युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

20 मई 2011

नशे के लिए मां को मारा

डबवाली। नशे की तलब पूरी करने के लिए पैसे नहीं मिले तो अपनी की मां को तेजधार से वार कर मौत के घाट उतार दिया। सुबह जब होश आने पर मां के शव को देख कर अपनी करतूत पर शर्मिंदा हो खुद को भी जिंदा जलाने का प्रयास किया। लेकिन आस पड़ोस के लोगों से आग को बुझा कर उसे काबू कर लिया। यह लोमहर्षक घटना उपमंडल के गांव मलिकपुरा की है। मृतक महिला की पहचान दान कौर के रूप में की गई है। जबकि उसका बेटा बोहड़ सिंह गांव में चौकीदार के तौर पर तैनात है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर हत्या के दौरान प्रयोग किये गये तेजधार हथियार को बरामद कर लिया है। हत्या की सूचना मिलते ही डबवाली के डीएसपी बाबू राम ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का जायजा लिया।
पुलिस को दिये ब्यान में मलिकापुरा निवासी लीला राम ने बताया कि उसका चचेरा भाई बोहड़ सिंह जो कि गांव में चौकीदार के पद पर तैनात है और नशे का आदि है। नशे को लेकर वह अक्सर में घर में लड़ाई-झगड़ा करता है। कुछ दिन पूर्व उसकी चाची दान कौर को पैंशन मिली थी। बोहड़ सिंह की पत्नी सिमरजीत कौर दो दिन पहले अपनी बीमार माँ का पता लेने के लिए अपने मायके भीटीवाला गांव गई हुई थी। उन्होंने बताया कि कल शाम बोहड़ सिंह नशे से चूर था और नशे की लत पूरी करने के लिए वह अपनी मां से पेंशन में मिले रुपये की मांग करने लगा जो कि पूरी न होने पर उससे झगड़ा करने पर उतारू हो गया। उनके झगड़े को देख कर वे अपने भाई के घर चले गये।
उन्होंने बताया कि सुबह उन्होंने आ कर देखा कि उनकी चाची दान कौर एक कोने पर मृत पड़ी थी और घर में पड़ी काटन स्टीक को आग लगा कर बोड़ सिंह खुद को जलाने का प्रयास कर रहा था। उन्होंने तुरंत आग को बुझा बोड़ सिंह को बाहर निकाला लेकिन तब तक उसके पैर और शरीर का कुछ अन्य भाग झुलस चुका था। ओढां पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को अपने कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम करवाने के उपरांत उसे उसके वारिसों को सौंप दिया है।

शाबास राहुल

शहर का छोरा इंडियन आर्मी में कैप्टन सिलेक्ट
डबवाली। कुछ कर दिखाने की जिद्द हो तो सपनों को भी हकीकत में बदला जा सकता है। शहर के एक 20 साल के नौजवान ने इंडियन आर्मी ज्वाईन करके मुल्क की सेवा करने का स्वपन पाला था। जब अवसर मिला तो उसने अपने स्वपन को हकीकत में बदल डाला। हम बात कर रहे हैं शहर के चौटाला रोड़ पर स्थित ए-वन धर्मकांटा वाली गली में रहने वाले सुनील सुखीजा के बेटे राहुल सुखीजा की। राहुल का हाल ही में इंडियन आर्मी (टेक्निकल फील्ड) में कैप्टन रेंक पर चयन हुआ है।
सफर पर इक नजर
डबवाली में पला-बढ़ा यह नौजवान इन दिनों करनाल स्थित दूनवेली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रोनिक एण्ड कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के लिए अंतिम समेस्टर की परीक्षाएं दे रहा है। पिछले दिनों इंडियन आर्मी के अधिकारियों की एक टीम कॉलेज में आई। इस टीम ने कॉलेज के युवाओं के कुछ टैस्ट लिए, ताकि आर्मी की टेक्निकल फील्ड में इन्हें अजमाया जा सकें। आर्मी अधिकारियों की नजर कॉलेज के मेहनती 15 स्टूडेंट पर पड़ी। प्राथमिक टैस्ट में पास हुए इन स्टूडेंटस को आर्मी के इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) हैड क्वार्टर पर टैस्ट देने के लिए आमंत्रित किया गया। जिनमें राहुल सुखीजा भी था। आर्मी में शामिल होने की तमन्ना लिए देश के भिन्न-भिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज से करीब 600 युवा हैड क्वार्टर पर जमा हुए।
इलाहाबाद में हुआ टैस्ट
आर्मी अधिकारियों की देखरेख में टेक्निकल फील्ड के इन युवाओं ने पांच दिनों तक दिमागी कसरत की। आखिर में 600 युवाओं में से 60 युवा सेना के नियमों की कसौटी पर खरा उतरे। 60 नौजवानों की लिस्ट में डबवाली के दुलारे राहुल सुखीजा का नाम भी आ गया। राहुल सेना में सिलेक्ट होने वाला अपने कॉलेज से एकमात्र स्टूडेंट है। जुलाई 2011 में राहुल आर्मी की ट्रेनिंग प्राप्त करेगा। इधर राहुल के इंडियन आर्मी के टेक्निकल फील्ड में कैप्टन रेंक प्राप्त करने का समाचार जैसे डबवाली में सुखीजा परिवार को मिला तो पूरा परिवार बेटे की सफलता पर गौरवान्वित हो उठा।
राहुल की माता शशिलता, पिता सुनील सुखीजा का कहना है कि उनके बेटे की तमन्ना थी कि वह आर्मी ज्वाईन करे, जो उसने की। बेटे की सफलता पर चंद शब्दों में अपनी फिलिंग व्यक्त नहीं कर सकते। लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि परिवार के बेटे को देश की सेवा करने का मौका मिला, उनके लिए इससे बढ़ा तोहफा भला और क्या हो सकता
इस संवाददाता से बातचीत करते हुए राहुल सुखीजा ने कहा कि सपना कब पूरा हुआ इसका पता ही नहीं चला। आज बहुत अच्छा लग रहा है। अन्दर से फिलिंग आ रही है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नशा करके युवा अपने आपको सजा दे रहे हैं। लेकिन युवाओं में नशे की इस प्रवृत्ति के पीछे 50 प्रतिशत भूमिका माता-पिता भी अदा करते हैं। सेना में क्रप्शन के संबंध में पूछे गए सवाल पर युवा कैप्टन ने कहा कि बाजार को गंदा कहने से समस्या का हल नहीं होने वाला। गंदगी कहां है, क्यों है यह भी जानना जरूरी है। सुखीजा के अनुसार वे अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश करेगा। कैप्टन के अनुसार समझा जाता है कि आर्मी केवल मारधाड़ वाली फील्ड है। लेकिन इसमें डॉक्टर, इंजीनियरों के लिए काफी जॉब मौजूद हैं।
गुरू और पापा ने बढ़ाई हिम्मत
राहुल सुखीजा ने बताया कि स्कूल दिनों में प्राचार्य रणवीर सिंह नरवाल का अनुशासन देखकर उसके मन में भी सेना में भर्ती होने की उत्सुकता जागी। यही उत्सुकता उसका सपना और फिर मंजिल बन गई। पापा सुनील सुखीजा की हौंसला अफजाई की बदौलत इस मुकाम तक पहुंचा।

लाडवा में लहलहाएंगे इजराईली आम

डबवाली (लहू की लौ) इंडो इजरायल प्रोजेक्ट के तहत बनी राजकीय बाग एवं नर्सरी, गांव मांगेआना की तर्ज पर जिला कुरूक्षेत्र के लाडवा में इजराईली आम झूलेंगे। हरियाणा बागवानी विभाग इसके लिए मसौदा तैयार करने में जुट गया है। इजरायली साईट्रस एक्सपर्टस मिस्टर सिमोन होल्टजमैन तथा डूबी राबेर ने बुधवार को इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के तहत गांव मांगेआना में स्थापित की जा रहे राजकीय बाग एवं नर्सरी का अवलोकन किया। मौका पर उपस्थित प्रदेश के बागवानी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
साईट्रस विशेषज्ञों ने अधिकारियों को साईट्रस पौधों के लिए से बेहतर उपज लेने के टिप्स बताते हुए इन पौधों के लिए कैसे सिंचाई की जाती है, कैसे स्प्रे की जाती है, इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डबवाली क्षेत्र और इजरायल का वातावरण लगभग मिलता-जुलता है। विशेषज्ञों ने बताया कि इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के तहत राजकीय बाग एवं नर्सरी में किए जा रहे इजरायली वरायटी के ट्रायल सही दिशा में जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को सावधान करते हुए कहा कि सिंचाई करते समय पौधों के तनों में पानी अधिक समय तक नहीं रखा जाना चाहिए। अगर पौधों के तनों में पानी अधिक समय तक रहेगा तो उसको फाइटोपथोरा नामक बीमारी हो सकती है। जिससे पौधा जल जाएगा। उन्होंने राय दी कि पौधे पर स्प्रे प्राय: शाम को 4 बजे के बाद की जानी चाहिए। चूंकि उस समय कीट भोजन लेने के लिए पौधे के ऊपरी भाग पर आ जाते हैं। स्प्रे ऐसी हालत में कीटों पर अधिक प्रभावशाली साबित होती है।
इजरायली विशेषज्ञों ने तापमान की वृद्धि होने पर पौधे को कैसे जीवित रखा जा सकता है, इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पौधे पर गडलिंग करनी चाहिए। उन्होंने गडलिंग को विस्तार से बताया कि इस पद्धति में पानी की कमी को पूरा करने के लिए विकसित पौधे के तने के छिलके को उतार दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मांगेआना नर्सरी में ट्रायल के तौर पर लगाई गई साईट्रस की इजरायली वरायटी मिखेल अगर चल निकली तो लोग हिंदुस्तानी किन्नू को बाय-बाय कह देंगे।
इस मौके पर उपस्थित बागवानी विभाग हरियाणा के फ्रूट विशेषज्ञ लक्ष्मी नारायण शर्मा ने बताया कि गांव मांगेआना की तर्ज पर जिला कुरूक्षेत्र के लाडवा में 25 एकड़ भूमि पर इजरायली आम की बुआई की जाएगी। चूंकि वहां की जलवायु इजरायली आम के लिए उपयुक्त है। मांगेआना नर्सरी में लगे इजरायली आम के पौधों को सीमित किया जा रहा है। उनके अनुसार योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। लाडवा में साल 2012 में इजरायली आम के पौधों का रोपण कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर बागवानी विभाग हरियाणा के ज्वाईंट डायरेक्टर डॉ. हरजोत सिंह सैनी, जिला बागवानी अधिकारी आत्मप्रकाश, राजकीय बाग एवं नर्सरी मांगेआना के प्रोजेक्ट ऑफिसर पवन कुमार, सलाहकार डॉ. आरके अरोड़ा उपस्थित थे।