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20 मई 2011

शाबास राहुल

शहर का छोरा इंडियन आर्मी में कैप्टन सिलेक्ट
डबवाली। कुछ कर दिखाने की जिद्द हो तो सपनों को भी हकीकत में बदला जा सकता है। शहर के एक 20 साल के नौजवान ने इंडियन आर्मी ज्वाईन करके मुल्क की सेवा करने का स्वपन पाला था। जब अवसर मिला तो उसने अपने स्वपन को हकीकत में बदल डाला। हम बात कर रहे हैं शहर के चौटाला रोड़ पर स्थित ए-वन धर्मकांटा वाली गली में रहने वाले सुनील सुखीजा के बेटे राहुल सुखीजा की। राहुल का हाल ही में इंडियन आर्मी (टेक्निकल फील्ड) में कैप्टन रेंक पर चयन हुआ है।
सफर पर इक नजर
डबवाली में पला-बढ़ा यह नौजवान इन दिनों करनाल स्थित दूनवेली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रोनिक एण्ड कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के लिए अंतिम समेस्टर की परीक्षाएं दे रहा है। पिछले दिनों इंडियन आर्मी के अधिकारियों की एक टीम कॉलेज में आई। इस टीम ने कॉलेज के युवाओं के कुछ टैस्ट लिए, ताकि आर्मी की टेक्निकल फील्ड में इन्हें अजमाया जा सकें। आर्मी अधिकारियों की नजर कॉलेज के मेहनती 15 स्टूडेंट पर पड़ी। प्राथमिक टैस्ट में पास हुए इन स्टूडेंटस को आर्मी के इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) हैड क्वार्टर पर टैस्ट देने के लिए आमंत्रित किया गया। जिनमें राहुल सुखीजा भी था। आर्मी में शामिल होने की तमन्ना लिए देश के भिन्न-भिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज से करीब 600 युवा हैड क्वार्टर पर जमा हुए।
इलाहाबाद में हुआ टैस्ट
आर्मी अधिकारियों की देखरेख में टेक्निकल फील्ड के इन युवाओं ने पांच दिनों तक दिमागी कसरत की। आखिर में 600 युवाओं में से 60 युवा सेना के नियमों की कसौटी पर खरा उतरे। 60 नौजवानों की लिस्ट में डबवाली के दुलारे राहुल सुखीजा का नाम भी आ गया। राहुल सेना में सिलेक्ट होने वाला अपने कॉलेज से एकमात्र स्टूडेंट है। जुलाई 2011 में राहुल आर्मी की ट्रेनिंग प्राप्त करेगा। इधर राहुल के इंडियन आर्मी के टेक्निकल फील्ड में कैप्टन रेंक प्राप्त करने का समाचार जैसे डबवाली में सुखीजा परिवार को मिला तो पूरा परिवार बेटे की सफलता पर गौरवान्वित हो उठा।
राहुल की माता शशिलता, पिता सुनील सुखीजा का कहना है कि उनके बेटे की तमन्ना थी कि वह आर्मी ज्वाईन करे, जो उसने की। बेटे की सफलता पर चंद शब्दों में अपनी फिलिंग व्यक्त नहीं कर सकते। लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि परिवार के बेटे को देश की सेवा करने का मौका मिला, उनके लिए इससे बढ़ा तोहफा भला और क्या हो सकता
इस संवाददाता से बातचीत करते हुए राहुल सुखीजा ने कहा कि सपना कब पूरा हुआ इसका पता ही नहीं चला। आज बहुत अच्छा लग रहा है। अन्दर से फिलिंग आ रही है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नशा करके युवा अपने आपको सजा दे रहे हैं। लेकिन युवाओं में नशे की इस प्रवृत्ति के पीछे 50 प्रतिशत भूमिका माता-पिता भी अदा करते हैं। सेना में क्रप्शन के संबंध में पूछे गए सवाल पर युवा कैप्टन ने कहा कि बाजार को गंदा कहने से समस्या का हल नहीं होने वाला। गंदगी कहां है, क्यों है यह भी जानना जरूरी है। सुखीजा के अनुसार वे अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश करेगा। कैप्टन के अनुसार समझा जाता है कि आर्मी केवल मारधाड़ वाली फील्ड है। लेकिन इसमें डॉक्टर, इंजीनियरों के लिए काफी जॉब मौजूद हैं।
गुरू और पापा ने बढ़ाई हिम्मत
राहुल सुखीजा ने बताया कि स्कूल दिनों में प्राचार्य रणवीर सिंह नरवाल का अनुशासन देखकर उसके मन में भी सेना में भर्ती होने की उत्सुकता जागी। यही उत्सुकता उसका सपना और फिर मंजिल बन गई। पापा सुनील सुखीजा की हौंसला अफजाई की बदौलत इस मुकाम तक पहुंचा।

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