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29 सितंबर 2009

बाबा रामदेव ने योग को बना दिया है परचून की दुकान-कर्मवीर

डबवाली (लहू की लौ) पतंजलि योग फाउंडेशन, लोनावाल महाराष्ट्र तथा महर्षि पंतजलि अंतर्राष्ट्रीय योग विद्यापीठ के संस्थापक, योग प्रचार में बाबा रामदेव के सबसे पुराने साथी स्वामी कर्मवीर ने कहा कि परचून की दुकान चलाना संयासियों का काम नहीं है। योग को योग के हिसाब से ही चलाया जाना चाहिए अन्यथा लोगों का योग और सन्यासियों से विश्वास उठ जाएगा। वे सोमवार को हिसार से फाजिल्कां जाते समय कुछ समय के लिए पत्रकारों से डबवाली में बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रामदेव योग के मिशन को लेकर चले थे और यह मिशन बहुत अच्छा था। जिससे लोगों को लाभ भी हुआ। लेकिन अब बाबा रामदेव अपने उद्देश्य से भटक गये हैं। उन्होंने तो बिस्कुट और आटा तक बेचना शुरू करके योग को परचून की दुकान बना दी है और इस व्यापार में सरकारी नियमों की भी धज्जियां उडाई जा रही हैं, जोकि राष्ट्र के हित में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य से भटकते हुए बाबा रामदेव ने पैप्सी और कोका कोला के खिलाफ भी बोलना बन्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक साधु-सन्यासी को सुरक्षा के लिए इतने कमांडों की जरूरत नहीं होती और उन्होंने सलाह दी कि बाबा रामदेव को स्वामी दयानन्द की तरह निर्भय होकर घूमना चाहिए और सत्य भाषण निर्भय होकर करते रहना चाहिए। बल्कि बाबा रामदेव को प्रयोग करो और फेंक दो की नीति नहीं करनी चाहिए और झूठे भाषण से बचना चाहिए। उन्होंने बीमारियों का कारण बढ़ते हुए प्रदूषण को बताया और कहा कि सरकार और लोगों को मिलकर प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। जो उद्योग प्रदूषण फैलाते हैं, उन पर नियंत्रण स्थापित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि योग केवल रोग ही नहीं भगाता बल्कि जीवन में संयम पैदा करके जनसंख्या नियंत्रण में कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय योग और संस्कृति अपनाने से नैतिकता जीवन में आती है और इसका अनुसरण करने से भ्रष्टाचार से स्वयं ही मुक्ति मिल सकती है।

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