03 जुलाई 2011

डबवाली का बीडीपीओ घोटालेबाज!


दो जांच अधिकारियों की रिपोर्ट में हुआ रहस्योद्घटन, साढ़े तीन लाख में से एक लाख का घपला
डबवाली (लहू की लौ) देश की राजधानी दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला का भूत डबवाली पहुंच गया है। उपमण्डल के गांव मसीतां में प्रस्तावित खेल स्टेडियम के निर्माण से पहले खरीदे गए सामान में बड़ा घपला सामने आया है। दो अधिकारियों की जांच के दौरान पाया गया कि सामान को बाजार भाव से ऊंची दरों में खरीदा गया। वहीं सामान के वजन तथा मोटाई में भी अंतर निकला है। साढ़े तीन लाख के सामान में करीब एक लाख घपला उजागर हुआ है। तीन माह के भीतर आई दो जांच रिपोर्ट में खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी डबवाली को राजकोष का 'घोटालेबाजÓ तय किया गया है।
नींव रखी नहीं, सामान पहुंचा
गांव मसीतां में निर्माणाधीन खेल स्टेडियम के हाल कमरे का निर्माण होना है। जिसका नींव पत्थर अभी तक नहीं रखा गया है। लेकिन हाल कमरे के लिए खिड़की, दरवाजे, रोशनदान, ग्रिल बगैरा का निर्माण पहले ही हो लिया। यह सारा सामान प्रस्तावित खेल स्टेडियम स्थल पर पहुंच गया। सामान का निर्माण बीडीपीओ डबवाली द्वारा करवाया गया था। बीडीपीओ ने सामान के बदले 3 लाख 74 हजार 333 रूपए का भुगतान किया। लेकिन ग्राम पंचायत ने सामान के निर्माण में गोलमाल की आशंका जाहिर की। गांव के सरपंच शिवराज सिंह ने तत्कालीन उपायुक्त सिरसा को एक शिकायत देकर आरोप लगाया कि सरपंच पद के लिए चुनाव जून 2010 में हुए थे। 25 जुलाई को उसने सरपंच पद की शपथ ग्रहण करनी थी। लेकिन इससे पूर्व ही बीडीपीओ ने बैंक से 3 लाख 74 हजार 333 रूपए निकलवा लिए और इन पैसों को उपरोक्त सामान पर खर्च किया हुआ दिखा दिया।
जांच से कर दिया था इंकार
सरपंच की शिकायत पर उपायुक्त ने डीडीपीओ को जांच के आदेश दिए। लेकिन डीडीपीओ ने इस मामले की जांच करने से इंकार कर दिया। जांच एसडीएम डॉ. मुनीश नागपाल के पास आ गई। एसडीएम ने मामले की जांच एसडीई पंचायती राज शेषकरण बिश्नोई को सौंप दी। एसडीई ने 1 अप्रैल 2011 को अपनी जांच रिपोर्ट एसडीएम डबवाली को सौंप दी।
जांच रिपोर्ट
पंचायती राज के एसडीई शेषकरण बिश्नोई ने एसडीएम डॉ. मुनीश नागपाल को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी राम सिंह ने खरीदे गए सामान का जो बिल प्रस्तुत किया है उसमें दरवाजों की मोटाई 14 गेज, माप 2018 फुट दर्शाई गई है। जबकि वास्तविक मोटाई 16 से 18 गेज है तथा माप 1971.31 फुट है। इनमें लगे पल्लों की लम्बाई बिल में 18 गेज तथा क्षेत्रफल 1123.19 वर्गफुट दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक मोटाई 19 गेज है तथा कुल क्षेत्रफल 1057.35 वर्गफुट है। इसी प्रकार ग्रिल का वजन बिल में 1238 किलोग्राम दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक वजन 787 किलोग्राम है। कब्जों की संख्या 496 की बजाए मौके पर 467 नग मिले हैं। खरीद किए गए इस सामान का बाजार मूल्य 55 रूपए, 90 रूपए तथा 55 रूपए का है, जबकि खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी ने इसकी अदायगी 72 रूपए, 105 रूपए तथा 60 रूपए के हिसाब से की गई है। जांच में सामने आया है कि खरीदे गए सामान पर 99703 रूपए  अधिक खर्च किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक दरों पर की गई खरीद से खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी, डबवाली ने राजकोष को जानबूझकर नुक्सान पहुंचाया है।
दूसरी रिपोर्ट भी खिलाफ
पंचायती राज के एसडीई की जांच रिपोर्ट को गलत बताते हुए खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी डबवाली ने उपायुक्त सिरसा से दोबारा जांच की मांग की। बीडीपीओ की मांग पर उपायुक्त ने पीडब्ल्यूडी सिरसा के एक्सीयन एमएस सांगवान को जांच का दायित्व सौंपा। उनकी जांच में भी बीडीपीओ को राजकोष के नुक्सान को दोषी करार दिया गया है। दोनों ही रिपोर्ट उपायुक्त के पास भेजी गई हैं।

जांच के संबंध में ये बोले अधिकारी
खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी डबवाली (बीडीपीओ) द्वारा जिस दर पर सामान खरीदा गया है, वह बाजार मूल्य से काफी अधिक है। वहीं सामान के वजन तथा गिनती में भी अंतर पाया गया है। बीडीपीओ ने राजकोष का दुरूपयोग किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसडीएम डॉ. मुनीश नागपाल को सौंप दी है।
-शेषकरण बिश्नोई, एसडीई पंचायती राज


उपायुक्त के आदेश पर उन्होंने गांव मसीतां में प्रस्तावित स्टेडियम के लिए खरीदे गए सामान की जांच की थी। सामान का वजन, मूल्य तथा बिलों में दर्शाई गई गिनती में काफी अंतर पाया गया है। बीडीपीओ ने राजकोष को करीब करीब एक लाख रूपए की चपत लगाई है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है।
-एमएस सांगवान, एक्सीयन पीडब्ल्यूडी सिरसा

जांच के लिए डीडीपीओ के इंकार करने पर उपायुक्त के आदेश पर उन्होंने एसडीई पंचायती राज शेषकरण बिश्नोई को जांच का कार्यभार सौंपा था। उनकी जांच में बीडीपीओ सरकारी पैसे के दुरूपयोग का दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट को उपायुक्त सिरसा के पास भेज दिया गया है।
-डॉ. मुनीश नागपाल, एसडीएम

वह बिल्कुल पाक साफ है। उसने कोई घोटाला नहीं किया। जांच में आया है कि उसके द्वारा खरीदे गए सामान की मोटाई अधिक है, जबकि उसने कम मोटाई के सामान पैसे दिए हैं। वह हर जांच रिपोर्ट का स्वागत करता है और उसका सामना करने के लिए तैयार है।
-राम सिंह, बीडीपीओ डबवाली



कार्रवाई में आनाकानी क्यों?
दो जांच अधिकारियों द्वारा सामान खरीद घोटाले का पर्दाफाश करने के बावजूद भी प्रशासन ढिलमुल रवैया अपनाए हुए है। बीडीपीओ राम सिंह के खिलाफ जांच रिपोर्ट आने के दो माह बीतने के बावजूद भी कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया है। जिला प्रशासन बीडीपीओ के खिलाफ केस दर्ज करवाकर, बीडीपीओ को कानूनी सजा दे। डबवाली में रहते हुए बीडीपीओ द्वारा किए गए सभी कार्यों की विभागीय कार्रवाई भी आरंभ करे। अगर ऐसा नहीं होता तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
-शिवराज सिंह सरपंच ग्राम पंचायत मसीतां एवं अध्यक्ष सरपंच एसोसिएशन ब्लाक डबवाली

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