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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

06 मई 2026

हाई टेक डेयरी स्थापित कर बढ़ाएं अपनी आय, 25 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान

सिरसा, 06 मई।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदेश में बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे के उद्देश्य से हाई टेक डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योजना क्रियांवित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए बैंक के मार्फत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
योजना के तहत 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हरियाणा निवासी आवेदन कर सकते हैं। आवेदक की किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या विशेष प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। इसके साथ ही आवेदक के पास डेयरी पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त स्थान या शेड होना जरूरी है। व्यक्तिगत स्तर पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, किसी समूह, संस्था या फर्म को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 4 से 10 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए  25 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, तथा  20 से 50 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए 5 वर्ष  तक ब्याज  स्कीम के अनुसार विभाग द्वारा  दिया  जाएगा ।  जिससे लाभार्थी को आर्थिक बोझ कम होगा और वह आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर सकेगा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत पशुओं का बीमा भी करवाया जाएगा। बीमा सुविधा विभागीय स्कीम के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी, हालांकि यदि  विभागीय  बीमा स्कीम चालू  नहीं है  तो बीमा प्रीमियम का भुगतान लाभार्थी को स्वयं करना होगा। इससे पशुपालकों को भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान से सुरक्षा मिलेगी। आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड और बैंक पासबुक या रद्द किया हुआ चेक जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं। इच्छुक व्यक्ति विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। यह योजना न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि दूध उत्पादन को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

6 May. 2026





 

डेयरी इकाई स्थापित कर बनें आत्मनिर्भर, 50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान


सिरसा, 05 मई।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित कर सकें।
योजना के तहत 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हरियाणा निवासी, जो अनुसूचित जाति से संबंधित हैं और बेरोजगार हैं, आवेदन कर सकते हैं। योजना में किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद लोग इसका लाभ उठा सकें। हालांकि, आवेदक के पास पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है।
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयों की स्थापना के लिए अनुदान दिया जा रहा है। दो दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं 10+1 सूअर इकाई के लिए भी 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध है, जिसके तहत अधिकतम 50,000 रुपये तक का अनुदान मिल सकता है। इसके अलावा 15+1 भेड़-बकरी इकाई के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 88,200 रुपये तक की सहायता दी जा सकती है।
योजना के तहत बीमा सुविधा भी प्रदान की जाती है। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभार्थियों को पशुओं का बीमा करवाना अनिवार्य है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। बीमा प्रीमियम का भुगतान लाभार्थी को स्वयं करना होगा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने बताया कि आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में परिवार पहचान पत्र, अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण और रद्द किया हुआ चेक शामिल हैं। इच्छुक लाभार्थी संबंधित विभाग में आवेदन कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना न केवल बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। पशुपालन के क्षेत्र में यह पहल सामाजिक उत्थान और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

04 मई 2026

बैकयार्ड कुक्कुट इकाई योजना : ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार में सहायक

सिरसा, 4 मई।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा द्वारा बैकयार्ड कुक्कुट इकाई योजना संचालित की जा रही है। यह योजना विशेष रूप से बेरोजगार ग्रामीण युवाओं के लिए लाभकारी साबित हो रही है, जिससे वे कम लागत में अपना स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनके लिए आय के स्थायी स्रोत तैयार करना तथा सामाजिक-आर्थिक उत्थान में योगदान देना है। इसके साथ ही योजना के माध्यम से लाभार्थियों और उनके परिवार के सदस्यों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत विभाग द्वारा लाभार्थियों को हिसार स्थित राजकीय पोल्ट्री हैचरी से चेब्रो नस्ल के कुक्कुट पक्षी उपलब्ध करवाए जाते हैं। प्रत्येक पात्र परिवार को 8 से 10 दिन के 50 चूजे नि:शुल्क दिए जाते हैं। इसके अलावा, कुक्कुट पालन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दो वाटर ड्रिंकर और दो फीडर भी मुफ्त प्रदान किए जाते हैं। इसके स्कीम के तहत आवेदक की उम्र 18 से 60 के बीच होनी चाहिए तथा हरियाणा का निवासी हो। इस स्कीम में अनुसूचित जाति, अन्य जाति के जरूरतमंद परिवार, बीपीएल परिवार व अन्य भूमि रहित खेती करने वाले लोग ऑनलाइन सरल पोर्टल पर आवेदन कर सकते है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने बताया कि यह योजना कम संसाधनों में अधिक लाभ देने वाली है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ पोषण स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने इच्छुक लाभार्थियों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें।

4 May. 2026





 

03 मई 2026

किसान क्रेडिट कार्ड योजना : कम ब्याज व आसान प्रक्रिया से कृषि क्षेत्र को औऱ सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सिरसा, 03 मई।

किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता योजना है, जिसका उद्देश्य उन्हें खेती से जुड़े कार्यों के लिए समय पर और सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से किसान बिना किसी जटिल प्रक्रिया के बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं और अपनी कृषि आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकते हैं। 
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च दर पर कर्ज से बचाकर उन्हें संस्थागत बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है। इसके तहत किसान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए आसानी से धन प्राप्त कर सकते हैं। 

इस योजना के तहत किसानों को ब्याज पर सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। सामान्यतः 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलता है, जिसमें समय पर भुगतान करने पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत तक की छूट मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर लगभग 4 प्रतिशत रह जाती है। 
किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक कड़ी है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि किसानों को समय पर संसाधन मिलने से उनकी उत्पादन क्षमता और आय में भी वृद्धि होती है। साथ ही, यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 
सस्ती ब्याज दर, आसान प्रक्रिया और बढ़ती ऋण सीमा के कारण यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार द्वारा किए जा रहे नए सुधारों से भविष्य में इस योजना का लाभ और अधिक किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है।

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित बैंक की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होता है। आवेदन जमा करने के बाद पात्रता के आधार पर किसी भी कार्य दिवसों में बैंक द्वारा आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद कृषि भूमि के हिसाब से ऋण प्रदान किया जाता है।

आवेदन के लिए किसानों को आवेदन पत्र, पासपोर्ट आकार की फोटो, पहचान पत्र (आधार, वोटर आईडी आदि), पते का प्रमाण, भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, फसल पैटर्न की जानकारी आदि दस्तावेज जमा कराने होते हैं।

3 May. 2026





 

02 मई 2026

2 May 2026





 

वाटर टैंक का निर्माण कर अपनाएं सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, 85 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी


सिरसा, 01 मई।
जिला के किसानों के लिए ऑन-फार्म वाटर टैंक निर्माण वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और पानी के बेहतर उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खेती में पानी की बचत व सिंचाई क्षेत्र में विस्तार करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। जहां कृषि क्षेत्र में पारंपरिक सिंचाई तरीकों से पानी की खपत अधिक होती है, वहीं वॉटर टैंक निर्माण के साथ माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपना कर पानी की कम खपत के साथ अधिक मुनाफा लिया जा सकता है।
योजना के तहत सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के वाटर टैंक बनाए जा सकेंगे। चार या अधिक किसानों द्वारा बनाए गए टैंक को सामुदायिक टैंक माना जाएगा, जिस पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, व्यक्तिगत किसान को टैंक निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि सामुदायिक टैंक से जुड़े कम से कम 75 प्रतिशत क्षेत्र तथा व्यक्तिगत टैंक के मामले में 50 प्रतिशत भूमि पर माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। योजना का लाभ केवल भूमि मालिक किसानों को ही मिलेगा।
सरकार ने 2 एकड़ से 50 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए टैंक निर्माण पर सहायता निर्धारित की है, जिसमें न्यूनतम 1.05 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 8.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत टैंक के लिए 70त्न व सामुदायिक टैंक के लिए 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो अधिक क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन अपनाएंगे।
एमआई काडा के कार्यकारी अभियंता विजय पाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत सहायता राशि तीन चरणों में जारी की जाएगी पहले चरण में खुदाई के बाद 20 प्रतिशत, दूसरे चरण में निर्माण पूरा होने पर 40 प्रतिशत और अंतिम 40 प्रतिशत राशि माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने के बाद दी जाएगी। इस योजना से पानी की बचत होगी, खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।


म्हारी योजना कॉलम के लिए

26 अप्रैल 2026

वीटा से जुड़ी दूध समितियों को उपलब्ध कराए जा रहे अत्याधुनिक संसाधन, उत्तम क्वालिटी के चारा बीज से लेकर पशु आहार भी कराए जा रहे उपलब्ध

सिरसा, 26 अप्रैल। 

प्रदेश में दूध उत्पादन को सशक्त बनाने और डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वीटा मिल्क प्लांट द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत महिला दूध समितियों सहित अन्य दूध समितियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे डी.पी.एम.सी.यू. उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इससे दूध की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद मिल सकेगा।
इसके साथ ही, “हरे चारे का बीज देने” की योजना के तहत दूध संघ सिरसा द्वारा हर वर्ष हरे चारेः ज्वार, बरसीम और जई के उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज समितियों को मांग अनुसार वितरित किए जाते हैं। इस पहल से पशुओं के लिए पोषक आहार की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।
वहीं “पशु आहार देने” की योजना के अंतर्गत समितियों को कैटल फीड, पशु मेश, कैटल मेश, मिनरल मिक्सचर, गोधारा शक्ति, काल सागर सहित पशुओं की अन्य आवश्यक दवाइयां रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पशुपालकों का खर्च कम होगा और पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ दिनेश कुमार ने कहा कि
इन योजनाओं से हरियाणा के डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। इस पहल को किसानों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

26 April. 2026