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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

08 अगस्त 2026

8 Aug. 2026





 

डॉ. अंबेडकर मेडिकल एड स्कीम के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मिलेगी साढ़े तीन लाख रुपये तक की सहायता

-एससी वर्ग के जरूरतमंदों को उपचार और सर्जरी के लिए दी जाएगी वित्तीय मदद, वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से हो कम

सिरसा

डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही डॉ. अंबेडकर मेडिकल एड स्कीम का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार और सर्जरी के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत केवल उन्हीं परिवारों को लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से कम है। योजना के अनुसार किडनी, हृदय, लिवर, कैंसर, मस्तिष्क सहित अन्य जानलेवा बीमारियों में सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीज सहायता के पात्र होंगे। इसके अलावा अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) तथा स्पाइनल सर्जरी के मामलों को भी योजना में शामिल किया गया है। यदि किसी मरीज को पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी है तो वह अगले वित्तीय वर्ष में दूसरी बार सहायता अनुदान के लिए भी आवेदन कर सकता है। योजना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किडनी रोग से पीडि़त तथा किडनी या अन्य अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों को भी सहायता मिलेगी। ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी भी पात्र होंगे, क्योंकि किडनी प्रत्यारोपण पीएम- जन आरोग्य योजना के अंतर्गत कवर नहीं है।

इन अस्पतालों में कराया जा सकेगा उपचार
योजना के तहत देश के विभिन्न प्रमुख अस्पतालों में उपचार कराया जा सकेगा। इनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली एवं अन्य राज्यों के एम्स, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट लखनऊ, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जबलपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बी. बरुआ कैंसर इंस्टीट्यूट गुवाहाटी, बिरला हार्ट फाउंडेशन कोलकाता, टाटा कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट मुंबई, निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हैदराबाद, द वॉलंटरी हेल्थ सर्विसेज चेन्नई सहित सभी सीजीएचएस से मान्यता प्राप्त अस्पताल शामिल हैं।इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पताल, राज्य अस्पताल, राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त अस्पताल, केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पूर्ण वित्तपोषित अस्पताल तथा जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों के सरकारी अस्पताल, जहां संबंधित सर्जरी या उपचार की सुविधा उपलब्ध है, भी इस योजना के अंतर्गत शामिल किए गए हैं। विशेष परिस्थितियों में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के अध्यक्ष की संतुष्टि होने पर किसी अन्य अस्पताल को भी शामिल किया जा सकता है।
इतनी मिलेगी आर्थिक सहायता
योजना के तहत स्वीकृत अनुमानित शल्य चिकित्सा व्यय का 100 प्रतिशत भुगतान सीधे संबंधित अस्पताल को बैंक हस्तांतरण अथवा मांग पत्र के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक बीमारी के अनुसार अधिकतम सहायता राशि निर्धारित की गई है। हृदय शल्य चिकित्सा तथा रीढ़ की हड्डी की शल्य चिकित्सा के लिए अधिकतम एक लाख पचास हजार रुपये, गुर्दा शल्य चिकित्सा, डायलिसिस तथा गुर्दा या अन्य अंग प्रत्यारोपण के लिए अधिकतम तीन लाख पचास हजार रुपये, कैंसर की शल्य चिकित्सा, रसायन चिकित्सा और विकिरण चिकित्सा के लिए अधिकतम दो लाख पचास हजार रुपये, मस्तिष्क की शल्य चिकित्सा तथा अन्य जानलेवा बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
ये दस्तावेज जरूरी
मरीज को निर्धारित आवेदन पत्र अथवा साधारण कागज पर निर्धारित प्रारूप के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ स्वयं प्रमाणित जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड या आधार कार्ड तथा अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट द्वारा प्रमाणित सर्जरी की अनुमानित लागत का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। किडनी प्रत्यारोपण के मामलों में लाभार्थी और डोनर के संबंध का प्रमाण, प्राधिकृत समिति का प्रमाण पत्र तथा डोनर का नाम, आयु, पता, रक्त समूह और आधार संबंधी विवरण भी देना होगा। आवेदन पर मरीज का स्वप्रमाणित फोटो लगाना अनिवार्य होगा। सहायता राशि के शीघ्र हस्तांतरण के लिए अस्पताल के बैंक खाते का विवरण भी आवेदन के साथ देना होगा।
कम से कम 15 दिन पहले करें आवेदन प्रस्तुत
योजना के अनुसार आवेदन सर्जरी, डायलिसिस या कीमोथेरेपी की निर्धारित तिथि से कम से कम 15 दिन पहले डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, 15 जनपथ, नई दिल्ली-110001 के निदेशक को भेजना होगा। आवेदन के साथ प्रस्तुत अनुमानित लागत प्रमाण पत्र में सर्जरी की निर्धारित तिथि का उल्लेख होना अनिवार्य है। योजना के तहत स्वीकृत सहायता राशि एकमुश्त किस्त में सर्जरी से पहले सीधे अस्पताल को जारी की जाएगी। मरीज के डिस्चार्ज होने पर अस्पताल को अंतिम बिल और उपयोगिता प्रमाण पत्र डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को जमा करना होगा। यदि जारी की गई सहायता राशि का कोई भाग उपयोग नहीं होता है तो उसे अस्पताल द्वारा मरीज के डिस्चार्ज की तिथि से अधिकतम एक माह के भीतर फाउंडेशन को वापस करना होगा। इसके अलावा फाउंडेशन और अन्य स्रोतों से प्राप्त कुल सहायता सर्जरी की अनुमानित लागत से अधिक नहीं हो सकती।
जिला कल्याण अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि योजना के तहत सामान्य परिस्थितियों में उपचार या सर्जरी के बाद हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि आवेदन सर्जरी की तिथि से कम से कम 15 दिन पहले फाउंडेशन को प्राप्त हो गया था, तो योग्यता के आधार पर ऐसे मामलों पर विचार किया जा सकता है। वहीं पीएम-जय (जन आरोग्य योजना) के अंतर्गत आने वाले मरीज सामान्यत: इस योजना के पात्र नहीं होंगे, लेकिन किडनी या अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में, जहां पीएम-जय के तहत कवरेज उपलब्ध नहीं है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा सकेगा।

05 अगस्त 2026

5 Aug. 2026





 

दाल मिल पर 25 लाख व तेल शोधन इकाइयों की स्थापना पर मिलेगा 09 लाख तक अनुदान

- राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन के तहत किसानों , एफपीओ, सहकारी समितियों व उद्यमियों को मिलेगा लाभ,

-26 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन
सिरसा, 04 अगस्त।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड्स) तथा दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन (मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज) के तहत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दाल मिल तथा तेल निष्कर्षण (ऑयल एक्सट्रैक्शन) इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना के तहत पात्र किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), उद्यमी एवं अन्य पात्र लाभार्थी निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत दाल मिल इकाइयों की स्थापना के लिए परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान, प्रति इकाई अधिकतम 25 लाख रुपये तक वर्ष 2026-27 के दौरान उपलब्ध कराया जाएगा। इसी प्रकार तिलहन के संग्रहण, तेल निष्कर्षण तथा पुनः प्राप्ति क्षमता बढ़ाने के लिए सरकारी एवं निजी उद्योगों, किसान उत्पादक संगठनों तथा सहकारी समितियों को अवसंरचना विकसित करने और मौजूदा सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए भी सहायता प्रदान की जाएगी। 10 टन क्षमता वाली तेल निष्कर्षण इकाइयों एवं तिलहन प्रसंस्करण मशीनरी की स्थापना पर परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 9.90 लाख रुपये तक दिया जाएगा।

रोजगार के मिलेंगे और अवसर
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. सुखदेव सिंह कम्बोज ने बताया कि इन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर दलहन एवं तिलहन फसलों का मूल्य संवर्धन होगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और देश को दलहन तथा खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने जिले के सभी पात्र किसानों, एफपीओ, सहकारी समितियों एवं उद्यमियों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इच्छुक आवेदक योजना से संबंधित पात्रता, अनुदान की दर तथा आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के लिए 26 अगस्त 2026 तक अपने निकटतम खंड कृषि अधिकारी, उपमंडल कृषि अधिकारी अथवा कृषि उपनिदेशक कार्यालय, सिरसा से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों की भागीदारी से जिले में कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

29 जुलाई 2026

कस्टोडियल डेथ मामला : हाईकोर्ट से पुलिस कर्मियों को झटका, याचिका खारिज, 304, 342 व 506 आईपीसी के तहत चलेगा मुकदमा

सिंघपुरा चौकी में हुई युवक की मौत का मामला: हाईकोर्ट ने समनिंग ऑर्डर और सेशन कोर्ट के फैसलों को ठहराया सही


डबवाली(लहू की लौ) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के चर्चित सिंघपुरा पुलिस चौकी कस्टोडियल डेथ मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकलपीठ ने पुलिस कर्मियों की याचिका खारिज करते हुए सत्र न्यायालय, सिरसा के आदेश और जेएमआईसी डबवाली द्वारा जारी समन आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही आरोपित पुलिस कर्मियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 342, 506 एवं 34 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया।

मामला 12 जून 2016 का है। शिकायतकर्ता जगदीश के अनुसार उनका बेटा संदीप अपने दो साथियों के साथ सिरसा जा रहा था। आरोप है कि गांव दादू के पास पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोककर संदीप को साथियों सहित सिंघपुरा  पुलिस चौकी ले जाकर अवैध रूप से हिरासत में रखा। शिकायत में मारपीट करने और तबीयत बिगडऩे के बावजूद समय पर इलाज नहीं कराने का आरोप लगाया गया है। बाद में कालांवाली के अस्पताल में संदीप को मृत घोषित कर दिया गया।

घटना के बाद धारा 176 सीआरपीसी के तहत हुई न्यायिक जांच में मौत को प्राकृतिक बताया गया था। हालांकि मृतक के पिता की निजी शिकायत पहले खारिज होने के बाद सत्र न्यायालय, सिरसा ने 2023 में उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया। इसके बाद जेएमआईसी डबवाली ने आरोपी पुलिस कर्मियों को सम्मन जारी किए, जिन्हें चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हिरासत में मौत जैसे मामलों में मजिस्ट्रियल जांच अंतिम नहीं मानी जा सकती। प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य, विशेषकर प्रत्यक्षदर्शी गवाह विकास (ष्टङ्ख-5) के बयान, मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौत प्राकृतिक थी या पुलिस की कथित लापरवाही अथवा मारपीट के कारण हुई, इसका अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर करेगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। 

29 July 2026





 

28 जुलाई 2026

28 July 2026





 

दाल मिल पर 25 लाख व तेल शोधन इकाइयों की स्थापना पर मिलेगा 09 लाख तक अनुदान

राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन के तहत किसानों , एफपीओ, सहकारी समितियों व उद्यमियों को मिलेगा लाभ,

-26 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन
सिरसा, 27 जुलाई।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड्स) तथा दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन (मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज) के तहत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दाल मिल तथा तेल निष्कर्षण (ऑयल एक्सट्रैक्शन) इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना के तहत पात्र किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), उद्यमी एवं अन्य पात्र लाभार्थी निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत दाल मिल इकाइयों की स्थापना के लिए परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान, प्रति इकाई अधिकतम 25 लाख रुपये तक वर्ष 2026-27 के दौरान उपलब्ध कराया जाएगा। इसी प्रकार तिलहन के संग्रहण, तेल निष्कर्षण तथा पुनः प्राप्ति क्षमता बढ़ाने के लिए सरकारी एवं निजी उद्योगों, किसान उत्पादक संगठनों तथा सहकारी समितियों को अवसंरचना विकसित करने और मौजूदा सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए भी सहायता प्रदान की जाएगी। 10 टन क्षमता वाली तेल निष्कर्षण इकाइयों एवं तिलहन प्रसंस्करण मशीनरी की स्थापना पर परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 9.90 लाख रुपये तक दिया जाएगा।

रोजगार के मिलेंगे और अवसर
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. सुखदेव सिंह कम्बोज ने बताया कि इन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर दलहन एवं तिलहन फसलों का मूल्य संवर्धन होगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और देश को दलहन तथा खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने जिले के सभी पात्र किसानों, एफपीओ, सहकारी समितियों एवं उद्यमियों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इच्छुक आवेदक योजना से संबंधित पात्रता, अनुदान की दर तथा आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के लिए 26 अगस्त 2026 तक अपने निकटतम खंड कृषि अधिकारी, उपमंडल कृषि अधिकारी अथवा कृषि उपनिदेशक कार्यालय, सिरसा से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों की भागीदारी से जिले में कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

म्हारी योजना कॉलम के लिए