- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आठ लाख के सहयोग से शुरू किया झींगा पालन
- 8.5 टन वार्षिक उत्पादन के साथ 14 लोगों को मिला रोजगारसिरसा, 02 अक्टूबर।
जिले के गांव कर्मसाना की महिला किसान कैलाश ने पारंपरिक कृषि फसलों से हटकर झींगा पालन को अपनाकर अपनी आय का नया और वैकल्पिक साधन विकसित किया है। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन एवं सहयोग से उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत की। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण ने उनके इस प्रयास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैलाश ने झींगा पालन इकाई स्थापित करने के लिए करीब 14 लाख रुपये की परियोजना तैयार की। इस परियोजना के लिए उन्हें मत्स्य विभाग की ओर से 8 लाख 36 हजार 48 रुपये का अनुदान मिला। इस आर्थिक सहायता से तालाब निर्माण सहित झींगा पालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने में मदद मिली।
तकनीक और उचित प्रबंधन की जानकारी जरूरी
कैलाश का मानना है कि झींगा पालन में केवल पूंजी लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तकनीक और उचित प्रबंधन की जानकारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने मत्स्य विभाग एवं एक्वाकल्चर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, हिसार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तालाब की तैयारी, पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन, स्टॉकिंग घनत्व, रोगों की रोकथाम तथा वैज्ञानिक आहार प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को अपनी इकाई में लागू करते हुए कैलाश ने झींगा पालन का व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक तरीके से संचालन किया। तालाब की नियमित निगरानी, पानी की गुणवत्ता पर ध्यान और उचित आहार प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाने से उनकी इकाई के संचालन में मदद मिली।
स्थानीय रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
मत्स्य किसान कैलाश के प्रयासों और वैज्ञानिक प्रबंधन का परिणाम वित्त वर्ष 2025-26 में देखने को मिला। उनकी झींगा पालन इकाई से एक वर्ष में 8.5 टन झींगा का उत्पादन हुआ। झींगा पालन से उन्हें अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी सफलता मिली। इस इकाई में तालाब की देखरेख, झींगा की कटाई तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 4 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि विभिन्न सहायक एवं संबंधित गतिविधियों के माध्यम से 10 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इस प्रकार कैलाश की झींगा पालन इकाई उनके लिए आय का साधन बनने के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी आजीविका का माध्यम बनी है।
सरकारी योजनाओं का उठाएं लाभ
कैलाश की सफलता यह दर्शाती है कि उचित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के सहयोग से हरियाणा के अंतर्देशीय क्षेत्रों में भी झींगा पालन को वैकल्पिक आय के साधन के रूप में अपनाया जा सकता है। पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को जोडक़र किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि कैलाश का अनुभव सिरसा जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि नई तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान कृषि क्षेत्र में नए अवसर तलाशने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।