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04 सितंबर 2010

स्कूली बच्चों को आई फ्लू

डबवाली (लहू की लौ) उपमंडल डबवाली के गांव सांवतखेड़ा के राजकीय माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को आई फ्लू होने से स्कूली बच्चों में दहशत का माहौल पर्याप्त है। विद्यालय के करीब 50 विद्यार्थी इस रोग से पीडि़त हैं। शुक्रवार को विद्यालय प्रशासन ने पीडि़त छात्रों को छुट्टी दे दी। साथ में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत करवाया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार गांव सांवतखेड़ा के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में 6वीं से लेकर 8वीं तक कुल 117 बच्चे हैं। जबकि प्राथमिक विंग में 135 बच्चे क,ख,ग पढ़ रहे हैं। स्कूली बच्चों में आई फ्लू रोग तेजी से अपनी जड़े जमा रहा है। कुल 252 बच्चों में से 50 बच्चे आई फ्लू का शिकार हो गए हैं। पीडि़त बच्चों में से अधिकतर विद्यालय आ रहे हैं। ऐसे में फ्लू के ओर अधिक फैलने का भय बन गया है। एतिहात के तौर पर विद्यालय का प्रशासन पीडि़त बच्चों को घर भेज रहा है।
कक्षा तीसरी की पवनदीप कौर, चौथी के भगवान, दविन्द्र, अनिता, हरमन कौर, राजिन्द्र सिंह, कुलदीप कौर, पांचवी के मदन लाल, मनदीप, अजय, साहिल, एकता, रजनी, कोमल, ममता, कुलदीप, लवप्रीत, पूनम, हरजिन्द्र सिंह, जसविन्द्र कौर, 6वीं की वीरपाल कौर, 7वीं के विशाल, स्वतंत्र, प्रगट, नवदीप, गुरप्रीत, तरूण, राहुल, शिवराज, सुखविंद्र, राजकुमार, 8वीं का विकास आई फ्लू की गिरफ्त में हैं।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय के मुख्य शिक्षक मलकीत सिंह ने बताया कि विद्यालय के बच्चों में यह रोग तेजी से फैल रहा है। पीडि़त बच्चों को आंखों पर गोगलस लगाकर या विद्यालय में न आने की सलाह दी जा रही है। अगर कोई पीडि़त बच्चा विद्यालय में आता है, तो उसे छुट्टी दे दी जाती है, ताकि स्वस्थ बच्चे को यह रोग न हो। उन्होंने बताया कि खण्ड शिक्षा अधिकारी को भी उन्होंने एक पत्र भेजकर मामले से अवगत करवा दिया है।
डबवाली सिविल अस्पताल के एसएमओ विनोद महिपाल के अनुसार आई फ्लू एक वायरल है। जो पीडि़त व्यक्ति को छूने या पास बैठने से फैलता है। यह रोग अधिकतर वर्षा के मौसम में होता है। आंख में दर्द, खुजली, सिर दर्द, आंख में लाली आना, आंख की पलक का चिपक जाना यह सब इस रोग के लक्षण है।
एसएमओ के अनुसार यह रोग सात-आठ दिन का होता है। लेकिन इसमें विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। पीडि़त व्यक्ति आंख पर गोगलस लगाए रखे, घर से बाहर न निकले, किसी के संपर्क में न आए इत्यादि। एसएमओ विनोद महिपाल ने बताया कि लापरवाही बरतने पर यह रोग घातक साबित हो सकता है। रोग बढऩे से आंख पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इतना ही नहीं आंख में घाव हो सकते हैं।
एसएमओ के अनुसार डबवाली के सामान्य अस्पताल में फ्लू के प्रथम चरण का ईलाज संभव है। लेकिन रोग बढऩे से आंख में इंफेक्शन होने पर विशेषज्ञ की राय पर ही ईलाज आगे बढ़ता है। डबवाली के सामान्य अस्पताल में आंख रोग विशेषज्ञ न होने संबंधी पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है।