युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

24 अक्तूबर 2010

ग्रंथी ने पुजारिन का कत्ल करके शव गुरूद्वारा में दबाया

डबवाली (लहू की लौ) गांव पंजावा के संतोषी माता मंदिर की पुजारिन की गांव के ही गुरूद्वारा के ग्रंथी ने सब्बलों से गोंद कर हत्या कर दी और शव को गुरूद्वारा में दबा दिया।
गांव पंजावा के संतोषी माता मंदिर के पुजारी रेशम लाल शर्मा (50) पुत्र हंसराज ने बताया कि वीरवार शाम को करीब 6.30 बजे उसकी पत्नी अविनाश रानी (48) हर रोज की तरह मंदिर के निकट बने जोहड़ के पास शौच के लिए गई थी। लेकिन जब एक घंटे तक वापिस नहीं लौटी तो उसने घर में आवाज लगा कर उसे ढूंढऩे का प्रयास किया। चूंकि मंदिर में जोत जलाने का समय हो रहा था। उसके घर पर न मिलने पर वह टॉर्च लेकर जोहड़ के पास गया लेकिन वहां भी उसे नहीं मिली। इस पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों को साथ लेकर शुक्रवार को लम्बी पुलिस में अविनाश रानी के लापता होने की सूचना और उसकी खोज भी जारी रखी।
अन्तत: संदेह की सूई गुरूद्वारा के ग्रंथी गुलाब सिंह पुत्र गुरजन्ट सिंह निवासी ढोल नगर संगरिया पर गई और उसने इस बात को लम्बी पुलिस को बताया। पुलिस ने गं्रथी को संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया। सख्ती करने पर ग्रंथी ने सबकुछ उगल दिया। शनिवार सुबह गुरूद्वारा के प्रांगण में बने चूल्हा के नीचे दबाई हुई अविनाश रानी की लाश बरामद कर ली गई। सूचना पाकर पुलिस के उच्च अधिकारी भी मौका पर पहुंचे।
इस अवसर पर डीएसपी मलोट मुखविन्द्र सिंह भुल्लर, नायब तहसीलदार लम्बी लखविन्द्र सिंह, थाना लम्बी प्रभारी एसआई हरिन्द्र सिंह चमेली पहुंचे और लाश को बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल मलोट ले जाया गया। थाना लम्बी प्रभारी हरिन्द्र सिंह चमेली ने बताया कि ग्रंथी ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया कि उसने सब्बलों से पुजारिन की हत्या की है। हत्या का कारण उसने यह बताया कि वह उसके चोले के संबंध में अपशब्द बोलती थी। इसके चलते उसने वीरवार को शौच के लिए आई अविनाश रानी को पकड़ लिया और गुरूद्वारा में ले जाकर उसकी हत्या करने के बाद उसके शव को चूल्हे के नीचे खड्डा खोद कर और नमक डाल कर दबा दिया। ऊपर से गोबर का लेप कर दिया।
पुलिस ने गिरफ्तार किये गये गुरूद्वारा के ग्रंथी को मलोट अदालत में पेश करके दो दिन का पुलिस रिमांड ले लिया।

ब्रिटिश विद्यार्थी बने परीक्षा की मशीन

यूके से जवाहर नवोदय बडिंगखेड़ा में आई अध्यापिका डायना हेमेन ने किया खुलासा
डबवाली (लहू की लौ) यूके के बूस्टर शहर बर्मिंघम किंग चाल्र्स फस्र्ट के शारीरिक शिक्षा की अध्यापिका डायना हेमेन ने कहा कि यूके में बच्चों पर परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं के भारी दबाव ने उनकी जिन्दगी की खुशियां छीन ली हैं। जबकि भारत के स्कूलों के बच्चे खुश हैं और उनमें नैतिक शिक्षा आज भी कायम है।
वे गांव बडिंगखेड़ा में जवाहर नवोदय विद्यालय में इस संवाददाता से भारत और यूके के एजूकेशन सिस्टम पर बातचीत कर रही थीं। वे अन्तर्राष्ट्रीय प्ररेणा-2010 के तहत यूके के इसी स्कूल के कम्प्यूटर अध्यापक गैरे केने और छह विद्यार्थियों एलेक्स, एरोन, निक, रियान, रिचेल, बेकी के साथ जवाहर नवोदय विद्यालय बडिंगखेड़ा में भारत की शैक्षणिक व्यवस्था, संस्कृति और विद्यार्थियों की खेलकूद संबंधी गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत और यूके के विद्यार्थियों के सामने चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं और शैक्षणिक सिस्टम में भी काफी समानता है। लेकिन इसके बावजूद यूके के विद्यार्थियों की अपेक्षा भारत के विद्यार्थियों में वेल्यू एजूकेशन अधिक है।
उन्होंने बताया कि यूके में भारत की तरह क्लॉस रूम में शिक्षा नहीं दी जाती। बल्कि वहां विकेन्द्रीयकरण के तहत बच्चों को ग्रुप डिसक्शन करके शिक्षा प्राप्त करने की आजादी है। उनका मानना है कि बच्चों को शिक्षा में स्वतंत्रता के साथ-साथ नियंत्रित भी किया जाना चाहिए। इस प्रकार की मिक्स शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। उनके अनुसार यूके और भारत की शिक्षा पद्धतियों का समन्वय करके विद्यार्थियों को शिक्षा दी जानी चाहिए।
डायना के अनुसार भारत के लोग खुश हैं और उनकी खुशी को वे भी महसूस कर रही हैं। यूके का एजूकेशन सिस्टम केवल मॉडल बनकर रह गया है और उसमें खुशी नहीं रही है। बच्चे परीक्षा की मशीन बन चुके हैं। जिन्दगी में मिलने वाली खुशी पीछे छूट गई है। प्राय: बच्चे इसी के चलते टेंशन में रहते हैं। वहां की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार की है कि आम विद्यार्थी महंगी पढ़ाई नहीं कर सकता। नॉकरी के चांस भी कम हैं। अक्सर बच्चा पढ़ाई करके भी पूछता है कि इतनी मेहनत के बावजूद भी क्या उसे रोजगार मिल पाएगा। रोजगार प्राप्ति के लिए वह अधिक से अधिक मेहनत करता है, परंतु नौकरी पाने के प्रयास बहुत ही कम सफल होते हैं।
इस मौके पर उपस्थित यूके के कम्प्यूटर अध्यापक गेरे केने ने अपनी सहयोगी अध्यापिका के विचारों से सहमति प्रकट करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि बच्चों की रोजगार संबंधी टेंशन को दूर करने में ब्रिटेन सरकार कोई मदद नहीं दे सकती। क्योंकि वह सरकार भी अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक मंदी से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को टेंशन फ्री रखने के लिए समय-समय पर योग और मेडीटेशन के शिविर विद्यालय में आयोजित किए जाते हैं। लेकिन ये शिविर उसी समय ही आयोजित होते हैं, जब कोई बाहर से इस प्रकार की शिक्षा देने के लिए आता है। इसके बावजूद परीक्षा के समय अवश्य विशेष तौर पर बच्चों के मेडीटेशन के पीरियड लगते हैं। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि टेंशन से ब्रिटेन (यूके) के बच्चों का व्यवहार बदल रहा है। लेकिन फिर भी ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जो अपना सौ प्रतिशत समय पढ़ाई पर खर्च करते हैं। कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जो टेंशन के चलते शैतानी की ओर जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ टीवी, फिल्में, म्यूजिक, सेलिब्रेट को भी जिम्मेवार ठहराया।
कंग चाल्र्स फस्र्ट, यूके के 11वीं कक्षा के विद्यार्थी बेकी और रिचेल ने अपने दिल की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें भारत में अपनी अध्यापिका डायना के साथ पढऩे का मौका मिले, तो वे ब्रिटेन छोड़कर भारत में पढऩा बेहतर समझेंगे। उन्होंने भारतीय सभ्यता को अच्छा बताते हुए कहा कि यहां का पढ़ाई का दृष्टिकोण उन्हें बहुत पसंद आया है। यहां विशेषकर उल्लेखनीय है कि ये बच्चे जब इस संवाददाता को मिले तो उन्होंने सबसे पहले नमस्ते शब्द बोलकर संवाददाता का अभिवादन किया।
जवाहर नवोदय विद्यालय बडिंगखेड़ा के प्रिंसीपल एन कुमार ने बताया कि भारत के चुनिंदा 12 नवोदय विद्यालयों में से उनका ये एकमात्र विद्यालय है, जिसे यूके के उपरोक्त स्कूल के अध्यापकों और विद्यार्थियों से विचार सांझे करने का मौका मिला। बडिंगखेड़ा के नवोदय स्कूल के विद्यार्थियों ने अपने विदेशी मेहमानों को यह आभास नहीं होने दिया कि वे यूके में हैं या फिर दूर भारत में। उनके अनुसार विद्यालय प्रशासन का प्रयास रहेगा कि उनके स्कूल के विद्यार्थियों का एक ग्रुप इसी प्रकार यूके के इस स्कूल में जाए और वहां की स्कूल की गतिविधियों, सांस्कृति और खेल कूद संबंधी जानकारी हासिल करे।
इस मौके पर लिंक टीचर संजीव पांडे ने बताया कि विद्यार्थियों का इस प्रकार से एक-दूसरे देश के विद्यार्थियों के साथ तालमेल की नीति बच्चों में आत्मविश्वास जगाती है तथा उन्हें आगे बढऩे का मौका पर प्रदान करती है। इस प्रकार के लिंक विद्यार्थियों में स्थापित होने चाहिए। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय की टयूटर मीनू टॉक भी उपस्थित थीं।
इस मौके पर विदेशी मेहमानों ने नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा उनके लिए आयोजित खो-खो और कबड्डी मैचों को भी निकटता से देखा। साथ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सेदारी डाली। इन खेलों के दौरान ही विदेशी विद्यार्थियों ने भारतीय विद्यार्थियों से इन खेलों के संबंध में जानकारी जुटाई।

20 अक्तूबर 2010

नकली नोट प्रकरण : बेनकाब हो सकते हैं कई चेहरे

डबवाली (लहू की लौ) भारत सरकार की जाली करंसी बाजार में चलाने के आरोप में पकड़ी गई महिलाओं ने पुलिस के समक्ष कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। लेकिन साथ में ये महिलाएं पुलिस को उलझाने के लिए एक-दूसरे पर ही आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं।
प्राप्त जानकारी अनुसार नकली नोटों को लेकर भारत के विभिन्न राज्यों में काफी शोर-शराबा मचा हुआ है। हालांकि कुछ स्थानों पर यह धंधा करने वाले पकड़े भी गए हैं। लेकिन इसके बावजूद भी नकली नोटों का प्रचलन रूकने का नाम नहीं ले रहा। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान की त्रिवेणी कहे जाने वाले नगर डबवाली भी जाली करंसी चलाने वालों के निशाने पर है। इसका रहस्योद्घटन सोमवार को डबवाली के मीना बाजार में एक हजार और पांच सौ रूपए के नकली नोट चलाने के आरोप में पकड़ी गई महिलाओं ने किया।
 पुलिस पूछताछ के दौरान महिला जितेन्द्र कौर उर्फ ज्योति  निवासी बठिंडा ने बताया कि वह बीए पास है। उसकी शादी फिरोजपुर में ईटीओ के पद पर तैनात हरविन्द्र पाल से हुई थी। लेकिन किसी कारणवश वे लोग साल 1986 में अलग-अलग रहने लग गए। साल 1997 में उनका तलाक हो गया। उसी समय वह अपने माता-पिता के पास बठिंडा में रह रही है। उसके पिता रघुवीर सिंह के पास करीब 23 एकड़ जमीन है। जमीन ठेके पर दी हुई है, जो राशि आती है, उससे गुजारा चलता है। उसका भाई सतविन्द्र उर्फ सतिन्द्र सिंह जिला मुक्तसर के गांव चन्नू में उसके माता-पिता से अलग रहता है। सतिन्द्र सिंह की बेटी अमृतसर के एक कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रही है। उसी कॉलेज में गांव चम्बल जिला तरनतारण की कोमलप्रीत  कौर की बेटी पढती है और उसकी भतीजी की रूम मेट है।
करीब पांच-छह माह पूर्व कोमलप्रीत कौर अपनी बेटी के साथ उसकी भतीजी को छोडऩे के लिए गांव चन्नू आई। शॉपिंग के बहाने वे लोग बठिंडा आ गए। इसी दौरान उसकी मुलाकात कोमलप्रीत से हुई। उस समय कोमलप्रीत ने अपनी पहचान जसवीर कौर के रूप में करवाई। दो-चार मुलाकातों के बाद कोमलप्रीत उर्फ जसवीर कौर का असली चेहरा सामने आने लगा। उसने उसे जाली नोटों के धंधे में फंसा लिया। लालच में वह उसके साथ मिल गई। कोमलप्रीत शॉपिंग के  बहाने बठिंडा के बजारों में आती और उसे साथ लेकर नकली नोटों से काफी कपड़ा खरीदकर वापिस चली जाती। धीरे-धीरे वह भी नकली नोटों की मदद से सामान खरीदने लगी और बकाया राशि कोमलप्रीत को देने लगी। कोमलप्रीत उर्फ जसवीर द्वारा दिए गए नोटों से वह घर का घरेलू सामान खरीदती और चेंज होने वाले पैसों को वापिस कोमलप्रीत को दे देती यानि 1000 रूपए के जाली नोट से 300 रूपये का सामान खरीदा। बचे 700 रूपए (असली नोट) वापिस दे देती।
करीब डेढ़ माह पूर्व कोमलप्रीत उर्फ जसवीर के पीछे पंजाब पुलिस लग गई। पुलिस से बचती हुई वह 1 लाख 80 हजार रूपए के नकली नोटों सहित बठिंडा पहुंची और उसने उसके यहां यह रूपए रखे। उसकी एवज में उसने 10 हजार रूपए नकली नोट लिए। इसी दौरान कोमलप्रीत उर्फ जसवीर कौर एक आदमी के साथ कार पर सवार होकर बठिंडा आने लगी। जिसे वह अपने मृतक पति बलविन्द्र सिंह हवलदार पंजाब पुलिस का मित्र बताती थी और वह व्यक्ति भी स्वयं को पंजाब पुलिस में तैनात बताता था। लेकिन नाम कभी नहीं बताया। कई बार इन लोगों ने रात भी उनके घर बठिंडा में गुजारी। नकली नोटों से शॉपिंग करके कपड़ों की कार भरकर ये लोग तरनतारण लेजाने लगे। बदले में उसे भी मुनाफा होने लगा।
जितेन्द्र कौर उर्फ ज्योति के अनुसार करीब चार माह पूर्व वह कार पर सवार होकर डबवाली आई थी। उस समय उन्होंने करीब 4000 रूपये के नकली नोटों से खरीददारी की और आराम से कार द्वारा बठिंडा के लिए रवाना हो गए। उसका लालच और गहराता गया। उसने इस काम के बदले फिफ्टी-फिफ्टी करने की बात कोमलप्रीत उर्फ जसवीर से की और नकली नोटों के सौदागरों से मिलने की इच्छा प्रकट की। उस समय कोमलप्रीत ने उसे बताया कि अमृतसर क्षेत्र में नकली नोट आसानी से पकड़े जाने लगे हैं। लेकिन बरनाला, बठिंडा, सिरसा, हिसार, संगरिया, हनुमानगढ़ इसके लिए उपयुक्त जगह है। कोमलप्रीत कौर उर्फ जसवीर कौर ने उसे यह भी बताया कि नकली नोट बॉर्डर पार से भारत में आते हैं। नकली नोट पहुंचाने वाले किसी से नहीं मिलते।
डबवाली में नकली नोट चलाने के लिए उन्होंने शुक्रवार को आना था। लेकिन कोमलप्रीत उस दिन बठिंडा नहीं आई। सोमवार को वे लोग बस से डबवाली आए और बाजार में खरीददारी करने लगे। लोगों को नकली नोट की भनक लग गई। इधर कोमलप्रीत निवासी गांव चम्बल जिला तरनतारण 7वीं पास ने भी पूछताछ के दौरान अहम खुलासे किए हैं। उसने भी अपने बेटी के जरिए बठिंडा निवासी जितेन्द्र कौर उर्फ ज्योति से मुलाकात का जिक्र किया है। कोमलप्रीत के अनुसार छुट्टियों के समय वह अपनी बेटी के साथ उसकी सहेली के गांव चन्नू आई थी। बाद में बठिंडा में उसकी मुलाकात ज्योति से हुई। ज्योति नकली नोटों का धंधा करती है। एक-दो मुलाकात के समय ज्योति उस पर इसके लिए दबाव डालने लगी। लालच में पड़कर वह झांसे में आ गई। कुछ दिन पहले उसके पास कोमलप्रीत का फोन आया और 60 हजार रूपए की मांग की। मांगे गए रूपयों के बदले भोपाल से आए एक लाख नकली नोट देने का भरोसा दिया। वह बिना पैसों के सोमवार को बठिंडा आई। यहां से ज्योति उसे डबवाली ले आई। कोमलप्रीत ने पुलिस को यह भी बताया कि उसका पहला पति बलविन्द्र सिंह तरनतारण पुलिस में हवलदार के पद पर था। साल 1996 में उसकी मौत होने के बाद उसने गांव चम्बल के गुरूद्वारा के ग्रंथी रणजीत सिंह से विवाह रचा लिया।
फिलहाल दोनों ही आरोपी महिलाएं एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करके पुलिस को उलझाकर स्पष्ट बताने से बच रही हैं। पुलिस का मानना है कि यह मामला काफी बड़े गिरोह का हो सकता है। इस मामले में कौन लोग संलिप्त हैं और यह पैसा कैसे आता है, इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने मंगलवार को उपमंडल न्यायिक दण्डाधिकारी महावीर सिंह की अदालत में इन महिलाओं को पेश करके तीन दिन का पुलिस रिमांड ले लिया

जाली करंसी सहित दो महिलाएं काबू

डबवाली (लहू की लौ) यहां के मीना बाजार में 1000, 500 रूपये के नकली नोट आने से दुकानदारों में खलबली मच गई। कुछ दुकानदार तो इन नकली नोटों का शिकार होकर सामान बेच भी चुके थे।
मीना बाजार के बाहर स्थित रानी बाजार के दुकानदार सुनील सेठी ने बताया कि एक अपटूडेट महिला उसके पास आयी और उसने उससे 200 रूपये की पैंट शर्ट खरीदी। 500 रूपये का नोट उसे देकर 300 रूपये वापिस ले गई। इसी प्रकार मीना बाजार के हैप्पी दुपट्टा हाऊस के मालिक हैप्पी ने बताया कि उससे महिला ने 90 रूपये की चुनरी लेकर 1000 रूपये नोट थमाते हुए 910 रूपये वापिस ले लिये। बब्बर शॉपिंग के मालिक नवीन बब्बर ने बताया कि एक महिला ने 170 रूपये का सामान खरीदा और एक हजार का नोट थमा दिया। हरीश सिंगला मालिक सिटी कोलेक्शन ने बताया कि उससे 280-280 रूपये अलग-अलग दो महिलाओं ने सूट खरीदे और उसे 1000-1000 रूपये का नोट थमा दिया। इसी प्रकार से गर्ग फैन्सी स्टोर, शगुन फैशन, स्माईल ब्यूटी सैन्टर पर भी ऐसा कुछ हुआ।
इन दुकानदारों को जैसे ही पता चला कि उनके साथ धोखादेही हुई है, जो नोट उन्हें थमाये गये हैं वह नकली हैं। वे तुरन्त इन महिलाओं की तालाश में निकल पड़े और उन्होंने एक-एक करके दोनों महिलाओं को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया।
थाना शहर प्रभारी इंस्पेक्टर जसवन्त ने बताया कि पकड़ी गई महिलाओं में से एक ने अपनी पहचान जितेन्द्र पाल उर्फ ज्योति पत्नी हरिन्द्रपाल सिधू निवासी भागू रोड़, बठिंडा के रूप में करवाते हुए बताया कि उसका पति फिरोजपुर में ईटीओ लगा हुआ है। उसे तो बठिंडा से उसके साथ आई कोमलप्रीत लेकर आयी थी और वहीं इन जाली नोटों को लेकर आयी है।
दूसरी महिला ने अपनी पहचान कोमलप्रीत पत्नी रणजीत सिंह गांव चम्बल थाना सिराड़ी जिला तरनतारन के रूप में करवाते हुए बताया कि वह तो बठिंडा में ज्योति को मिलने आई थी और ज्योति ही उसे दवाइयां खरीदने के लिए डबवाली के बठिंडा चौक में लायी थी। इसके बाद वह इसे बाजार में ले गई। जाली नोट इसी के पास थे। थाना शहर प्रभारी ने बताया कि दोनों महिलाओं से काफी भारी मात्रा में राशि बरामद की है। लेकिन इनमें से 7 नोट 500-500 के और 7 नोट 1000-1000 रूपये के जाली पाये गये हैं। जाली नोटों की पहचान पंजाब नैशनल बैंक के हैडकैशियर राकेश मदान ने की है। सुनील सेठी के ब्यान पर महिलाओं के खिलाफ जाली करंसी के आरोप में केस दर्ज कर लिया गया है।

कांग्रेस सम्मानित नहीं, अपमानित करती है-अभय चौटाला

डबवाली (लहू की लौ) ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कांग्रेस कभी किसी को सम्मानित नहीं कर सकती। गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार का बोझ लादकर अपमानित जरूर कर सकती है। वे सोमवार को चौधरी मार्किट में तेलूराम बांसल के व्यापारिक संस्थान पर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
इनेलो नेता ने कहा कि चौ. देवीलाल ने हरियाणा को अलग राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। पार्टी ने हर्ष साल 1 नवंबर को हरियाणा दिवस पर उनका जन्म दिन मनाने का निर्णय लिया है। इस बार 1 नवंबर को उनके जन्म दिवस पर विशाल जनसभा करके सरकार की नाकामियों को जनता के समक्ष रखा जाएगा। इनेलो विधायक ने कहा कि कभी बंसीलाल का परिवार, तो कभी सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का परिवार अपने आपको हरियाणा का निर्माता करार देता है। लेकिन हकीकत यह है कि पंजाब से हरियाणा को अलग प्रदेश बनाकर देश में उसे पहचान देने का काम चौ. देवीलाल ने किया। जबकि उस समय कैबिनेट के पद पर विराजमान सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा प्रदेश के निर्माण में रोड़ा बने हुए थे। चापलूसी के सिवा ये लोग कुछ नहीं कर सकते। इन लोगों के तो खून में भी झूठ, मक्कारी और चपलूसी है। चापलूसी की वजह से आज भूपेन्द्र सिंह हुड्डा हरियाणा प्रदेश के सीएम बन बैठे हैं। एक सवाल के जवाब में चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री हुड्डा खेल में भी राजनीति करने में लगे हुए हैं। इनेलो ने 1 नवंबर को राष्ट्रमंडल खेलों में मैडल पाने वाले राज्य के खिलाडिय़ों को सम्मानित करने का निर्णय लिया था। लेकिन मुख्यमंत्री को डर था कि कहीं खिलाड़ी सम्मानित होकर इनेलो की ओर न चले जाएं। इसी डर के चलते मुख्यमंत्री ने खिलाडिय़ों को उसी दिन सम्मानित करने की घोषणा की। लेकिन इनेलो खेलों में राजनीति नहीं चाहती। खिलाडिय़ों को इनेलो एशियन गेम्स के बाद नए वर्ष के मौके पर सम्मानित करेगी।
अभय चौटाला ने कहा कि इनेलो की ओर से साल 2001 में बनाई गई स्पोट्र्स पॉलिसी का ही परिणाम है कि आज हरियाणा का डंका पूरे विश्व में बज रहा है। देश के 469 खिलाडिय़ों में से राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के मात्र 49 खिलाडिय़ों शामिल थे। जिनमें से 32 पदक हरियाणा के खिलाडिय़ों को मिले। जिसमें 16 गोल्ड, 8 सिल्वर और 8 ताम्र पदक शामिल हैं। इनेलो की स्पोट्र्स पॉलिसी को बेहतरीन पॉलिसी करार देकर उसे साल 2009 में राज्य में लागू करने वाली प्रदेश की सरकार इसे हुड्डा पॉलिसी कहकर मजे लूट रही है। इनेलो विधायक ने मांग की कि अगर हरियाणा सरकार खिलाडिय़ों की सच्ची हितैषी है तो वह राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड पदक लाने वाले प्रदेश के खिलाड़ी को 35 लाख, सिल्वर पदक लाने वाले खिलाड़ी को 25 लाख और ताम्र पदक लाने वाले खिलाड़ी को 20 लाख रूपए का पुरस्कार देकर सम्मानित करे। इसके साथ खिलाडिय़ों की कामयाबी के पीछे एसोसिएशन तथा अन्य लोगों को भी सम्मानित करे।
इससे पूर्व अभय सिंह चौटाला ने अग्रवाल धर्मशाला में इनेलो कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया। उन्होंने रैली के संबंध में कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य रणवीर सिंह गंगवा, जिला परिषद सिरसा के अध्यक्ष डॉ. सीता राम, पदम जैन, रणवीर सिंह राणा, कुलदीप सिंह एडवोकेट,  डॉ. गिरधारी लाल, विनोद अरोड़ा, जगदीश अरोड़ा, बलदेव भीटीवाला, सर्वजीत सिंह मसीतां, नरेन्द्र सिंह बराड़, गुरप्रीत सिंह कुलार, दर्शन मोंगा, प्रिन्स जुनेजा, गुरजीत सिंह, टेकचन्द छाबड़ा, नीलकान्त मैहता लवली, प्रहलाद राय, महेन्द्र डूडी, सुरिन्द्र छिन्दा, सुखविन्द्र सरां, राजा पेन्टर, पुष्पा दैड़ान, विक्की शर्मा, जोगिन्द्र सिंह डाल आदि उपस्थित थे।

लूट के इरादे से एसबीआई के एटीएम में तोडफ़ोड़

डबवाली (लहू की लौ) अज्ञात लोगों ने रात को भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में लगे दो एटीएम में तोडफ़ोड़ करके लूटपाट का प्रयास किया।
प्राप्त जानकारी अनुसार थाना सदर पुलिस के एक कर्मचारी इन्द्र सिंह ने बाहर जाना था और वह भारतीय स्टेट बंैक के एटीएम पर मंगलवार सुबह सवा पांच बजे जब राशि निकलवाने के लिए पहुंचा तो उसने देखा कि बैंक में लगे दोनों एटीएम टूटे पड़े हैं। उसने इसकी सूचना थाना शहर पुलिस को दी।  मौका पर थाना शहर प्रभारी इंस्पेक्टर बलवन्त कुमार जस्सू पहुंचे और घटना का निरीक्षण किया।
भारतीय स्टेट बंैक की डबवाली शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक  बीएस सरपाल ने बताया कि वह छुट्टी पर चल रहा है। लेकिन उन्हें सुबह जैसे ही इस घटना की सूचना मिली तो वह मौका पर पहुंचे और देखा कि अज्ञात लोगों ने एटीएम में तो तोडफ़ोड़ की है, साथ में सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ डाले। उनके अनुसार इस तोडफ़ोड़ से एटीएम की मशीनरी का 3 लाख रूपये का नुक्सान हुआ है। उनके अनुसार अभी तक एक एटीएम का ताला नहीं खुल पाया है जिसे अज्ञात लोगों ने तोड़ डाला था। इस ताले के खुलने के बाद ही पता चल पायेगा कि कैश का कोई नुक्सान हुआ है या नहीं। थाना शहर प्रभारी इंस्पेक्टर बलवन्त कुमार जस्सू ने बताया कि शाखा प्रबंधक के ब्यान पर रपट लिख कर मामले की जांच शुरू कर दी है।