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06 दिसंबर 2014

गुरूओं के चरणों में जाकर माफी मांगें इनेलो नेता-भाजपा

दिग्विजय चौटाला के डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ ब्यान पर गर्माई राजनीति

डबवाली (लहू की लौ) डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ इनेलो नेताओं के बोल से राजनीति गर्मा गई है। इनेलो नेता खुल्लम-खुल्ला ग्रामीण जनसभाओं में डेरा के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। वहीं भाजपा डेरा सच्चा सौदा के बचाव में उतर आई है। भाजपा ने इनेलो की छात्र इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला पर जमकर हमला बोला है। वहीं दिग्विजय सिंह चौटाला ने भी भाजपा पर तीखा वार किया है। दिग्विजय चौटाला ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में बुजुर्गों को दो हजार रुपए प्रति माह पेंशन देने का वायदा किया था लेकिन सरकार बनते ही भाजपा के मुख्यमंत्री इसे भूल गए और पेंशन को बढ़ाकर केवल 1200 किया गया है। प्रदेश की यह पहली ऐसी सरकार बनी है जो पेंशन बढ़ाने के अपने वायदे को किस्तों में पूरा करने की बात कर रही है। यह बुजुर्गों के साथ भद्दा मजाक है। युवाओं को रोजगार देने के वायदे से पलटते हुए केंद्र सरकार ने एक साल के लिए नौकरियों पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति भी लचर हो गई है। भाजपा को वोट देकर लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
कहा था, राजनीति करनी है तो राजनीतिक दल बनायें
वीरवार को डबवाली क्षेत्र के ग्रामीण दौरे पर लोगों को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा था कि धार्मिक संतों का कार्य अंधविश्वासों को मिटाते हुए समाज के उत्थान के लिए के लिए काम करना है न कि राजनीति करना। धर्म की आड़ में राजनीति करना न केवल जनता के साथ धोखा है बल्कि करोड़ों लोगों के विश्वास पर भी ठेस पहुंचती है। हमारे में समाज में धार्मिक संतों व गुरूओं ने एक नई दिशा है परंतु अब धर्म के नाम पर कुछ संत ढोंग कर रहे हैं। उनका असली मकसद समाज हित अथवा अध्यात्म नहीं बल्कि निजी स्वार्थों की पूर्ति करना है। संत समाज में फैले अंधविश्वास को मिटाएं और लोगों को जागरूक करें। यदि किसी को राजनीति करनी है तो वे राजनीतिक दल बनाएं और चुनाव लड़ें।


संतों, गुरूओं के चरणों में जाकर माफी मांगें इनेलो नेता
इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष के ब्यान की भाजपा ने तीखी आलोचना की है। भाजपा नेता देव कुमार शर्मा ने कहा कि पहले अभय सिंह चौटाला और अब दिग्विजय चौटाला ने संतों व धार्मिक गुरूओं के प्रति अपनी सोच का प्रदर्शन किया है और यह सोच किसी भी प्रकार से हिंदू संस्कृति के अनुरूप नहीं है। ज्ञानवान संतों व धर्म गुरूओं को इनेलो नेताओं की सीख की जरूरत नही है। उन्होंने कहा कि इनेलो नेताओं को अपनी हार से सबक लेते हुए संतों व गुरूओं को धमकाने की बजाए उनके चरणों में जाकर माफी मांगनी चाहिए। अगर लोग इनेलो को वोट डालें तो सब ठीक है और अगर वोट नहीं दिए तो सब बुरे हैं।  इसी सोच के कारण लोग इनेलो से दूर हो रहे हैं।  देवकुमार शर्मा ने कहा कि हरियाणा में इनेलो का दौर अब समाप्त हो चुका है।

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