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15 मार्च 2010

नानकशाही कलेण्डर में बदलाव करके बादल डाल रहे हैं सिक्ख कौम में दरार-चीमा

डबवाली (लहू की लौ) यहां की सिक्ख संगत ने नानकशाही संवत के अनुसार नया वर्ष मनाते हुए रविवार को गुरूद्वारा बाबा विश्वकर्मा से एक दस्तार मार्च आयोजित किया और नई पीढ़ी को सिक्खी के बारे में जानकारी दी।
इस दस्तार मार्च से पूर्व शिरोमणि अकाली दल पंच प्रधानी अमृतसर (पंजाब) प्रदेश महासचिव हरपाल सिंह चीमा ने नानकशाही कलेण्डर का विमोचन किया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 2003 में अकालतख्त से नानकशाही कलेण्डर को जारी किया गया था। लेकिन अब शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी अमृतसर इसमें कुछ परिवर्तन करके धूमाशाप कलेण्डर जारी कर रही है। जो उन्हें स्वीकार नहीं है और इस प्रकार से दो-दो कलेण्डर जारी करके सिक्ख कौम को बांटने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने इस परिवर्तन के पीछे बादल परिवार की भूमिका बताते हुए कहा कि नानकशाही कलेण्डर में वोटों की राजनीति के चलते बदलाव किया जा रहा है। बदलाव में संक्रांति और गुरूपर्वो को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के चुनाव आने ही वाले हैं और उनका प्रयास है कि बादल विरोधी सभी गुटों को एकत्रित करके इन चुनावों में भाग लेकर वर्षों से एसजीपीसी और सिक्ख संस्थानों पर कुंडली मारे बैठे बादल परिवार को खदेड़ा जा सकें। उन्होंने कहा कि सिक्खों को उतना खतरा बाहर से नहीं है, जितना खतरा भीतर बैठे बादल जैसे लोगों से हैं। जिन्होंने लगातार सिक्खी को नुक्सान पहुंचाया है।
उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह भी कहा कि पंजाब में अब 1984 के दंगों को लेकर कोई तलखी नहीं है। उनके अनुसार उस समय भी और अब भी बादल परिवार का ही एक ड्रामा था। उनके अनुसार अब 25 वर्ष के बाद सुखबीर सिंह बादल को 1984 के दंगों की याद आई है और इसमें दोषियों को सजा दिलाने की बात कही जाने लगी है। जबकि सच यह है कि बीजेपी सरकार के केन्द्र में होते हुए सुखबीर बादल केन्द्रीय मंत्री थे। उस समय 1984 के दंगों पर वे कुछ नहीं कर पाये और अब कभी हरसिमरत कौर से और कभी स्वयं इस सम्बन्ध में ब्यान देकर सिक्खों के जख्मों को हरे करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस अवसर पर उपस्थित श्री गुरूग्रंथ साहिब सत्कार सभा हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुखविन्द्र सिंह खालसा ने कहा कि दस्तार सिक्खी की आत्मा है और इस दस्तार ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। लेकिन बहकावे में आकर कुछ युवा इस दस्तार से मुंह मोड़ चुके हैं। उन्हें वापिस लौट आना चाहिए।
उन्होंने डेरावाद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हरियाणा, पंजाब और केन्द्र की सरकारें डेरावाद को बढ़ावा दे रही हैं। डेरावाद सिक्खी की आड़ में युवा पीढ़ी को सिक्खी से दूर कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 22 मार्च 2009 से शुरू हुए धर्म युद्ध मोर्चे की 21 मार्च को मनाई जा रही वार्षिकी पर 101 सिक्खों का जत्था बाबा हरदीप सिंह के नेतृत्व में अकालतख्त तलवंडी साबो से डेरा सलावतपुर की ओर कूच करेगा। यह जत्था पाखंडवाद के द्योतक सलावतपुरा डेरा पर ताले जड़ेगा।
इस अवसर पर शिरोमणि अकाली दल पंच प्रधानी अमृतसर के जिला पटियाला अध्यक्ष गुरमीत सिंह, बलकरण सिंह खालसा, श्री गुरूग्रंथ साहिब सत्कार सभा के जिला सिरसा के उपप्रधान जस्सा सिंह सोढ़ी, गुरूद्वारा बाबा विश्वकर्मा मन्दिर के प्रधान सुखविन्द्र सिंह, सुरजीत सिंह, कुलवन्त सिंह, सुरेन सिंह, कंवलजीत सिंह, मनदीप सिंह, मनिन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।

राजा राम अग्रवाल धर्मशाला ट्रस्ट के खिलाफ जनहित याचिका

डबवाली (लहू की लौ) गांव गोरीवाला के दो लोगों ने राजा राम अग्रवाल धर्मशाला ट्रस्ट, डबवाली के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर करके न्यायालय से गुहार लगाई है कि वर्तमान ट्रस्ट पारिवारिक ट्रस्ट बनकर रह गया है और इसके पदाधिकारियों को हटाकर इस ट्रस्ट को पब्लिक हित में बनाया जाये।

गांव गोरीवाला निवासी रामनाथ पुत्र मोहन लाल पुत्र परस राम और कृष्णा देवी पत्नी रामनाथ ने न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी अमरजीत सिंह की अदालत में सीपीसी की धारा 92 के तहत राजा राम अग्रवाल धर्मशाला ट्रस्ट, डबवाली (रजि.) को चुनौती देते हुए अपनी याचिका में कहा है कि इस ट्रस्ट को राजा राम अग्रवाल की 1944 में मृत्यु के बाद उनकी स्मृति में उनकी विरासत को संभालते हुए कस्तूरी लाल और मोहन लाल निवासीगण गोरीवाला ने 30-07-1945 में बनाया था। जिसमें ट्रस्ट को चैरिटेबल और धार्मिक प्रकृति का घोषित किया गया था। इस ट्रस्ट के पास इस समय गांव गोरीवाला और डबवाली नगर में करीब 25 दुकानें, स्कूल, धर्मशाला और 529 कैनाल भूमि है।
याचि ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि ट्रस्ट के नियमानुसार ट्रस्ट के नाम जो भूमि है, उसे आम पब्लिक के लिए प्रयोग में लाया जाना था। लेकिन अब इस ट्रस्ट को एक ही परिवार ने अपनी निजी सम्पत्ति मानते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में ले रखा है। कस्तूरी लाल की मृत्यु के बाद इस ट्रस्ट को बाबू राम पुत्र कस्तूरी लाल का खानदान ही संभाल रहा है और इसी परिवार में से प्रधान, सचिव व अन्य सदस्य हैं। जबकि उनके (मोहन लाल) परिवार से किसी को सदस्य नहीं मनाया गया है। याचियों ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि पिछले 20 वर्ष से संस्था के चुनाव नहीं हुए हैं। याचियों ने अपनी गुहार में कहा है कि आय-व्यय का ब्यौरा भी कभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस ट्रस्ट को ट्रस्ट की भावनाओं के अनुसार न रखे जाने के चलते इसके पदाधिकारियों को हटाकर इसे पब्लिक हित में बनाया जाये।
याचिका दायर करने से पूर्व याचियों ने अदालत से सीपीसी की धारा 92 की अनुमति लेकर ही इस याचिका को दायर किया है। अदालत ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए पदाधिकारियों और ट्रस्ट सहित 9 को नोटिस भेजकर 13 अप्रैल को अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखने के आदेश दिये हैं।