रहा है। गली के निवासी रवि कुक्कड़ ने बताया कि इसकी सूचना एक निजी चिकित्सक को दी गई। चिकित्सक ने प्रिंस को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने ही इसकी सूचना गांव मसीतां में सविता के रिश्तेदारों को दी। इधर घर में बेटे प्रिंस के शव को छोड़कर मां सविता घर से भाग गई। रिश्तेदारों ने आकर प्रिंस के शव का अंतिम संस्कार डबवाली के रामबाग में किया। रामबाग में बेटे की चिता जल रही थी, इससे अनजान मां शहर की गलियों में घूम रही थी।
ऐसा न था प्रिंस
Ab Kewal Diwaro per najat aate hain naam
प्रिंस की मौत की जानकारी पाकर मलोट से डबवाली पहुंची प्रिंस की बुआ किरण बाला ने उपरोक्त बातों की पुष्टि करते हुए बताया कि उसके भाई सुरेश का परिवार खुशहाल था। लेकिन सुरेश और उसके पिता रामचन्द की मौत के बाद परिवार बिखर गया। प्रिंस भी नशे का आदि नहीं था। लेकिन डबवाली में आकर गलत संगत में पड़कर नशे करने लगा। नशे ने उनका सबकुछ छीन लिया।
नशे का खात्मा होना चाहिए
Prince ka ghar. jiska sara saman nashe
k leya usne bech dala.
अपने भाई रामचन्द के पोते की मौत का समाचार पाकर डबवाली आए लक्ष्मण दास तथा सोमनाथ निवासी मसीतां ने बताया कि उसके भाई रामचन्द का परिवार यूं तिनकों में बिखर जाएगा, इसकी कल्पना तक नहीं की थी। उनके अनुसार नशे ने केवल उनके ही घर के प्रिंस की जान नहीं ली, बल्कि हर रोज कितने घरों के प्रिंस नशे में पड़कर अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने सरकार से नशे के विरूद्ध कड़े कदम उठाने की मांग की।

मल्लेकां की टीम ने जीती क्रिकेट ट्रॉफी


औढ़ां (जितेन्द्र गर्ग) खंड के गांव आनंदगढ़ में जनचेतना युवा क्लब द्वारा ग्राम पंचायत व समस्त गांववासियों के सहयोग से आयोजित नौवीं शहीद मदन लाल माकड़ मैमोरियल क्रिकेट प्रतियोगिता का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। गांव के सरपंच बलवंत गोदारा की अध्यक्षता में आयोजित समापन समारोह में मुख्यातिथि के रुप में उपस्थित शहरी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश मेहता ने प्रतियोगिता की विजेता टीम मल्लेकां को ट्राफी के साथ 15 हजार रुपए का नकद पुरस्कार एवं उपविजेता टीम बणी को ट्राफी के साथ 11 हजार रुपए का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा खेल को खेल की भावना से खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने हेतु खिलाडिय़ों को अनेक सुविधाएं प्रदान कर रही है। सरकार के प्रयास रंग्र ला रहे हैं और प्रदेश में खेलों का स्तर ऊंचा हुआ है तथा प्रदेश के खिलाडिय़ों प्रदेश का मान बढ़ाया है। कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यातिथि ने शहीद मदन लाल माकड़ की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए तथा जनचेतना युवा क्लब के प्रधान ओमप्रकाश गोदारा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इससे पूर्व प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंची मल्लेकां की टीम ने कुसुंबी की टीम को और बणी की टीम ने बनसुधार की टीम को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। प्रतियोगिता के फाइनल मैच में मल्लेकां की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। मल्लेकां की टीम ने निर्धारित 12 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 95 रन बनाए जिसमें बल्लेबाज पम्मी ने 2 छक्कों व 2 चौकों सहित 32 गेंदों में 35 रनों और जगमीत ने 2 चौकों सहित 26 गेंदों में 25 रनों का योगदान दिया। बणी के गेंदबाज अजय ने 3 ओवरों में 19 रन देकर 2 और भीम ने 3 ओवरों में 10 रन देकर 2 विकेट लिए। इसके जवाब में बल्लेबाजी करने मैदान में उतरी बणी की टीम 12 ओवरों में 6 विकेट खोकर 73 रन ही बना सकी जिसमें बल्लेबाज भीम ने 5 चौकों सहित 11 गेंदों में 25 रनों और बंसी ने एक छक्के व एक चौके सहित 14 गेंदों में 17 रनों का योगदान दिया। मल्लेकां के गेंदबाज जगमीत ने 3 ओवरों में 12 रन देकर 3 विकेट लिए। इस प्रकार मल्लेका की टीम ने यह मैच 22 रनों से जीत लिया जिसका मैन आफ दी मैच का पुरस्कार मल्लेकां के बल्लेबाज पम्मी को दिया गया जिसने 35 रन बनाए।
प्रतियोगिता में मैन आफ दी सीरीज का पुरस्कार मल्लेकां के आलराऊंडर जगमीत को दिया गया जिसने प्रतियोगिता के दौरान कुल 18 विकेट लिए और 60 रन भी बनाए। इस अवसर पर ओमप्रकाश एंथोनी, डॉ. राजकुमार धींगड़ा, रमेश गोयल, प्रेम सैनी, धन्नाराम माकड़, जगतपाल गोदारा, रिसाल गोदारा, अमर सिंह गोदारा, दलबीर बैनिवाल, अनिलवीर बैनिवाल, हवा सिंह गोदारा, शीशपाल गोदारा, आयोजक समिति के सदस्य रोहताश गोदारा, पायलट गोदारा, बजरंग गोदारा और कृष्ण फांडर सहित काफी संख्या में गांववासी एवं खेलप्रेमी उपस्थित थे।

हस्सू में मासिक ग्रामीण लोक अदालत आयोजित


डबवाली (लहू की लौ) गांव हस्सू के राजकीय विद्यालय में उपमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी एवं उपमण्डलीय विधिक सेवा समिति डबवाली के अध्यक्ष महावीर सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को न्यायिक लोक अदालत का आयोजन किया गया।
इस मौके पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके गर्ग ने बताया कि मुकद्दमा में बिना अदालत के किए गए राजीनामा को तुरंत अदालत में प्रस्तुत करके उस पर अदालत की मोहर लगवाकर उसे पक्का कर लेना चाहिए। उन्होंने बंधुआ मजूदर प्रणाली उन्मूलन नियम 1976 की जानकारी भी दी। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि वे अपने बच्चों को मेडिकल नशे से रोकें और 18 साल से कम आयु के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें। दुर्घटना से बचने के लिए ट्रेक्टर के दोनों हैडलाईट और पीछे की रेड लाईट को जरूर लगवाएं। जब भी रात को चलें तो रिफलेक्टर लगाकर ही चलें।
एडवोकेट सुखबीर सिंह बराड़ ने ग्रामीणों को लोक अदालत की जानकारी दी। इस मौके पर वाईके शर्मा ने मंच संचालन किया। इस मौके पर एडवोकेट ओपी गर्ग, इन्द्रपाल बिश्नोई, राजेश यादव, अमरीक सिंह बैनीवाल, रमेश बिश्नोई, अशोक बिश्नोई, अमरजीत सिंह विर्क, गुरदित्त सिंह दुरेजा, महिपाल सिंह और दिनेश बांसल के अतिरिक्त गांव हस्सू के सरपंच नरेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच शिवराज सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन सिंह, छिन्द्र नम्बरदार, ईश्वर सिंह पंच, विद्यालय के अध्यापक संजीव बिश्नोई, महिपाल यादव तथा प्रशासनिक अधिकारियों में से कानूनगो जोगा सिंह, पटवारी बलविंद्र सिंह भी उपस्थित थे।
मासिक न्यायिक लोक अदालत में कुल 67 केस प्रस्तुत हुए। जिनमें से 32 का मौका पर निपटारा कर दिया गया। 30 इंतकाल पेश हुए सभी का मौका पर निपटारा कर दिया गया।