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18 दिसंबर 2010

'जिसको तेरी बुद्धि से प्रकाश मिल गया, धरा मिल गई आकाश मिल गयाÓ

डबवाली (लहू की लौ) आर्य समाज द्वारा करवाए जा रहे वाॢषक उत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय सामवेदीय यज्ञ महोत्सव की पारिवारिक श्रृंखला का शुभारम्भ प्रात: जगदीश राय पेंटर व जगरूप राय के निवास पर हवन यज्ञ से हुआ। ''जिसको तेरी बुद्धि से प्रकाश मिल गया, धरा मिल गई आकाश मिल गयाÓÓ भजन से वातावरण भक्तिमय हो गया।
द्रोणस्थली आर्य कन्या गुरूकुल की ब्रह्मचारिणीयों श्रद्धा, शान्ति, श्रीदेवी एवं मनीषा ने परमात्मा का गुणगान किया। राजवीर शास्त्री दिल्लीवाले ने अपने चिरपरिचित अन्दाज में यज्ञ महिमा का गुणगान करते हुए ''होता है सारे विश्व का कल्याण यज्ञ से, जल्दी प्रसन्न होते हैं भगवान यज्ञ सेÓÓ गाया तो उपस्थित श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। आर्य जगत की प्रकाण्ड विदुषी डॉ. अन्नपूर्णा ने अपने वचनों के माध्यम से श्रोताओं को अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने के लिए प्रेरित किया।
मंच का संचालन प्रचार मन्त्री डॉ. अशोक आर्य ने किया। इस अवसर पर डॉ. एनडी वधवा, मास्टर नत्थू राम अग्रवाल, हरि ग्रोवर, विकास, रामधन, सावित्री देवी, सुदेश आर्य उपस्थित थे।

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