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10 अक्तूबर 2009

जिला प्रशासन और गौशाला प्रबंधकों के अडियल रवैये ने ली वृद्धा की बलि

अग्रसेननगर में सांडों की लड़ाई की चपेट में आने से वृद्धा की मौत श्रीगंगानगर। जिला प्रशासन के आलाधिकारियों, नगर में विभिन्न गौशालाओं की प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों और तथाकथित गौ-प्रेमियों के अडियल-उदासीन रवैये के कारण आज एक वृद्धा की बलि चढ़ गई। अग्रसेननगर में पार्क के समीप आज सुबह करीब 7 बजे अचानक दो सांड लड़ पड़े। इनमें से एक गुस्साये सांड ने वहां से गुजर रही 72 वर्षीय जमनादेवी पत्नी प्यारेलाल को सींगों से उठाकर जमीन पर दे मारा, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई। वृद्धा को घायल देखकर लोग भागकर आये और सांडों को भगाया। जमनादेवी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। उसके परिजनों ने पुलिस कार्यवाही से इंकार कर दिया। जवाहरनगर थाना पुलिस ने बताया कि मरग रिपोर्ट दर्ज किए बिना और पोस्टमार्टम किए बिना शव परिजनों को सौंप दिया गया। नगर में इससे पहले भी इसी तरह आवारा पशुओं के कारण कई जने बेमौत मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद शहर को आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई प्रभावी तथा पुख्ता कार्यवाही नहीं की जा रही। समय-समय पर नगरपरिषद आवारा पशुओं को फाटक में करने का अभियान चलाती है। पशुओं को पकड़कर गौशालाओं के सुपुर्द किया जाता है, लेकिन ऐसे आवारा-नकारा पशु गौशाला प्रबंधक अपने ऊपर थोपा गया अनावश्यक बोझ समझते हैं। ऐसे पशुओं को कुछ दिनों बाद पुन: शहर में आवारा छोड़ दिया जाता है। गौशाला प्रबंधकों का सारा ध्यान दुधारू पशुओं और इनके लिए सरकार से अनुदान प्राप्त करने पर लगा रहता है। राज्य सरकार हर महीने लाखों-करोड़ों रूपये का अनुदान गौशालाओं को देती है। इसके अलावा गौशालाओं को भारी भरकम दूध की कमाई भी होती है। अधिकांश गौशालाओं की प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों के घरों में गौशालाओं से मुफ्त दूध पहुंचता है। यह अडियल-उदासीन रवैया आगे न जाने कितने और लोगों की बलि लेगा।

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