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10 जुलाई 2011

धर्म लोगों को जोड़ता है तोड़ता नहीं-निराला बाबा

कालांवाली (संजीव सिंगला) संतों का काम लोगों को सही मार्ग पर चलने का संदेश देना है। संत किसी भी धर्म या समाज को नहीं मानते। यह बात ओजस्वी प्रखर वक्ता क्रांतिकारी आचार्य दिव्यानंद विजय महाराज निराले बाबा ने शनिवार को मॉडल टाऊन में इंद्रजीत गोयल के निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमें धीरे-धीरे अपनी पुरानी रूढ़ीवादी सोच को बदलना होगा। लोगों को साथ जोडऩे व जुडऩे के लिए समाजिक कार्यक्रता बनना होगा। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्ेश्य सभी धर्म व वर्ग के लोगों को साथ जोडऩा है और समाजिक कार्यों के लिए जागरूक करना ताकि समाज सेवा के माध्यम से लोक भलाई के कार्य हो सके।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रेरणा से व लोगों के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर 12 गोशालाएं स्थापित हुई हैं। एक स्कूल स्थापित किया है जिसमें बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा कालांवाली मण्डी में कई ऐसे सामाजिक कार्य करने की है जिससे लोगों को फायदा हो। निराले बाबा ने बताया कि हरियाणा में उनका प्रथम चतुर्मास है, जबकि वह पंजाब में 11 व राजस्थान में चतुर्मास कर चुके हैं। इससे पूर्व निराले बाबा का निवास स्थान पहुंचने पर इंद्रजीत गर्ग, अग्रवाल वैश्य समाज के हल्का प्रधान सुरेश गर्ग (बंटू), अशोक टोनी आदि ने उनका स्वागत किया। उनका रविवार को मंडी में चतुर्मास के लिए भव्य नगर प्रवेश होगा।

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