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युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

21 अप्रैल 2026

स्व-गणना में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें आमजन


- सरपंचों, ग्राम सचिवों और विद्यार्थियों को स्व-गणना अभियान में योगदान के लिए किया प्रेरित
सिरसा, 21 अप्रैल।
जिले में जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान के अंतर्गत सीएमके महाविद्यालय में छात्राओं को, बीडीपीओ कार्यालय में सरपंचों व ग्राम सचिवों को तथा आरोही स्कूल नाथूसरी चौपटा में विद्यार्थियों को स्व-गणना अभियान में योगदान के लिए प्रेरित किया।
डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर हिमांशु शर्मा ने बताया कि नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल के माध्यम से सुरक्षित रूप से अपने परिवार का डाटा दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल 16 अप्रैल से शुरू हो चुका है और निर्धारित अवधि तक उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि सफलतापूर्वक फॉर्म जमा करने पर प्रत्येक परिवार को एक यूनिक 11 अंकों की स्व-गणना आईडी प्राप्त होगी, जिसे बाद में सत्यापन के दौरान जनगणना प्रगणक को दिखाना होगा। उन्होंने बताया कि स्व-गणना के लिए पहले मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा और लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर देकर 15 से 20 मिनट में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे घर-घर जाकर होने वाली जनगणना के दौरान लंबी पूछताछ से भी राहत मिलेगी।
सहायक ललित कुमार ने बताया कि जिलावासी 30 अप्रैल तक स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें। यह सुविधा पहली बार जनगणना में दी गई है, जिससे नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह भारत की पहली पूर्णतः: डिजिटल जनगणना होगी, इसमें जनगणना कर्मी मोबाइल ऐप के माध्यम से डाटा संग्रह करेंगे और जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपडेट होगी। जो लोग ऑनलाइन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे, उनके लिए पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। आमजन आधुनिक और सरल प्रक्रिया का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय रहते स्व-गणना कर जनगणना 2027 को सफल बनाने में अपना योगदान दें।

पीएम स्वनिधि योजना: रेहड़ी-फड़ी संचालकों के लिए आसान ऋण, सब्सिडी और डिजिटल प्रोत्साहन से आत्मनिर्भर बनाने की पहल

सिरसा, 21 अप्रैल।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शहरी क्षेत्रों में कार्यरत रेहड़ी-फड़ी (स्ट्रीट वेंडर्स) के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना विशेष रूप से छोटे कारोबारियों के लिए शुरू की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें वित्तीय समावेशन के तहत लाना और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आसान ऋण उपलब्ध करवाना है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जाता है। पहले चरण में 15 हजार तक का ऋण 12 महीनों के लिए, दूसरे चरण में 25 हजार तक का ऋण 18 महीनों के लिए और तीसरे चरण में 50 हजार तक का ऋण 36 महीनों के लिए दिया जाता है। यदि लाभार्थी समय पर ऋण चुकता करता है, तो वह अगले चरण के अधिक राशि वाले ऋण के लिए पात्र बन जाता है।
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है, जो सीधे उनके खाते में तिमाही आधार पर जमा की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक की सुविधा भी दी गई है, जिससे वेंडर्स को प्रति माह और प्रति वर्ष निर्धारित सीमा तक प्रोत्साहन मिलता है। योजना में यूपीआई से जुड़े रूपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी शामिल की गई है, जिसकी प्रारंभिक सीमा 10 हजार रुपये होती है और इसे बढ़ाकर 80 हजार रुपये तक किया जा सकता है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक है, जिसके माध्यम से लाभार्थियों के परिवारों को अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही, ‘सपोर्ट टू अर्बन स्ट्रीट वेंडर्स’ के तहत वेंडर्स की पहचान, प्रमाण पत्र जारी करना और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाते हैं। 

21 April. 2026





 

पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार दे रही लाखों की सहायता


सिरसा, 20 अप्रैल।
हरियाणा में बागवानी किसानों को उद्यान विभाग द्वारा फसल तुड़ाई के बाद प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना, फसल की उचित रखरखाव करना और उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाना है।
योजना के तहत विभिन्न प्रकार की इकाइयों पर लाखों की सहायता दी जाएगी। फार्म गेट पैक हाउस के लिए प्रति इकाई 25 लाख रुपये लागत निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 12.50 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं, ग्रेडिंग लाइन सहित एकीकृत पैक हाउस पर 160 लाख रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत सहायता दी जायेगी, जो अधिकतम प्रति इकाई 56 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड, इसके अलावा, भंडारण, ग्रेडिंग और पैकिंग इकाइयों पर 320 लाख रुपये की लागत के हिसाब से 35 प्रतिशत (अधिकतम 112 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) का प्रावधान है। प्री-कूलिंग यूनिट पर 5 लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन लागत के आधार पर 35 प्रतिशत सहायता दी जाएगी, जबकि चलित प्री-कूलिंग यूनिट पर 30 लाख रुपये प्रति इकाई लागत पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 10.5 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) तय किया गया है।
इसी तरह शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) के लिए भी इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं।  वहीं, सौर ऊर्जा आधारित शीत गृह को भी योजना में शामिल किया गया है, जिसे अन्य इकाइयों के साथ जोड़ा जा सकता है और इस पर भी 35 प्रतिशत सहायता बैंक ऋण के आधार पर उपलब्ध होगी।
इन योजनाओं से किसानों को फसल के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, भंडारण क्षमता बढ़ेगी और उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर दाम मिल सकेंगे। यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ते हुए उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

17 अप्रैल 2026

स्व-गणना करने की प्रक्रिया, इसके महत्व के बारे में किया जागरूक

जनगणना 2027 : शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किए गए जागरूकता कार्यक्रम, अधिकारियों ने की अधिक से अधिक भागीदारी की अपील

सिरसा, 17 अप्रैल।
जनगणना-2027 के तहत जिला में स्व-गणना करने बारे जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत आम नागरिक घर बैठे मोबाइल के माध्यम से जानकारी भर सकते हैं। जनगणना से संबंधित डाटा स्वयं द्वारा भरे जाने की प्रक्रिया सरल सटीक और पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगी। इस प्रक्रिया के तहत 30 अप्रैल तक नागरिक अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। सांख्यकीय विभाग द्वारा इस संबंध में आमजन को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल, अनाजमंडी सिरसा तथा राजकीय महिला महाविद्यालय सहित विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों को स्व-गणना प्रक्रिया, इसके महत्व और पोर्टल के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। राजकीय महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शत्रुजीत सिंह ने बताया कि स्व-गणना से नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर मिलता है, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थी अपने अभिभावकों को स्व-गणना के लिए प्रेरित करें।
वहीं डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह पहल डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे जनगणना प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि स्व-गणना के तहत नागरिक स्वयं ही 30 अप्रैल तक पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण भर सकेंगे। उन्होंने बताया कि स्व गणना के उपरांत 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का आयोजन किया जाएगा।
यह है स्व-गणना की आसान प्रक्रिया:
सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (एसइडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन -  se.census.gov.in) पर जाएं। इसके बाद अपने मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लॉगिन करें। अपना राज्य, जिला और स्थानीय क्षेत्र चुनें। डिजिटल मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिन्हित करें। इसके बाद मकान एवं परिवार से संबंधित पूर्ण जानकारी भरें। तत्पश्चात सबमिशन करें। सबमिशन के बाद एक एसई आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखें और प्रगणक आने पर यह आईडी उनके साथ साझा करें। इसके बाद प्रगणक आप द्वारा दर्ज की गई जानकारी की पुष्टि करेंगे। यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रहेगी।
इस अवसर पर उपप्राचार्य डॉ. विक्रम जीत सिंह, प्रेस प्रवक्ता डॉ. कपिल कुमार सैनी, डॉ. रुपिंदर कौर, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. शिवानी, किरण बाला, डॉ. मनीषा गर्ग, किरण सरदाना, मुकेश कुमार, मुकेश सुथार और लिपिक ललित कुमार सहित अन्य स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे।

वर्टिकल फार्मिंग को बढावा देने, पॉली हाउस-ग्रीन हाउस के लिए सरकार दे रही 85 प्रतिशत तक अनुदान

सिरसा, 17 अप्रैल।

प्रदेश के किसानों के लिए संरक्षित खेती और वर्टिकल फार्मिंग को बढ़ावा देने, आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे पॉली हाउस, ग्रीन हाउस और हाइड्रोपोनिक्स अपनाने वाले किसानों को उद्यान विभाग द्वारा 85 प्रतिशत तक  अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके और वे बेमौसम सब्जियों व फलों का उत्पादन कर सकें।
इन योजनाओं के तहत प्राकृतिक रूप से पॉलीहाउस, हाई-टेक ग्रीन हाउस, वॉक-इन टनल, शेड नेट हाउस, प्लास्टिक टनल, एंटी-इंसेक्ट नेट हाउस और बंबू/बेलन आधारित नेट हाउस जैसी संरचनाओं पर 50 प्रतिशत से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित वर्ग के किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलेगा, जबकि अनुसूचित जाति के भूमि पट्टा धारकों को 65 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। अधिकतम अनुदान सीमा 2500 वर्ग मीटर तक निर्धारित की गई है।
इसके अतिरिक्त, संरक्षित खेती से जुड़े अन्य आवश्यक घटकों जैसे एरोपोनिक्स यूनिट, हाइड्रोपोनिक इकाई, हाई-टेक नर्सरी, एंटी हेल नेट, बेड तैयार करने का सामान, मल्चिंग प्लास्टिक, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक टनल आदि पर भी 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार संभव हो सके।
सहायता योजनाओं में मधुमक्खी पालन, फसल संरक्षण, जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत विभिन्न उपकरणों और सामग्रियों पर निर्धारित सीमा तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसानों का खर्च कम हो और उत्पादन लागत में कमी आए।
विभाग द्वारा किसानों के लिए बड़े स्तर पर संरचनाओं के निर्माण जैसे पौधशालाओं में वॉक-इन टनल और नेट हाउस स्थापित करने के लिए भी विशेष अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पुराने पॉलीहाउस और नेट हाउस की मरम्मत व क्लैडिंग शीट बदलने के लिए भी 70 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पहले से स्थापित संरचनाओं का पुन: उपयोग किया जा सके।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। संरक्षित खेती और नवीन तकनीकों के उपयोग से किसान कम भूमि पर अधिक उत्पादन कर सकते हैं और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

17 April. 2026





 

14 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के तहत मिलती है 5 लाख रुपये तक की सहायता

सिरसा, 14 अप्रैल।

हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से किसानों और खेतीहर मजदूरों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के अंतर्गत किसानों, खेतीहर मजदूरों, मार्केट यार्ड में काम करने वाले मजदूरों को कृषि मशीनरी पर कार्य करने के दौरान मृत्यु या अंगहानि होने पर 37,500 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है। इनमें कृषि मशीनरी, औजार, उपकरण या यंत्रों के उपयोग के दौरान हुई दुर्घटनाएं, कुआं खोदते या ट्यूबवेल लगाने के समय हादसे, गन्ना क्रशर, चाफ कटर या थ्रेशर चलाते समय दुर्घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कुआं खोदते या संचालन के दौरान जहरीली गैस से होने वाली दुर्घटनाएं, बिजली करंट लगने से होने वाली घटनाएं, कृषि उपज को वाहन में ले जाते समय पशु, बैलगाड़ी, ट्रक या अन्य वाहन से दुर्घटना, कीटनाशक, पेस्टिसाइड या खरपतवार नाशक दवाओं के उपयोग से नुकसान, मार्केट यार्ड में माल उतारते या तोलते समय दुर्घटनाएं तथा सांप या अन्य जहरीले जीवों के काटने से मृत्यु भी इस योजना में शामिल हैं।

सहायता राशि के रूप में विभिन्न स्थितियों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5,00,000 रुपये की सहायता दी जाती है। रीढ़ की हड्डी टूटने या अन्य कारणों से स्थायी अपंगता की स्थिति में 2,50,000 रुपये दिए जाते हैं। दो अंगों या दोनों आंखों की पूर्ण हानि या गंभीर चोट की स्थिति में 1,87,500 रुपये तथा एक अंग की हानि या स्थायी गंभीर चोट पर 1,25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा पूरी उंगली कटने पर 75,000 रुपये और आंशिक उंगली क्षति पर 37,500 रुपये की सहायता दी जाती है।

14 April. 2026





 

12 अप्रैल 2026

हरियाणा उद्यान विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन पर 75 से 85 प्रतिशत तक दिया जा रहा है अनुदान, किसानों के लिए सुनहरा अवसर

सिरसा, 12 अप्रैल।

प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग की इस योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन से जुड़े विभिन्न उपकरणों और इकाइयों पर 75 से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत मधुमक्खी बक्सों पर प्रति बक्सा 2,250 रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को लगभग 1,707.59 रुपये प्रति बक्सा अनुदान मिलेगा। इस योजना में अधिकतम 50 बक्सों तक अनुदान का लाभ लिया जा सकता है।
इसके अलावा, 8 फ्रेम वाली मधुमक्खी कॉलोनी के लिए प्रति कॉलोनी 2,000 रुपये की लागत तय की गई है। इस पर किसानों को करीब 1,700 रुपये प्रति कॉलोनी अनुदान दिया जाएगा। इस श्रेणी में भी अधिकतम 50 कॉलोनियों तक सहायता प्रदान की जाएगी।
मधुमक्खी पालन उपकरणों पर भी सरकार द्वारा विशेष सहायता दी जा रही है। उपकरणों की लागत 18 रुपये से लेकर 21,280 रुपये तक निर्धारित है, जिसमें किसानों को 11.44 रुपये से लेकर 14,250 रुपये प्रति यूनिट तक अनुदान मिलेगा।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि मधुमक्खी पालन न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत है, बल्कि यह फसलों के परागण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। इस योजना का लाभ लेकर किसान कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की यह योजना खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

12 April. 2026





 

11 अप्रैल 2026

बागवानी किसानों को एकीकृत पैक हाउस और फसल समूह केंद्र पर छह करोड़ तक मिलता है अनुदान

सिरसा,उद्यान विभाग हरियाणा द्वारा “खेती पर मदद व विपणन प्रोत्साहन योजना” के तहत बागवानी किसानों को भारी अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है।


इस योजना के अंतर्गत “एकीकृत पैक हाउस एवं फसल समूह केंद्र” स्थापित करने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजना की कुल लागत एक करोड रुपये से लेकर 6 करोड रुपये तक निर्धारित की गई है, जिसमें किसानों को इसी सीमा तक अनुदान राशि भी दी जाएगी।

योजना में किसानों के समूह (सदस्यों) के आधार पर अनुदान की अधिकतम सीमा तय की गई है। यदि किसी परियोजना में 25 सदस्य शामिल होते हैं तो उन्हें अधिकतम एक करोड रुपये तक का अनुदान मिलेगा। वहीं 50 सदस्यों के लिए यह सीमा दो करोड रुपये, 75 सदस्यों के लिए तीन करोड रुपये और 100 सदस्यों के लिए चार करोड रुपये तक होगी।

इसके अलावा, 125 सदस्यों वाले समूह को पांच करोड रुपये और 150 सदस्यों के समूह को अधिकतम छह करोड रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इस तरह अधिक सदस्यों के जुड़ने पर अनुदान की राशि भी बढ़ती जाएगी।

जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इस योजना से किसानों को अपनी फसल की बेहतर पैकेजिंग, भंडारण और मार्केटिंग में मदद मिलेगी। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य भी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि सरकार की यह पहल बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

11 April. 2026