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17 जनवरी 2011

सैंकड़ों पेड़ों का कत्ल!

डबवाली (लहू की लौ) हरियाणा के सबसे स्वच्छ गांव कालूआना में इन दिनों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। स्टेडियम और स्कूल की बिल्डिंग खड़ी करने के लिए करीब पंद्रह एकड़ में लगे करीब तेरस सौ पेड़ काटे जा चुके हैं। गांव के कुछ लोगों ने पेड़ों की कटाई रूकवाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है।
ग्रामीण प्रितपाल नम्बरदार, लेखराय नम्बरदार, पंच सुरेश कुमार, विनोद कुमार, प्रहलाद सिंह, जगतपाल, वेदप्रकाश, सतपाल, विकास भादू, संदीप भादू, चेतराम वर्मा, जगदीश, भगड़ावत, सतनारायण, रणवीर गोदारा, सहदेव भादू, इन्द्रपाल, सहदेव जाखड़ व छोटू भादू का कहना है कि गांव के सरपंच जगदेव सहारण द्वारा देवीलाल पार्क व अनाज मंडी में हरियाली खण्ड के तहत रोपित हरे-भरे पेड़ कटवाए जा रहे हैं। इन पेड़ों के लिए हरियाणा सरकार ने हरियाली खण्ड के तहत करोड़ों रूपए की अनुदान राशि खर्च की थी। उन्होंने बताया कि सरपंच पेड़ों को कटवाकर वहां पर स्कूल बनवाना चाहता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उनको स्कूल बनाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वहां पर हरियाणा सरकार के करोड़ों रूपए खर्च हुए है, अगर स्कूल बनवाना ही है तो पंचायत के पास और भी बहुत जगह खाली पड़ी है, वहां पर स्कूल बनवाया जा सकता है। उन्होंने पेड़ों की अवैध रूप से कटाई के मामले को ग्राम सभा की बैठक में भी उठाया था। लेकिन इसमें भी उनकी सुनवाई नहीं हुई।
इस बारे में गांव के सरपंच जगदेव सहारण का कहना है कि गांव में चौ. देवीलाल के नाम का कोई भी पार्क नहीं है और ना ही वहां पर उद्घाटन का पत्थर अंकित है। न ही इस पार्क का नाम कागजों में चौ. देवीलाल के नाम पर है। वे चौ. देवीलाल का दिल से आदर करते हैं। देवीलाल किसानों के हितैषी थे। उनके दिल में चौ. देवीलाल के प्रति सम्मान है। उन्होंने बताया कि दस एकड़ भूमि पर मॉडल स्कूल बनाया जाना है। मार्च 2010 में मॉडल स्कूल बनाने के लिए ग्राम सभा की आम बैठक में फैसला लिया गया था और इसी फैसले में इस जमीन का चयन किया गया था। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि पंद्रह-सोलह एकड़ भूमि पर 1248 वृक्ष लगे थे। जोकि पुराने थे। उन्हें जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी सिरसा के आदेशानुसार व नियमानुसार नीलामी करवाकर काटा गया है। उनके अनुसार वे साल 2005 में सरपंच बने थे। तभी से वृक्षारोपण में सहयोग कर रहे हैं। 25 एकड़ जमीन में वृक्षारोपण किया गया है और वहां पर जितने वृक्ष लगाए गए हैं, वो सारे के सारे अच्छी अवस्था में खड़े हैं। गांव में ही वृक्षों की नर्सरी तैयार करके एक लाख वृक्ष लगवाएं गए हैं। कोई गली और स्कूल व खाली स्थान वृक्षारोपण से वंचित नहीं रखा गया है। जिसे पार्क की बात की जा रही है, उस पार्क में कभी भी घास नहीं लगाई गई थी। बल्कि कंटीली झाडिय़ां थी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर सभी ग्रामवासी इस बात पर सहमत हों कि यहां स्कूल बनाया जा रहा है, वहां स्कूल नहीं बनना चाहिए, वे अब भी निर्णय को गांव की सहमति से बदलने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार वास्तव में एक प्रतिशत लोग पार्टीबाजी के चलते इसमें अड़चन डाल रहे हैं। लेकिन उनका प्रयास गांव वासियों के सहयोग से अड़चन डालने वालों को मनाने का रहेगा और उनकी जो गलत फहमी है, उसे निकाल दिया जाएगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पार्क स्थल को इसलिए चुना गया, ताकि विद्यालय का गेट कालूआना की ओर निकल सके तथा बच्चों को स्कूल में आने-जाने में कोई बाधा न आए। अगर इस जमीन को स्कूल के लिए न लिया होता, तो इसका गेट बस स्टैण्ड से होकर गुजरता और ऐसे में लड़कियों को विशेष तौर पर स्कूल आने-जाने में असुविधा रहती।
सरपंच ने यह भी कहा कि उपायुक्त सिरसा ने गांव में दो एकड़ भूमि पर पार्क बनाने की अनुमति दे दी है और इस पार्क पर दस लाख रूपए तक खर्च करने का भी अनुमति प्रदान की है। जिसका निर्माण शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा।

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