युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

28 सितंबर 2010

हिन्दुस्तानी पर लट्टू हुए गोरे

डीडी गोयल
मो. 093567-22045
डबवाली। जोधपुर के लोग और मुकाम की धार्मिक यात्रा पर आए श्रद्धालु जिस व्यक्ति को पॉलीथीन का कचरा बीनते देखकर पागल की संज्ञा देते थे, आज वह व्यक्ति केवल पर्यावरण प्रेमी के नाम से ही विख्यात नहीं है, बल्कि विदेशों में भी प्रेरणा का स्त्रोत बनकर विश्व को पॉलीथीन के कचरे के खिलाफ खड़ा करने का एक आंदोलन बन गया है। गोरे उस पर इतने लट्टू हुए हैं कि उन्होंने उस पर वीडियो फिल्म तैयार करनी शुरू कर दी है।
यह व्यक्ति कोई ओर नहीं, बल्कि हिन्दोंस्तान के राजस्थान राज्य के जोधपुर का एमकॉम पास खमु राम बिश्नोई है। जोकि राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में न्यायिक सहायक के पद पर कार्यरत है। खमु राम बिश्नोई डबवाली की बिश्नोई धर्मशाला में गुरूवार को बिश्नोई समाज द्वारा खेजड़ी के शहीदों समर्पित पर्यावरण रैली में भाग लेने के लिए आए हुए थे और इस संवाददाता से पर्यावरण पर विशेष बातचीत कर रहे थे। पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण संस्थान, जोधपुर के संस्थापक खमुराम बिश्नोई ने बताया कि उसे प्लास्टिक का कचरा बीनने की न तो कोई सनक है और न ही इसे इक्ट्ठा करके कबाडिय़ों को बेचना उसका पेशा है। बल्कि वह निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, राज्य, देश और विश्व के भले के लिए इस काम को अंजाम दे रहा है। उसका एकमात्र उद्देश्य है कि पृथ्वी के पर्यावरण को संतुलित रखकर प्रदूषण से कैसे बचाए रखा जा सकें। यहीं कारण है कि वह स्थान-स्थान पर यहां भी उसे प्लास्टिक का कचरा दिखाई देता है, वह उसे बीनने लग जाता है।
खमुराम के अनुसार वे इस बात से भली प्रकार से परिचित हैं कि प्लास्टिक के कचरे को जलाने से निकलने वाली हानिकारक गैसें वातावरण को प्रदूषित करती हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक है। यदि कचरे को मिट्टी में दबा दिया जाए, तो वह दब तो जाता है, लेकिन सैंकड़ों सालों तक भी वह नष्ट नहीं होता।
उन्होंने बताया कि वे पहली बार हरियाणा की भूमि पर आए हैं और उन्हें पंजाब, राजस्थान तथा हरियाणा की त्रिवेणी कही जाने वाली मण्डी डबवाली में आने का सौभाग्य ही प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि इस मिट्टी की सुगंधी को अपने मात्थे से लगाने का अवसर भी प्राप्त हुआ है। विशेषकर ऐसे मौके पर जब पर्यावरण के लिए 281 वर्ष पूर्व 363 बिश्नोईयों ने शहीदी दी और उसमें भी एक विरांगना अमृता देवी शामिल थी। जिसका आज स्मृति दिवस है।
उन्होंने बताया कि वे एमकॉम करने के बाद राजस्थान सरकार की न्यायिक सेवा में चला गया। लेकिन इसके बावजूद भी उसके दिल में पर्यावरण के प्रति एक टीस थी। धरती को बिगड़ रहे पर्यावरण से कैसे बचाया जा सके, इससे सुरक्षा पाने की सनक उसके सिर पर सवार थी। उसने धरती मां की रक्षा के लिए जब कचरा बीनने की सेवा का कार्य अपने हाथ में लिया तो जोधपुर नगर के लोग उसे पागल कहने लगे। कुछ लोग तो उससे नफरत भी करने लगे। लेकिन जब उन्हें यह पता चला कि वे यह काम अपने लिए नहीं, उन लोगों के लिए कर रहा है तो उन्होंने धीरे-धीरे उसका साथ देना शुरू किया। उन्होंने दुकानदारों को भी समझाया कि वे पॉलीथीन को काम में न लेकर कागज की थैलियों, गत्ते के डिब्बों या फिर कपड़े के थैलों का प्रयोग करें। नक्कारखाना में तूती की आवाज कौन सुनता, लेकिन वह भी अपनी धुन का पक्का था। उसने कपड़े के थैले बनाए और उसे बाजार में लोगों को नि:शुल्क दिया। देखते-देखते पर्यावरण संरक्षण के लिए और भी लोग आगे आए। जोधपुर महानगर उसका मिशन बन गया और मारवाड़ को मुक्त करने का अभियान शुरू हो गया। गांधीवाद के आदर्शों पर चलते हुए उसने विरोधियों के पैर छुए और अपने मिशन में सफलता अर्जित की।
परिणामस्वरूप साल 2004 में फ्रांस से पर्यावरण शोधकर्ता फ्रेंक वोगेल अपनी थीसिस के सिलसिले में भारत आए और इसी दौरान वह राजस्थान के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर निकल पड़े। वोगेल की दृष्टि एक मेले में प्लास्टिक का कचरा बीननते खमुराम पर पड़ी। खमुराम इस मेले में केवल कचरा ही नहीं बीनन रहा था, बल्कि लोगों को इस कचरे के खतरों से सचेत और जागरूक भी कर रहा था। जिससे प्रभावित होकर फ्रेंक ने उससे बातचीत की और उसके ढ़ेर सारे फोटो खींचकर अपने देश ले गया। फ्रेंक ने यूरोपीय देशों की इस भ्रांति को दूर करने का प्रयास किया कि भारतीय पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। फ्रेंक वोगेल की इस दृष्टि ने खमुराम को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। 11 दिसंबर 2008 को कोर्चेवेल सिटी (पेरिस) में प्रारम्भ होने वाले तीन दिवसीय इंटरनेशनल प्लेनेट वर्कशॉप में केवल शामिल होने का गौरव ही प्राप्त नहीं हुआ। बल्कि एशिया महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला। इस वर्कशॉप में वल्र्ड के 300 पर्यावरण शोधकर्ताओं ने शिरकत की थी।
खमुराम ने बताया कि उस पर फ्रेंक वोगेल द्वारा बनाई जा रही डाक्यूमेंट्री (फिल्म) का पहला चरण पूरा हो चुका है। पुन: इसकी शूटिंग 29 सितंबर से जोधपुर में होनी है। इस फिल्म में शोधकर्ता ने प्लास्टिक के प्रभाव को दिखाते हुए पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। खमुराम का मानना है कि सरकारें पर्यावरण की रक्षा के लिए कानून तो बना रहीं हैं, लेकिन इसको एम्पलीमेंट करने में लापरवाह हैं। जिसके चलते पर्यावरण की रक्षा उतनी तीव्र गति से नहीं हो रही है, जितनी तीव्र गति से होनी चाहिए। उनके अनुसार सावन और भादो में बड़ी तादाद में वृक्षारोपण किया जाता है और यह वृक्षारोपण केवल नाटक ही साबित होता है। चूंकि वृक्षारोपण के बाद उसकी पालना करना हम सब भूल जाते हैं। पर्यावरण प्रेमी खमुराम ने बताया कि पिछले दस वर्षों के दौरान वह और उसकी संस्था के सदस्य करीब एक करोड़ लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर चुके हैं। यहां भी मेला भरता है, वे लोग वहीं पहुंच जाते हैं।

रात को सरकारी अस्पताल में हंगामा

डबवाली (लहू की लौ) सरकारी अस्पताल में बुधवार रात को घायल को उपचार के लिए बाहर लेजाने के लिए एम्बूलैंस उपलब्ध न होने पर घायल के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। मौका पर उपस्थित डॉक्टर को खूब खरी खोटी सुनाई।
जानकारी अनुसार गांव जोगेवाला का मंदर सिंह (40) अपने बाईक से गांव की ओर जा रहा था। जोगेवाला मार्ग पर अचानक उसकी बाईक स्लिप कर गई। सूचना पाकर डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के सदस्य मौका पर पहुंचे। उन्होंने घायल को उठाया और डबवाली के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवा दिया। सिर पर चोट होने की वजह से डॉक्टर ने तुरंत उसे सिरसा के लिए रैफर कर दिया। उस समय अस्पताल में एम्बूलैंस मौजूद नहीं थी।
दुर्घटना की सूचना पाकर घायल मंदर सिंह के परिजन अस्पताल पहुंचे। करीब अढ़ाई घंटे उन्हें एम्बूलैंस उपलब्ध नहीं हुई। जिससे परिजनों का गुस्सा उफन गया। गांव के बलराज सिंह नंबरदार, सर्वजीत सिंह, जोगिन्द्र सिंह, हरदीप सिंह, सुरेन्द्र, लवली, राजपाल आदि ने मौका पर उपस्थित डॉक्टर पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया। ग्रामीणों के अनुसार डॉक्टर ने घायल की सही तरीके से देखभाल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि घायल के मरहम-पट्टी तक नहीं की गई। घायल को रैफर किए हुए अढ़ाई घंटे हो चुके हैं। लेकिन सरकारी अस्पताल में एम्बूलैंस तक उपलब्ध नहीं है। इसी बीच ग्रामीणों की डॉक्टर से काफी तकरार हुई। अस्पताल में हंगामा होने की सूचना पाकर मौका पर थाना शहर पुलिस के एसआई भागीरथ, हवलदार खेता राम तथा जय सिंह भी पहुंचे। उन्होंने भी ग्रामीणों को शांत करवाने का प्रयास किया। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए डॉक्टर ने फौरी तौर पर प्राईवेट अस्पताल की एम्बूलैंस मंगवाकर घायल को रैफर किया।
इस संबंध में जब मौका पर उपस्थित डॉक्टर सुखवंत सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया। उनके अनुसार इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई। घायल के सिर पर चोट होने के कारण उन्होंने तुरंत उसे सिरसा के लिए रैफर कर दिया था। लेकिन अस्पताल की एम्बूलैंस एक मरीज को छोडऩे के लिए बाहर गई हुई थी। इसी के चलते घायल मंदर सिंह को रैफर करने में देरी हुई।

ड्रेन टूटा,खेतों में घुसा पानी

डबवाली (लहू की लौ) यहां से 5 किलोमीटर दूर पंजाब के बठिंडा जिला के साथ लगते गांव डूमवाली के रकबा में पडऩे वाली बरसाती डे्रेन का बांध बुधवार शाम को टूट जाने से पानी नरमा के खेतों में बह गया। जिससे किसानों में हड़कम्प मच गया। इसकी सूचना पाकर एसडीएम बठिंडा मौका पर पहुंचे।
गांव डूमवाली के किसान महिपाल सिंह एडवोकेट, भानुप्रताप ङ्क्षसह, कुलजीत सिंह सिधू, गांव पथराला के सरपंच लुधर सिंह ने बताया कि केन्द्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा में बरसात के समय आने वाली बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए इस डे्रनेज का निर्माण किया था। ताकि इस डे्रनेज की मार्फत फालतू पानी राजस्थान  के सूखाग्रस्त इलाके में छोड़ा जा सके। लेकिन हरियाणा की तत्कालीन इंडियन नैशनल लोकदल सरकार ने हरियाणा में इस डे्रनेज को बन्द करके जमीन किसानों को दे दी। उनका गांव हरियाणा की सीमा पर होने के कारण वहां डे्रनेज बन्द हो चुकी है। उनके अनुसार 8 वर्ष के बाद इस ड्रेन में पहली बार पानी का बहाव इतना अधिक आया है कि यह बांध तोड़ कर खेतों में घुस गया। इन किसानों ने यह भी कहा कि बठिंडा ब्रांच तथा कोटला ब्रांच का फालतू पानी भी इसमें छोड़ा जाता है। किसानों ने बठिंडा के उपायुक्त की मार्फत केन्द्र सरकार  तथा पंजाब सरकार को एक पत्र लिख कर मांग की है कि रिपेरियन एक्ट के तहत हरियाणा में बन्द पड़ी ड्रेनेज को चालू करवाया जाये। ताकि आने वाले खतरे से किसानों की जमीनों को बचाया जा सके।
प्रभावित किसान जोगिन्द्र सिंह भाऊ तथा विकास कुमार ने बताया कि डे्रनेज का बांध टूटने से उनकी 8 एकड़ भूमि पर उगी नरमा का फसल में पानी भर गया। इसकी जानकारी उन्होंने जिला प्रशासन बठिंडा को दी।
सूचना पाकर मौका पर पहुंचे बठिंडा के एसडीएम केपीएस माहीं ने इस संवाददाता को बताया कि एक्सीयन ड्रेनेज मानसा को इसकी जानकारी देकर टूटे बांध को जेसीबी मशीनों से भरवा दिया गया है। किसानों का जो भी नुक्सान हुआ है उसकी भरपाई कर दी जायेगी। एक्सीयन ड्रेनेज मानसा विजय कुमार ने बताया कि इन ड्रेनेज में अक्सर पानी रहता है जो कि पानी की कमी के चलते किसानों के  काम आता है। इस बार बरसात ज्यादा होने से ड्रेनेज में पानी ज्यादा आ गया। इधर बुर्जी नं. 0 से 185 तक हरियाणा का क्षेत्र पड़ता है, वहां के किसानों ने डे्रनेज को बन्द कर दिया है। इसके चलते पानी आगे नहीं जा पाया और इस क्षेत्र में डे्रनेज का बांध टूट गया।

स्वाईन फ्लू का रोगी मिला

डबवाली (लहू की लौ) मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र लम्बी के गांव मण्डी किलियांवाली में राजस्थान से आए स्वाईन फ्लू के रोगी ने स्वास्थ्य विभाग पंजाब में हड़कम्प मचा दिया।
मण्डी किलियांवाली के बस अड्डा के सामने स्थित क्वालिटी फर्नीचर हाऊस वाली गली के निवासी राजेन्द्र पाल गर्ग ने बताया कि उसका बेटा राहुल (17) 11वीं का छात्र है और वह 13 अप्रैल 2010 को कोटा के बांसल कोचिंग सैन्टर में पढ़ाई के साथ-साथ आईआईटी की कोचिंग ले रहा है। उन्हें सूचना मिली कि राहुल बीमार है और कंपकंपी लगकर उसे बुखार आ रहा है। कोटा में राहुल के रक्त की जांच करवाई गई। इधर वे उसे डबवाली ले आए। बुधवार रात को कोटा से जो रिपोर्ट उनके पास आई, उसमें स्वाईन फ्लू घोषित किया गया था। जिस पर उन्होंने डबवाली के सरकारी अस्पताल में जाकर डॉक्टरों से सलाह-मश्विरा किया और उनकी सलाह पर उसे पीजीआई रोहतक में ईलाज के लिए लेजाया गया है।
इस संदर्भ में लम्बी सिविल अस्पताल के कार्यकारी एसएमओ डॉ. रीटा गुप्ता से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी इस बात की जानकारी मिली है की कोटा से राहुल नामक छात्र किलियांवाली में आया है। जोकि स्वाईन फ्लू का रोगी है। एतिहात के तौर पर कदम उठाते हुए राहुल के कनटेक्ट में आने वाले उसके परिवार के आठों सदस्यों को स्वाईन फ्लू की दवा टैनी फ्लू दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही एक टीम भी गठित की गई है, जोकि उसके परिवारिक सदस्यों और आसपास के लोगों पर स्वाईन फ्लू को लेकर निगाह बनाए रखेगी। इस टीम में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक बहुउद्देश्यीय कर्मचारी, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नियुक्त किया गया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्वाईन फ्लू से बचने के लिए स्वाईन फ्लू के रोगी से दूर रहा जाए। रोगी खांसी व जुकाम के समय अपने मुंह पर रूमाल रखे। रोगी के साथ हाथ न मिलाया जाए। और अगर रोगी के साथ हाथ लगता है, तो उसे अच्छी प्रकार से धोया जाए। बुखार, खांसी और सिरदर्द होने पर आवश्य ही अपने आस-पड़ौस के सरकारी अस्पताल से टैस्ट करवाकर इस संदर्भ में राए ली जाए।
इधर डबवाली के सरकारी अस्पताल के कार्यकारी एसएमओ डॉ. एमके भादू ने बताया कि स्वाईन फ्लू का रोगी अस्पताल में आया था। उसे स्वाईन फ्लू से संबंधी ट्रीटमेंट दे दिया गया है।

ड्रेन टूटा,खेतों में घुसा पानी

डबवाली (लहू की लौ) यहां से 5 किलोमीटर दूर पंजाब के बठिंडा जिला के साथ लगते गांव डूमवाली के रकबा में पडऩे वाली बरसाती डे्रेन का बांध बुधवार शाम को टूट जाने से पानी नरमा के खेतों में बह गया। जिससे किसानों में हड़कम्प मच गया। इसकी सूचना पाकर एसडीएम बठिंडा मौका पर पहुंचे।
गांव डूमवाली के किसान महिपाल सिंह एडवोकेट, भानुप्रताप ङ्क्षसह, कुलजीत सिंह सिधू, गांव पथराला के सरपंच लुधर सिंह ने बताया कि केन्द्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा में बरसात के समय आने वाली बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए इस डे्रनेज का निर्माण किया था। ताकि इस डे्रनेज की मार्फत फालतू पानी राजस्थान  के सूखाग्रस्त इलाके में छोड़ा जा सके। लेकिन हरियाणा की तत्कालीन इंडियन नैशनल लोकदल सरकार ने हरियाणा में इस डे्रनेज को बन्द करके जमीन किसानों को दे दी। उनका गांव हरियाणा की सीमा पर होने के कारण वहां डे्रनेज बन्द हो चुकी है। उनके अनुसार 8 वर्ष के बाद इस ड्रेन में पहली बार पानी का बहाव इतना अधिक आया है कि यह बांध तोड़ कर खेतों में घुस गया। इन किसानों ने यह भी कहा कि बठिंडा ब्रांच तथा कोटला ब्रांच का फालतू पानी भी इसमें छोड़ा जाता है। किसानों ने बठिंडा के उपायुक्त की मार्फत केन्द्र सरकार  तथा पंजाब सरकार को एक पत्र लिख कर मांग की है कि रिपेरियन एक्ट के तहत हरियाणा में बन्द पड़ी ड्रेनेज को चालू करवाया जाये। ताकि आने वाले खतरे से किसानों की जमीनों को बचाया जा सके।
प्रभावित किसान जोगिन्द्र सिंह भाऊ तथा विकास कुमार ने बताया कि डे्रनेज का बांध टूटने से उनकी 8 एकड़ भूमि पर उगी नरमा का फसल में पानी भर गया। इसकी जानकारी उन्होंने जिला प्रशासन बठिंडा को दी।
सूचना पाकर मौका पर पहुंचे बठिंडा के एसडीएम केपीएस माहीं ने इस संवाददाता को बताया कि एक्सीयन ड्रेनेज मानसा को इसकी जानकारी देकर टूटे बांध को जेसीबी मशीनों से भरवा दिया गया है। किसानों का जो भी नुक्सान हुआ है उसकी भरपाई कर दी जायेगी। एक्सीयन ड्रेनेज मानसा विजय कुमार ने बताया कि इन ड्रेनेज में अक्सर पानी रहता है जो कि पानी की कमी के चलते किसानों के  काम आता है। इस बार बरसात ज्यादा होने से ड्रेनेज में पानी ज्यादा आ गया। इधर बुर्जी नं. 0 से 185 तक हरियाणा का क्षेत्र पड़ता है, वहां के किसानों ने डे्रनेज को बन्द कर दिया है। इसके चलते पानी आगे नहीं जा पाया और इस क्षेत्र में डे्रनेज का बांध टूट गया।

खुली हवा में सांस लेंगे हीरा और जग्गा

डबवाली (लहू की लौ) वर्षों से जंजीरों में जकड़े गांव पन्नीवाला रूलदू के गुरदीप और जगवीर को खुली हवा में सांस लेने की उम्मीद आखिर जगी है। अखबारों की खबर के बाद डॉक्टरों की टीम ने जाकर दोनों की हिस्ट्री जानी और अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दी।
डबवाली सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल ने बताया कि जैसे ही स्वास्थ्य विभाग हरियाणा को गांव पन्नीवाला रूलदू में गुरदीप उर्फ हीरा और जगवीर उर्फ जग्गा को उनके अभिभावकों द्वारा बीमारी के चलते जंजीरों में जकडऩे का पता चला तो उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देश पर इसकी जांच के लिए डॉ. गुरजीत सिंह सिधू मैडीकल अधिकारी पीएचसी देसूजोधा की डयूटी लगाई। इस पर डॉ. गुरजीत सिंह जगवीर और गुरदीप के घर पहुंचे और उनके अभिभावकों से हिस्ट्री जानी और रिपोर्ट उसकेे समक्ष प्रस्तुत की।
महिपाल के  अनुसार जगवीर के भाई हरफूल सिंह ने बताया कि जग्गा 9 वर्ष का था तो वह घर के सदस्यों से अलग ही अपनी दुनिया में रहने लगा तथा इतना आक्रमिक हो गया, उसके सामने जो भी आता उसे मारने के लिए दौड़ता। बिना बताये घर से भाग जाता। उसके इलाज के लिए तीन वर्ष सिरसा और दो वर्ष बठिंडा के अस्पतालों में हजारों रूपये उन्होंने खर्च कर डाले, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। उसकी हरकतों से तंग आकर मां-बाप ने मजबूरन जग्गा को जंजीरों में डाल दिया। यदि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग उसके भाई के इलाज के लिए उनका सहयोग करती है तो वह उसका इलाज करवाने के लिए उसे यहां भी विभाग कहेगा वहां ले जाने को तैयार हैं।
इधर गुरदीप उर्फ हीरा की माता हरबन्स कौर ने चिकित्सक को बताया कि हीरा जब एक वर्ष का था तो अचानक घर में बनी डिग्गी में गिर गया था। 5वीं पास करने के बाद हीरा के दिमाग में पता नहीं क्या आया कि उसने स्कूल जाना छोड़ दिया और गुमसुम रहने लगा। कुछ ही दिनों बाद लोगों को मारने के लिए दौडऩे लगा। जिस पर उसे 17 वर्ष की आयु में जंजीरों  से बांधना पड़ा, हालांकि वह बीड़ी पीने का शौकीन है, भोजन, चाय आदि मांग लेता है। हरबन्स कौर ने बताया कि उन्होंने जगह-जगह हीरा के इलाज के लिए पैसे पानी की तरह बहाये, अब उनके पास उसके इलाज के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं बची। अगर हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग उसके बेटे को सामान्य करने में उनकी मदद करता है तो वह विभाग के निर्देश अनुसार इलाज करवाने के लिए तैयार हैं।
एसएमओ ने इस संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने डॉक्टर से प्राप्त जांच रिपोर्ट को आवश्यक कार्यवाही के लिए सीएमओ सिरसा और उपमंडलाधीश डबवाली  को भेज दिया है। उनके अनुसार स्वास्थ्य विभाग से हीरा और जग्गा के अभिभावकों ने इलाज की तैयारी के लिए 2 दिन का समय मांगा है। इसके बाद इलाज के लिए इन्हें पीजीआई रोहतक में भेज दिया जायेगा। इलाज का खर्च स्वास्थ्य विभाग हरियाणा वहन करेगा।

डूमवाली बैरियर पर बवाल

डबवाली (लहू की लौ) डूमवाली बैरियर पर मंगलवार रात को जमकर बवाल मचा। शराब के नशे में धुत्त एक पुलिस कर्मी ने ट्रक चालक पर बंदूक तान दी।
जानकारी अनुसार बठिंडा रोड़ पर स्थित डूमवाली बैरियर पर अक्सर वाहनों की लम्बी कतारें लगी रहती हैं। जिसके कारण इस मार्ग पर जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। मंगलवार रात को एक ट्रक चालक ने अपने ट्रक को सड़क पर रोका और उसके भीतर सो गया। जिसको लेकर ट्रक चालक और आईआरबी के जवान के बीच तूतू-मैंमैं हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि तैश में आए जवान ने ट्रक चालक को पीटना शुरू कर दिया। बचाव में उतरे ट्रक चालकों पर उक्त जवान ने बंदूक तान ली। जिससे मामला और भी बिगड़ गया।
गुजरात से सामान लेकर बठिंडा जा रहे ट्रक चालक कैलाश चन्द्र ने बताया कि वह रात को अपनी गाड़ी पास करवाने के लिए बैरियर पर रूका हुआ था। इसी दौरान एक ट्रक चालक ने मार्ग में ट्रक खड़ा कर दिया था। बैरियर पर मौजूद आईआरबी जवान ने उसे ट्रक साईड में लगाने को कहा। चालक ट्रक को साईड में लगा रहा था, इसी बीच दोनों में गर्मा-सर्दी हो गई। बात इतनी बिगड़ गई कि शराब के नशे में धुत्त जवान ने उसे नीचे उतार लिया और पीटना शुरू कर दिया। डंडों की मार से ट्रक चालक के खून बहने लगा। इंसानियत के नाते उसने ट्रक चालक को छुड़वाने का प्रयास किया। लेकिन शराब के नशे में धुत्त जवान ने उस पर बंदूक तान ली। जवान के साथियों ने बीच-बचाव करके उसे बचाया। जवान ने अपनी वर्दी और उस पर लगी नेम प्लेट तक तोड़ डाली। सेल टैक्स बैरियर के उच्च अधिकारियों के मौका पर पहुंच जाने से उस समय मामला शांत हो गया।
इधर आईआरबी जवान नरिन्द्र पाल ने बताया कि वह रात को डयूटी पर था। एक ट्रक चालक ने मार्ग में ही ट्रक खड़ा कर दिया था। जब वह उसे ट्रक साईड खड़ा करने के लिए कहने गया, तो वह उससे उलझ गया। ट्रक चालक गाली-गलौच पर उतर आया। जब उसने विरोध किया तो वह उससे मारपीट करने लगा। उसने उसकी वर्दी तक फाड़ डाली।
इस संदर्भ में जब टैक्स बैरियर के मंगलवार रात्रि डयूटी के समय इंचार्ज रणधीर सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास दोनों पक्षों में से किसी की शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।