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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

27 जून 2026

27 June 2026







 

सरकारी खरीद में बढ़ेगी पारदर्शिता: 5 करोड़ रुपये से अधिक के सभी टेंडरों और अनुबंधों का ब्यौरा वेबसाइट पर करना होगा अपलोड

  • मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जारी किए निर्देश; हर महीने मुख्य सचिव कार्यालय को भेजनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

  • टेंडर राशि, एजेंसी का नाम और आवंटन की तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां करनी होंगी सार्वजनिक

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे बड़े टेंडरों एवं अनुबंधों का पूरा विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट तथा राज्य खरीद पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। इसके साथ ही हर महीने इस नियम के पालन का प्रमाण-पत्र भी जमा करवाना होगा।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को जारी एक पत्र के माध्यम से इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के पोर्टल पर भी देनी होगी जानकारी

नए निर्देशों के अनुसार, 5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं की खरीद, निर्माण कार्यों एवं सेवाओं से संबंधित जितने भी टेंडर या अनुबंध होंगे, उनका विवरण विभागीय वेबसाइट के साथ-साथ उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की नोडल वेबसाइट पर भी अपलोड करना अनिवार्य होगा।

वेबसाइट पर यह जानकारी साझा करनी होगी:

  • खरीद करने वाले विभाग का नाम

  • कार्य या प्रोजेक्ट का संक्षिप्त विवरण

  • टेंडर/अनुबंध की कुल राशि

  • चयनित की गई एजेंसी या कांट्रेक्टर का नाम

  • कार्य आवंटन (अलॉटमेंट) की अधिकारिक तिथि

मुख्य सतर्कता अधिकारी करेंगे निगरानी

इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रत्येक सार्वजनिक खरीद इकाई के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि हर महीने टेंडर या अनुबंध संबंधी समस्त विवरण पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। इसके साथ ही निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन का एक मासिक प्रमाण-पत्र (Compliance Certificate) मुख्य सचिव कार्यालय को नियमित रूप से भेजा जाएगा।

विभागों को समय पर जानकारी अपलोड करने में कोई तकनीकी परेशानी न हो, इसके लिए आपूर्ति एवं निपटान निदेशालय को आवश्यक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म एवं यूजर लॉगिन उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। सरकार के इस कदम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी बजट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित हो सकेगा।

हरियाणा में स्वास्थ्य ढांचा होगा मजबूत: 18 करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों और रेट कॉन्ट्रैक्ट्स को मंजूरी


स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में हुई "स्पेशल हाई पावर्ड परचेज कमेटी" की बैठक में लिया गया फैसला


18 जिला अस्पतालों में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट, 16 उप-मंडल अस्पतालों में शुरू होंगी डायलिसिस सेवाएं



चंडीगढ़ (लहू की लौ) हरियाणा सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठा रही है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में हुई स्पेशल हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में पूरे राज्य के लिए 18 करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों और दर अनुबंधों (रेट कॉन्ट्रैक्ट्स) को अंतिम रूप देते हुए मंजूरी दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने और दीर्घकालिक सुधारों को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

मरीजों को मिलेगी तत्काल राहत (महत्वपूर्ण दवाएं व उपकरण)

थैलेसीमिया की दवाएं: आनुवंशिक रक्त विकार से जूझ रहे मरीजों को बिना किसी रुकावट के निरंतर उपचार देने के लिए 82 लाख रुपये की दवाओं की खरीद को मंजूरी दी गई।


मोतियाबिंद के लेंस: बुजुर्गों और मोतियाबिंद से पीडि़त मरीजों को सरकारी अस्पतालों में सस्ती व सुलभ सर्जरी की सुविधा देने के लिए 44 लाख रुपये के इंट्राओकुलर लेंस (ढ्ढह्ररु) खरीदे जाएंगे।


यूनानी दवाएं: सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर वैकल्पिक और समग्र चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए करीब 1.85 करोड़ रुपये की लागत से 40 यूनानी दवाओं की खरीद की जाएगी।


जिला व उप-मंडल स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे में बड़े सुधार

ऑक्सीजन प्लांट (रुरूह्र): आपातकालीन मामलों में ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 18 जिला नागरिक अस्पतालों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट और टैंकों की स्थापना व खरीद हेतु करीब 9.55 करोड़ रुपये के 2 साल के रेट कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप दिया गया। इससे मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी।


डायलिसिस सेवाएं: किडनी के मरीजों को उनके घर के नजदीक ही जीवन रक्षक इलाज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (क्कक्कक्क) मॉडल के तहत 16 उप-मंडल नागरिक अस्पतालों में हीमोडायलिसिस सेवाएं प्रदान करने के लिए लगभग 2.40 करोड़ रुपये के टेंडर को स्वीकृत किया गया।


ऑडियोमीटर की खरीद: कानों और सुनने की समस्याओं की शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर ही संभव बनाने के लिए 22 जिला नागरिक अस्पतालों हेतु 24 प्योर टोन ऑडियोमीटर की खरीद के लिए 3.02 करोड़ रुपये के 2 साल के रेट कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी गई है।


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन बुनियादी सुधारों से जिला और उप-मंडल स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और आमजन को महंगे निजी इलाज के आर्थिक बोझ से बड़ी राहत मिलेगी।

26 जून 2026

मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना: सब्जियों और फलों को दें सुरक्षा कवच, 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक मिलता है मुआवजा

- प्रति एकड़ किसानों को मात्र 2.5 प्रतिशत राशि के आधार पर अधिकतम एक हजार रुपये का करना होगा भुगतान

सिरसा, 26 जून।
हरियाणा सरकार द्वारा बागवानी किसानों के हितार्थ कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है, जिसके माध्यम से अनुदान प्रदान किया जाता है। वहीं बागवानी किसानों को जोखिम से बचाने के लिए बीमा योजना भी शुरू की गई है, जिसमें किसान नाममात्र शुल्क के साथ साथ अपनी फसलों को सुरक्षित कर सकते हैं. बागवानी फसलों में प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना की शुरुआत की गई है। योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ प्रीमियम के तौर पर 2-5 प्रतिशत राशि के अनुसार सब्जियों व मसालों के लिए 750 रुपये प्रति एकड़ व फलों के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ अदा करना होता है। वहीं बीमे के आधार पर सब्जियों एवं मसालों के लिए प्रति एकड़ 15000 रुपये न्यूनतम व 30000 रुपये अधिकतम मुआवजा राशि निर्धारित की गई है। इसी तरह फलों के लिए न्यूनतम मुआवजा राशि 20000 रुपये व अधिकतम 40000 रुपये प्रति एकड़ राशि निर्धारित है। बागवानी विभाग द्वारा फसल व मौसम के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन भी मांगे जाते हैं।
योजना के तहत इन सब्जियों और फलों का होगा बीमा
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाएं जैसे ओलावृष्टि, तापमान, पाला, जलकारक (बाढ़, बादल फटना, नहर या ड्रेन का टूटना, जलभराव) आंधी तूफान व आग लगने जैसी घटनाओं की स्थिति में मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस योजना में 46 फसलें शामिल की गई है।
अरबी, भिन्डी, करेला, लौकी, बैंगन, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, गोभी, मिर्च, खीरा, ककड़ी, प्याज, मटर, आलू, कद्दू, मूली, तोरई, टिंडा, टमाटर ,तरबूज, आँवला,बेर,चीकू,खजूर,ड्रैगन फल,अंजीर,अंगूर,अमरूद,जामुन, किन्नू,लैमन,नींबू,लीची,मालटा,संतरा,आम,आड़ू,नाशपाती, आलु बुखारा, अनार,स्ट्राबेरी,हल्दी,लहसुन आदि सब्जियां व फल इस योजना के तहत कवर किए जाएंगे।

नुकसान प्रतिशत के आधार पर यह रहेगी मुआवजा राशि
नुकसान प्रतिशत--मुआवजा दर --सब्जियां व मसाले--फल (रुपये प्रति एकड़)
0 से 25 --शुन्य --शुन्य --शुन्य
26 से 51 --50 प्रतिशत --15000 --20000
51 से 75 --75 प्रतिशत --22500 --30000
75 से अधिक --100 प्रतिशत --30000 --40000

जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि योजना के तहत फसल अनुसार समय- समय पर पोर्टल खोला जाता है, जिसके माध्यम से किसान स्वयं या अटल सेवा केंद्र के माध्यम से अपनी फसल का बीमा कर सकते हैं। समिति द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार नुकसान के आंकलन रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा राशि सीधे पंजीकृत किसान के खाते में भेजी जाती है। बीमा कराने वाले किसानों से अनुरोध है कि बाग में नुकसान की स्थिति में विभाग को समय पर जरूर अवगत कराएं।

म्हारी योजना कॉलम के लिए

26 June 2026





 

आयुष्मान योजना : प्रत्येक परिवार को हर साल पांच लाख तक का निशुल्क उपचार

-टोल फ्री नंबर 14555 पर करें संपर्क, चिरायु हरियाणा योजना के माध्यम से नाममात्र शुल्क के साथ भी मिलेगा योजना का लाभ

सिरसा, 25 जून।

केंद्र सरकार द्वारा साल 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, नागरिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों में बड़ी सहायक साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक की सहायता सरकारी एवं पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। प्रदेश में फैमिली आईडी में सत्यापित इनकम के आधार पर, हरियाणा निवासी जिनकी पारिवारिक आय एक लाख 80 हजार रुपये हैं, उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क पांच लाख तक उपचार प्रदान किया जाता है। इसके अलावा हरियाणा सरकार द्वारा साल 2022 में इस योजना का विस्तार करते हुए नाममात्र शुल्क के साथ चिरायु हरियाणा योजना लागू की है। इस योजना के तहत जिन परिवारों की सत्यापित आय एक लाख 80 हजार से  तीन लाख के बीच हैं, वे 1500 रुपये सालाना जमा करवाकर पांच लाख रुपये तक का सरकारी और पैनल में शामिल अस्पतालों में निशुल्क उपचार करवा सकते हैं।

ऐसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड
पात्र परिवार जिनकी आय एक लाख 80 हजार रुपये से कम हैं, वे फैमिली आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ही सीएससी या स्वयं अपना कार्ड बनवा सकते हैं। पात्र परिवार के प्रत्येक सदस्य का अलग-अलग कार्ड बनेंगे। जिला स्तर पर बात करें तो नागरिक अस्पताल में आयुष्मान कार्ड बनाए जाते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर शिविर लगाकर आयुष्मान कार्ड बनाए जाते हैं। योजना की शर्तों के अनुसार सरकारी अथवा पैनल में शामिल अस्पतालों में ही इस योजना का लाभ मिलेगा। आप आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र हैं या नहीं इसके लिए टोल फ्री नंबर 14555 पर कॉल की जा सकती है। इसके अलावा अन्य प्रकार की समस्या या शिकायत भी इस टोल फ्री नंबर के माध्यम से कर सकते हैं।

नागरिक अस्पताल सिरसा से आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डॉ संदीप सिंह ने बताया कि जिला सिरसा में फिलहाल 93 सूचीबद्ध अस्पताल अथवा केंद्र योजना का लाभ दे रहे हैं जिसमें से 35 सरकारी अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्र तथा 58 निजी अस्पताल है। उपलब्ध डाटा अनुसार जिला में अब तक 60 हजार नागरिक आयुष्मान भारत योजना का लाभ उठा चुके हैं।

म्हारी योजना कॉलम के लिए

16 जून 2026

मत्स्य पालन : ई-प्लेटफॉर्म से और बेहतर होगी मार्केटिंग, सरकार भी दे रही सब्सिडी

सिरसा, 16 जून।

मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार द्वारा "मछली और मत्स्य उत्पादों के ई-ट्रेडिंग और ई-मार्केटिंग के लिए ई-प्लेटफॉर्म हेतु सब्सिडी योजना" संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मछली पालकों, उद्यमियों और मत्स्य उत्पादों से जुड़े व्यवसायियों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध करवाना है, ताकि वे अपने उत्पादों की बिक्री व्यापक स्तर पर कर सकें और बेहतर आय अर्जित कर सकें।
योजना के तहत ऐसे लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है जो मछली और मत्स्य उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल एवं ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना चाहते हैं। सरकार द्वारा परियोजना की लागत के आधार पर उचित सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे आधुनिक विपणन व्यवस्था को बढ़ावा मिल सके और मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हों।
योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) होना अनिवार्य है। साथ ही लाभार्थी को यह वचनबद्धता पत्र देना होगा कि ई-प्लेटफॉर्म से जुड़ी सभी परिसंपत्तियों का संचालन, रखरखाव और निगरानी अनुदान प्राप्त करने के बाद कम से कम पांच वर्षों तक सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना प्रस्तावों पर विचार डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) अथवा एससीपी मॉडल के आधार पर किया जाएगा तथा परियोजना का आकार एवं व्यवहार्यता विभाग द्वारा मामले-दर-मामले के आधार पर तय की जाएगी।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को सीधे खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल मछली पालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि योजना के लिए आवेदन करते समय लाभार्थियों को पहचान प्रमाण के रूप में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड अथवा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), विभाग और लाभार्थी के बीच अनुबंध पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), बैंक खाते एवं पैन कार्ड का विवरण सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। सभी दस्तावेज विधिवत एवं पूर्ण होने पर ही आवेदन पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार से मछली पालन व्यवसाय को नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। योजना का लाभ उठाकर लाभार्थी आधुनिक विपणन तंत्र से जुड़ सकते हैं और अपने व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं।

म्हारी योजना कॉलम के लिए

16 June 2026