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31 अगस्त 2009

विधानसभा चुनाव में गूंजेंगे स्थानीय मुद्दे

डबवाली (लहू की लौ) हरियाणा के आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष कई मुद्दे लेकर मैदान में आ रही है। जिसमें प्रमुख रूप से सूखा, बिजली के कट और राज्य की लॉ एण्ड ऑर्डर की व्यवस्था शामिल हैं। इसके साथ-साथ ही स्थानीय मुद्दे भी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान में आ रही है। लेकिन इस सम्बन्ध में मतदाताओं की राय यह है कि विकास तो कोई भी सरकार आये वो तो होगा ही होगा, जिसमें सड़कें या गलियां बनना शामिल हैं। लेकिन आम आदमी के विकास के लिए कांग्रेस ने क्या किया, यह मुख्य मुद्दा रहेगा। जिसमें बेरोजगारी पहले से बढ़ी है। रोजगार के अवसर छिन रहे हैं। किसान प्राकृतिक कारणों से निराश होकर खेती से मुंह मोड़ रहा है और वह भी रोजगार के अवसर उद्योग या अन्य में ढूंढ़ रहा है। किसान का बेटा किसानी में न जाकर शहरों में रोजगार ढूंढ़ रहा है।
आम लोगों के अनुसार सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में असफल रही है, बल्कि महंगाई को बढ़ावा देने में लगी हुई है। उद्योग-धंधे स्थापित न करके बिना वजह सिर्फ वोट प्राप्त करने के लिए पैसा बांटने में व्यस्त है। नरेगा स्कीम के तहत गांवों में पैसा बांटा गया है। लेकिन विकास जीरो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सरकार ने अगर रोजगार ही देना था तो खड्डे खुदवाने की अपेक्षा इस पैसे को गांवों की गलियां सीसी बनाने और उन्हें सीवरेज जैसी सुविधा उपलब्ध करवाने में दिया जाता और वहीं पर ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध करवा दिया जाता। अब अगर रोजगार देने की बात कही गई है तो केवल ग्रामीणों को निठल्ला बनाने का ही प्रयास किया गया है। चूंकि मजदूरी पर लगे लोग मिट्टी को ही इधर-उधर फेंक रहे हैं, वह भी बिना किसी कारण के।
नरेगा से यहां सरकार को वोट मिलने की उम्मीद है, वहां मजदूर न मिलने से निर्माण कार्य रूक गये हैं या फिर महंगी दिहाड़ी पर निर्माण कार्य करवाने के लिए आम आदमी मजबूर है। यहां तक लॉ एण्ड ऑर्डर का सवाल है राज्य में कोई भी ऐसा दिन नहीं जाता जब कहीं न कहीं हत्या या लूटमार न हुई हो। लेकिन फिर भी सरकार यह दावा करती है कि राज्य में पूरी तरह शान्ति है और लोग सुख-चैन से जी रहे हैं।
हरियाणा सरकार विज्ञापनों के माध्यम से राज्य में पूरी बिजली होने का ढिंढोरा पिटती है। लेकिन वास्तविकता में बिजली लोगों को उनकी जरूरत पूरी करने के बराबर भी नहीं मिलती। इससे सरकार को एक लाभ जरूर हुआ है कि बिना बिजली के ही लोगों को बड़े-बड़े बिल आ रहे हैं। पैसा लोगों की जेब से निकलकर सरकारी खजाने में जा रहा है। चूंकि बिजली मिले न मिले उपभोक्ता को फिक्स बिल तो आ ही जाना है। लोड़ भी अनावश्यक रूप से उपभोक्ताओं पर डाल दिया गया है।
विपक्ष के समक्ष उपरोक्त मामलों के अतिरिक्त स्थानीय मुद्दे भी महत्व रखते हैं। जो विपक्ष ने अभी से उठाने शुरू कर दिये हैं। इनमें डबवाली विधानसभा में प्रमुख मुद्दों में रजिस्ट्रियां बन्द होना, बार-बार घोषणाओं के बावजूद भी कॉलेज भवन का निर्माण न होना, रेलवे ओवरब्रिज का मामला भी जैसे है वैसे ही रहना, सड़कों आदि के निर्माण में हुए घोटालों की जांच सिर्फ फाईलों में ही सीमित होकर रह जाना शामिल है।
विपक्ष के पास हुड्डा सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा यह भी है जिसमें 48 औद्योगिक और 7 इंस्टीट्यूशनल संस्थानों को करोड़ों रूपये की जमीन सस्ते भाव अलाट करना शामिल है। इसके साथ ही कुछ धार्मिक संस्थाओं को भी वोट बटौरने के लिए हुड्डा सरकार ने सरकारी जमीनें बिना किसी कारण ही अलाट कर दी। यह मुद्दा भी चुनावों में उठ सकता है।

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