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13 जनवरी 2011

'आजाद मुल्क के गुलामÓ

डबवाली (लहू की लौ) आजादी मिले 63 साल बीत गए हैं। लेकिन आज भी इस देश के मजदूर सरकार के गुलाम हैं। सरकार के छोड़े गए ठेकेदार आज भी मजदूरों का खून चूस रहे हैं। अब मजदूर जाग गया है। अपना हक लेकर रहेगा। यह कहना था मंगलवार को ऑल इंडिया एफसीआई मजदूर वर्कर यूनियन के आह्वान पर यहां के एफसीआई गोदाम में केन्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का।
मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर एफसीआई वर्कर यूनियन के सदस्यों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। एफसीआई यूनियन डबवाली के अध्यक्ष बृजलाल ने बताया कि साल 1991 में केन्द्र सरकार ने देश के कुछ एफसीआई डिपुओं के मजदूरों को पक्का किया था। जिसमें हरियाणा के 22 डिपू भी शामिल थे। लेकिन इसके बाद सरकार ने मजदूरों की दशा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार के छोड़े ठेकेदार मजदूरों का खून चूसने में लगे हुए हैं। एफसीआई डिपुओं में लगे चंद सरकारी मुलाजिम टेबल पर बैठ हजारों मजदूरों से काम करवा रहे हैं। जबकि वर्षों से अपनी पीठ पर माल लादकर सरकारी ठेकेदारों की जेबें भर रहे मजदूर आज भी दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। अगर मजदूरों को आजाद मुल्क के गुलाम कहकर पुकारा जाए, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
मंगलवार को ऑल इंडिया एफसीआई वर्कर यूनियन के आह्वान पर एक दिन की हड़ताल रखी गई। अगर इससे भी सरकार न मानी तो आगामी 3 फरवरी को यूनियन के आह्वान पर एफसीआई डिपुओं को ताले जड़ दिए जाएंगे। इस अवसर पर एफसीआई वर्कर यूनियन के राजा राम, कृष्ण फौजी, कृष्ण कीनिया, मक्खन सिंह, प्रेम कुमार नम्बरदार, विजय कुमार, लालचंद, सरदूल सिंह, भोला राम, रोशन लाल, रूप सिंह, ओमप्रकाश आदि उपस्थित थे।

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