युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

04 दिसंबर 2014

21 दिनों में दूसरी हड़ताल

डबवाली शहर में 14 बैंक रहे पूर्णतय बंद, ढाई सौ करोड़ का नुक्सान



डबवाली (लहू की लौ) वेतन वृद्धि की मांग को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। जिससे करीब ढाई सौ करोड़ रूपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। एटीएम प्रयोग के लिये लोग एक-दूसरे को आगे-पीछे करते नजर आये।
डबवाली में बंद रहे 14 बैंक
भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल, ओबीसी, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, पंजाब एवं सिंध बैंक सहित शहर डबवाली के सभी 14 राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे। इसके अतिरिक्त इन बैंकों की ग्रामीण क्षेत्र में खुली सभी शाखाओं में कामकाज ठप रहा। हड़ताल के चलते सुबह बैंक कर्मचारी बैंकों के मुख्य द्वारों पर इक्ट्ठे हुये और मांगों को पूरा न करने पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने अपने-अपने बैंकों के मुख्य द्वार पर आज हड़ताल है के पोस्टर चस्पा कर दिये।
वेतन में 23 प्रतिशत वृद्धि की मांग
कर्मचारी यूनियन की डबवाली शाखा के अध्यक्ष जसविंद्र बहल तथा सचिव प्रेम सिंगला ने बताया कि वर्ष 2007 में सरकार ने वेतन वृद्धि की थी। प्रत्येक पांच वर्ष बाद वेतन में वृद्धि की पॉलिसी है। वर्ष 2012 में सरकार ने वेतन में बढ़ौतरी करनी थी, लेकिन सरकार 11 प्रतिशत वेतन वृद्धि पर अड़ गई। जबकि यूनियन दिन-ब-दिन काम के बढ़ रहे बोझ को देखते हुये 23 प्रतिशत वेतन बढ़ौतरी की मांग कर रही है। लेकिन सरकार अपनी जिद्द नहीं छोड़ रही। जिसके चलते मजबूरन कर्मचारियों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
12 नवंबर को भी हुई थी हड़ताल
उपरोक्त मांग को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने 12 नवंबर 2014 को हड़ताल की थी। 21 दिनों में कर्मचारियों के दूसरी बार हड़ताल पर जाने से करीब 500 करोड़ रूपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। जसविंद्र बहल के अनुसार डबवाली पंजाब सीमा से सटा हुआ है। जिसके चलते शहर की शाखाओं में प्रतिदिन करीब ढाई सौ करोड़ रूपये का लेनदेन होता है।

तारीख याद, महीना भूल गये
हड़ताल के दौरान एक मजेदार पहलू नजर आया। कर्मचारियों को हड़ताल की तारीख याद रही। लेकिन महीना याद नहीं रहा। एसबीआई के मुख्य द्वार पर चस्पा पोस्टर में कर्मचारियों ने 3 दिसंबर की अपेक्षा, आज हड़ताल है लिखते हुये नीचे 3 नवंबर 2014 लिखा।

कोई टिप्पणी नहीं: