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03 अगस्त 2010

एक साथ जलीं 21 चिताएं

गुडग़ांव। जिला गुडग़ांव के गांव बाघनकी में आज 21 चिताएं एक साथ जली। इनमें 20 चिताएं उन युवकों की थी जो रविवार को गौमुख से कावड़ लेकर वापिस गुडग़ांव आते समय उत्तरकाशी के निकट डबरानी में एक सड़क दुर्घटना में मारे गये थे और एक चिता गांव के पूर्व सरपंच गंगाबिशन की थी जिसका आज तड़के हृदयगति रूकने से निधन हो गया था। गांव का सारा माहौल गमगीन था और गांव बाघनकी व आसपास के गांव वासियों, मृतकों के रिश्तेदारों, परिचितों, मित्रों आदि ने हजारों की संख्या में गांव में पहुँचकर दिवंगत आत्माओं को अश्रुपूर्ण विदाई दी।
सड़क दुर्घटना में मारे गए 24 कावडिय़ों के उत्तरकाशी से शव आज गुडग़ांव पहुँचे। ये शव विशेष वाहन में लाए गए थे तथा जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर मानेसर के तहसीलदार के.एस. ढाका के नेतृत्व में एक दल इस विशेष वाहन के साथ था। शवों को लेकर ये विशेष वाहन आज प्रात: लगभग 10.00 बजे जिला के गांव बाघनकी में पहुँचा। गांव में पहुँचने से पहले पंचगांव चौक से ही जिला प्रशासन ने बाघनकी से बाहर के शवों को एम्बूलैंसों में डाल कर उनके गांवों में भेजने की व्यवस्था कर रखी थी। इस दुर्घटना में अकेले गांव बाघनकी के 20 युवक मारे गए जबकि एक युवक जिला ऐटा उत्तर प्रदेश, एक भौड़ाकलां, एक सोहना तथा एक गुडग़ांव से था। दुर्घटना के समय ये सभी युवक ट्रक नं0 एच.आर.-55ई-2303 में सवार थे जो रास्ते में पलट कर गहरी खाई में गिर गया था।
मृतकों को श्रद्घांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग आज गांव बाघनकी पहुँचे थे जिसके कारण गांव से लगभग तीन किलोमीटर तक वाहनों की कतारे लगने के कारण जाम लगा हुआ था और लोगों को पैदल ही गांव तक जाना पड़ा। शवों को पहले गांव के राजकीय वरिष्ठï माध्यमिक विद्यालय में उतारा गया था जहां पर परिजनों को अपने लाडलों के अन्तिम दर्शन करवाये गये। गांव के लोगों ने ही ऐसी व्यवस्था कर रखी थी कि महिलाओं को स्कूल परिसर में लाया जा रहा था जहां पर ही वे रोती-बिलखती मृतक युवकों को अन्तिम विदाई दे रही थी। इनमें कोई माँ अपने लाडले को याद करके विलाप कर रही थी तो कोई पत्नी अपने सुहाग के अन्तिम दर्शन करके फूट-फूट कर रो रही थी। कही कोई बहन अपने सदा के लिए बिछुड़े भाई को बिलख-बिलख कर पुकार रही थी। गांव के स्कूल में महिलाओं की चीखों व रोने की आवाजों से सारा माहौल गमगीन था जिसे देख कर विभिन्न स्थानों से मृतकों को अन्तिम विदाई देने आये लोगों की आंखों में भी आंसू भर आये। इन रोती-बिलखती महिलाओं को ग्रामीण जबरदस्ती उनके घरों को ले जा रहे थे।
गांव के सारे मृतक युवकों के शव एक साथ गांव के राजकीय वरिष्ठï माध्यमिक विद्यालय में रखे गए थे। गमगीन ग्रामीणों को ढांढस बंधाने के लिए हजारों की संख्या में लोग वहां पहुँचे जिनमें आसपास के गांवों के निवासी, मृतकों के रिश्तेदार, विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता, जिला प्रशासन के अधिकारीगण शामिल थे। राज्य सरकार की तरफ से हरियाणा के वित्त, वन एवं पर्यावरण मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव, मुख्य संसदीय सचिव एवं सोहना के विधायक धर्मबीर, मुख्य संसदीय सचिव राव दानसिंह ने मृतकों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की। मुख्य संसदीय सचिव धर्मबीर ने इस मौके पर कहा कि इतना बड़ा हादसा पहले कभी नहीं हुआ और इस घटना से समूचा हरियाणा प्रदेश शोकाकुल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व जिला प्रशासन इस दु:ख की घड़ी में मृतक युवकों के परिजनों के साथ है और उनकी हर संभव मदद की जायेगी। इसी प्रकार मुख्य संसदीय सचिव राव दान सिंह ने भी इस घटना को दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
मृतक युवकों को अन्तिम विदाई देने गुडग़ांव कांग्रेस शहरी के जिलाध्यक्ष जी.एल. शर्मा, पटौदी के विधायक गंगाराम, कांग्रेस के संगठन सचिव धर्मबीर डागर, युवा कांग्रेस के नेता नरेश सहरावत, रोहतास बेदी, हरियाणा विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष गोपीचन्द गहलोत, सोहना के पूर्व विधायक सुखबीर जौनापुरिया, भाजपा नेता रामबिलास शर्मा व उमेश अग्रवाल, उपायुक्त राजेन्द्र कटारिया, संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल, पुलिस उपायुक्त दक्षिणी पालाराम, गुडग़ांव उत्तरी के एसडीएम सतेन्द्र दुहन, गुडग़ांव नगर निगम के संयुक्त आयुक्त नरेन्द्र सिंह यादव, गुडग़ांव सदर के सहायक पुलिस आयुक्त कृष्ण मुरारी, मानेसर के तहसीलदार के.एस. ढाका सहित हजारों लोग उमड़ पड़े। स्कूल के परिसर में तथा दूर-दूर तक बाहर भी लोगों की भारी भीड़ थी।
स्कूल परिसर से इन शवों को गांव के शमशान घाट में ले जाया गया जहां पर सभी की चिताएं एक साथ जलाई गई और हजारों नम आंखों ने इन मृतक युवकों को अन्तिम विदाई दी। एक ही गांव के इतने ज्यादा 17 से 25 वर्ष की आयु के बीच के युवकों की अर्थियाँ एक साथ उठने से उनके किसी परिजन का हाल बेहाल हो सकता है इसलिए जिला प्रशासन ने गांव में कई एम्बूलैंस तथा डाक्टरों को तैनात कर रखा था। युवकों के शवों को देख कर अपनी सुधबुद खो बैठे व्यक्तियों तथा महिलाओं को चिकित्सकों ने तत्काल प्राथमिक चिकित्सा दी। इसी प्रकार अंत्येष्ठिï के समय शमशान घाट में भी वह मंजर देख कर दो व्यक्ति बेहोश हो गए, उन्हें भी चिकित्सकों ने दवा दी।

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