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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

15 अक्टूबर 2026

पराली को जलाने की बजाय बनाया कमाई का जरिया, जितेंद्र संधू का सालाना कारोबार नौ करोड़ के पार

-2009 में स्थापित की कंपनी, 12 बेलर से हर सीजन में दो लाख क्विंटल पराली का कर रहे प्रबंधन, 60 से अधिक लोगों को दिया रोजगार

सिरसा, 15 अक्टूबर।

खेतों में धान के फसल अवशेषों को आग लगाने से होने वाले नुकसान को देखते हुए बरूवाली प्रथम निवासी जितेंद्र सिंह संधू ने पराली प्रबंधन को रोजगार का माध्यम बना लिया। वर्ष 2009 में उन्होंने संधु एग्री वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी बनाई। आज उनके पास 12 बेलर हैं, जिनकी मदद से वह हर सीजन में दो लाख क्विंटल से अधिक पराली एकत्रित करते हैं। पराली की गांठें बनाकर भादरा पावर प्लांट सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति की जाती है। इस व्यवसाय से उनका सालाना कारोबार करीब नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

लुधियाना में पहली बार देखा बेलर, 2009 में खरीदी मशीन
स्नातक पास जितेंद्र सिंह संधू ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले लुधियाना में एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम दौरान बेलर मशीन देखी थी। इसकी कार्यप्रणाली और फसल अवशेषों के प्रबंधन की संभावनाओं को देखकर उन्होंने बेलर खरीदने का निर्णय लिया। वर्ष 2009 में पहली मशीन खरीदकर लाने के साथ ही उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया। जितेंद्र के पास 12 बेलर के अलावा 25 ट्रैक्टर अपने हैं। सीजन के दौरान काम बढ़ने पर उन्हें लगभग इतने ही ट्रैक्टर किराये पर लेने पड़ते हैं। उनके पास 40 से अधिक ट्रेलर हैं, जिनके माध्यम से खेतों से एकत्रित फसल अवशेषों को संबंधित औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता है। इस व्यवसाय के माध्यम से 60 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। पराली के साथ-साथ वह गेहूं के अवशेषों को भी एकत्रित करते हैं और उनकी गांठें बनाकर उपयोग के लिए भेजते हैं। इस तरह धान और गेहूं, दोनों फसलों के अवशेषों का समुचित प्रबंधन किया जा रहा है।

35 एकड़ जमीन के मालिक, कभी नहीं जलाई फसल अवशेषों में आग
जितेंद्र सिंह संधू के पास अपनी 35 एकड़ जमीन है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपने खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाए। पहले भी वह अवशेषों को खेत में मिलाकर उनका उपयोग करते रहे हैं। जब पराली जलाने से वातावरण में धुआं फैलने और प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी तो उन्होंने इस चुनौती के समाधान में योगदान देने के साथ इसे रोजगार के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। आज वह लगातार अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं और किसानों को फसल अवशेषों के निपटान का एक विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

पराली में आग न लगाएं किसान, मित्र कीट भी होते हैं नष्ट
सहायक कृषि अभियंता डॉ. विजय जैन ने किसानों से धान के फानों को आग नहीं लगाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से जमीन में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिसका फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा आग से निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित करता है और प्रदूषण की समस्या बढ़ाता है। उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन की तकनीकें अपनाने तथा फसल अवशेषों का उचित उपयोग करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

15 Oct. 2026





 

14 अक्टूबर 2026

बाल दिवस पर 21 से 28 अक्टूबर तक होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएं


- 14 अक्टूबर से शुरू हुआ बच्चों का पंजीकरण, चार आयु एवं कक्षा समूहों में आयोजित होंगी प्रतियोगिताएं

सिरसा, 14 अक्टूबर। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद, चंडीगढ़ के निर्देशानुसार जिला बाल कल्याण परिषद द्वारा बाल दिवस के उपलक्ष्य में 21 से 28 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं के लिए 14 अक्टूबर से बच्चों का पंजीकरण शुरू हो गया है।

जिला बाल कल्याण अधिकारी नरेन्द्र सिंह मलिक ने बताया कि प्रतियोगिताओं के लिए विद्यार्थियों को चार समूहों में विभाजित किया गया है। प्रथम समूह में पांचवीं कक्षा तक, द्वितीय समूह में छठी से आठवीं कक्षा तक, तृतीय समूह में नौवीं और दसवीं कक्षा तथा चतुर्थ समूह में 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थी शामिल होंगे। विभिन्न समूहों के लिए सोलो डांस, पोस्टर मेकिंग, फैंसी ड्रेस, लड़कों एवं लड़कियों के लिए फन गेम्स, रंगोली, सोलो सॉन्ग, ग्रुप डांस, स्केचिंग ऑन द स्पॉट, बेस्ट ड्रामेबाज, कलश सजावट, क्लासिकल सोलो डांस, डिक्लेमेशन कॉन्टेस्ट, हिंदी एवं अंग्रेजी हस्तलेखन, देशभक्ति समूहगान, क्ले मॉडलिंग, दीया एवं कैंडल मेकिंग, कार्ड मेकिंग, वन एक्ट प्ले, क्विज और मेहंदी रचाओ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अन्य प्रतिभाओं को भी बढ़ावा मिलता है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। इस वर्ष अधिक संख्या में बच्चों की भागीदारी की उम्मीद है। प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चे मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पात्र होंगे।

प्रतियोगिताओं एवं पंजीकरण संबंधी अधिक जानकारी के लिए इच्छुक बच्चे और अभिभावक कार्यदिवसों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक जिला बाल कल्याण परिषद, सिरसा के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अमन रहेजा (8814900157) और अंशु बाला (70155-74839) से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

14 Oct. 2026





 

13 अक्टूबर 2026

पराली से पैलेट्स बनाकर सालाना 7 से 8 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहीं संजना व सोनिका

- ढाई करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2024 में स्थापित की फैक्ट्री, 20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार

सिरसा, 13 अक्टूबर।

खेतों में फसल अवशेष जलने से उठने वाला धुआं कभी पर्यावरण और आमजन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता था, लेकिन अब यही पराली रोजगार और कमाई का जरिया बन रही है। सिरसा जिले के गांव घोड़ावाली निवासी संजना व सोनिका ने पराली की समस्या का समाधान तलाशते हुए वर्ष 2024 में फैक्ट्री स्थापित की। यहां धान की पराली से पैलेट्स तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस परियोजना को कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना के माध्यम से पूरा किया गया। आज इस फैक्ट्री का सालाना कारोबार 7 से 8 करोड़ रुपये तक है। दो महिला साझेदार मिलकर इस इकाई का संचालन कर रही हैं।

सालाना डेढ़ लाख क्विंटल तक पराली की खपत

फैक्ट्री में पैलेट्स तैयार करने के लिए सिरसा और आसपास के क्षेत्रों में काम करने वाले बेलर संचालकों से पराली खरीदी जाती है। इस इकाई में हर साल करीब एक से डेढ़ लाख क्विंटल पराली की खपत होती है। धान की कटाई के सीजन में एकत्र की गई पराली का भंडारण करके उससे पूरे साल उत्पादन जारी रखा जाता है। इससे फसल अवशेष का उपयोगी उत्पाद तैयार होता है और पराली के प्रबंधन के लिए एक व्यावहारिक विकल्प भी मिलता है। फैक्ट्री में तैयार पैलेट्स बिजली संयंत्रों द्वारा खरीदे जाते हैं, जिससे उत्पाद के लिए बाजार उपलब्ध है।
20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
पराली से पैलेट्स बनाने वाली इस फैक्ट्री ने कारोबार के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। यहां 20 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यह पहल बताती है कि कृषि अवशेषों का उचित प्रबंधन केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। पराली को खेतों में जलाने के बजाय उपयोगी उत्पाद में बदलने से किसानों, बेलर संचालकों और उद्योगों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
धुएं की परेशानी से निकला समाधान का रास्ता
सोनिका ने बताया कि कुछ साल पहले धान की कटाई के बाद आसमान में चारों तरफ धुआं दिखाई देता था। पराली जलाने से होने वाली परेशानी को देखते हुए उन्होंने इसके समाधान की दिशा में प्रयास शुरू किए। उनका उद्देश्य पराली का ऐसा उपयोग तलाशना था, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ आर्थिक लाभ भी हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी तरफ से जितना योगदान दे सकती हैं, उतना देने का प्रयास कर रही हैं। सोनिका के अनुसार, सरकार की नीतियों और पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के प्रयासों से स्थिति में बदलाव आया है।

जिला की मंडियों में 10577 मीट्रिक टन धान की खरीद


सिरसा, 13 अक्टूबर।
जिला की विभिन्न मंडियों में खरीद एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 10577 मीट्रिक टन (एमटी) धान की खरीद की जा चुकी है। गत दिवस तक कुल आवक में से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 5345 एमटी, हैफेड द्वारा 3969 एमटी तथा हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन द्वारा 1263 एमटी खरीद की गई है। इसके साथ-साथ उठान प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक हरवीर सिंह ने बताया कि डबवाली अनाजमंडी में 1648 एमटी, देसूजोधा मंडी में 847 एमटी, ऐलनाबाद मंडी में 900 एमटी, कालांवाली में 1786 एमटी, रानियां में 860 एमटी, रोड़ी मंडी में 1157 एमटी धान की खरीद दर्ज की गई, साथ ही जिला की अन्य मंडियों में भी धान की आवक जारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि धान को सुखाकर मंडी में लेकर आए, ताकि जल्द खरीद की जा सके।

13 Oct. 2026





 

09 अक्टूबर 2026

9 Oct. 2026





 

पीएम-कुसुम योजना से किसान यशवीर की खेती की लागत हुई कम

-सोलर पंप से सिंचाई हुई किफायती, डीजल के खर्च से मिली बड़ी राहत

सिरसा, 08 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना किसानों के लिए सिंचाई की लागत कम करने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। योजना के तहत किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें डीजल और बिजली पर होने वाले खर्च से राहत मिल रही है। सिरसा के गांव लुदेसर के किसान यशवीर गाट के लिए भी यह योजना खेती को अधिक किफायती बनाने का माध्यम बनी है। 43 वर्षीय यशवीर गाट बीए और जेबीटी पास हैं तथा उनके पास पांच एकड़ जमीन है। वर्ष 2023 में उनके खेत में 10 एचपी की सोलर मोटर लगाई गई। इससे पहले वह खेतों की सिंचाई के लिए डीजल इंजन और जनरेटर पर निर्भर थे। सौर ऊर्जा आधारित पंप लगने के बाद उनके लिए सिंचाई का तरीका आसान होने के साथ-साथ खर्च भी काफी कम हुआ है।
डीजल खर्च से मिली राहत, सौर ऊर्जा ने बदली सिंचाई की तस्वीर
यशवीर गाट बताते हैं कि सोलर कनेक्शन मिलने से पहले खेतों की सिंचाई के लिए डीजल इंजन और जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता था। एक घंटे में करीब 10 लीटर डीजल खर्च हो जाता था। इसके अलावा डीजल इंजन की सर्विस और रख-रखाव पर होने वाला खर्च अलग था। उन्होंने बताया कि हर बार सिंचाई से पहले डीजल की व्यवस्था करने और जनरेटर के रख-रखाव को लेकर चिंता रहती थी। वर्ष 2023 में खेत में 10 एचपी की सोलर मोटर लगने के बाद यशवीर गाट की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। अब वह सौर ऊर्जा की मदद से एक दिन में करीब दो एकड़ जमीन की सिंचाई कर लेते हैं। उन्हें डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और जनरेटर चलाने से जुड़े खर्च से भी राहत मिली है।
जरूरत के अनुसार सिंचाई करना भी आसान
यशवीर गाट के अनुसार, पहले सिंचाई खेती की लागत बढ़ाने वाला एक बड़ा खर्च था, लेकिन सोलर पंप लगने के बाद यह खर्च काफी कम हो गया है। दिन के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध होने से खेत की जरूरत के अनुसार सिंचाई करना भी आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार की यह योजना लाभदायक बन रही है और खेती के खर्चों को कम करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी लाभ पहुंचा रही है। सोलर पंप का रखरखाव का खर्च नहीं है। यह लंबी अवधि की बचत का हिस्सा है।
- योजना ने किसानों के किए ठाठ, 35500 किसानों को हुआ लाभ
यह अकेले लुदेसर के किसान की कहानी नहीं है बल्कि जिले में 35,500 ऐसे किसान है जिन्होंने इस योजना के तहत 2019 से लेकर अबतक लाभ लिया है। किसानों के ठाठ करने वाली यह योजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी और लगातार किसान योजना से जुड़ रहे हैं।

08 अक्टूबर 2026

8 Oct. 2026





 

हरियाणा की एग्री-बिजनेस नीति से चमकी ‘दीपम इंडस्ट्रीज’

- छोटे से व्यवसाय से 50 करोड़ के टर्नओवर तक का सफर

सिरसा, 07 अक्टूबर।
हरियाणा सरकार की ‘एग्री-बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी’ प्रदेश के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों के लिए आर्थिक विकास और विस्तार का प्रभावी माध्यम बन रही है। सरकारी नीतियों के तहत मिलने
वाले प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता का लाभ उठाकर सिरसा की दीपम इंडस्ट्रीज ने छोटे स्तर से शुरुआत कर सफलता की नई मिसाल कायम की है। कंपनी के प्रोप्राइटर केवल कृष्ण बाथला ने वर्ष 1993 में टॉफी और कैंडी बनाने की एक छोटी इकाई से अपना कारोबार शुरू किया था। निरंतर मेहनत, आधुनिक तकनीक और नीतिगत सहयोग के बल पर यह व्यवसाय वर्ष 2023 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में विकसित हुआ।

4.5 करोड़ का नया निवेश और एक करोड़ तक की सब्सिडी
प्रोप्राइटर केवल कृष्ण बाथला के अनुसार, राज्य सरकार की खाद्य प्रसंस्करण प्रोत्साहन नीति का लाभ लेते हुए इकाई के विस्तार के लिए 4.5 करोड़ का नया निवेश किया गया। नीति के तहत फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25 प्रतिशत पूंजीगत निवेश सब्सिडी का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा एक करोड़ तक है। नीतिगत सहयोग, वित्तीय प्रोत्साहन और आधुनिक तकनीक के उपयोग से दीपम इंडस्ट्रीज ने कारोबार का लगातार विस्तार किया और आज कंपनी करीब 50 करोड़ के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुकी है।
55 लोगों को मिला रोजगार, 20 स्थानीय महिलाएं भी शामिल
दीपम इंडस्ट्रीज की सफलता केवल कारोबार के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। वर्तमान में कंपनी में 55 लोगों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है। इनमें 20 स्थानीय महिला कार्यकर्ता शामिल हैं। इस प्रकार उद्योग के विस्तार से स्थानीय युवाओं के साथ-साथ महिलाओं को भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर प्राप्त हुए हैं।
कन्फेक्शनरी और मिठाइयों से लेकर स्नैक्स तक, देशभर में पहुंच
दीपम इंडस्ट्रीज द्वारा विभिन्न प्रकार के कन्फेक्शनरी उत्पाद, शीतल पेय, पारंपरिक मिठाइयां तथा नमकीन और स्नैक्स तैयार किए जा रहे हैं। कंपनी ने स्थानीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने के साथ-साथ अपने उत्पादों की पहुंच देश के विभिन्न हिस्सों तक बनाई है। आज दीपम इंडस्ट्रीज के उत्पादों की आपूर्ति पूरे भारत में की जा रही है।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर युवा बन सकते हैं आत्मनिर्भर
जिला एमएसएमई केंद्र के उप निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि सिरसा जिले में खाद्य प्रसंस्करण एवं पेय निर्माण क्षेत्र में करीब 300 से अधिक पंजीकृत इकाइयां स्थापित हैं। इनमें मसाले, जूस, पशु आहार, राइस मिल, दाल मिल और बेकरी उत्पादों सहित विभिन्न प्रकार की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हैं। ये इकाइयां स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ-साथ जिले की औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए उद्यम शुरू करने तथा मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए विभिन्न प्रोत्साहन एवं सहायता योजनाएं उपलब्ध हैं। दीपम इंडस्ट्रीज की सफलता यह दर्शाती है कि उचित योजना, मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी नीतियों का लाभ लेकर छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है। इच्छुक युवा और उद्यमी इन योजनाओं की जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल अथवा जिला एमएसएमई केंद्र से संपर्क कर लाभ उठा सकते हैं और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।