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10 सितंबर 2010

15 सालों से जंजीरों में जगवीर

डबवाली (लहू की लौ) 'तेलू दे मुंडे की लत बड़ी करड़ी है, किन्ना भी मोड़ी जाईए मुडदी ही नहींÓ अपने बेटे के यह शब्द किलकारी बनकर उपमंडल डबवाली के गांव पन्नीवाला रूलदू की एक दम्पत्ति के कानों में गूंज रहे हैं। उनका बेटा अब 28 सालों का हो गया है। लेकिन मानसिक रूप से परेशान है। शायद यही कमजोरी उसका कसूर बन गई। जिसके कारण मजबूर दम्पत्ति ने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर उसे जंजीरों में जकड़ दिया।
गांव पन्नीवाला रूलदू में रहने वाले घग्घी सिंह (52) का बेटा जगवीर उर्फ जग्गा पिछले 15 सालों से जंजीरों में जकड़ा घर के एक कोने में बैठा हुआ है। लेकिन जन्म से वह ऐसा नहीं था। गांव के सरकारी स्कूल से कक्षा पहली, दूसरी और फिर तीसरी पास की। लेकिन चौथी कक्षा में कदम रखते ही न जाने जग्गा को क्या हुआ। हंसता-खेलता चेहरा एकदम से मायूस पड़ गया। स्कूल छोड़ दिया, घर के सदस्यों से बात करनी छोड़कर अपनी ही दुनियां में खो गया। बीतता समय उसका जख्म और गहरा करता गया। 10 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह इतना आक्रमक हो गया कि जो भी उसके सामने आता वह उसे मारने के लिए दौड़ता। बिना बताए वह घर से भाग जाने लगा। उसके मां-बाप उसे दिखाने के लिए कभी तांत्रिक, तो कभी डॉक्टर के पास लेजाते। इसके बावजूद भी उसकी आदतें नहीं बदली। अलबत्ता वह ओर ज्यादा खूंखार हो गया। मासूम चेहरे पर हैवान का चेहरा कैसे लग गया। यह किसी की समझ में नहीं आया। मजबूरन हरकतों से तंग आए मां-बाप ने जग्गा को जंजीरों में डाल दिया।
बकौल घग्घी सिंह (52) वह एक दिहाड़ीदार मजदूर है। उसके दो बेटे हरफूल (32) तथा जगवीर उर्फ जग्गा (28) हैं। हरफूल विवाहित है। लेकिन जगवीर को वे लोग बांधने को मजबूर हैं। चौथी कक्षा में दाखिल होते ही उसके बेटे को दौरे पडऩे लगे। कई बार उसे शिक्षा प्राप्त करते हुए कक्षा में ही दौरा पड़ा और वे उसे घर ले आए। दौरा पडऩे से पहले वह आक्रमक भी होने लगा। उसे डबवाली, सिरसा, बठिंडा, गंगानगर के चिकित्सकों के पास लेजाया गया। जगवीर के उपचार पर उसने अपनी दो कैनाल भूमि, घर में पुरूखों की दौलत तक लगा डाली। लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। वह घर से भागने लगा। जगवीर की हरकतें दिन-ब-दिन बढऩे लगी, वह घर के सदस्यों से भी उलझने लगा। जिसके कारण उसे अपने कलेजे पर पत्थर रखकर उसे जंजीरों में बांधना पड़ा।
घग्घी सिंह की पत्नी सुखदेव कौर (50) ने बताया कि चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि जगवीर को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं तथा उसके दिमाग की नसें भी कमजोर हैं। जगवीर की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। वह और अधिक आक्रमक होता जा रहा है। जिसके कारण उसे नशे के इंजेक्शन तथा टेबलेट दी जा रही है।
मजबूर मां-बाप अपने बेटे जगवीर का ईलाज करवाकर थक चुके हैं। लेकिन अब भी उन्हें उनके घर में भगवान रूपी इंसान के पहुंचने की उम्मीद है। उन्हें आशा है कि वह इंसान जल्द आएगा और उसके बेटे के चेहरे की हंसी दोबारा लौटेगी।
डबवाली सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्हें आज ही जानकारी मिली है। इसकी जांच के लिए स्वास्थ्य कर्मी की डयूटी लगा दी गई है। स्वास्थ्य कर्मी की रिपोर्ट के बाद जगवीर का ईलाज करवाया जाएगा।

गुरदीप 'हीराÓ को इंसाफ मिलने की उम्मीद

डबवाली (लहू की लौ) गांव पन्नीवाला रूलदू का हीरा क्या एक बार फिर खुली हवा में सांस ले सकेगा? इस प्रश्न का उत्तर तो प्रशासन के आला अधिकारी ही दे सकते हैं। लेकिन सबकुछ मालूम होते हुए भी वे अनजान बने हुए हैं। लेकिन हीरा इंसाफ मिलने की उम्मीद लिए हुए जी रहा है।
उपमंडल डबवाली के गांव पन्नीवाला रूलदू का गुरदीप 'हीराÓ  पिछले 18 वर्षों से जंजीरों में बंधा है। हीरा को जो बीमारी है उसे साईंस के विशेषज्ञ लाईलाज नहीं मानते हैं। इलाज के बाद हीरा आजाद पंछी की तरह खुली हवा में अपने पंख फैलाकर उड़ सकता है। लेकिन यह तभी संभव हो सकता है, जब प्रशासन उसके प्रति संजीदा हो और उसका उपचार करवाए। दुर्भाग्य तो इस बात का है कि प्रशासन ने आज तक हीरा की ओर कदम नहीं बढ़ाया है। यहां बता दें कि गुरदीप उर्फ हीरा भाइयों में से सबसे छोटा है। उसकी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है। बाल्यकाल से ही हीरा किसी से कुछ नहीं कहता था। स्कूल से वापिस घर आने के बाद वह गुमसुम सा घर के एक कोने में बैठा रहता। जैसे-तैसे उसने गांव के सरकारी स्कूल से पांचवी पास की। लेकिन 6वीं में प्रवेश पाते ही उसने स्कूल जाना छोड़ दिया। जवानी में पांव रखते ही उसे न जाने क्या हुआ वह घर के सदस्यों से बदसलूकी करने लगा। इसी दौरान हीरा के पिता कौर सिंह की हृदय घात से मौत हो गई। वे सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। पिता की मौत के बाद हीरा और तनाव में रहने लगा। वह परिवार के सदस्यों से मारपीट भी करने लगा। बिना बताए वह घर से दूर जाने लगा। सूचना मिलने पर परिवार के सदस्य उसे ढूंढकर घर वापिस लाते। हीरा का चैकअप सिरसा और बठिंडा के डॉक्टरों को भी करवाया। डॉक्टरों की सलाह थी कि हीरा मानसिक रूप से बीमार है। उसे घर में ही रखें।
30 अगस्त को इस मामले में एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल से पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि हीरा की पूरी मदद की जाएगी। जिला सिरसा में कोई भी मनोरोग चिकित्सक नहीं है। इसके चलते हीरा को रोहतक में भेजा जाएगा। अस्पताल की ओर से रोहतक लेजाने के लिए उसे एम्बूलैंस उपलब्ध करवाई जाएगी।