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02 जुलाई 2010

20 मानव रहित स्टेशनों पर कर्मचारी नियुक्त होंगे-मीणा

डबवाली (लहू की लौ) मानव रहित रेलवे फाटकों पर बढ़ रहे हादसों से रेलवे मंत्रालय के माथे पर चिंता की रेखाएं खिंच गई है। मंत्रालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए लोगों को जागरूक करने की ठानी है। इसी संदर्भ में सबडीविजन हनुमानगढ़ के एडीईएम ने सबडिविजन के अन्तर्गत पडऩे वाले मानव रहित रेलवे फाटकों का दौरा किया। पेट्रोल पम्पस, ढाबों तथा चौपालों पर जाकर वाहन चालकों को जागरूक किया।
प्राप्त जानकारी अनुसार पिछले कुछ समय से देश में बने मानव रहित रेलवे फाटकों पर काफी हादसे हुए हैं। इन हादसों में न जाने कितने लोग मौत का शिकार हुए हैं। लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए रेलवे मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पग उठाया है। वाहन चालकों को जागरूक किया जा रहा है। व्यक्तिगत तौर पर जानकारी देकर वाहन चालकों को रेल यातायात सम्बन्धी सचेत करवाया जा रहा है। यहीं नहीं लोगों को रेल अधिनियम तथा मोटर वाहन कानून से भी अवगत करवाया जा रहा है।
इसी सिलसिले में संरक्षा संगठन उत्तर-पश्चिम रेलवे बीकानेर मण्डल के आह्वान पर हनुमानगढ़ सबडीििवजन के एडीईएम ए.के.मीणा, एसके मदान एसएसई बठिण्डा, रमेश यादव एएसआई आरपीएफ डबवाली के प्लेटफार्म पर पहुंचे। इस संवाददाता से बातचीत करते हुए एडीईएम एके मीणा ने रेल मंत्रालय के उपरोक्त पग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ रेलवे उपमण्डल के अन्तर्गत 35 मानव रहित रेलवे फाटक आते हैं। वर्ष 2010-11 में इनमें से 20 रेलवे फाटकों पर कर्मचारी नियुक्त करने की योजना है। जबकि इससे पूर्व 2009-10 में 6 मानव रहित रेलवे फाटकों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि मोटर वाहन कानून 1988 के तहत मानव रहित रेलवे फाटक पर लापरवाही बरतना कानूनी अपराध है। इसके साथ ही रेलवे लाईन को क्रॉस करना भी एक अपराध है। इसके बाद रेलवे उपमण्डल हनुमानगढ़ के एडीईएम ए.के.मीणा ने वाहन चालकों को डूमवाली स्थित पेट्रोल पम्पस, जस्सी बागवाली स्थित एक ढाबे पर वाहनों को रोककर मानव रहित रेलवे फाटक को पार करने से पहले रूकने, दाएं-बाएं रेलवे लाइन पर आने वाली संभावित रेल गाड़ी को देखने के दोरान गाड़ी न आने की सूरत में ही फाटक को क्रॉस करने के लिए कहा। उन्होंने वाहन चालकों को बताया कि रेलगाड़ी प्रति सैकेण्ड 30 मीटर की गति से बढ़ती है, इसलिए फाटक को पार करने की भूल कदापि न करें। ऐसा करना मोटर वाहन कानून 1988 की धारा 131 के अधीन अपराध हैं।

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