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16 नवंबर 2014

नेशनल किक की तैयारी


प्रतिभा का सम्मान : नेशनल खेलने पर पढ़ाई के नाम पर एक पाई नहीं लेगा स्कू
डबवाली (लहू की लौ) यहां की तीन बेटियों का चयन नेशनल स्तर पर फुटबाल प्रतियोगिता के लिये हुआ है। आगामी दिसंबर माह में होने जा रही प्रतियोगिता में तीनों अपनी किक से देश को नचाने के लिये तैयार हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद तीनों सुबह-शाम कड़ा अभ्यास कर रही हैं। बेटियों की मेहनत पर स्कूल भी फिदा है। अब पढ़ाई के लिये स्कूल एक पैसा भी इन बेटियों से नहीं लेगा।
खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढऩे वाली छात्रा मनप्रीत कौर की आयु 16 वर्ष है। फुटबाल के अंडर-19 वर्ग में खेलते हुये इसी वर्ष अक्तूबर माह में ब्लाक, जिला तथा प्रदेश स्तर पर खेली। फुटबाल में मुख्य स्टॉपर की भूमिका में रहने वाली इस खिलाड़ी ने हिसार में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं को अपनी ओर खींचा और नेशनल के लिये प्रदेश की टीम में जगह बनाई। गांव नीलियांवाली की रहने वाली इस खिलाड़ी का कहना है कि वह फुटबाल में एक शानदार प्लेयर बनना चाहती है। वह स्कूल समय में नेशनल के लिये मेहनत कर रही है। गांव में खेल सुविधाएं न होने की वजह से वह वहां अभ्यास नहीं कर पा रही। मनप्रीत ने दिसंबर माह में गोवा में होने जा रही नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेना है।
इसी विद्यालय की 10वीं कक्षा में पढऩे वाली अंजलि सियाल की उम्र महज 13 वर्ष है। फुटबाल अंडर-17 वर्ग में खंड, जिला तथा प्रदेश स्तर पर खेलने के साथ-साथ नेशनल के लिये क्वालिफाई किया है। फुटबाल में सेंटर फारवर्ड रहकर विरोधी टीम पर प्रहार के लिये अंजलि हमेशा तैयार
 कहना है कि उसके पिता खेल प्रशिक्षक हैं। समय-समय पर पिता से गुर सीखती रहती हूं। साथ में टीवी पर फुटबाल मैच दे रहती है। अंजलि दिसंबर माह में मणिपुर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता में भाग लेगी। अंजलि काखकर अपनी गलतियों को सुधार रही हूं। मेरा सपना प्लेयर बनना है। खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल की 7वीं कक्षा में पढऩे वाली हरवीर कौर का चयन फुटबाल अंडर-14 के लिये हुआ है। खंड, जिला तथा प्रदेश स्तर पर खेलने के बाद अब हरवीर गुवाहटी में खेलने जायेगी। 12 वर्षीय इस खिलाड़ी का कहना है कि वह फुटबाल प्लेयर बनना चाहती है। इसके लिये वह जी तोड़ मेहनत कर रही है। राईट फारवर्ड पर खेलने वाली इस खिलाड़ी का कहना है कि अपने खेल गुरू से बारीकियां सीख अपनी खेल शैली को धारधर बना रही है।

ये बेटियां हैं कमाल
नेशनल लेवल पर खेलने जा रही तीनों बेटियों का पढ़ाई में भी कोई सानी नहीं है। मैदान में फुटबाल को किक लगाने वाली तीनों लड़कियों हर बर मेरिट लिस्ट में अपना नाम लिखवाती हैं। इन बेटियों के खेल गुरू राजन ने बताया कि नेशनल स्तर पर चयनित इन खिलाडिय़ों को निरंतर अभ्यास करवाया जा रहा है। तीनों खिलाडी बेहतरीन हैं। खंड, ब्लाक तथा प्रदेश स्तरीय मुकाबलों में हुई गलतियों को दूर किया जा रहा है। डबवाली क्षेत्र के लिये गौरव की बात है कि तीन लड़कियां फुटबाल में अलग-अलग आयु वर्ग में नेशनल खेलने जा रही हैं।


मुफ्त शिक्षा मिलेगी
खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल के प्रिंसीपल गुरतेज सिंह ने बताया कि नेशनल खिलाड़ी को विद्यालय में मुफ्त शिक्षा दी जाती है। तीनों खिलाडिय़ों को भी नि:शुल्क शिक्षा दी जायेगी। पढ़ाई के नाम पर एक पाई भी उनसे वसूल नहीं की जायेगी।

एंबुलैंस में गूंजी किलकारी


समय पर चिकित्सीय सुविधा न मिलने से बच्चे की हालत गंभीर

डबवाली (लहू की लौ) शनिवार को गांव सुकेराखेड़ा की गर्भवती आशा वर्कर ने एंबुलैंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया। समय पर चिकित्सीय सहायता न मिलने के कारण बच्चा इंफेक्शन का शिकार हो गया। सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से उसे एक निजी अस्पताल में रैफर कर दिया गया। यहां बच्चे की हालत चिंताजनक बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच करने की बात कही है।
गांव सुकेराखेड़ा की आशा वर्कर रेणू बाला को शनिवार सुबह करीब साढ़े चार बजे प्रसव पीड़ा हुई। सूचना पाकर सरकारी एंबुलैंस बिना इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन के प्रसव पीडि़ता को लेने उसके घर द्वार पहुंच गई। पीडि़ता का गांव से डबवाली के सरकारी अस्पताल में लेजाया जा रहा था। इस दौरान पीडि़ता के पति बुधराम, आशा वर्कर सीता देवी तथा चाची सास सुदेश रानी भी उसके साथ थे। गांव सकताखेड़ा के नजदीक प्रसव पीड़ा झेल रही आशा वर्कर ने बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव पीड़ा फिर बढ़ गई। जिससे परिजन चिंतित हो उठे।
अस्पताल में जाकर दूसरे बच्चे को दिया जन्म
बिना ईएमटी एंबुलैंस में डिलीवरी होने के बाद आशा वर्कर ने सिविल अस्पताल में पहुंचने के बाद एक और बच्चे को जन्म दिया। जबकि समय पर चिकित्सीय सुविधा न मिलने के कारण एंबुलैंस में जन्मा बच्चा इंफेक्शन का शिकार हो गया। अस्पताल में बाल विशेषज्ञ न होने के कारण चिकित्सक ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में रैफर कर दिया। यहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। जबकि दूसरा बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है।

सांस तेज है, इंफेक्शन ज्यादा है
एंबुलैंस में जिस बच्चे का जन्म हुआ है, उसकी सांस बहुत तेज चल रही है। इंफेक्शन भी बहुत ज्यादा है।
-सरवन बांसल, बाल रोग विशेषज्ञ, डबवाली

ईएमअी से मांगा स्पष्टीकरण
तीन इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन कार्यरत हैं। जो बारी-बारी से एंबुलैंस के साथ डयूटी पर रहते हैं। एंबुलैंस में लोगों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करते हैं। शनिवार सुबह एंबुलैंस के साथ न चलने वाले ईएमटी से जवाब मांगा गया है। जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।
  -एमके भादू, एसएमओ, डबवाली

मामले की जांच करवाएंगे
देखिये, अभी मामला मेरी नोटिस में नहीं है। मैं मामले की जांच करवाऊंगा। दोषी पाये जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।
-डॉ. वीरेश भूषण, डिप्टी सर्जन, नेशनल हेल्थ मिशन, सिरसा

आशा वर्कर ने भुगती लापरवाही
सरकार आशा वर्कर के जरिये गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मुहैया करवाती है। लेकिन शनिवार को एक आशा वर्कर को ही स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का सामना करना पड़ा। आशा वर्कर का एक बच्चा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

ससुराल से सटा गांव गोद लेने पर फंसी हरसिमरत कौर बादल


गांव वडिंगखेड़ा में बादल विरोधी लगाया धरना, ग्रामीण बोले हमारे साथ धोखा हुआ


डबवाली (लहू की लौ) पीएम नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत हरियाणा तथा राजस्थान सीमा से सटे गांव वडिंगखेड़ा को सूची से हटाकर अपनी ससुराल बादल से सटा गांव मान को गोद लेने पर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल फंस गई हैं। शनिवार को गांव वडिंगखेड़ा के ग्रामीणों ने पंचायत के साथ केंद्रीय मंत्री तथा उनके ससुर प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ धरना दिया। मौका पर आये अकाली नेता तथा ब्लाक समिति चेयरमैन से जवाब तलबी की। अकाली नेता ने अपना पिंड छुड़वाते हुये कहा कि वे उन्हें सीएम के पास ले जाएंगे, सवाल आप पूछना, सीएम उत्तर दे देंगे।
पिछड़े गांवों को आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करने के लिये पीएम ने सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की है। केंद्र सरकार में मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने योजना के तहत हल्का लंबी के गांव वडिंगखेड़ा का चयन किया था। इसकी जानकारी गांव के सरपंच कश्मीर सिंह को दी गई। अकाली नेताओं तथा अधिकारियों की बधाईयां आने लगीं। 11 नवंबर को जब योजना के तहत चयनित गांवों के नाम बेवसाईट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि थी तो गांव वडिंगखेड़ा की जगह गांव मान का नाम अपलोड किया गया। जिसके बाद गांव वडिंगखेड़ा के ग्रामीणों में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल तथा उनके ससुर सीएम प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ तीव्र रोष पनप रहा है। शनिवार को ग्रामीणों ने बादल के खिलाफ धरना दे दिया। बादल के विरोध की सूचना पाकर ब्लाक समिति लंबी के चेयरमैन गुरबख्शीश सिंह विक्की मिड्डूखेड़ा मौका पर पहुंचे।
ग्रामीणों को समझाते हुये चेयरमैन ने कहा कि गांव मान सीएम के गांव से सटा हुआ है। गांव बादल में हरसिमरत कौर का आना-जाना लगा रहता है। बिना किसी बाधा के वे आसानी से गांव मान में पहुंच सकती हैं। अगर वे हर रोज गांव वडिंगखेड़ा आती तो सिक्योरिटी के साथ-साथ शेष प्रबंध करने पड़ते। इसलिये गांव मान को योजना के तहत चुना गया है। वे विरोध न करें, जैसा विकास गांव मान का होगा, वैसा ही गांव वडिंगखेड़ा का होगा। ग्रामीणों ने चेयरमैन से सवाल किया कि अगर सीएम के गांव से महज दो किलोमीटर दूर स्थित गांव पिछड़ा हुआ है, तो शेष गांवों का क्या होगा। उन्हें इस बात का जवाब दिया जाये कि आखिर उनके गांव को गोद क्यों नहीं लिया गया। क्या हरसिमरत कौर बादल के संसदीय क्षेत्र के बाशिंदे नहीं हैं? हर बार शिरोमणि अकालीदल की वोट यहां से बढ़ी, फिर ऐसा हमारे साथ क्यूं हुआ? ग्रामीणों ने चेयरमैन को खरी-खोटी सुनाई। जिस पर चेयरमैन ने कहा कि वे उन्हें सीएम प्रकाश सिंह बादल के पास ले जाएंगे, यह सवाल उनसे करना, वे ही उत्तर देंगे।
शिरोमणि अकालीदल के बायकाट की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुये कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत जो सुविधाएं गांव को मिलनी चाहिये थी, शिरोमणि अकालीदल ने उन्हें उससे दूर कर दिया है। जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।

यह बोले सरपंच
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव को गोद लिया गया था। जिसकी सूचना सीएम बादल के ओएसडी तथा ब्लाक समिति लंबी के चेयरमैन ने देते हुये बधाई दी थी। जिला श्री मुक्तसर साहिब के अन्य अधिकारियों की बधाई कॉल भी आई थी। राजस्थान तथा हरियाणा सीमा से सटा गांव वडिंगखेड़ा काफी पिछड़ा हुआ है। आबादी करीब चार हजार है। योजना में शामिल होने पर गांव आदर्श बन सकता था। ग्रामीणों में गहरा रोष है।
-कश्मीर सिंह, सरपंच
गांव वडिंगखेड़ा

योजना के तहत होगा फायदा
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रत्येक सांसद ने अपने संसदीय क्षेत्र में एक गांव का चयन करना है। चयनित गांव हर तरह से 2016 तक पूर्ण आदर्श बनाये जाने का लक्ष्य है। यहां पर लाईब्रेरी, पार्क, जलघर, बिजलीघर, सीवरेज, स्ट्रीट लाईट, पक्की गलियां, सामुदायिक केंद्र, स्कूल, अस्पताल की व्यवस्था करना प्रस्तावित है। आदर्श ग्राम में आदर्श प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय, विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा पर जोर, आईटी क्लास रूम, वेब पुस्तकालय के साथ-साथ ई-लाईब्रेरी की सुविधा मिलेगी। ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गांवों में वाई-फाई सुविधा मिलेगी।

गांव मान जैसा विकास वडिंगखेड़ा का होगा
गांव वडिंगखेड़ा का नाम सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रोसेस में था। इसके साथ-साथ अन्य चार-पांच गांव थे। मैंने मेहनत की थी कि गांव वडिंगखेड़ा चुना जाये। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीणों का विरोध गलत है। गांव मान जैसा विकास वडिंगखेड़ा में होगा।
-गुरबख्शीश सिंह विक्की चेयरमैन, ब्लाक समिति, लंबी

सीएम विलेज से दो किलोमीटर दूर है मान
सीएम विलेज से महज दो किलोमीटर दूर गांव में अगर सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकती, तो वडिंगखेड़ा जैसे सरहदी इलाका तो बहुत दूर की बात है। पीएम की योजना में गांव का नाम आने से विकास की उम्मीद जगी थी, जिस पर पानी फिर गया।
-जगपाल सिंह, ग्रामीण

गांव के साथ धोखा हुआ
हरियाणा तथा राजस्थान सीमा से सटा यह गांव अपनी हालत पर आंसू बहा रहा है। योजना में गांव का नाम आने के बाद बधाईयां मिलने का सिलसिला जारी था। गांव के साथ धोखा हुआ है, जिसे सहन नहीं किया जायेगा।
-चरण सिंह, पंच गांव वडिंगखेड़ा

16 Nov. 2014