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19 जून 2011

नशे के खिलाफ महिलाएं एकजुट, शराब ठेका न खुलने देने पर अडिग

 डबवाली (लहू की लौ) पति को शराब से दूर रखने के लिए गांव सावंतखेड़ा में महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को महिलाओं ने एक धार्मिक स्थल में बैठक की। बैठक के बाद महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर गांव में ठेका नहीं खुलने देंगी।
आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा गांव की पंचायत के विरोध के बावजूद भी गांव में शराब का प्रस्तावित ठेका खोले जाने से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। इस संदर्भ में गांव की महिलाएं तीन दिन पूर्व शराब ठेकेदार के करिंदों के साथ भिड़ चुकी हैं। महिलाओं ने उस समय एक मोबाइल शराब ठेका पर हमला करके शराब की बोतलें तोड़ दी थी। आरोप है कि इस कार्रवाई के बावजूद भी आबकारी एवं कराधान विभाग के सहयोग से ठेकेदार गांव में ठेका खोलने के लिए अड़ा हुआ है। गांव के प्रभावशाली लोगों को नियंत्रण में करके शराब ठेकेदार ठेका खोलने के प्रयास में जुटे होने की सूचना पाकर शनिवार को गांव के बाबा रामदेव मंदिर में सैंकड़ों महिलाएं जमा हो गई। इस संदर्भ में बैठक से पूर्व मंदिर से महिलाओं को एकत्रित होने की सूचना भी दी गई। बैठक में आबाकारी एवं कराधान विभाग पर ठेकेदार की मदद करने का आरोप लगाया गया। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार गांव में कभी कहीं और कभी कहीं मोबाइल शराब ठेका खोलकर शराब के ठेके का विरोध करने वाली महिलाओं को उत्तेजित कर रहा है। गांव के प्रभावशाली व्यक्तियों पर दबाव भी बना रहा है कि उसे गांव में ठेका खोलने की अनुमति किसी प्रकार मिल जाए। महिलाओं ने हैरानी प्रकट की कि जब गांव की पंचायत ने प्रस्ताव पारित करके शराब का ठेका न खोले जाने की मांग की है, तो इसके बावजूद भी प्रशासन उनके गांव में शराब का ठेका क्यों खोलना चाहता है? बैठक में भारी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने मौखिक तौर पर गांव में ठेका न खुलने देने का प्रस्ताव पारित किया। प्रशासन के एकतरफा रवैये को देखते हुए महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
गांव सावंतखेड़ा निवासी पार्वती देवी, राज रानी, सुलोचना देवी, माया देवी, अमरजीत कौर, सरोज रानी, छिन्द्रपाल कौर, गोमती देवी, मोहनी देवी, बिमला देवी, कैलाश रानी, शकुंतला देवी, सीता देवी, शांति देवी, कमला देवी, कमलेश्वरी, कुलवंत कौर, वीरपाल कौर ने कहा कि अधिकांश अपराधों के पीछे नशा ही है। अगर गांव में शराब का ठेका खुलता है तो गांव के मर्द शराब पीकर एक-दूसरे से झगड़ा तो करेंगे ही और दूसरा बहू-बेटियों से भी झगड़ेंगे। जिसके परिणाम गंभीर होंगे। गांव का पैसा बिना किसी वजह के अदालतों में पैरवियों पर खर्च होगा। उन्होंने कहा कि अपराध की जड़ को अगर पहले ही समाप्त कर दिया जाए, तो इससे गांव का पैसा बचेगा और गांव में रहने वाले परिवार भी शांति से रहकर खुशहाल होंगे। गांव के सरपंच रणजीत सिंह सावंतखेड़ा ने कहा कि पंचायत ने पंचायत ने गांव में शराब का ठेका होने से पूर्व भी गांव में ठेका न खोले जाने के संबंध में प्रस्ताव पारित करके उपायुक्त को भेजा था। गांव के लोग अगर शराब का ठेका नहीं चाहेंगे तो पंचायत भी किसी भी कीमत पर गांव में ठेका नहीं खोलने देगी। महिलाओं ने कहा कि अगर उनकी मांग को प्रशासन ने नजरअंदाज किया तो वे नेशनल हाईवे जाम करने को बाध्य होंगी।
उपमण्डलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल ने कहा कि डीईटीसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांव के माहौल को देखे और संबंधित शराब ठेकेदार को वहां शराब बेचने से रोके। लोगों को शराब के ठेके से किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

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