Adsense

Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

11 मार्च 2026

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को प्रमाणित बीजों पर मिलता है अनुदान

सिरसा, 11 मार्च।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों पर अनुदान प्रदान किया जाता है। योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराकर फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस योजना के तहत किसानों को गेहूं, बाजरा और धान आदि के प्रमाणित बीजों पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाता है। वहीं जौ के प्रमाणित बीजों पर 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो पाते हैं, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बीज खरीद सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से पैक्स, सहकारी समितियां, हरियाणा सीड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को प्रमाणित बीज अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
कृषि विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि प्रमाणित बीजों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और रोगों से बचाव की संभावना भी बढ़ जाती है। साथ ही इससे किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
किसानों से अपील है कि वे योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और प्रमाणित बीजों का उपयोग करें। किसान अपने नजदीकी सहकारी संस्थान या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

11 March 2026





 

10 मार्च 2026

व्यापारियों को मिलेगी आर्थिक सुरक्षा, आगजनी या प्राकृतिक आपदा से नुकसान पर 20 लाख तक मिलेगी राशि

- हरियाणा सरकार की व्यापारियों के लिए बड़ी पहल: दो बीमा योजनाओं के लिए आवेदन शुरू, 31 मार्च तक करें पंजीकरण

सिरसा, 10 मार्च।
हरियाणा सरकार ने राज्य के व्यापारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और व्यापारिक माहौल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण बीमा योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के माध्यम से व्यापारियों को दुर्घटना या सामान के नुकसान की स्थिति में वित्तीय सहायता दी जाएगी।
सरकार द्वारा शुरू की गई पहली योजना मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना है। इस योजना के तहत यदि किसी व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो सरकार की ओर से उसके परिवार को 5 लाख रुपये तक की बीमा सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारी को केवल 50 रुपये शुल्क देकर पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।
दूसरी योजना मुख्यमंत्री व्यापारी क्षतिपूर्ति योजना है, जिसके अंतर्गत किसी व्यापारी के माल या स्टॉक को आगजनी या प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ राज्य के पंजीकृत व्यापारियों को उनके वार्षिक टर्नओवर के आधार पर मिलेगा। योजना के तहत 0 से 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जाएगा, जबकि 20 से 50 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 10 लाख रुपये तक का कवर मिलेगा।
इसी प्रकार 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 15 लाख रुपये तक और 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 20 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इन श्रेणियों के अनुसार वार्षिक पंजीकरण शुल्क क्रमश: 100 रुपये, 500 रुपये, 1500 रुपये और 2500 रुपये निर्धारित किया गया है।
इन योजनाओं के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल  http://htwbhry.in के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार ने इन योजनाओं के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की है। इन योजनाओं से व्यापारियों को जोखिम से सुरक्षा मिलेगी और राज्य में व्यापार तथा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

10 March 2026





 

विपदा की घड़ी में सरकार बन रही सहारा, श्रमिक की मृत्यु पर मिलती है दो लाख की सहायता

सिरसा, 09 मार्च।

हरियाणा में श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए हरियाणा श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत कामगारों के परिवारों के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। इसी कड़ी में सरकार द्वारा पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि श्रमिक परिवारों को कठिन समय में आर्थिक सहारा मिले। इस योजना के तहत यदि किसी पंजीकृत श्रमिक की किसी भी कारण से मृत्यु हो जाती है, तो उसके नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
हरियाणा सरकार की इस पहल का लाभ उन कामगारों के परिवारों को मिलेगा जो श्रम विभाग में नियमित रूप से पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार, श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में परिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें तय की गई हैं ताकि सहायता राशि सही पात्र व्यक्ति तक पहुंच सके। योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि कामगार का श्रम विभाग में नियमित पंजीकरण हो। इसके साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जिस व्यक्ति को सहायता राशि दी जानी है, उसे नामांकित या कानूनी उत्तराधिकारी होने का प्रमाण पत्र भी देना होगा।
आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए क्लेम फॉर्म-18 में आवेदन करना अनिवार्य है। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करने के बाद विभाग द्वारा जांच की जाती है और पात्र पाए जाने पर लाभार्थी को दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह योजना श्रमिकों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। अचानक होने वाली मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में यह सहायता काफी मददगार साबित होती है।

06 मार्च 2026

प्राकृतिक खेती अपनाने पर मिल रहा आर्थिक प्रोत्साहन


सिरसा, 06 मार्च।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाली प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। इसके तहत किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे वे आसानी से प्राकृतिक खेती अपना सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी उपकरण और संसाधनों की खरीद पर भी सहायता उपलब्ध है। यदि किसान प्राकृतिक खेती के लिए चार ड्रम खरीदता है, तो उसे 3000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। योजना में देसी पशुपालन को भी बढ़ावा दिया गया है। यदि कोई किसान देसी गाय खरीदता है, तो उसे प्रति गाय 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। देसी गाय का गोबर और गौमूत्र प्राकृतिक खेती में जैविक खाद और कीटनाशक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को विभाग के पोर्टल एग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर पंजीकरण करना आवश्यक है। पंजीकरण के बाद किसान योजना से जुड़ी सहायता और अनुदान का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

6 March 2026





 

05 मार्च 2026

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सरकार दे रही 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन

सिरसा, 05 मार्च।

हरियाणा सरकार द्वारा श्रम विभाग के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद प्रतिमाह 1000 रुपये की पेंशन प्रदान की जाती है। सरकार की यह पहल उन श्रमिकों के लिए राहत भरी है, जो जीवन भर मेहनत करने के बाद बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं।
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा, जो हरियाणा श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण कामगार हैं। योजना के अनुसार, श्रमिक को कम से कम तीन वर्ष तक नियमित रूप से बोर्ड का सदस्य रहना अनिवार्य है और यह सदस्यता 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले की होनी चाहिए। इसके अलावा श्रमिक के पहचान पत्र में पंजीकरण शुल्क तथा अंशदान की अदायगी का रिकॉर्ड दर्ज होना भी आवश्यक है।
पंजीकरण के समय श्रमिक को अपनी आयु प्रमाणित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रति भी जमा करवानी होती है। इस योजना का उद्देश्य निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है। लंबे समय तक मेहनत करने वाले श्रमिकों के लिए यह पेंशन उनके जीवन-यापन में मददगार साबित होती है। इससे उन्हें बुढ़ापे में अपने खर्चों को पूरा करने में सहायता मिलती है।
गौरतलब है कि यह पेंशन सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग द्वारा दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन के अतिरिक्त दी जाती है। यानी पात्र श्रमिकों को राज्य सरकार की अन्य पेंशन योजनाओं के साथ-साथ इस योजना का लाभ भी मिल सकता है। हरियाणा सरकार की इस योजना से राज्य के हजारों निर्माण श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

5 March 2026





 

03 मार्च 2026

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को प्राकृतिक आपदा में मिल रहा आर्थिक सहारा

सिरसा, 03 मार्च

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों में होने वाले नुकसान की भरपाई करना है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी फसल का बीमा करवाकर सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, आंधी, अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित प्रीमियम राशि जमा कर किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान को संबंधित बैंक, जिसमें उसका किसान क्रेडिट कार्ड या बचत खाता है, अथवा अटल सेवा केंद्र के माध्यम से अपनी फसल का बीमा कराना होता है। किसान को फसल के अनुसार निर्धारित प्रीमियम राशि संबंधित बीमा कंपनी को जमा करनी होती है। इसके बाद प्राकृतिक आपदा की स्थिति में बीमा कंपनी द्वारा तय मानकों के अनुसार क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है।
खरीफ फसलों के अंतर्गत कपास पर प्रति हेक्टेयर 5435.05 रुपये प्रीमियम के बदले 1,08,701 रुपये तक की बीमा राशि निर्धारित की गई है। धान पर 2124.98 रुपये प्रीमियम के बदले 1,06,249 रुपये, बाजरा पर 1024.36 रुपये के बदले 51,218 रुपये, मक्का पर 1089.74 रुपये के बदले 54,487 रुपये तथा मूंग पर 953.50 रुपये प्रीमियम के बदले 47,675 रुपये की बीमा राशि तय की गई है।
वहीं रबी फसलों में जौ पर 768.27 रुपये प्रीमियम के बदले 51,218 रुपये, चना पर 592.545 रुपये के बदले 39,503 रुपये, सरसों पर 809.13 रुपये के बदले 53,942 रुपये, सूरजमुखी पर 817.305 रुपये के बदले 54,487 रुपये तथा गेहूं पर 1205.52 रुपये प्रीमियम के बदले 80,368 रुपये की बीमा राशि निर्धारित है।
उप निदेशक कृषि डा. सुखदेव सिंह ने जिला के किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी फसलों का बीमा कराएं, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।

डबवाली ने हरिपुरा फुटबॉल टूर्नामेंट जीता

 


डबवाली(लहू की लौ)हरिपुरा में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट में बाबा टहल दास फुटबॉल क्लब डबवाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। &2 टीमों की भागीदारी वाले टूर्नामेंट में डबवाली की टीम ने लगातार चार मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई।फाइनल मुकाबले में डबवाली ने फट्टा मलूका को कड़े संघर्ष के बाद 2-1 से हराया। जीत के साथ टीम ने 61 हजार रुपये नकद पुरस्कार और ट्रॉफी हासिल की।टूर्नामेंट में लकी को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया। वहीं अजय, आशीष और राहुल का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा।क्लब के ’योति ढिल्लों ने खिलाडिय़ों की मेहनत और टीमवर्क की प्रशंसा की। इस मौके पर लेक्चरर गुरप्रीत सिंह, विक्रमजीत गिल, मनोज सांगवान व हैप्पी मास्टर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। 

3 March 2026





 

02 मार्च 2026

अक्षम बच्चों को श्रम विभाग द्वारा प्रदान की जाती है प्रतिमाह 2000 रुपये की आर्थिक सहायता


सिरसा, 02 मार्च।
हरियाणा श्रम विभाग द्वारा श्रमिक परिवारों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं के तहत अक्षम बच्चों को वित्तीय सहायता योजना राहत साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत कामगारों के ऐसे बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पालन-पोषण एवं उपचार में सहयोग देना है।
योजना के अनुसार, जिन कामगारों के बच्चों में 50 प्रतिशत या उससे अधिक शारीरिक या मानसिक दिव्यांगता होती है, उन्हें हर महीने 2000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है, जिससे परिवारों को नियमित आर्थिक सहयोग मिल सके। दिव्यांग बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त खर्च आता है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह सहायता शुरू की गई है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें निर्धारित की गई हैं। सबसे पहले, श्रमिक को निर्धारित क्लेम फॉर्म-15 में आवेदन करना अनिवार्य है। इसके साथ ही मेडिकल अथॉरिटी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र संलग्न करना जरूरी होगा। यह प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापित होना चाहिए, ताकि वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक ही योजना का लाभ पहुंच सके।
योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। ऐसी योजनाएं न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता भी बढ़ाती हैं। यह योजना श्रमिक परिवारों के लिए सहारा बनकर उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

डबवाली का ग्रीन प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में: गलियों में अतिक्रमण बन रहे ट्री-गार्ड, नगर परिषद के अधिकारी और पार्षद भी बेखबर


प्रोजेक्ट के बजट और टेंडर की ईओ और वाईस चेयरमैन को भी पूर्ण जानकारी नहीं, पार्षद बोले- ठेकेदार करेगा रख-रखाव



डबवाली (लहू की लौ) नगर परिषद डबवाली द्वारा शहर को हरा-भरा बनाने के लिए शुरू किया गया ग्रीन प्रोजेक्ट अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। बिना किसी ठोस योजना और जमीनी हकीकत को जाने तंग गलियों में लगाए जा रहे पौधे और उनके ऊपर लगे लोहे के ट्री-गार्ड शहरवासियों के लिए सुविधा के बजाय दुविधा बन गए हैं।

अतिक्रमण या हरियाली? एडवोकेट कुलदीप सिंह ने उठाए सवाल

वार्ड नंबर 21 बठिंडा रोड वाली गली के निवासी एडवोकेट कुलदीप सिंह ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी गली पहले ही तंग है, जहाँ दो से तीन फुट की थहडिय़ां (चबूतरे) बनी हुई हैं। अब नगर परिषद ने ठीक उनके आगे दो-दो फीट के ट्री-गार्ड लगाकर पौधे रोप दिए हैं। इससे गली इतनी संकरी हो गई है कि दो वाहनों का एक साथ गुजरना नामुमकिन है। कुलदीप सिंह ने तर्क दिया कि एक तरफ नगर परिषद अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर खुद गलियों में अवरोध पैदा कर अतिक्रमण को बढ़ावा दे रही है।


अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही

हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर नगर परिषद के शीर्ष अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है

ईओ सुरेंद्र कुमार उन्होंने इस प्रोजेक्ट के टेंडर और बजट के बारे में जानकारी होने से इनकार करते हुए सारा मामला जेई पर डाल दिया।

वाईस चेयरमैन अमनदीप बांसल का कहना है कि पौधे पार्षदों की डिमांड पर लग रहे हैं, लेकिन इसके नियम और खर्च के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

पार्षद सुनील छिन्दा ने दावा किया कि पौधे निवासियों की सलाह से लग रहे हैं और एक साल तक ठेकेदार इनका रख-रखाव करेगा, लेकिन बजट के बारे में उन्हें भी नहीं पता।



बिना प्लानिंग के चल रहा ग्रीन प्रोजेक्ट

सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कोई ग्राउंड सर्वे नहीं किया गया कि कहाँ पौधा लगाना सुरक्षित है और कहाँ इससे ट्रैफिक बाधित होगा। पार्षदों के कहने पर ठेकेदार मनमर्जी से ट्री-गार्ड लगा रहा है। शहरवासियों का कहना है कि वे हरियाली के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पौधे ऐसी जगह लगाए जाने चाहिए जहाँ वे हादसों का सबब न बनें। सवाल यह उठता है कि जब अधिकारियों को बजट और टेंडर की जानकारी ही नहीं है, तो यह प्रोजेक्ट किस आधार पर और किस पारदर्शिता के साथ चल रहा है?

2 March 2026





 

28 फ़रवरी 2026

अस्पताल में भर्ती श्रमिक को न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मिलती है आर्थिक सहायता

उपचार हेतु न्यूनतम चार दिन भर्ती रहने पर मिलती है सहायता राशि

सिरसा, 28 फरवरी।
हरियाणा श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत कामगारों के लिए चिकित्सा सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रमिकों को प्रचलित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर सहायता प्रदान की जाएगी। यदि कोई पंजीकृत श्रमिक दुर्घटना या गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाता है, तो उसे उपचार के दौरान आर्थिक राहत देने का प्रावधान किया गया है, ताकि इलाज के समय उसकी आय रुकने से परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े।

इस योजना के अनुसार, श्रमिक को सरकारी अस्पताल अथवा सरकार द्वारा अनुमोदित निजी अस्पताल में भर्ती होकर उपचार कराना आवश्यक है। उपचार हेतु अस्पताल में कम से कम चार दिनों और अधिकतम 30 दिनों तक भर्ती रहना अनिवार्य है। इसी अवधि के आधार पर उसकी न्यूनतम मजदूरी की भरपाई की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक को इलाज के दौरान आय के अभाव में कठिनाई न झेलनी पड़े।

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। सबसे पहले, श्रमिक को क्लेम फॉर्म-20 में आवेदन करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, अस्पताल में भर्ती होने का प्रमाण-पत्र क्लेम फॉर्म के साथ संलग्न करना होगा। इस प्रकार यह योजना श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में श्रमिकों को आर्थिक सहारा मिलेगा और वे बिना चिंता के अपना उपचार करवा सकेंगे।

28 Feb. 2026