युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

06 दिसंबर 2014

बरसी से तीन दिन पहले तारीख मुआवजे के लिये होगी बहस

डबवाली (लहू की लौ) डबवाली अग्निकांड को अब तक दुनियां का सबसे भयानक अग्निकांड माना गया है। जिसने शहर की एक प्रतिशत आबादी को लील लिया। उन्नीस वर्षों से चला रहा अग्निकांड पीडि़तों का संघर्ष अभी तक जारी है। मुआवजे की लड़ाई में बेशक सरकार अपने कोटे का पैसा देकर निकल गई हो। लेकिन एक निजी संस्थान अब भी अग्निकांड पीडि़तों को कोर्ट की तारीखें भुगतने के लिये मजबूर कर रहा है। मामले में इस बार सुनवाई अग्निकांड की 19वीं बरसी से ठीक तीन दिन पहले होनी है।
क्या हुआ था
23 दिसम्बर 1995 को चौटाला रोड़ पर स्थित राजीव मैरिज पैलेस (अब अग्निकांड स्मारक स्थल) में डीएवी स्कूल डबवाली का वार्षिक कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान 1 बजकर 47 मिनट पर बिजली शॉर्ट सर्किट से पंडाल के गेट से लगी आग ने देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में 442 लोगों को लील लिया। जिसमें 36 व्यस्क, 258 स्कूली बच्चे और 125 घरेलू महिलाएं व 13 अन्य थे। जबकि 88 लोग घायल हुए थे। इस कार्यक्रम में करीब दो हजार लोगों ने भाग लिया था। आग से झुलसे लोगों में से 30 ऐसे लोग हैं, जिनके अंग भंग हो गए।
जारी है मुआवजे की जंग
साल 1996 में न्याय पाने के लिए एसोसिएशन को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जाना पड़ा। अदालत ने एसोसिएशन की याचिका पर साल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश टीपी गर्ग पर आधारित एक सदस्यीय आयोग का गठन करके उन्हें संबंधित पक्षों पर मुआवजा निर्धारित करने का अधिकार दिया। मार्च 2009 को आयोग ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दी। नवंबर 2009 में हाईकोर्ट ने मुआवजा के संबंध में अपना फैसला सुनाते हुए हरियाणा सरकार को 45 प्रतिशत और डीएवी संस्थान को 55 प्रतिशत मुआवजा राशि पीडि़तों को अदा करने के आदेश दिए। अदालत ने सरकार को 45 प्रतिशत मुआवजा के रूप में 21 करोड़, 26 लाख, 11 हजार 828 रूपए और 30 लाख रूपए ब्याज के रूप में अदा करने के आदेश दिए। जबकि डीएवी संस्थान को 55 प्रतिशत के रूप में 30 करोड़ रूपए की राशि अदा करने के लिए कहा। अग्निकांड पीडि़तों को अदालत द्वारा मुआवजा दिए जाने के आदेश जारी करने के बावजूद भी जब सरकार ने इसके विरूद्ध अपील करने की ठानी तो अग्निकांड पीडि़तों को संघर्ष करना पड़ा। जिसके चलते सरकार ने तो अपने हाथ पीछे खींच लिए। लेकिन डीएवी मुआवजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चला गया। उच्चतम न्यायालय दिल्ली के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान तथा न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की बैंच ने डीएवी की दायर याचिका को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चण्डीगढ़ के 9 नवम्बर 2009 के निर्णय को बहाल रखा। मामला उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी डबवाली को सौंप दिया गया। अदालत में मामला अभी भी विचाराधीन है। जिस पर 20-12-2014 को सुनवाई होनी है। डीएवी संस्थान की ओर चार करोड़ बकाया : अग्निकांड पीडि़त संघ के प्रवक्ता विनोद बांसल ने बताया कि अदालत ने डीएवी संस्थान की ओर जो मुआवजा तय किया था, उसे पूर्ण रूप से भरने में संस्थान हिचकिचा रहा है। अभी तक चार करोड़ रूपये संस्थान की ओर बकाया हैं। जिसका विवाद अदालत में चल रहा है। 

कोई टिप्पणी नहीं: