युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

21 दिसंबर 2010

'ऐट पीएमÓ पर भावुक हुए केवी

डबवाली (लहू की लौ) बढ़ते कदम रैली में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के लिए कांग्रेसी नेता जनता के सामने तेवर बदलकर आ रहे हैं। कोई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नेता के नाम पर फूट डालने की बात करता है, तो कोई बेचारा अपना दर्द जनता के समक्ष रखकर लोगों के जज्बात कांग्रेस के साथ जोडऩे का प्रयास करता है। शनिवार को डबवाली में जनता को रिझाने के लिए कांग्रेसी नेता मक्खियों की तरह भिनभिनाते रहे। तरह-तरह के प्रलोभन और आश्वासन देते रहे। लोगों का विश्वास जीतने के लिए कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस की ही आलोचना करनी शुरू कर दी। गोबिंद कांडा ने वर्करों की सहानुभूति के लिए नेताओं को रौंदा, तो शाम की ऐट पीएम पर डॉ. केवी सिंह ने अपने दर्द लोगों को सुनाए, सुनाते-सुनाते इतने भावुक हो गए कि उन्होंने अपने आकाओं पर यह आरोप जड़ दिया कि वह यहां भी कहीं विकास करवाते हैं, तो उन्हें पुरस्कार के रूप में हल्का से बनवास दे दिया जाता है। लेकिन इस बार वह किसी भी कीमत पर बनवाास पर नहीं जाएंगे। भले ही उन्हें हल्का बदलने के लिए कहा जा रहा है। वे डबवाली में ही अपने भाग्य को अजमाएंगे। डबवाली उनका अपना घर है।
शनिवार को ऐट पीएम का समय था। वार्ड नं. 14 के पार्षद विनोद बांसल के निवास स्थान पर डॉ. केवी सिंह की सभा चल रही थी। लोगों को 25 दिसंबर की बढ़ते कदम रैली में शामिल होने का न्यौता दिया जा रहा था। न्यौता देते-देते केवी सिंह एकदम भावुक हो उठे और बोल पड़े कि ओएसडी रहते समय करीब साढ़े तीन साल तक उन्होंने रानियां हल्के में विकास की गंगा बहाई।  करीब 16 स्कूल अपग्रेड करवाए। यहीं नहीं गलियां व सड़कें पक्की करवाई। चूंकि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने उन्हें वहां से टिकट देने का आश्वासन दिया था। जब हुड्डा को सीआईडी रिपोर्ट मिली कि डबवाली और ऐलनाबाद से चौटाला परिवार का सदस्य चुनाव मैदान में उतर रहा है, तो उन्हें वहां से डबवाली भेज दिया गया। डबवाली में उन्होंने 10 माह के भीतर कांग्रेस को डबवाली नगरपालिका की सत्ता, फिर लोकसभा चुनाव में विजय दिलाई। यहीं नहीं बल्कि कई करोड़ रूपए खर्च करके क्षेत्र की गलियां, सड़कें बनवाई। लेकिन अब उस पर हल्का बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इस बार उसने ठान ली है, कि वह अपना हल्का नहीं बदलेंगे। डबवाली में रहेंगे, डबवाली के लोगों के काम करवाएंगे, डबवाली के लोगों के लिए लड़ेंगे और स्वयं भी डबवाली में ही अपना भाग्य अजमाएंगे।
उन्होंने लोगों को भी उलाहना दिया कि कांग्रेस ने तो उन्हें डबवाली से टिकट दी लेकिन अगर लोग मेरा साथ देते और मुझे जीता देते, आज डबवाली का नक्शा ओर होता। जीते हुए व्यक्ति को सरकार में जितना सम्मान मिलता है, हारे हुए को उतना सम्मान नहीं मिलता। यही वजह है कि आज उनके काम करवाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता है। अन्यथा चुटकी में उनके काम हो जाते।

कोई टिप्पणी नहीं: