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26 नवंबर 2010

यूं खत्म हो जाएगी दोस्ती, मालूम ना था...

डबवाली। लोग उन दोनों की दोस्ती की दाद दिया करते थे। अढ़ाई साल पूर्व हुई दोस्ती यूं खत्म हो जाएगी यह किसी को मालूम ना था। लेकिन स्कूल समय की दुश्मनी ने दोनों को जुदा कर दिया।
गांव अबूबशहर के रहने वाले रवि कम्बोज (18) और मण्डी किलियांवाली की महाशा मोहल्ला के रहने वाले जसवीर उर्फ जस्सी (18) दोनों गहरे मित्र थे। उनकी मित्रता प्लस वन में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डबवाली में हुई। दोनों प्लस वन पास करके 12वीं में हुए। जसवीर प्रजापत उर्फ जस्सी आर्टस ग्रुप का छात्र था। जबकि रवि कॉमर्स ग्रुप का। दोस्ती की खातिर रवि ने कॉमर्स ग्रुप को अलविदा कह 12वीं में आर्टस ग्रुप ज्वाईन किया। रवि 12वीं में फेल हो गया और जस्सी पास। लेकिन दोस्त द्वारा दी गई कुर्बानी जस्सी ने व्यर्थ न जाने दी। 12वीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। दोनों ने फैशन डिजाईनिंग कोर्स करने का मन बनाया।
रवि कम्बोज के अनुसार फैशन डिजाईनिंग में जस्सी की गहरी रूचि थी। इसी के कारण वे लोग बुधवार सुबह बठिंडा गए। फैशन डिजाईनिंग कोर्स की जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने वहां शॉपिंग की। शाम को करीब 5.30 बजे वे लोग डबवाली के बठिंडा चौक में पहुंचे। यहां वे लोग रिक्शा से जस्सी के घर के लिए रवाना हुए। लेकिन उसकी रंजिश उसके दोस्त जसवीर उर्फ जस्सी पर भारी पड़ी। बाईक पर सवार होकर आए 4 युवकों ने उसकी डबवाली में भनक पाकर उन्हें पुराना कचहरी रोड़ पर घेर लिया और कापों तथा डंडों से ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। वह जान बचाकर भाग निकला। लेकिन उसकी रंजिश का शिकार उसका मित्र जस्सी हो गया।
रवि कम्बोज ने यह भी बताया कि हमलावरों की अगुवाई विनोद निवासी रविदास नगर तथा मोनू निवासी प्रेमनगर निवासी डबवाली कर रहे थे। विनोद से उसकी स्कूल समय की रंजिश है। विनोद बगैरा स्कूल में दादागिरी किया करते थे। लेकिन उसे रौब सहना पसंद नहीं था। उसकी दुश्मनी का सिला जस्सी को उठाना पड़ेगा, यह उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
मृतक जसवीर उर्फ जस्सी के परिवार में उसका एक बड़ा भाई सुखबीर सिंह तथा माता हरपाल कौर (40) निवासी मण्डी किलियांवाली (पंजाब) हैं। हरपाल कौर पंजाब के गांव पथराला में बतौर क्लर्क के पद पर तैनात हैं। जबकि जस्सी का भाई सुखबीर सिंह जालंधर में जेबीटी कर रहा है। हरपाल कौर (40) के अनुसार जब उसका बेटा जस्सी गर्भ में था तो उसके पति बलदेव की मृत्यु हो गई थी। बलदेव सिंह मानसा (पंजाब) के एक गुरूद्वारा में सेवादार थे। पिता का साया बच्चों के सिर से उठने के बाद उसने बड़े लाड़-प्यार से दोनों को पाला पोसा।
जबकि रवि कम्बोज पुत्र झींडा राम कम्बोज का परिवार गांव अबूबशहर में किसानी करता है। वह अपने मां-बाप का इकलौता पुत्र है।

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