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25 नवंबर 2014

सरकार कर्मचारियों की रिटायरमैंट की उम्र में बदलाव न करे

डबवाली (लहू की लौ) कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बार-बार बदले जाने के सरकारों के निर्णय से कर्मचारी वर्ग में रोष है। एक सरकार रिटायरमेंट की उम्र 58 या 60 वर्ष करती है तो दूसरी सरकार आकर उसे बदल देती है। सरकार की यह नीति ठीक नही है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरदेव कुमार  ने कहा कि पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार ने कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 साल की थी लेकिन अब खट्टर सरकार इसे दोबारा 58 साल करना चाहती है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाकर कर्मचारियों के साथ अन्याय न करे।
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक आम आदमी की तरह विचार कर निर्णय लें। पंजाब की तर्ज पर कुछ शर्तें लगाकर इसे लागू कर देना चाहिए जैसे इंक्रीमेंट नहीं लगेगा अथवा प्रमोशन नहीं की जाएगी। वैसे भी पंजाब तथा राजस्थान में भाजपा की सरकारें हैं और वहां भी रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है। अब भाजपा सरकार को हरियाणा में भी उसी तर्ज पर रिटायरमेंट की उम्र 60 साल रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट की उम्र 60 साल होने से जो कर्मचारी लाभान्वित होंगे वह सरकार के आभारी रहेंगे।

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