युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

01 दिसंबर 2010

यूं तो रोगों से लडऩे की शक्ति खो देंगे डबवाली वासी

डबवाली (लहू की लौ) विश्व के वैज्ञानिक धरती से मानव जीवन समाप्त होने की हर रोज नई-नई तारीख घोषित कर देते हैं। यह महज एक भविष्यवाणी होती है। लेकिन हम कोई भविष्यवाणी नहीं कर रहे, बल्कि आपको एक ऐसे 'खतरेÓ से परिचित करवाने जा रहे हैं, जो तीन प्रदेशों की त्रिवेणी कहे जाने वाले नगर डबवाली के लोगों के लिए सबसे ज्यादा नुक्सानदायक साबित हो सकता है।
एक ऐसा 'खतराÓ जिसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति पर नहीं, लगभग एक लाख आबादी वाले नगर डबवाली पर पड़ेगा। 'खतराÓ किसी व्यक्ति या प्रलय से नहीं है। बल्कि लोगों द्वारा ही सीवरेजों में बहाए जाने वाले गंदे पानी से है। यही गंदा पानी अब लोगों के गले की फांस बनेगा। चूंकि सीवरेज के गंदे पानी को निकालने का स्थान लगभग खत्म हो चुका है। इसी के कारण नगर के विभिन्न हिस्सों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। अब के बरस हुई बारिश के दिनों में नगर में फैला डायरिया रोग इस बात का जीता-जागता सबूत है। खैर इस 'खतरेÓ से प्रशासन भी अनजान नहीं है। लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वह मसौदा तैयार करने में जुट गया है।
हरियाणा राज्य बनने से पूर्व डबवाली के रामबाग के पीछे गंदे पानी को निकालने के लिए डिस्पोजल स्थापित किया गया था। लेकिन साल 1965 में हरियाणा राज्य पंजाब से अलग हो गया। लेकिन जिस भूमि पर डिस्पोजल निर्मित है, वह जगह पंजाब की है। इसी के साथ हरियाणा क्षेत्र में पड़ती 11 एकड़ भूमि में गंदा पानी छोड़ा जाता था। डिस्पोजल का पूरा खर्च हरियाणा सरकार व्यय करती है। इस डिस्पोजल से शहर डबवाली का 70 फीसदी गंदा पानी निकलता है। लेकिन अब 11 एकड़ भूमि में से करीब आठ एकड़ भूमि पर नगरपालिका द्वारा गिराए गए शहर के कूड़े कचरे का कब्जा हो गया है। इसके अतिरिक्त एक अन्य डिस्पोजल चौटाला रोड़ पर बना हुआ है, जो शहर का 30 फीसदी गंदा पानी बाहर निकालता है।
यह है स्थिति
रामबाग के पीछे बने डिस्पोजल का गंदा पानी इन दिनों पंजाब के किसान प्रयोग में ला रहे हैं। सीवरेज के गंदे पानी से पंजाब के किसानों की करीब चार सौ एकड़ जमीन को फायदा पहुंच रहा है। लेकिन वे भी अपनी जरूरत तक ही पानी लगाएंगे। गौरतलब है कि बारिश के दिनों में पंजाब के किसानों ने गंदा पानी अपनी खेतों में निकालने पर रोक लगा दी थी। निकासी का कोई प्रबंध न होने के कारण और किसानों द्वारा अपने खेतों में गंदे पानी के प्रवेश को बंद करते ही यह गंदा पानी डबवाली नगर में लोगों के घरों में ही जाएगा। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि अब भी नगर के अधिकतर भाग में गंदा पानी घरों में आ रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस बात से जनस्वास्थ्य विभाग भली भांति परिचित है। इस समस्या के हल के लिए गंदे पानी को पंजाब से होते हुए शेरगढ़ तक पहुंचाने की योजना तैयार कर रहा है। योजना के मुताबिक करीब तीन किलोमीटर लम्बी नाली या पाईप बिछाकर गंदे पानी को गांव शेरगढ़ तक पहुंचाया जाएगा। सूत्रों की माने तो योजना लगभग पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। जिसे जल्द ही स्वीकृति के लिए मुख्य सचिव हरियाणा के पास भेजा जाएगा। लेकिन यह योजना सिरे चढऩे की उम्मीद कम है। चूंकि योजना को पूरा करने के लिए पंजाब सरकार की भी मोहर लगानी होगी।
योजना तैयार
डिस्पोजल व्यवस्था देख रहे जनस्वास्थ्य विभाग के जेई सुभाष चन्द्र ने समस्या को स्वीकार करते हुए बताया कि इसे दूर करने के लिए योजना बनाई गई है। जिसे जल्द मुख्य सचिव हरियाणा के पास भेजा जाएगा

सीवरेज का गंदा पानी स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके प्रयोग से ये रोग हो सकते हैं :-
1. डायरिया
2. हैजा
3. टाईफाईड
4. पीलिया
5. कैंसर
6. चमड़ी रोग
7. अनीमिया
8. हड्डी रोग
डबवाली के सरकारी अस्पताल के डॉ. बलेश बांसल ने बताया कि सीवरेज युक्त पानी को उबालने के बावजूद भी पानी के कीटाणु नहीं मरते। इसे शुद्ध पानी नहीं कहा जा सकता। सीवरेज युक्त पानी पीने से कैंसल तथा हड्डी रोग हो सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि व्यक्ति बीमारियों से लडऩे की भी शक्ति खो सकता है। चिकित्सक के अनुसार ऐसेी परिस्थिति में आरओ कारगार साबित हो सकते हैं। लेकिन कुछ समय के लिए। आरओ के पानी को भी इक्ट्ठा करके प्रयोग करने में ध्यान रखना आवश्यक होता है।

7 साल के बाद फौजी विधवा को मिला इंसाफ

मलोट (लहू की लौ) अपने ही गांव के एक स्वर्ण जाति से संबंधित व्यक्ति के हाथों मानसिक और शारीरिक छेड़छाड़ का शिकार हुई फौजी की दलित विधवा की पुलिस द्वारा सुनवाई न किये जाने के बाद पीडि़ता ने अदालत में गुहार लगाई और उसे 7 साल के बाद इंसाफ मिल गया।
गांव किलियांवाली की एक दलित महिला रछपिन्द्र कौर उर्फ माया पत्नी पिरथी सिंह फौजी ने 6 अक्तूबर 2003 को मलोट के उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में धारा 354/380/382/323/506/452 आईपीसी और एससी व एसटी एक्ट के तहत इस्तगासा दायर करके इंसाफ की मांग की थी। अपनी शिकायत में पीडि़ता ने कहा था कि उनके ही गांव किलियांवाली के राजवीर सिंह उर्फ मक्खन ने 26 अगस्त 2003 को खेत जाते समय रास्ते में घेर लिया और बुरी नीयत से शारीरिक छेड़छाड़ की और उसे गांव के ही लोगों ने आकर बचाया। उसने इस संबंध में चौकी किलियांवाली में शिकायत की लेकिन उसे इंसाफ नहीं मिला।
उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी मलोट कृष्णकांत की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोषी करार देते हुए आरोपी राजवीर सिंह को एक साल की कैद की सजा सुनाई।

विवादित प्लाट के मामले ने तूल पकड़ा

डबवाली (लहू की लौ) कबीर बस्ती में विवादित प्लाट को लेकर मामला तूल पकड़ गया है। प्लाट मालिक मंगत राए पुत्र हुक्म चन्द ने एक शिकायत पत्र नायब तहसीलदार हरिओम बिश्नोई तथा डीएसपी बाबू लाल को देकर न्याय की गुहार लगाई है।
नायब तहसीलदार तथा डीएसपी को दी शिकायत में मंगत राए निवासी डबवाली ने कहा है कि उसके पास कबीर बस्ती में 18 मरले का प्लाट है। जोकि उसकी पत्नी उषा रानी व अन्य आशा रानी पत्नी प्रवीण कुमार, हरभजन कौर पत्नी नन्द लाल के बराबर हिस्से हैं। जिसे उन्होंने 1 सितंबर 2010 को विजय कुमार पुत्र वेदप्रकाश से खरीदा। जिसकी रजिस्ट्री भी उनके पास है और प्लाट खरीदने के बाद तीन-तीन फुट की चारदीवारी भी उन्होंने की हुई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार कबीर बस्ती निवासी देवीलाल, विक्की चोरा, ओमप्रकाश, किशोर चन्द व अन्य 15-20 नामालूम लोगों ने उनके प्लाट पर कब्जा करने की नियत से 29 नवंबर 2010 को धर्मशाला का रकबा दिखाते हुए उपमंडलाधीश को ज्ञापन दिया है। जबकि सच्चाई यह है कि प्लाट उनका है, दावा करने वालों के पास किसी प्रकार की कोई रजिस्टरी बगैरा नहीं है। धर्मशाला की आड़ में आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर आरोप लगाया कि ये लोग कबीर बस्ती में पहले भी एक विधवा औरत के प्लाट को धर्मशाला का रकबा बताकर उस पर कब्जा कर चुके हैं और बाद में उस प्लाट को बेच भी चुके हैं।
नायब तहसीलदार हरिओम बिश्नोई तथा डीएसपी बाबू लाल ने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिलाया कि इस प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। जो भी कोई दोषी पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस मौके पर शिकायतकर्ता मंगत राए बगैरा के साथ काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

महिला पंचों ने कहा गांव में भी लगें प्रशिक्षण शिविर

डबवाली (लहू की लौ) यहां के खण्ड विकास एवं पंचायत कार्यालय   में पंचायती राज संस्थाओं का प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को समाप्त हो गया। शिविर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी द्वारा आयोजित आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक मैनपाल सिहाग ने बताया कि खण्ड डबवाली में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 नवम्बर 2010 को शुरू किया गया था। जिसकी शुरूआत खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी रामसिंह ने की थी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तापूर्वक बताते हुए मैनपाल सिहाग ने बताया कि दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से खण्ड डबवाली की सभी 48 ग्राम पंचायतों के नव निर्वाचित पंच व सरपंचों को पंचायती राज के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंच सरपंचों को पंचायती राज की अवधारणा, ग्राम सभा, ग्राम पंचायत की शक्तियों, कार्यों, पंच व सरपंचों की शक्तियों व कत्र्तव्यों तथा ग्राम सचिव की भूमिका के बारे में बताया गया। इसके साथ-साथ पंच सरपंचों को सुचना के अधिकार 2005, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, शामलात भूमि के प्रबंधन तथा अनेक सामाजिक मुद्दो के बारे में जानकारी दी गई। सिरसा जिला में पंच सरपंचों के प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 अगस्त 2010 को बड़ागुढ़ा खण्ड से शुरु होकर आज खण्ड डबवाली में सम्पन्न हुए हैं।
पत्रकारों द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में सिहाग ने बताया कि पंच सरपंचों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफल रहे और इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में खण्ड तथा जिला स्तर पर सभी कर्मचारियों ने अह्म भूमिका निभाई। उन्होंने यह बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि नव निर्वाचित महिला पंच सरपंचों ने घर की चार दीवारी से बाहर निकलकर ब्लाक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा अपने अधिकार व कत्र्तव्यों के बारे में जानने के लिए जागरुकता दिखाई। पत्रकारों द्वारा महिला पंच सरपंचों से पूछे गये सवाल के जवाब में महिला पंच मनजीत कौर नीलियांवाली, सुखजीत कौर पाना, जसपाल कौर, परमिन्द्र कौर, सुखदीप कौर खुईयांमलकाना ने सुझाव दिया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम खण्ड स्तर की बजाय गांव स्तर पर करवाए जाने चाहिए ताकि गांव से शहर न पहुंचने वाली महिला पंचायत सदस्यों को उनके अधिकारों की पूर्ण जानकारी मिल सकें।
मंगलवार के अंतिम प्रशिक्षण कार्यक्रम में खुईयां मलकाना, सांवतखेड़ा, नीलांवाली, दीवानखेड़ा, हैबूआना तथा पाना गांव की पंचायतों के पंच सरपंचों को प्रशिक्षण दिया गया। खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी राम सिंह ने प्रशिक्षण के समापन समारोह पर नीलोखेड़ी से आए प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक मैनपाल सिहाग, प्रशिक्षक वजीर सिंह को प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बधाई दी व आशा की कि वह आगे भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे और ग्राम पंचायतों को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा। इस मौके पर समाज शिक्षा अधिकारी राम प्रकाश, खण्ड लेखाकार रामकिशन, सहायक सामान्य संदीप शर्मा सहित खण्ड के अन्य कर्मचारी व अधिकारी भी उपस्थित थे।
2 नवंबर से खण्ड डबवाली में चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में खण्ड डबवाली की 48 गांव पंचायतों के 691 सदस्यों ने भाग लिया तथा अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

माशूका की जलती चिता में कूद गया आशिक

सिरसा। प्यार की कोई उम्र नहीं होती। जात -पात भी नहीं देखता प्रेमी और जब प्यार परवान नहीं चढ़ता तो दिल टूट जाता है। ऐसे में प्रेमी कुछ भी कर गुजरते हैं। ऐसा ही एक मामला रोड़ी में सामने आया है। यहां एक प्रेमी युगल ने आत्मदाह कर दिया। आत्मदाह करने वाला प्रेमी युगल नाबालिग है। हालांकि दोनों ही पक्षों ने इस सिलसिल में पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन गांव में इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं।
मिली जानकारी के अनुसार रोड़ी निवासी तेजराम की 14 वर्षीय पुत्री वीरपाल कौर उर्फ लाली रोड़ी में ही 8वीं कक्षा की छात्रा थी। लाली का मलसिंहवाला (पंजाब) निवासी बिट्टू से विगत दो वर्षों से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक विगत 27 नवम्बर को लाली के भाई को दोनों के प्रेम-प्रसंग का पता चल गया। लाली को परिजनों ने समझाया लेकिन उसके सिर से बिट्टू के इश्क का भूत नहीं उतरा। परिजनों ने इस पर लाली को पीट भी डाला था। प्यार परवान न चढ़ते देखकर  लाली ने स्वयं पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। लाली द्वारा उठाए गए इस कदम से परिजन सक्ते में आ गए। झुलसी अवस्था में लाली को सिरसा के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। तीन दिनों तक लाली मौत से जूझती रही। सोमवार शाम उसकी मौत हो गई। परिजनों ने लोकलाज के चलते पुलिस को कोई सूचना नहीं दी। बिना पोस्टमार्टम के परिजन शव अपने  साथ ले गए और आनन-फानन मं अंतिम संस्कार कर देना चाहा। इसी बीच लाली की मौत की  खबर उसके प्रेमी बिट्टू को लग गई।  बिट्टू भी शमशान घाट जा पहुंचा। वहां लाली के शव को आग की लपटों में देख बिट्टू ने आपा खो दिया। बिट्टू ने भी लाली की चिता में छलांग लगा दी। बुरी तरह झुलसे बिट्टू का मौके पर ही दम टूट गया। बिट्टू और लाली की इस प्रेम कथा के दुखद अंत से परिजनों के साथ-साथ गांव के लोग भी सक्ते में हैं।
दूसरी ओर पुलिस पूरे मामले से ही पल्ला झाड़ रही है। रोड़ी थाना के कार्यकारी प्रभारी उपनिरीक्षक बचन सिंह का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी तो मिली है लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से कोई शिकायत नहीं आई। ऐसे में वे कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है।

दुर्घटना में माली की मौत

डबवाली (लहू की लौ) थाना शहर पुलिस ने गांव सांवतखेड़ा के पास मोटरसाईकिल दुर्घटना में घायल हुए एक व्यक्ति की बाद में मौत हो जाने पर अज्ञात मोटरसाईकिल चालक के खिलाफ लापरवाही से मोटरसाईकिल चलाकर दुर्घटना को अंजाम देने के आरोप में मामला दर्ज करके आरोपी की तालाश शुरू कर दी है।
गांव सांवतखेड़ा निवासी जय राम (45) सोमवार रात को रिक्शा पर डबवाली से अपने घर लौट रहा था। मार्ग में रिक्शा चालक रिक्शा को रोड़ पर खड़ा करके स्वयं लघुशंका के लिए चला गया। जबकि जयराम उस पर बैठा रहा। अचानक डबवाली साईड से आए एक तेजगति मोटरसाईकिल ने रिक्शा में टक्कर मारी। रिक्शा पर बैठा जयराम नीचे गिर गया। उसे घायल अवस्था में पुलिस एम्बूलैंस के चालक हरपाल तथा जयप्रकाश ने डबवाली के सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद जयराम को उपचार के लिए सिरसा रैफर कर दिया। लेकिन वहां से भी उसे रोहतक के लिए रैफर कर दिया गया। रोहतक लेजाते समय मार्ग में ही उसने दम तोड़ दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए डबवाली लाया गया। जयराम गांव सांवतखेड़ा में किसान जय सिंह दंदीवाल के खेत में सब्जी की बुआई करता था।
पता चला है कि मोटरसाईकिल पर सवार एक व्यक्ति भी घायल हुआ है। जिसकी पहचान स्वर्ण सिंह (45) पुत्र लाभ सिंह निवासी नीलियांवाली के रूप में हुई है।
मामले की जांच कर रहे थाना शहर पुलिस के एएसआई सुभाष ने बताया कि मृतक के भांजे दिनेश कुमार (25) पुत्र जसराम के ब्यान पर अज्ञात आरोपी मोटरसाईकिल चालक के खिलाफ मामला दर्ज करके मोटरसाईकिल को कब्जे में ले लिया है।