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21 नवंबर 2014

स्टे ऑर्डर एक का, बाकी पर अधिकारी मेहरबान


जेसीबी, पुलिस बल के साथ बैरंग वापिस लौटा कब्जा हटाने आया प्रशासनिक अमला


डबवाली (लहू की लौ) हिंदी साहित्य सदन के सामने अवैध कब्जा हटाने के लिये जैसी ही जेसीबी ने मुंह खोला डयूटी मजिस्ट्रेट के हाथ में स्टे ऑर्डर आ गया। टीम उल्टे पांव ही वापिस लौट गई। हालांकि स्टे ऑर्डर एक का आया था। जिसे देखकर शेष तीन कब्जाधारियों पर टीम को दया आ गई।
वीरवार शाम करीब साढ़े 3 बजे डयूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार मातू राम नेहरा, नगर परिषद के एमई जयवीर डुडी के नेतृत्व में एक टीम जेसीबी तथा पुलिस बल के साथ हिंदी साहित्य सदन के सामने चार घरों के आगे बने अवैध कब्जे हटाने के लिये पहुंची। एक मकान मालिक ने बताया कि उन्हें नप के निर्णय के खिलाफ अदालत से स्टे मिल गया है। नप टीम ने स्टे की कॉपी मंगवाई। करीब 4 बजे मकान मालिक ने स्टे की कॉपी डयूटी मजिस्ट्रेट के हाथों में सौंप दी। तीन मकान मालिकों ने स्वेच्छा से कब्जा हटाने के लिये तीन दिन का समय मांग लिया। स्टे की कॉपी के साथ ही टीम को अन्य पर दया आ गई। टीम जेसीबी तथा पुलिस बल के साथ वहां से खिसक गई।
पहला मौका नहीं था
यह पहला मौका नहीं था जब नप टीम कब्जा हटाने के के लिये उपरोक्त जगह पर न आई हो। पिछली दफा भी नप ने कब्जाधारियों पर दया दिखाते हुये एक दिन का समय दिया था। लेकिन दया के चलते तीन दिन बीत गये। मौका पर उमड़ी भीड़ ने सवाल खड़े किये कि अगर नगर परिषद यूं ही दया दिखाती रही तो अतिक्रमण अभियान ठंडा पड़ सकता है। चूंकि हिंदी साहित्य सदन के सामने लोगों ने करीब बारह-बारह फुट जमीन पर कब्जा जमाया हुआ है।

यह बोले डयूटी मजिस्ट्रेट
एक मकान मालिक ने स्टेटस को पेश किया है। जिसके चलते कार्रवाई रोक दी गई है। मैं डयूटी मजिस्ट्रेट हूं। शेष कब्जाधारियों पर जेसीबी क्यों नहीं चली, यह तो नगर परिषद ही बता सकती है।
-मातू राम नेहरा, तहसीलदार


पहले भी टूटा था स्टे
कब्जा हटाने के लिये हम तैयार थे। स्टे ऑर्डर के चलते जेसीबी रोकनी पड़ी। तीन कब्जाधारियों ने स्वयं कब्जा हटाने के लिये तीन दिन का समय मांगा है। हालांकि पूर्व में भी स्टे ऑर्डर लिया गया था। नगर परिषद का पक्ष जानने के बाद स्टे ऑर्डर खत्म हो गया था। स्थानीय तथा सैशन कोर्ट दोनों ने स्टे ऑर्डर खत्म किया था। इस बार भी ऐसा होगा।
-जयवीर डुडी, एमई नगर परिषद, डबवाली

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