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25 फ़रवरी 2011

छीनने पड़ते हैं अधिकार


गुरूनानक कॉलेज किलियांवाली में राष्ट्रीय स्तरीय सेमिनार आयोजित, वक्ता बोले
डबवाली (लहू की लौ) गुरूनानक कॉलेज किलियांवाली में बुधवार को राष्ट्रीय स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। जिसका विषय था मानव अधिकारों की परिभाषा : परिप्रेक्ष्य, चुनौतियां और मौके। इस अवसर पर वक्ताओं ने मानव अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उपस्थित लोगों को इसके प्रति जागरूक किया। वहीं श्रोताओं द्वारा पूछे प्रश्नों के उत्तर दिए।
हम कमजोर राष्ट्र हैं?
सेमिनार के मुख्यातिथि पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ के एसोसिएट रीडर (कानूनी विभाग) डॉ. दविंद्र सिंह ने कहा कि हमें प्रारंभ से ही यह पढ़ाया जाता है कि हम कमजोर राष्ट्र हैं। हमारी जनता कमजोर, लाचार और गरीब है। जबकि यह बात कहने वाले स्वयं कमजोर नहीं है। इससे मानवाधिकारों की बात बेमानी हो जाती है। कागजों में मानवाधिकारों की बात तो की जाती है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें लागू नहीं किया जाता। जिसके चलते मानव को किसी भी क्षेत्र में समानता के अवसर नहीं मिल पा रहे। जोकि मानव अधिकार का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि एक मजदूर आठ घंटे काम करता है और उसे सौ रूपए दिहाड़ी मिलती है। जबकि एक व्यक्ति को उसके ही विपरीत इतने ही समय की नौकरी करने पर डेढ़ लाख रूपए मिलता है। मानवाधिकारों के होते हुए यह असमानता क्यों? इसी प्रकार अध्यापक को पठन पाठन का कार्य शिक्षा के अधिकार के तहत सौंपा गया। लेकिन उसे जनगणना, चुनाव करवाने जैसे कार्य भी सौंप दिए गए। इसके चलते अध्यापक बच्चों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में न्याय नहीं कर पाता। चूंकि उसे शिक्षा देने का समय ही कहां बचता है।
मांगो मत छीनो
सेमिनार के गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. मुकेश अरोड़ा सीनेटर पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़ ने कहा कि अधिकार मांगने से नहीं, छीनने से मिलते है। हम मानव अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन ये अधिकार हमें मिले कब हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उसका मोबाइल पांच व्यक्ति छीनकर ले गए। इसकी रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए जब वे थाने में गए तो पुलिस ने उससे कहा कि आप से बात तभी की जाएगी, जब आप रिपोर्ट मोबाइल छीनने की नहीं, गुम होने की दर्ज करवाओगे। उनके अनुसार पुलिस कर्मी ने यह भी कहा कि अगर हम छीनने की रिपोर्ट दर्ज करते हैं, तो कागजों में क्राईम बढ़ा हुआ आएगा। जिससे उनकी प्रमोशन रूक सकती है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज करवाने का अधिकार तो हमें मिल गया है, लेकिन सच्चाई दर्ज करवाने का अधिकार हमारे पास नहीं है।
कंट्रोलर ऑफ इग्जामिनेशन पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला डॉ. पवन कुमार सिंगला ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति और व्यवस्था ही ऐसी रही है कि हमने समूह मानव की खुशहाली की बात कही है। हमारी सभ्यता में हमेशा ही मानवाधिकारों की बात होती रही है। लेकिन जब हम गुलाम हुए तब हमारी आजादी छिन गई, हमारे अधिकार छिन गए और जब हमने अधिकार मांगे तो हमें लाठी और गोली मिली। उन्होंने कहा कि आज जो देश (इंग्लैंड) मानवाधिकारों का अपने आपको सबसे बड़ा अलंबरदार कहता है, इसी देश ने हमें डेढ़ सौ वर्ष तक गुलाम बनाकर हमारे अधिकार छीने और जब हमने अधिकार मांगे तो हमें दबाया गया। उन्होंने कहा कि आज हम ब्रिटिश साम्राज्य से धरोहर के रूप में मिली शिक्षा और कानून को लागू किए हुए हैं। जिसके चलते हमें आज मानवाधिकारों की बात करनी पड़ रही है। आज अपने आपको बदलने की जरूरत है, विद्यार्थियों का भविष्य और चरित्र बनाकर उसे मानव बनाने की जरूरत है। व्यवस्था बदलने की आवश्यकता है।
सीनियर सीनेटर पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ डॉ. जगपाल सिंह ने कहा कि इस समय मानव अधिकारों की बात कब हुई यह कहने की बात नहीं है। बल्कि आम आदमी को उसी की भाषा में उसके के अधिकारों और कत्र्तव्यों की बात समझाने की जरूरत है। उनके अनुसार मानव अधिकार हमारे जन्मसिद्ध अधिकार हैं। जोकि समय के अनुसार बदलते रहे हैं। आज हमें उपभोक्ता कानून और आरटीए के अधिकार मिले हैं, जो कारगर साबित हो रहे हैं।
नवांशहर से आए डॉ. विनय सोफत ने कहा कि जब तक मानव के पास अपने विशेषाधिकार हैं और वह दूसरों के अधिकारों को नहीं समझता, तब तक मानव अधिकारों की बात नहीं की जा सकती। चूंकि एक अधिकार पाने के लिए दूसरों के अधिकार को कुचलता आया है। उन्होंने इस मौके पर स्वामी विवेकानंद के शब्दों को उदृत करते हुए कहा कि महिलाओं को किसी से अधिकार मांगने की जरूरत नहीं। अगर महिलाओं को पढ़ा-लिखाकर अपने फैसले खुद लेने के काबिल बना दिया जाए, तो महिलाएं अपना अधिकार स्वयं ले लेंगी।
मीडिया भी ध्यान दे
हिसार से आए डॉ. दिनेश चहल ने महिला अधिकारों पर सटीक बात कहकर खूब तालियां बटोरी। उन्होंने व्यंग्यत्मक शैली में कहा कि शीला और मुन्नी को ही बदनाम किया जाता है, लेकिन इसके लिए राम और शाम लाल को दोषी नहीं ठहराया जाता। मीडिया पर हम दोष देते हैं लेकिन जो समाज चाहता है, मीडिया वही परोसता है। यदि मानव अधिकारों की बात करनी है, तो समाज को अपना नजरिया बदलना होगा और मीडिया को अपनी सोच बदलनी होगी। इस अवसर पर डॉ. प्रितपाल कौर आरएनएनयूएल पटियाला, डॉ. आदिती शर्मा पीयूआरसी लुधियाना, डॉ. आशुतोष शर्मा एडवोकेट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चण्डीगढ़, डॉ. संजीव, डॉ. प्रमोद, डॉ. सुखजीत, डॉ. जसपाल सिंह होशियारपुर, डॉ. संजीव डाबर नवांशहर ने भी मानव अधिकारों पर अपने विचार रखे। मंच का संचालन प्रियतोष ने बखूबी निभाया। इस मौके पर मेजर भूपिंद्र सिंह ढिल्लों ओएसडी सीएम पंजाब, कॉलेज प्राचार्या डॉ. इंदिरा अरोड़ा, डॉ. आशा गर्ग प्रिंसीपल एमपी कॉलेज, प्रिंसिपल एसएम देवगुण, आयोजक डॉ. भारत भूषण, प्रेम गुप्ता शाखा प्रबंधक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला किलियांवाली, मास्टर दीदार सिंह, केशव शर्मा, पवन गर्ग, हरीश सेठी रिंका आदि उपस्थित थे।

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