युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

24 अक्तूबर 2010

ग्रंथी ने पुजारिन का कत्ल करके शव गुरूद्वारा में दबाया

डबवाली (लहू की लौ) गांव पंजावा के संतोषी माता मंदिर की पुजारिन की गांव के ही गुरूद्वारा के ग्रंथी ने सब्बलों से गोंद कर हत्या कर दी और शव को गुरूद्वारा में दबा दिया।
गांव पंजावा के संतोषी माता मंदिर के पुजारी रेशम लाल शर्मा (50) पुत्र हंसराज ने बताया कि वीरवार शाम को करीब 6.30 बजे उसकी पत्नी अविनाश रानी (48) हर रोज की तरह मंदिर के निकट बने जोहड़ के पास शौच के लिए गई थी। लेकिन जब एक घंटे तक वापिस नहीं लौटी तो उसने घर में आवाज लगा कर उसे ढूंढऩे का प्रयास किया। चूंकि मंदिर में जोत जलाने का समय हो रहा था। उसके घर पर न मिलने पर वह टॉर्च लेकर जोहड़ के पास गया लेकिन वहां भी उसे नहीं मिली। इस पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों को साथ लेकर शुक्रवार को लम्बी पुलिस में अविनाश रानी के लापता होने की सूचना और उसकी खोज भी जारी रखी।
अन्तत: संदेह की सूई गुरूद्वारा के ग्रंथी गुलाब सिंह पुत्र गुरजन्ट सिंह निवासी ढोल नगर संगरिया पर गई और उसने इस बात को लम्बी पुलिस को बताया। पुलिस ने गं्रथी को संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया। सख्ती करने पर ग्रंथी ने सबकुछ उगल दिया। शनिवार सुबह गुरूद्वारा के प्रांगण में बने चूल्हा के नीचे दबाई हुई अविनाश रानी की लाश बरामद कर ली गई। सूचना पाकर पुलिस के उच्च अधिकारी भी मौका पर पहुंचे।
इस अवसर पर डीएसपी मलोट मुखविन्द्र सिंह भुल्लर, नायब तहसीलदार लम्बी लखविन्द्र सिंह, थाना लम्बी प्रभारी एसआई हरिन्द्र सिंह चमेली पहुंचे और लाश को बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल मलोट ले जाया गया। थाना लम्बी प्रभारी हरिन्द्र सिंह चमेली ने बताया कि ग्रंथी ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया कि उसने सब्बलों से पुजारिन की हत्या की है। हत्या का कारण उसने यह बताया कि वह उसके चोले के संबंध में अपशब्द बोलती थी। इसके चलते उसने वीरवार को शौच के लिए आई अविनाश रानी को पकड़ लिया और गुरूद्वारा में ले जाकर उसकी हत्या करने के बाद उसके शव को चूल्हे के नीचे खड्डा खोद कर और नमक डाल कर दबा दिया। ऊपर से गोबर का लेप कर दिया।
पुलिस ने गिरफ्तार किये गये गुरूद्वारा के ग्रंथी को मलोट अदालत में पेश करके दो दिन का पुलिस रिमांड ले लिया।

ब्रिटिश विद्यार्थी बने परीक्षा की मशीन

यूके से जवाहर नवोदय बडिंगखेड़ा में आई अध्यापिका डायना हेमेन ने किया खुलासा
डबवाली (लहू की लौ) यूके के बूस्टर शहर बर्मिंघम किंग चाल्र्स फस्र्ट के शारीरिक शिक्षा की अध्यापिका डायना हेमेन ने कहा कि यूके में बच्चों पर परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं के भारी दबाव ने उनकी जिन्दगी की खुशियां छीन ली हैं। जबकि भारत के स्कूलों के बच्चे खुश हैं और उनमें नैतिक शिक्षा आज भी कायम है।
वे गांव बडिंगखेड़ा में जवाहर नवोदय विद्यालय में इस संवाददाता से भारत और यूके के एजूकेशन सिस्टम पर बातचीत कर रही थीं। वे अन्तर्राष्ट्रीय प्ररेणा-2010 के तहत यूके के इसी स्कूल के कम्प्यूटर अध्यापक गैरे केने और छह विद्यार्थियों एलेक्स, एरोन, निक, रियान, रिचेल, बेकी के साथ जवाहर नवोदय विद्यालय बडिंगखेड़ा में भारत की शैक्षणिक व्यवस्था, संस्कृति और विद्यार्थियों की खेलकूद संबंधी गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत और यूके के विद्यार्थियों के सामने चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं और शैक्षणिक सिस्टम में भी काफी समानता है। लेकिन इसके बावजूद यूके के विद्यार्थियों की अपेक्षा भारत के विद्यार्थियों में वेल्यू एजूकेशन अधिक है।
उन्होंने बताया कि यूके में भारत की तरह क्लॉस रूम में शिक्षा नहीं दी जाती। बल्कि वहां विकेन्द्रीयकरण के तहत बच्चों को ग्रुप डिसक्शन करके शिक्षा प्राप्त करने की आजादी है। उनका मानना है कि बच्चों को शिक्षा में स्वतंत्रता के साथ-साथ नियंत्रित भी किया जाना चाहिए। इस प्रकार की मिक्स शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। उनके अनुसार यूके और भारत की शिक्षा पद्धतियों का समन्वय करके विद्यार्थियों को शिक्षा दी जानी चाहिए।
डायना के अनुसार भारत के लोग खुश हैं और उनकी खुशी को वे भी महसूस कर रही हैं। यूके का एजूकेशन सिस्टम केवल मॉडल बनकर रह गया है और उसमें खुशी नहीं रही है। बच्चे परीक्षा की मशीन बन चुके हैं। जिन्दगी में मिलने वाली खुशी पीछे छूट गई है। प्राय: बच्चे इसी के चलते टेंशन में रहते हैं। वहां की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार की है कि आम विद्यार्थी महंगी पढ़ाई नहीं कर सकता। नॉकरी के चांस भी कम हैं। अक्सर बच्चा पढ़ाई करके भी पूछता है कि इतनी मेहनत के बावजूद भी क्या उसे रोजगार मिल पाएगा। रोजगार प्राप्ति के लिए वह अधिक से अधिक मेहनत करता है, परंतु नौकरी पाने के प्रयास बहुत ही कम सफल होते हैं।
इस मौके पर उपस्थित यूके के कम्प्यूटर अध्यापक गेरे केने ने अपनी सहयोगी अध्यापिका के विचारों से सहमति प्रकट करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि बच्चों की रोजगार संबंधी टेंशन को दूर करने में ब्रिटेन सरकार कोई मदद नहीं दे सकती। क्योंकि वह सरकार भी अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक मंदी से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को टेंशन फ्री रखने के लिए समय-समय पर योग और मेडीटेशन के शिविर विद्यालय में आयोजित किए जाते हैं। लेकिन ये शिविर उसी समय ही आयोजित होते हैं, जब कोई बाहर से इस प्रकार की शिक्षा देने के लिए आता है। इसके बावजूद परीक्षा के समय अवश्य विशेष तौर पर बच्चों के मेडीटेशन के पीरियड लगते हैं। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि टेंशन से ब्रिटेन (यूके) के बच्चों का व्यवहार बदल रहा है। लेकिन फिर भी ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जो अपना सौ प्रतिशत समय पढ़ाई पर खर्च करते हैं। कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जो टेंशन के चलते शैतानी की ओर जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ टीवी, फिल्में, म्यूजिक, सेलिब्रेट को भी जिम्मेवार ठहराया।
कंग चाल्र्स फस्र्ट, यूके के 11वीं कक्षा के विद्यार्थी बेकी और रिचेल ने अपने दिल की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें भारत में अपनी अध्यापिका डायना के साथ पढऩे का मौका मिले, तो वे ब्रिटेन छोड़कर भारत में पढऩा बेहतर समझेंगे। उन्होंने भारतीय सभ्यता को अच्छा बताते हुए कहा कि यहां का पढ़ाई का दृष्टिकोण उन्हें बहुत पसंद आया है। यहां विशेषकर उल्लेखनीय है कि ये बच्चे जब इस संवाददाता को मिले तो उन्होंने सबसे पहले नमस्ते शब्द बोलकर संवाददाता का अभिवादन किया।
जवाहर नवोदय विद्यालय बडिंगखेड़ा के प्रिंसीपल एन कुमार ने बताया कि भारत के चुनिंदा 12 नवोदय विद्यालयों में से उनका ये एकमात्र विद्यालय है, जिसे यूके के उपरोक्त स्कूल के अध्यापकों और विद्यार्थियों से विचार सांझे करने का मौका मिला। बडिंगखेड़ा के नवोदय स्कूल के विद्यार्थियों ने अपने विदेशी मेहमानों को यह आभास नहीं होने दिया कि वे यूके में हैं या फिर दूर भारत में। उनके अनुसार विद्यालय प्रशासन का प्रयास रहेगा कि उनके स्कूल के विद्यार्थियों का एक ग्रुप इसी प्रकार यूके के इस स्कूल में जाए और वहां की स्कूल की गतिविधियों, सांस्कृति और खेल कूद संबंधी जानकारी हासिल करे।
इस मौके पर लिंक टीचर संजीव पांडे ने बताया कि विद्यार्थियों का इस प्रकार से एक-दूसरे देश के विद्यार्थियों के साथ तालमेल की नीति बच्चों में आत्मविश्वास जगाती है तथा उन्हें आगे बढऩे का मौका पर प्रदान करती है। इस प्रकार के लिंक विद्यार्थियों में स्थापित होने चाहिए। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय की टयूटर मीनू टॉक भी उपस्थित थीं।
इस मौके पर विदेशी मेहमानों ने नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा उनके लिए आयोजित खो-खो और कबड्डी मैचों को भी निकटता से देखा। साथ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सेदारी डाली। इन खेलों के दौरान ही विदेशी विद्यार्थियों ने भारतीय विद्यार्थियों से इन खेलों के संबंध में जानकारी जुटाई।