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27 मई 2011

मुसलमान ने दी हिन्दू की चिता को अग्नि

कट्टरता पर चोट : धर्म से ऊंची है इंसानियत
डीडी गोयल (093567-22045)
डबवाली।
एक मुसलमान ने हिन्दू को मरणोपरांत अग्नि देकर हिन्दू-मुसलमान के बीच फूट डालने वालों को करारा जवाब दिया है। यह मिसाल कहीं ओर नहीं बल्कि मण्डी किलियांवाली में कायम हुई। हिन्दू बहुल क्षेत्र होने के बावजूद भी एक हिन्दू साधु को मुसलमान ने केवल कंधा ही नहीं दिया, बल्कि डबवाली के रामबाग में उसके मृतक शरीर को अग्नि देकर उसे पंचतत्वों में विलीन भी किया।
धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़े तो अक्सर होते रहते हैं। लेकिन धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत के लिए काम करने वाली मिसालें अक्सर कम ही मिलती हैं। अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद भी एक मुसलमान मुन्ना ने एक हिन्दू साधु राजेंद्र शुक्ला को पहले शरण दी और मृत्यु हो जाने पर उसे कंधा दिया। मूल रूप से कानपुर निवासी राजेंद्र कुमार शुक्ला पुत्र गंगा नारायण शुक्ला साधु वेष में काफी समय से मालवा बाईपास पर घूम रहा था। करीब डेढ़ साल पूर्व उसका संपर्क मालवा बाईपास पर सर्विस स्टेशन चलाने वाले मुन्ना से हुआ। मुन्ना मुसलमान है, लेकिन इसके बावजूद उसने हिन्दू साधु को अपने सर्विस स्टेशन पर जगह दी। मुन्ना हर रोज की तरह शाम को अपना सर्विस स्टेशन बंद करके घर जाता और राजेंद्र शुक्ला वहीं सर्विस स्टेशन के आगे चारपाई पर लेटकर रात बिताता।
मंगलवार को भी प्रतिदिन की तरह मुन्ना सर्विस स्टेशन बंद करके घर चला गया। बुधवार सुबह करीब 8 बजे वह सर्विस स्टेशन पर आया। चारपाई पर लेटे राजेंद्र को आवाज लगाई। उसने कोई जवाब नहीं दिया। राजेंद्र के ओढ़े कंबल को हटाया तो देखा कि वह खून से लथपथ मृत पड़ा था। किलियांवाली पुलिस ने मुन्ना की शिकायत पर मौका पर पहुंचकर राजेंद्र के शव को कब्जे में लिया। मलोट से पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव को मुन्ना को सौंप दिया। लेकिन मुन्ना की आर्थिक हालत दयनीय होने के कारण शव का संस्कार करने के लिए मुन्ना को डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके नीना ने सहयोग दिया।
हिन्दू संस्कार के अनुसार मुन्ना ने मुसलमान होते हुए भी डबवाली के रामबाग में बुधवार देर शाम को मुखाग्नि देकर राजेंद्र शुक्ला के शरीर को पंचभूतों में समाहित कर दिया। मण्डी किलियांवाली में रहने वाले मुन्ना ने बताया कि उसने शुक्ला के परिवार से कानपुर संपर्क किया। उसके परिजनों से अनुमति मिलने के बाद ही शुक्ला के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।

कौन था राजेंद्र शुक्ला
कानपुर में कपड़ा के बिजनेस मैन संजय शुक्ला के अनुसार राजेंद्र शुक्ला उसका चाचा था। जोकि हिन्दुस्तानी फौज के असला खाना में बतौर बाबू तैनात था। किसी कारणवश असला खाना की नौकरी छोड़कर उसका चाचा बाबू से साधु बन गया। पिछले करीब सात सालों से वह साधु के रूप में घर से चला गया था। राजेंद्र शुक्ला की बीवी पुष्पा देवी, दो बच्चे कमल शुक्ला तथा लड़की बबली शुक्ला हैं। दोनों विवाहिता हैं। कमल आर्मी में है। संजय के अनुसार वे जल्द डबवाली आएंगे और राजेंद्र शुक्ला की अस्थियां कानपुर लेजाकर, अन्य संस्कार वहीं करेंगे। संजय के मुताबिक मुन्ना ने मुसलमान होते हुए भी उसके चाचा के शव को कंधा दिया और मुखाग्नि दी। इससे बढ़कर इंसानियत का उदाहरण कहीं और नहीं मिल सकता।

बीवी के वियोग में डेरा प्रेमी ने दी जान

डबवाली (लहू की लौ) पत्नी के वियोग में एक डेरा प्रेमी ने किलियांवाली जलघर की डिग्गी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मृतक की पहचान राजपाल बठला उर्फ अंग्रेज सिंह (32) निवासी अबोहर हाल एकता नगरी, वार्ड नं.11, डबवाली के रूप में की है।
गुरूवार सुबह 9 बजे किलियांवाली जलघर में तैनात बेलदार सतपाल ने जलघर की डिग्गी में एक शव बहता हुआ देखा। उसने तत्काल इसकी जानकारी जनस्वास्थ्य विभाग डबवाली के जेई सतपाल तथा किलियांवाली पुलिस को दी। इधर इसकी जानकारी पाकर डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के सदस्य भी मौका पर आ गए। संस्था के सदस्यों ने मण्डी किलियांवाली के तैराक रतन लाल उर्फ जयसूर्या की सहायता से शव को डिग्गी से बाहर निकाला। मौका पर पहुंची किलियांवाली पुलिस को युवक के पहनी पेंट की जेब से डेरा सच्चा सौदा सिरसा का लॉकेट मिला। जिससे पता चला कि मृतक डेरा प्रेमी है। मृतक की दाई बाजू पर राजपाल बठला लिखा हुआ पाया। पुलिस ने लॉकेट के आधार पर युवक की पहचान करने के लिए डेरा सच्चा सौदा के स्थानीय मैम्बरों से संपर्क साधा।
करीब दो घंटे बाद मृतक की पहचान मौका पर पहुंचे उसके भाई कालू राम (36) निवासी एकता नगरी, डबवाली ने की। कालू राम ने पुलिस को बताया कि उसका भाई राजपाल उर्फ अंग्रेज उसके पास रहता था और सब्जी रेहड़ी में उसका हाथ बंटाता था। बुधवार सुबह 8 बजे वह घर से रेहड़ी पर जाने का कहकर निकला था। लेकिन उसके बाद घर वापिस नहीं आया। कालू राम ने बताया कि राजपाल की शादी साल 1995 में अबोहर की एक युवती से हुई थी। पति-पत्नी में अनबन के चलते दोनों में करीब डेढ़ साल पूर्व तलाक हो गया। वह बिल्कुल अकेला हो गया था। इसी के चलते उसका भाई मानसिक तौर पर परेशान रहने लगा। करीब डेढ़ माह पूर्व वह अबोहर छोड़कर उसके पास डबवाली आ गया और यहीं उसके पास रहने लगा। पत्नी के वियोग में मानसिक परेशानी के चलते उसने उपरोक्त कदम उठाया।
किलियांवाली पुलिस चौकी के प्रभारी एएसआई जीत सिंह ने बताया कि कालू राम के उपरोक्त ब्यान पर पुलिस ने दफा 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करते हुए शव का मलोट के सरकारी अस्पताल से पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे उसके वारिसों को सौंप दिया।