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20 जनवरी 2010

खेत मजदूरों को देख बीडीपीओ भागा


डबवाली (लहू की लौ) पंजाब खेत मजदूर यूनियन ने महंगाई पर नियंत्रण स्थापित करने और नरेगा के तहत मजदूरों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को बीडीपीओ कार्यालय लम्बी के समक्ष धरना देकर अपना रोष प्रकट किया। लेकिन जब ज्ञापन देने का समय आया तो उस समय बीडीपीओ चोर मोरी से कार्यालय से फरार हो गया। जिससे मजदूरों में रोष भड़क गया और मजदूरों ने धरने को अनिश्चितकालीन घेराव में तबदील कर दिया।

हर रोज बढ़ रही महंगाई को नियंत्रण में करने, नरेगा स्कीम के अन्तर्गत मजदूरों को साल भर का रोजगार 200 रूपये प्रति दिहाड़ी के तहत देने जैसी मांगों को लेकर पंजाब खेत मजदूर यूनियन के कार्यकर्ता यूनियन की राज्य इकाई के आह्वान पर आज अचानक बीडीपीओ कार्यालय पर धरना देने के लिए पहुंच गये। इन मजदूरों के साथ बीडीपीओ ने 2.30 बजे का समय ज्ञापन देने के लिए निर्धारित किया था। लेकिन जब ज्ञापन देने का समय आया तो उस समय बीडीपीओ अपने कार्यालय के पिछवाड़े से खिसक गया। जिसको लेकर मजदूरों में रोष भड़क उठा। मौका पर उपस्थित मजदूर नेता लक्ष्मण सिंह सेवेवाला, सुक्खा सिंह आदि ने खेत मजदूरों के साथ विचार-विमर्श के बाद अपने इस धरने को अनिश्चित कालीन घेराव में बदल दिया और बीडीपीओ तथा पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
इस मौके पर खेत मजदूरों को सम्बोधित करते हुए यूनियन के प्रदेश महासचिव लक्ष्मण सिंह सेवेवाला ने कहा कि भारत की सत्ता पर काबिज हाकमों की गलत आर्थिक नीति के कारण ही महंगाई तेज गति से बढ़ रही है। जबकि कृषि में उत्पादन कम हो रहा है। पूंजीवादी सरकार कृषि की अपेक्षा अन्य साधनों पर पूंजी निवेश कर रही है। जबकि कृषि को निरोत्साहित करने पर तुली हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जन वितरण प्रणाली को सरकार की नीतियों ने पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।
सेवेवाला ने यह भी कहा कि सिंघेवाला-फतूहीवाला में मजदूरों से नरेगा के तहत करवाये गये काम का पारिश्रमिक 1 लाख 48 हजार 376 रूपये महीनों बीतने के बावजूद भी नहीं दिये गये।
इस मौके पर इलाका प्रधान सुक्खा सिंह, काला सिंह, राजा सिंह, गुरतेज सिंह, परमजीत सिंह चन्नू आदि नेताओं ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर मजदूर मांग कर रहे थे कि नरेगा के तहत मजदूरों को वर्ष भर के लिए 200 रूपये प्रति दिहाड़ी के हिसाब से रोजगार दिया जाये, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए डिपुओं द्वारा रसोई और अन्य घरेलू प्रयोग की वस्तुओं की आपूर्ति सस्ते रेट पर की जाये, जमाखोरी बन्द की जाये और जमाखोरों द्वारा जमा की गई वस्तुओं को जब्त करके सस्ती दरों पर लोगों को वितरित की जायें, वायदा व्यापार पर रोक लगाई जाये, खेत मजदूरों को 10-10 मरले के प्लाट और मकान निर्माण के लिए एक लाख रूपये अनुदान राशि दी जाये, आत्महत्या से पीडि़त किसान-मजदूर परिवारों को 5-5 लाख रूपये मुआवजा और नौकरी दी जाये।

शिक्षा के गिरते स्तर के लिए संस्थाओं का सिस्टम दोषी-सेठी

डबवाली (लहू की लौ) किड्स किंगडम स्कूल, सिंघेवाला के प्रांगण में रविवार को वर्तमान शिक्षा पद्धति एवं शिक्षा के गिरते स्तर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें डबवाली व आसपास के क्षेत्र के लोगो ने भाग लिया।
इस मौके पर लर्निग ट्री एजुकेशनेल सोसायटी की ओर से नीलू सेठी ने कहा कि शिक्षा के गिरते स्तर के लिए संस्थाओं का सिस्टम ही दोषी है। चूंकि शिक्षण संस्थाएं शिक्षा देने की अपेक्षा पैसा कमाने पर जोर देने लगी है। संस्थाएं इस बात पर अधिक विचार करती हैं कि पैसा अधिक से अधिक कैसे कमाया जाये लेकिन शिक्षा का स्तर कैसे ऊपर उठे इस पर ध्यान नहीं देती। जबकि लर्निग ट्री एजुकेशानल सोसायटी इससे हट कर केवल पैसा कमाने पर नहीं बल्कि बच्चे का शिक्षा स्तर कैसे ऊपर उठे इस पर जोर देती है। विद्यालय की अंग्रेजी अध्यायपिका उमा गर्ग ने कहा कि शिक्षा का स्तर तभी ऊंचा उठ सकता है जब वहां पर बच्चों को अध्ययन करवा रहे अध्यापक की शिक्षा और अनुभव का स्तर भी ऊंचा हो। सोसायटी के प्रवक्ता के के वर्मा ने कहा कि संस्था का दृष्टिकोण, उद्देश्य एवं मिशन महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी संस्था का दृष्टिकोण विशाल, उद्देश्य उच्च एवं मिशन केवल सेवा हो तो वह संस्था केवल दूसरों का उदार ही नहीं करती बल्कि वह संस्था भविष्य में भी लम्बे समय तक लोगो की सेवा में कार्यरत रहने का गौरव पाती है। उनकी सोसायटी भी इसी पर चलते हुए 2020 में दसवी एवं 2022 में बाहरवीं कक्षा तक इस विद्यालय को ले जाकर सीबीएसई में बच्चों को टॉप पोजिशन हासिल करवाने का मिशन लेकर चल रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संस्था का उद्देश्य केवल बच्चे को टॉप पर लेजाना ही नहीं है बल्कि बच्चे का सर्वागीण विकास करवाते हुए उसे उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देकर उसे देश, समाज और अपने प्रति उत्तरदायी बनाना है।
इस मौके पर एडवोकेट जगदीश गुप्ता ने संस्था के प्रयास की सरहाना करते हुए कहा कि यह संस्था जिस प्रकार से अपने प्रयासों में पारदर्शिता दिखा रही है उससे लगता है कि संस्था बच्चों और उनके अभिभावकों को उनकी उम्मीद से भी अधिक देने का प्रयास कर रही है। इस मौके पर गांव लौहारा के सरपंच सुरजीत सिंह, देव कुमार शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर आये हुए मेहमानो का धन्यवाद सोसायटी की प्रबंधन निर्देशिका मीनाक्षी खूंगर ने किया। जबकि मेहमानो का स्वागत स्कूल प्रशासक सोहन लाल गुम्बर ने किया।

सरपंच पर नरेगा का वेतन न देने का आरोप

डबवाली (लहू की लौ) गांव गोदीकां के एक युवक ने उपायुक्त सिरसा को एक शिकायत देकर नरेगा स्कीम के तहत गांव के सरपंच पर उसे काम करवाने के बावजूद भी वेतन न देने का आरोप लगाया है। जबकि सरपंच ने आरोप को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता पर ही कई आरोप जड़ दिये हैं।

कालू राम पुत्र फूला राम निवासी गोदीकां ने उपायुक्त सिरसा को व्यक्तिगत रूप से 6 जनवरी को दिये एक पत्र में कहा है कि वह गांव गोदीकां का स्थाई निवासी है और उसे गांव के सरपंच विनोद सहारण ने सहायक/मैट के पद पर 15 मार्च 08 से 20 अगस्त 2009 तक कार्य पर रखा हुआ था और उसे 2000 रूपये प्रति माह के हिसाब से वेतन देना स्वीकार किया था। लेकिन उसे यह कहकर सरपंच वेतन न देता रहा कि अभी तक उसका वेतन उसके पास नहीं पहुंचा है। जबकि 4 माह पूर्व उसे सरपंच ने काम से भी निकाल दिया।
इधर इस सम्बन्ध में जब गांव के सरपंच विनोद सहारण से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कालू राम पुत्र फूला राम उसके पास सहायक के पद पर ही नहीं था। उनके अनुसार ग्राम सभा की बैठक में एक प्रस्ताव पारित करके सहायक के पद पर किसी व्यक्ति को रखा जाता है। ग्राम सभा के रिकॉर्ड में कहीं भी कालू राम सहायक के पद पर नहीं है। उसने नरेगा के तहत जितना काम किया था, उसे उसके हिसाब से राशि दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे गांव में नरेगा के तहत जिसे भी राशि दी गई है, उसकी फोटो भी ली गई हैं। सरपंच ने यह भी कहा कि मामला कुछ और है।
सरपंच के अनुसार शिकायतकर्ता अपनी पत्नी को गांव में बने बैंक में नौकरी लगवाना चाहता था, जबकि नौकरी उसकी पत्नी से अधिक पढ़ी लिखी लड़की को मिली है। इसी रंजिश को लेकर शिकायतकर्ता उसके खिलाफ शिकायतबाजी कर रहा है।

सर्दी में स्कूल के गेट पर खड़े रहे बच्चे

डबवाली (लहू की लौ) सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था इतनी बिगड़ती जा रही है कि हाड़ कम्पा देने वाली सर्दी में भी बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद भी विद्यालय का मुख्य गेट न खुलने के बावजूद भी कड़कती सर्दी में बाहर खड़े रहना पड़ रहा है। अफसोस तो यह है कि अध्यापक भी समय पर नहीं पहुंचते।
इसका उदाहरण सोमवार को कई दिनों की छुट्टियों के बाद खुले राजकीय मिडिल स्कूल (राजकीय प्राथमिक पाठशाला नं. 3) में मिला। सुबह 9 बजे स्कूल के बच्चे इस विद्यालय के गेट पर आ गये। लेकिन गेट न खुले होने के कारण उन्हें बाहर सड़क पर ही घनी धुंध में गेट खुलने की इंतजार में खड़े होना पड़ा और यह बच्चे सड़क तक आ जाने से वाहनों की चपेट में आते हुए बचे। यहीं नहीं बल्कि इसके चलते कुछ समय तक वहां वाहनों का जाम भी लग गया।
इसकी सूचना पाकर 9.25 पर मौका पर पहुंचे इस संवाददाता को बच्चों ने बताया कि कुछ बच्चों को स्कूल के मुख्य गेट की चाबी लेने के लिए मास्टर शेषपाल के घर भेजा गया है। इधर इस संवाददाता ने विद्यालय के प्रभारी राजेन्द्र सिंह देसूजोधा को फोन करके स्थिति से अवगत करवाया और मौका पर पहुंचने के लिए कहा। इसी दौरान संवाददाता ने देखा कि 10 बजे तक अध्यापक एक-एक करके विद्यालय तक पहुंचे।
राजेन्द्र सिंह देसूजोधा ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि सभी मिडिल स्कूलों में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की व्यवस्था है लेकिन उनके विद्यालय को चतुर्थश्रेणी कर्मी नहीं दिया गया है। इसी के चलते यह मुश्किल दरपेश आई है। उनके अनुसार स्कूल में लाखों रूपये की कीमत का सामान आया हुआ है। जिसमें एजूसैट भी शामिल है। लेकिन चौकीदार न होने के कारण उसे शुरू नहीं किया गया और यह सामान बेकार साबित हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस स्कूल के केवल प्राईमरी विभाग में 413 बच्चे हैं जिनके बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके चलते यह स्कूल मिडिल के नॉरम को भी पूरा नहीं करता। इस स्कूल को डबल स्टोरी बनाने के लिए लिखा जा चुका है।