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22 सितंबर 2009

स्वाइन फ्लू की देशी दवा को नहीं मिल रही मंजूरी

नई दिल्ली, 22 सितंबर। वनस्पतियों से दवाइयां बनाने वली भारत की एक कम्पनी ने स्वाइन फ्लू की वनस्पतीय औषधि बनाने का दावा किया है, जिसे उसने इस संक्रामक बीमारी की परम्परागत दवाई टेमीफ्लू से अधिक कारगर बताया है। उसका कहना है कि इसका व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन करने पर यह यह 20 से 30 फीसदी सस्ती पडेगी। पुणे स्थित इंडस बायोटेक के कार्यकारी निदेशक राजन आर. श्रीनिवासन ने बताया कि भारतीय बाजार में इस उपलब्ध कराने के संबंध में भारतीय औषदि नियंत्रक के पास प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले इस दवा को एचआीवी वायरस के लिए तैयार किया गया था, मगर परीक्षणों से इ दवाई को स्वाइन फ्लू के लिए भी कारगर पाया गया है। इस औषधि के प्रयोगशाला परीक्षण हो चुके हैं और अमरीका के फैडरल ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) से इसे इन्वेस्टीगेशनल न्यू ड्रग्स (आईएनडी) के रूप में अनुमति मिल चुकी है। आईएनडी किसी नई दवा को मंजूरी दिलाने की दिशा में पहला कदम है। इसके बाद मानव पर इसके परीक्षण किए जाते हैं। श्रीनिवासन ने बताया कि कम्पनी पहले ही एचआईवी के मामले में एफडीए से अनुमति प्राप्त कर चुकी है, पूर्व नैदानिक परीक्षण एक समान ही रहेंगे, चाहे वह एचआईवी के लिए हो या एच1एन1 के लिए।
श्रीनिवासन ने बताया कि बायोटेक ने भारतीय औषधि नियंत्रक के पाास भारत में इस दवा के मानव पर परीक्षण के लिए अनुमति की अर्जी दाखिल की है। हालांकि भारतीय औषदि नियंत्रक बॉटेनिकल श्रेणी की दवाओं का समर्थन करता है पर फिर भी इस दवा को एनसीई के वर्ग में रखवा होगा जबकि एनसीई तथा बॉटेनिकल दवाओं की प्रकृति भिन्न है।

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