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Lahoo Ki Lau
04 मई 2026
03 मई 2026
किसान क्रेडिट कार्ड योजना : कम ब्याज व आसान प्रक्रिया से कृषि क्षेत्र को औऱ सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सिरसा, 03 मई।
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता योजना है, जिसका उद्देश्य उन्हें खेती से जुड़े कार्यों के लिए समय पर और सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से किसान बिना किसी जटिल प्रक्रिया के बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं और अपनी कृषि आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च दर पर कर्ज से बचाकर उन्हें संस्थागत बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है। इसके तहत किसान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए आसानी से धन प्राप्त कर सकते हैं।
इस योजना के तहत किसानों को ब्याज पर सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। सामान्यतः 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलता है, जिसमें समय पर भुगतान करने पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत तक की छूट मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर लगभग 4 प्रतिशत रह जाती है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक कड़ी है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि किसानों को समय पर संसाधन मिलने से उनकी उत्पादन क्षमता और आय में भी वृद्धि होती है। साथ ही, यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सस्ती ब्याज दर, आसान प्रक्रिया और बढ़ती ऋण सीमा के कारण यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार द्वारा किए जा रहे नए सुधारों से भविष्य में इस योजना का लाभ और अधिक किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है।
किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित बैंक की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होता है। आवेदन जमा करने के बाद पात्रता के आधार पर किसी भी कार्य दिवसों में बैंक द्वारा आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद कृषि भूमि के हिसाब से ऋण प्रदान किया जाता है।
आवेदन के लिए किसानों को आवेदन पत्र, पासपोर्ट आकार की फोटो, पहचान पत्र (आधार, वोटर आईडी आदि), पते का प्रमाण, भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, फसल पैटर्न की जानकारी आदि दस्तावेज जमा कराने होते हैं।
02 मई 2026
वाटर टैंक का निर्माण कर अपनाएं सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, 85 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
सिरसा, 01 मई।
जिला के किसानों के लिए ऑन-फार्म वाटर टैंक निर्माण वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और पानी के बेहतर उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खेती में पानी की बचत व सिंचाई क्षेत्र में विस्तार करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। जहां कृषि क्षेत्र में पारंपरिक सिंचाई तरीकों से पानी की खपत अधिक होती है, वहीं वॉटर टैंक निर्माण के साथ माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपना कर पानी की कम खपत के साथ अधिक मुनाफा लिया जा सकता है।
योजना के तहत सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के वाटर टैंक बनाए जा सकेंगे। चार या अधिक किसानों द्वारा बनाए गए टैंक को सामुदायिक टैंक माना जाएगा, जिस पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, व्यक्तिगत किसान को टैंक निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि सामुदायिक टैंक से जुड़े कम से कम 75 प्रतिशत क्षेत्र तथा व्यक्तिगत टैंक के मामले में 50 प्रतिशत भूमि पर माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। योजना का लाभ केवल भूमि मालिक किसानों को ही मिलेगा।
सरकार ने 2 एकड़ से 50 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए टैंक निर्माण पर सहायता निर्धारित की है, जिसमें न्यूनतम 1.05 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 8.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत टैंक के लिए 70त्न व सामुदायिक टैंक के लिए 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो अधिक क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन अपनाएंगे।
एमआई काडा के कार्यकारी अभियंता विजय पाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत सहायता राशि तीन चरणों में जारी की जाएगी पहले चरण में खुदाई के बाद 20 प्रतिशत, दूसरे चरण में निर्माण पूरा होने पर 40 प्रतिशत और अंतिम 40 प्रतिशत राशि माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने के बाद दी जाएगी। इस योजना से पानी की बचत होगी, खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
जिला के किसानों के लिए ऑन-फार्म वाटर टैंक निर्माण वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और पानी के बेहतर उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खेती में पानी की बचत व सिंचाई क्षेत्र में विस्तार करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। जहां कृषि क्षेत्र में पारंपरिक सिंचाई तरीकों से पानी की खपत अधिक होती है, वहीं वॉटर टैंक निर्माण के साथ माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपना कर पानी की कम खपत के साथ अधिक मुनाफा लिया जा सकता है।
योजना के तहत सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के वाटर टैंक बनाए जा सकेंगे। चार या अधिक किसानों द्वारा बनाए गए टैंक को सामुदायिक टैंक माना जाएगा, जिस पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, व्यक्तिगत किसान को टैंक निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि सामुदायिक टैंक से जुड़े कम से कम 75 प्रतिशत क्षेत्र तथा व्यक्तिगत टैंक के मामले में 50 प्रतिशत भूमि पर माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। योजना का लाभ केवल भूमि मालिक किसानों को ही मिलेगा।
सरकार ने 2 एकड़ से 50 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए टैंक निर्माण पर सहायता निर्धारित की है, जिसमें न्यूनतम 1.05 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 8.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत टैंक के लिए 70त्न व सामुदायिक टैंक के लिए 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो अधिक क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन अपनाएंगे।
एमआई काडा के कार्यकारी अभियंता विजय पाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत सहायता राशि तीन चरणों में जारी की जाएगी पहले चरण में खुदाई के बाद 20 प्रतिशत, दूसरे चरण में निर्माण पूरा होने पर 40 प्रतिशत और अंतिम 40 प्रतिशत राशि माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने के बाद दी जाएगी। इस योजना से पानी की बचत होगी, खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
01 मई 2026
30 अप्रैल 2026
29 अप्रैल 2026
28 अप्रैल 2026
27 अप्रैल 2026
26 अप्रैल 2026
वीटा से जुड़ी दूध समितियों को उपलब्ध कराए जा रहे अत्याधुनिक संसाधन, उत्तम क्वालिटी के चारा बीज से लेकर पशु आहार भी कराए जा रहे उपलब्ध
सिरसा, 26 अप्रैल।
प्रदेश में दूध उत्पादन को सशक्त बनाने और डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वीटा मिल्क प्लांट द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत महिला दूध समितियों सहित अन्य दूध समितियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे डी.पी.एम.सी.यू. उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इससे दूध की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद मिल सकेगा।
इसके साथ ही, “हरे चारे का बीज देने” की योजना के तहत दूध संघ सिरसा द्वारा हर वर्ष हरे चारेः ज्वार, बरसीम और जई के उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज समितियों को मांग अनुसार वितरित किए जाते हैं। इस पहल से पशुओं के लिए पोषक आहार की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।
वहीं “पशु आहार देने” की योजना के अंतर्गत समितियों को कैटल फीड, पशु मेश, कैटल मेश, मिनरल मिक्सचर, गोधारा शक्ति, काल सागर सहित पशुओं की अन्य आवश्यक दवाइयां रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पशुपालकों का खर्च कम होगा और पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ दिनेश कुमार ने कहा कि
इन योजनाओं से हरियाणा के डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। इस पहल को किसानों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
25 अप्रैल 2026
दूध उत्पादकों की पढ़ाई में अव्वल बच्चों को मिलेगी 5100 रुपये की छात्रवृत्ति,
सिरसा, 24 अप्रैल।
सहकारी क्षेत्र से जुड़े दूध उत्पादकों के परिवारों के लिए कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। वीटा के साथ जुड़े इन परिवारों के लिए यह कदम समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहायक सिद्ध होगा और डेयरी क्षेत्र से जुड़े परिवारों को सम्मानजनक सहयोग प्रदान करेगा। दूध उत्पादकों व उत्पादक समिति के सदस्यों के बच्चों के लिए मैट्रिक व 12वीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर क्रमश: 2100 रुपये तथा 5100 रुपये की छात्रवृति योजना लागू की गई है। इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इससे दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, दूध उत्पादकों की बेटियों की शादी पर 1100 रुपये की राशि कन्यादान के रूप में प्रदान की जाएगी। ये पहल दुग्ध उत्पादकों के शिक्षा में अव्वल बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
24 अप्रैल 2026
23 अप्रैल 2026
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