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14 दिसंबर 2009

2009 में बहुत कुछ हुआ पहली बार

नयी दिल्ली। देखते-देखते एक और साल गुजरने को है और २०१० की हलकी सी दस्तक सुनाई देने लगी है। बीते बरस में चंद्रमा पर पानी की खोज, अमेरिका में अश्वेत राष्ट्रपति का चुनाव और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की सुखोई में उड़ान जैसी बड़ी और अपने तरह की पहली घटनाओं की सुखिर्यो के बीच कुछ ऐसी अनूठी बातें भी पहली बार हुईं, जो आने वाले वर्ष में एक मिसाल बनकर रहेंगी। आने वाले वर्ष में भी इस तरह की घटनाएं होगी, लेकिन तब भी इस बरस पहली बार हुई इन घटनाओं को याद जरूर किया जाएगा। राष्ट्रपति र्पतिभा पाटिल ने २५ नवंबर को सुखोई-३० एमकेआई लड़ाकू विमान से उड़ान भर कर अपने नाम एक रिकॉर्ड दर्ज करा लिया।

रूस निर्मित सुखोई में ३० मिनट की उड़ान भर कर प्रतिभा ऐसा करने वाली किसी भी देश की पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष बन गईं। चौहत्तर वर्षीय प्रतिभा ने किसी भी युद्धक विमान में ३० मिनट की यात्रा करने वाली सबसे उम्रदराज महिला का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। पिछले साल २२ अक्तूबर २००८ चंर्दमा के रहस्य सुलझाने के लिए भारत द्वारा प्रक्षेपित पहले मानवरहित मिशन 'चंर्दयान—१Ó ने पृथ्वी के इकलौते उपग्रह पर इस साल पानी की खोज कर भारत के खाते में एक और उपलब्धि दर्ज करा दी।

चंर्दयान-१ के साथ भेजे गए नासा के उपकरण 'मून मिनरलोजी मैपर एम-३Ó ने चंर्द्रयान१ द्वारा जुटाए गए विवरण का विश्लेषण कर चंर्दमा पर पानी के अस्तित्व की पुष्टि कर दी। इस खोज ने चार दशक से चले आ रहे इन कयासों पर विराम लगा दिया कि चंर्दमा पर पानी है या नहीं।

अमेरिका के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए बराक ओबामा ने २० जनवरी को देश के ४४ वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह करिश्माई डेमोक्रेट नेता अमेरिका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति है। आंध्र र्पदेश में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में भक्तजनों को दिए जाने वाले 'तिरपति लड्डूÓ को भौगोलिक कापीराइट प्रदान किया जाना इस वर्ष की एक अनूठी घटना रही। अब अन्य कोई भी इसी नाम से लड्डू न तो बना सकेगा और न ही इसकी मार्केटिंग कर सकेगा।

तिरमाला पहाड़ी पर वेंकटेश्वर मंदिर की देखरेख करने वाले ट्रस्ट तिरमाला-तिरपति देवस्थानम ने पिछले साल मार्च में चेन्नई स्थित ''जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रीÓÓ में लड्डू के भौगोलिक कापीराइट के लिए आवेदन किया था और सितंबर में उसे यह अधिकार मिल गया।

तिरुपति के लड्डू और दार्जिलिंग की चाय के साथ साथ जीआई तमगा बनारसी साडिय़ों को भी मिल गया। उम्दा गुणवत्ता एवं बुनाई के लिए प्रसिद्ध बनारसी साडिय़ां सितंबर में विशिष्ट भौगोलिक पहचान जीआई दर्जा मिलने के साथ ही कई संरक्षित वस्तुओं की सूची में शामिल हो गईं। कुदरत की सबसे खूबसूरत कलाकृतियों को राष्ट्रीय चिन्ह का दर्जा देकर उनके संरक्षण को बढ़ावा देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने गंगा की डाल्फिन को इस साल राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर दिया। यह पहला मौका है जब किसी जलचर को राष्ट्रीय जीव घोषित किया गया है। सितंबर माह में र्पधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई गंगा नदी घाटी प्राधिकरण की बैठक में लुप्तप्राय: गंगा डालफिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित करने का निर्णय किया गया। दरअसल गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने और बढ़ते र्पदूषण के कारण यह खूबसूरत प्राणी अपने अस्तित्व के लिए संघषर्रत है। हालत यह है कि आज २००० से भी कम गंगा डालफिन बची हैं। यह अनूठी डालफिन दृष्टिहीन है और केवल अपने सूंघने की शक्ति से अपना जीवन बसर करती है।

अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों के योगदान को जब तब सराहा जाता रहा है। लेकिन राष्ट्रपति ओबामा पर भारत का रंग गहरा चढ़े होने की झलक तब साफ दिखाई दी, जब इस वर्ष व्हाइट हाउस में पहली बार प्रकाश का त्यौहार दीपावली और गुरूनानक देव का जन्मदिन गुरूपर्व के रूप में धूमधाम से बनाया गया। इस मौके पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पाठियों ने मनोहर प्रस्तुति दी और समारोह में पूरे अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों ने भाग लिया। व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ पब्लिक इंगेजमेंट द्वारा आयोजित यह समारोह राष्ट्रपति ओबामा की खास पहल पर हुआ। दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला द्वारा शांति के क्षेत्र में दिए योगदान का सम्मान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार १८ जुलाई को 'अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवसÓ घोषित कर दिया। विश्व संस्था की १९२ सदस्यीय महासभा में इस संबंध में ११ नवंबर को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत २०१० से हर साल इस दिन को अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के १९९४ से १९९९ तक राष्ट्रपति रहे मंडेला आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और अन्य वैश्विक मुद्दों पर लोगों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

पुरुषों को भी होता है जुदाई का गम

मुम्बई । अगर आप सोचते हैं कि जुदाई का गम सिर्फ लड़कियों को ही होता है तो यह विचार बदलने की जरूरत है। दरअसल लड़कियों से भी ज्यादा दुख लड़कों को होता है। उनके लिए भी रिश्ते से बाहर आने और पुराने प्यार को भुला पाना बहुत आसान नहीं होता है। डेट डॉट कॉम नाम की वेबसाइट द्वारा कराए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। यहां तक कि बुरे लड़के यानी बैड बॉयज भी इस दुख को झेलते हैं। हालांकि लड़कियों को यह दुख कम होता है। रिश्ते से बाहर निकलने के बाद वो जल्द ही नई डेट पर चली जाती हैं। वेबसाइट के मुताबिक ८५ प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया है कि ब्रेकअप के बाद वो अवसाद में चले गए थे। वहीं महिलाओं के मामले में यह संख्या सिर्फ ८ प्रतिशत रही।