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04 जून 2010

अविश्वास मत पर टिका कांग्रेस का भविष्य

डबवाली (लहू की लौ) नगरपालिका अध्यक्षा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर डबवाली के लोगों की निगाह अब 16 जून पर लगी हुई हैं। इसी प्रस्ताव पर डबवाली क्षेत्र में कांग्रेस और डॉ. केवी सिंह का राजनीतिक भविष्य भी जुड़ा हुआ है। चूंकि डॉ. केवी सिंह के आशीर्वाद से ही पालिका अध्यक्षा के पद पर सिम्पा जैन सुशोभित हो पाई थीं।
नगरपालिका के चुनावक्रम पर दृष्टि डालें तो पालिका के चुनाव पहली पालिका के समय सीमा समाप्त होने से पूर्व ही 30-12-2008 को सम्पन्न हुए थे। जिसके चलते 3-3-2009 को विजेता पार्षदों की नोटिफिकेशन सरकार द्वारा की गई। हालांकि इन चुनावों में 19 वार्डों में से 10 पर कांग्रेस को, 7 पर इनेलो तथा 2 पर इनेलो की सहयोगी भाजपा को सफलता हासिल हुई थी।
पार्षदों की प्रथम बैठक और शपथ ग्रहण समारोह 20 मार्च 2009 को तत्कालीन उपमण्डलाधीश धर्मपाल सिंह ने सम्पन्न करवाया था। लेकिन प्रधान और उपप्रधान पद को लेकर कांग्रेस में कशमकश चलती रही। कांग्रेस के 10 में से चार पार्षद प्रधान पद की दौड़ में थे। जिसमें विनोद बांसल, रमेश बागड़ी, सिम्पा जैन तथा हरनेक सिंह शामिल थे। कई दिन तक इनमें उठा-पटक चलती रही। उस समय इनेलो ने यह शिगूफा भी छोड़ा कि सरकार तो नगरपालिका पर इनेलो की ही आएगी और कांग्रेसी आपस में लड़ते रह जाएंगे। इनेलो के इस शिगूफा से कांग्रेसी पार्षदों को एक होने का मौका मिला और 31 मार्च को सिम्पा जैन के नाम पर जैसे तैसे सहमति हो गई। लेकिन इस सहमति से पूर्व कांग्रेस में फिर दरार पैदा हुई और पार्षद हरनेक सिंह नगरपालिका के बाहर से ही गायब हो गया। उस दिन कांग्रेसी पार्षदों के हाजिर न होने से बैठक कैंसल कर दी गई। इस मौके पर उपस्थित हुए इनेलो पार्षदों ने खूब शोर-शराबा किया। लेकिन उनकी एक न चली।
फिर अगले दिन 1 अप्रैल को कांग्रेसी पार्षद नगरपालिका में उपमण्डलाधीश धर्मपाल सिंह के निमंत्रण पर आयोजित पार्षदों की बैठक में उपस्थित हुए। इस मौके पर सभी 19 पार्षद उपस्थित थे। लेकिन बहुमत कांग्रेस के पक्ष में होने के कारण प्रधान पद पर सिम्पा जैन और उपप्रधान पद पर हरनेक सिंह को चुन लिया गया। हरनेक सिंह ने तत्काल अपना कार्य शुरू कर दिया। लेकिन 4 मई 2009 को प्रधान पद की नोटिफिकेशन के बाद प्रधान ने 5-5-2009 को अपना कार्यभार संभाला।
प्रधान पद को लेकर इसके बावजूद भी कांग्रेसी पार्षदों में नोंकझोंक अक्सर चलती रही। पार्षद जगदीप सूर्या, विनोद बांसल, रमेश बागड़ी ने बताया कि सिम्पा जैन वायदे पर कायम नहीं रही। जिसके चलते उन्हें विद्रोही तेवर अपनाने पड़े। उनके अनुसार प्रधान पद पर सिम्पा जैन की नियुक्ति करते समय पार्षदों में यह तय हुआ था कि छह माह के बाद वह प्रधान पद छोड़ देगी। इन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिम्पा जैन पार्षदों को ब्लैकमेल करके प्रधान बनी थी। चूंकि उसने धमकी दी थी कि अगर उसे प्रधान नहीं बनाया जाता तो वह विपक्षी खेमे में शामिल हो सकती है।
विद्रोही कांग्रेसी पार्षदों ने इनेलो पार्षदों के साथ हाथ मिलाते हुए अपनी गुप्त बैठकें नगर के एक होटल में करनी शुरू कर दी। जिसमें विपक्ष के पार्षद गुरजीत सिंह शामिल थे। 14 मई 2010 को विद्रोही पार्षद अपने कार्य को अंजाम देने के लिए डबवाली से इनेलो के विधायक अजय सिंह चौटाला से सिरसा में उनके निवास स्थान पर मिले और बताया कि वे पालिका अध्यक्षा से खफा है और किसी भी कीमत पर इसे बदलने के इच्छुक हैं। बताया तो यह जाता है कि अजय सिंह चौटाला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अब भी विचार कर लें, अन्यथा आगे कदम बढ़ाने के बाद पीछे न हटें। इस मौके पर कांग्रेसी पार्षदों ने एक शर्त रखी कि यदि पालिका अध्यक्षा इनेलो में शामिल होने की इच्छा करे तो उसे किसी भी कीमत पर इनेलो में शामिल न किया जाए और न ही उसे समर्थन देकर इनेलो प्रधान बनाए। इस पर अजय सिंह चौटाला ने सहमति व्यक्त की और इनेलो व विद्रोही कांग्रेसी पार्षदों में समझौता हो गया। इसी योजना के तहत 17 मई को विद्रोही कांग्रेसी पार्षद अजय सिंह चौटाला के नेतृत्व में इनेलो पार्षदों के साथ उपायुक्त सिरसा के समक्ष प्रस्तुत हुए और  उन्हें पालिका अध्यक्षा और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए अपने शपथ पत्र सौंपे। अविश्वास प्रस्ताव के लिए पार्षदों की विशेष बैठक 16 जून को बुलाए जाने को लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीति पर्यवेक्षकों का मानना है कि नगरपालिका के अध्यक्षा पद पर सिम्पा जैन को बिठाने के लिए कांग्रेस नेता डॉ. केवी सिंह की अहम भूमिका थी और डॉ. केवी सिंह ने इसके लिए नगरपालिका चुनाव के समय गठित की गई पांच सदस्यीय कमेटी को भी नजरअंदाज कर दिया था। इस कमेटी में मलकीत सिंह गंगा, नवरतन बांसल, रवि चौटाला, संदीप चौधरी, दीपक कौशल एडवोकेट शामिल थे। कमेटी को नजरअंदाज करने के बाद कमेटी के सदस्यों और डॉ. केवी सिंह के बीच तभी से 36 का आंकड़ा चला आ रहा है। लेकिन विद्रोही कांग्रेसी भी केवी सिंह के ही समर्थक माने जाते रहे हैं। आखिर केवी सिंह के आशीर्वाद से बनाई गई पालिका अध्यक्षा के खिलाफ केवी सिंह के समर्थकों के ही विद्रोह में आ जाने से यह माना जाने लगा है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव 16 जून को पारित हो जाता है, तो डॉ. केवी सिंह का डबवाली से जुड़ा राजनीतिक भविष्य भी काफी हद तक प्रभावित होगा। हालांकि पालिका अध्यक्षा के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगेगा ही।

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