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युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

24 अगस्त 2026

डॉ. अंबेडकर मेडिकल एड स्कीम के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मिलेगी साढ़े तीन लाख रुपये तक की सहायता

-एससी वर्ग के जरूरतमंदों को उपचार और सर्जरी के लिए दी जाएगी वित्तीय मदद, वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से हो कम

सिरसा, 24 अगस्त।
डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही डॉ. अंबेडकर मेडिकल एड स्कीम का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार और सर्जरी के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत केवल उन्हीं परिवारों को लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से कम है। योजना के अनुसार किडनी, हृदय, लिवर, कैंसर, मस्तिष्क सहित अन्य जानलेवा बीमारियों में सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीज सहायता के पात्र होंगे। इसके अलावा अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) तथा स्पाइनल सर्जरी के मामलों को भी योजना में शामिल किया गया है। यदि किसी मरीज को पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी है तो वह अगले वित्तीय वर्ष में दूसरी बार सहायता अनुदान के लिए भी आवेदन कर सकता है। योजना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किडनी रोग से पीडि़त तथा किडनी या अन्य अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों को भी सहायता मिलेगी। ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी भी पात्र होंगे, क्योंकि किडनी प्रत्यारोपण पीएम- जन आरोग्य योजना के अंतर्गत कवर नहीं है।
इन अस्पतालों में कराया जा सकेगा उपचार
योजना के तहत देश के विभिन्न प्रमुख अस्पतालों में उपचार कराया जा सकेगा। इनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली एवं अन्य राज्यों के एम्स, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट लखनऊ, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जबलपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बी. बरुआ कैंसर इंस्टीट्यूट गुवाहाटी, बिरला हार्ट फाउंडेशन कोलकाता, टाटा कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट मुंबई, निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हैदराबाद, द वॉलंटरी हेल्थ सर्विसेज चेन्नई सहित सभी सीजीएचएस से मान्यता प्राप्त अस्पताल शामिल हैं।इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पताल, राज्य अस्पताल, राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त अस्पताल, केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पूर्ण वित्तपोषित अस्पताल तथा जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों के सरकारी अस्पताल, जहां संबंधित सर्जरी या उपचार की सुविधा उपलब्ध है, भी इस योजना के अंतर्गत शामिल किए गए हैं। विशेष परिस्थितियों में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के अध्यक्ष की संतुष्टि होने पर किसी अन्य अस्पताल को भी शामिल किया जा सकता है।
इतनी मिलेगी आर्थिक सहायता
योजना के तहत स्वीकृत अनुमानित शल्य चिकित्सा व्यय का 100 प्रतिशत भुगतान सीधे संबंधित अस्पताल को बैंक हस्तांतरण अथवा मांग पत्र के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक बीमारी के अनुसार अधिकतम सहायता राशि निर्धारित की गई है। हृदय शल्य चिकित्सा तथा रीढ़ की हड्डी की शल्य चिकित्सा के लिए अधिकतम एक लाख पचास हजार रुपये, गुर्दा शल्य चिकित्सा, डायलिसिस तथा गुर्दा या अन्य अंग प्रत्यारोपण के लिए अधिकतम तीन लाख पचास हजार रुपये, कैंसर की शल्य चिकित्सा, रसायन चिकित्सा और विकिरण चिकित्सा के लिए अधिकतम दो लाख पचास हजार रुपये, मस्तिष्क की शल्य चिकित्सा तथा अन्य जानलेवा बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
ये दस्तावेज जरूरी
मरीज को निर्धारित आवेदन पत्र अथवा साधारण कागज पर निर्धारित प्रारूप के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ स्वयं प्रमाणित जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड या आधार कार्ड तथा अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट द्वारा प्रमाणित सर्जरी की अनुमानित लागत का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। किडनी प्रत्यारोपण के मामलों में लाभार्थी और डोनर के संबंध का प्रमाण, प्राधिकृत समिति का प्रमाण पत्र तथा डोनर का नाम, आयु, पता, रक्त समूह और आधार संबंधी विवरण भी देना होगा। आवेदन पर मरीज का स्वप्रमाणित फोटो लगाना अनिवार्य होगा। सहायता राशि के शीघ्र हस्तांतरण के लिए अस्पताल के बैंक खाते का विवरण भी आवेदन के साथ देना होगा।
कम से कम 15 दिन पहले करें आवेदन प्रस्तुत
योजना के अनुसार आवेदन सर्जरी, डायलिसिस या कीमोथेरेपी की निर्धारित तिथि से कम से कम 15 दिन पहले डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, 15 जनपथ, नई दिल्ली-110001 के निदेशक को भेजना होगा। आवेदन के साथ प्रस्तुत अनुमानित लागत प्रमाण पत्र में सर्जरी की निर्धारित तिथि का उल्लेख होना अनिवार्य है। योजना के तहत स्वीकृत सहायता राशि एकमुश्त किस्त में सर्जरी से पहले सीधे अस्पताल को जारी की जाएगी। मरीज के डिस्चार्ज होने पर अस्पताल को अंतिम बिल और उपयोगिता प्रमाण पत्र डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को जमा करना होगा। यदि जारी की गई सहायता राशि का कोई भाग उपयोग नहीं होता है तो उसे अस्पताल द्वारा मरीज के डिस्चार्ज की तिथि से अधिकतम एक माह के भीतर फाउंडेशन को वापस करना होगा। इसके अलावा फाउंडेशन और अन्य स्रोतों से प्राप्त कुल सहायता सर्जरी की अनुमानित लागत से अधिक नहीं हो सकती।
जिला कल्याण अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि योजना के तहत सामान्य परिस्थितियों में उपचार या सर्जरी के बाद हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि आवेदन सर्जरी की तिथि से कम से कम 15 दिन पहले फाउंडेशन को प्राप्त हो गया था, तो योग्यता के आधार पर ऐसे मामलों पर विचार किया जा सकता है। वहीं पीएम-जय (जन आरोग्य योजना) के अंतर्गत आने वाले मरीज सामान्यत: इस योजना के पात्र नहीं होंगे, लेकिन किडनी या अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में, जहां पीएम-जय के तहत कवरेज उपलब्ध नहीं है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा सकेगा।

खारे पानी में किसान ने तलाशा ‘सुनहरा’ विकल्प, झींगा पालन से 65 लाख का कारोबार


- जहां खेती नहीं वहां झींगा पालन ने बदली किसान की तकदीर

- खारे पानी को बनाया कमाई का जरिया, गुरदीप सिंह ने खड़ा किया लाखों का कारोबार
- आधुनिक तकनीक ने गुरदीप सिंह को बनाया सफल मत्स्य पालक
सिरसा, 24 अगस्त।
खारा पानी, सीमित सिंचाई और फसलों का उम्मीद से कम उत्पादन के कारण रघुआना गांव के किसान गुरदीप सिंह के सामने खेती को लेकर चुनौतियां कम नहीं थीं। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को समस्या मानकर रुकने के बजाय उनमें संभावना तलाशने की कोशिश की। इसी तलाश ने उन्हें खेत से तालाब तक और फसल से झींगा पालन तक पहुंचाया।=आज गुरदीप सिंह की पहचान एक ऐसे प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है, जिन्होंने खारे पानी वाली जमीन में व्हाइट श्रिंप पालन को सफल व्यवसाय में बदल दिया। करीब 14 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ यह सफर वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच गया।
जानकारी जुटाई, प्रशिक्षण लिया और फिर उठाया जोखिम
गुरदीप सिंह ने बताया कि पारंपरिक खेती में खारे पानी और सिंचाई की समस्याओं के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। उन्होंने कृषि से जुड़े सेमिनारों, विशेषज्ञों और ऑनलाइन माध्यमों से झींगा पालन के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। खारी जमीन में झींगा पालन की सफल कहानियों ने उन्हें इस दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया। वर्ष 2019 में उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपये की परियोजना लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए गए। परियोजना के लिए उन्हें करीब 3.93 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। बाद में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और तालाब बनाए गए।
12 टन से शुरू हुआ सफर, वैज्ञानिक तरीके से 21 टन तक पहुंचा उत्पादन
गुरदीप ने अपने फार्म के लिए उच्च मांग और उत्पादकता को देखते हुए व्हाइट श्रिंप का चयन किया। इसके लिए उन्हें मत्स्य विभाग तथा एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार से प्रशिक्षण मिला। फार्म पर वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किया जाता है। करीब 25 से 32 झींगा प्रति वर्ग मीटर की स्टॉकिंग डेंसिटी रखी जाती है। 120 से 130 दिन की कल्चर अवधि में उत्पादन लिया जाता है। पानी की लवणता, गुणवत्ता और संभावित रोगों की नियमित निगरानी के साथ उच्च गुणवत्ता वाले फीड का इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआती वर्ष में गुरदीप सिंह ने 12 टन झींगा का उत्पादन किया और करीब 24 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इसके बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और उत्पादन बढकऱ 21 टन तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2023-24 में उनका कारोबार करीब 65 लाख रुपये, जबकि शुद्ध लाभ करीब 22 लाख रुपये रहा।
सिर्फ खुद की आय नहीं बढ़ाई, दूसरों के लिए भी रास्ता खोला
झींगा पालन का लाभ केवल गुरदीप सिंह तक सीमित नहीं रहा। इस व्यवसाय से 10 लोगों को प्रत्यक्ष और 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र के अन्य किसान भी झींगा पालन की संभावनाओं को समझने लगे हैं। गुरदीप सिंह का कहना है कि शुरुआत में बीमारी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां सामने आईं। उन्होंने जैव सुरक्षा उपायों, पानी के बेहतर प्रबंधन, प्रोबायोटिक्स के इस्तेमाल और अलग-अलग बिक्री चैनल विकसित करके इन समस्याओं का सामना किया।
जिला मत्स्य अधिकारी बोले- खारी जमीन वाले किसानों के लिए बेहतर विकल्प
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चन्द्र ने कहा कि सिरसा जैसे क्षेत्रों में जहां कुछ स्थानों पर खारे पानी के कारण पारंपरिक खेती प्रभावित होती है, वहां वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किसानों के लिए आय का बेहतर वैकल्पिक साधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि किसान झींगा पालन शुरू करने से पहले अपने पानी और जमीन की जांच करवाएं तथा मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लें। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और पात्रता के अनुसार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। गुरदीप सिंह का उदाहरण यह दिखाता है कि सरकारी सहयोग के साथ आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं।
कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और निर्यात की तैयारी
गुरदीप सिंह अब अपने कारोबार को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। उनकी योजना झींगा पालन का क्षेत्र बढ़ाने के साथ आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने की है। वे सिरसा में कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने तथा झींगा बीज, फीड और दवाइयों के वितरण की दिशा में भी आगे बढऩा चाहते हैं। इसके साथ ही वे सीधे निर्यात की संभावनाएं तलाश रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल अपना व्यवसाय बढ़ाना नहीं, बल्कि जिले के अधिक से अधिक किसानों को झींगा पालन से जोडकऱ इस क्षेत्र में एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

24 Aug. 2026