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19 मार्च 2010

अंग्रेजों के खेल को पदमश्री क्यों!

डबवाली (लहू की लौ) कबड्डी में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले कर्नाटक के बीसी सुरेश ने खिलाडिय़ों की पीड़ा को जाहिर करते हुए कहा कि कितनी बड़ी विडम्बना है कि भारतीय खेल कबड्डी, हॉकी में स्वर्ण पदक पाने वालों को केवल अर्जुन अवार्ड पर ही संतोष करने को मजबूर किया जाता है, जबकि अंग्रेजों के खेल क्रिकेट में पचासा ठोकने वाले को पदमश्री पुरस्कार से नवाजा जाता है।
वे वीरवार को जोधपुर में सम्पन्न एक कबड्डी टूर्नामेंट जीतकर वापिस कर्नाटक लौटते समय डबवाली में सतनाम सिंह नामधारी के निवास स्थान पर कुछ समय रूके थे और इसी दौरान पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कबड्डी में भारतीय खिलाडिय़ों द्वारा बटोरी की गई प्रशंसा का व्यख्यान करते हुए कहा कि वे 1990 में कबड्डी के अन्तर्राष्ट्रीय खेल के मैदान में उतरे थे। सन् 2002 में कोरिया में हुई 14वें एशियन खेल में उसे भारत की ओर से कबड्डी खेलने का मौका मिला। जिसमें भारतीय टीम ने विजयश्री पाई और इसके बाद 2003 में मलेशिया में सम्पन्न हुई एशियन चैम्पियनशिप में भारतीय कबड्डी टीम ने फिर विजय गाथा दोहराई। वर्ष 2004 में मुम्बई में हुए कबड्डी के पहले वल्र्ड कप में भी भारत ने अपना परचम लहराया। इसके बाद वर्ष 2006 में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें भारत की कबड्डी टीम के कप्तान पद पर सुशोभित होने का मौका मिला। उनकी कप्तानी में वर्ष 2006 में इरान में सम्पन्न हुई एशियन चैम्पियनशिप में टीम स्वर्ण पदक जीतकर वापिस लौटी।
बीसी सुरेश ने बताया कि अब तक वे अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 6 बार गोल्ड मैडल तथा नेशनल चैम्पियनशिप में 8 बार गोल्ड मैडल प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने खिलाडिय़ों की टीस को पत्रकारों को अनुभव करवाते हुए कहा कि भारतीय खेलों में जो जगह कबड्डी को मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। जिसके कारण भारत का यह मूल खेल आज क्रिकेट के मुकाबले में फिसड्डी बना दिया गया है। जबकि उत्तर भारत में अभी भी कबड्डी का क्रेज है और उत्तर भारत की सरकारें कबड्डी खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करती हैं, इसके विपरीत दक्षिण भारत में कबड्डी को दोयम दर्जे का खेल समझा जाता है।
उन्होंने बताया कि दक्षिण में कबड्डी के प्रति लोगों में उत्साह पैदा हो और अच्छे खिलाड़ी बाहर जाकर देश का नाम रोशन करें, इसके लिए उन्होंने कर्नाटक में बीसी रमेश के नाम तले एक अकादमी की स्थापना की है। वर्ष 2009 में उन्हें स्टेट बैेंक ऑफ मैसूर ने डिप्टी मैनेजर के पद पर सम्मान देकर जो उसके लिए किया अब वह इसके अहसान के रूप में बैंक की ओर से कबड्डी खेल भी रहा है तथा साथ में कबड्डी का प्रशिक्षण भी अपने साथी खिलाडिय़ों को दे रहा है।

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