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युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

22 जुलाई 2026

निजी प्ले स्कूलों का पंजीकरण अनिवार्य, स्कूल संचालक सरल पोर्टल पर करें आवेदन : डॉ. दर्शना सिंह

- महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक ने एनसीपीसीआर दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित मानकों की पालना सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

सिरसा, 22 जुलाई।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा निजी प्ले स्कूलों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक डॉ. दर्शना सिंह ने जिले के सभी निजी प्ले स्कूल संचालकों से अपील की है कि वे हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल के माध्यम से अपने संस्थान का शीघ्र पंजीकरण करवाएं तथा एनसीपीसीआर द्वारा जारी निजी प्ले स्कूलों के नियामक दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित चेक लिस्ट के सभी मानकों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक निजी प्ले स्कूल में निर्धारित आधारभूत सुविधाओं एवं सुरक्षा मानकों का होना अनिवार्य है। विभाग की टीम द्वारा स्कूलों के निरीक्षण के दौरान एनसीपीसीआर दिशा-निर्देशों एवं सरल पोर्टल पर निर्धारित चेक लिस्ट के अनुसार सभी बिंदुओं का सत्यापन किया जाएगा।

यह सुविधाएं करें सुनिश्चित
डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि विभागीय निरीक्षण टीम द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ निजी प्ले स्कूलों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं एवं दस्तावेजों से संबंधित कमियां पाई गई हैं। ऐसे सभी संचालक इन आपत्तियों का शीघ्र निराकरण करते हुए अपने संस्थान में कम से कम तीन (03) कक्षाएं, विश्राम कक्ष, पुस्तकालय, कार्यालय कक्ष, बच्चों के लिए इनडोर एवं आउटडोर खेल क्षेत्र, बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्ले स्कूल में प्रशिक्षित शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ, स्टाफ का पुलिस सत्यापन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था एवं फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र, सीसीटीवी कैमरे, प्राथमिक उपचार, भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता प्रमाण-पत्र, नियमित स्वास्थ्य जांच, पॉक्सो एवं बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन, बाल हितैषी वातावरण, आवश्यक शिक्षण एवं खेल सामग्री एवं हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित अन्य सभी मानकों की अनुपालना अनिवार्य है।

नियमानुसार होगी कड़ी कार्रवाई
उन्होंने बताया कि जिन निजी प्ले स्कूलों ने अभी तक सरल पोर्टल पर पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है, वे बिना किसी विलंब के अपना ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें तथा यदि आवेदन में कोई कमी या आपत्ति लगाई गई है तो उसका समय रहते निराकरण करें, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण की जा सके। डॉ. दर्शना सिंह ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण संचालित किए जा रहे निजी प्ले स्कूलों अथवा निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सक्षम उच्च अधिकारियों की स्वीकृति उपरांत नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने सभी निजी प्ले स्कूल संचालकों से आग्रह किया कि छोटे बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास की जिम्मेदारी प्रत्येक संचालक की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संचालक बच्चों के सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए एनसीपीसीआर दिशा-निर्देशों एवं हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों की पालना सुनिश्चित करें तथा शीघ्र अपना पंजीकरण करवाएं।
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  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा निजी प्ले स्कूलों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक डॉ. दर्शना सिंह ने जिले के सभी निजी प्ले स्कूल संचालकों से अपील की है कि वे हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल के माध्यम से अपने संस्थान का शीघ्र पंजीकरण करवाएं तथा एनसीपीसीआर द्वारा जारी निजी प्ले स्कूलों के नियामक दिशानिर्देशों एवं निर्धारित चेक लिस्ट के सभी मानकों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक निजी प्ले स्कूल में निर्धारित आधारभूत सुविधाओं एवं सुरक्षा मानकों का होना अनिवार्य है। विभाग की टीम द्वारा स्कूलों के निरीक्षण के दौरान एनसीपीसीआर दिशा-निर्देशों एवं सरल पोर्टल पर निर्धारित चेक लिस्ट के अनुसार सभी बिंदुओं का सत्यापन किया जाएगा।

यह सुविधाएं करें सुनिश्चित
डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि विभागीय निरीक्षण टीम द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ निजी प्ले स्कूलों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं एवं दस्तावेजों से संबंधित कमियां पाई गई हैं। ऐसे सभी संचालक इन आपत्तियों का शीघ्र निराकरण करते हुए अपने संस्थान में कम से कम तीन (03) कक्षाएं, विश्राम कक्ष, पुस्तकालय, कार्यालय कक्ष, बच्चों के लिए इनडोर एवं आउटडोर खेल क्षेत्र, बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्ले स्कूल में प्रशिक्षित शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ, स्टाफ का पुलिस सत्यापन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था एवं फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र, सीसीटीवी कैमरे, प्राथमिक उपचार, भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता प्रमाण-पत्र, नियमित स्वास्थ्य जांच, पॉक्सो एवं बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन, बाल हितैषी वातावरण, आवश्यक शिक्षण एवं खेल सामग्री एवं हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित अन्य सभी मानकों की अनुपालना अनिवार्य है।

नियमानुसार होगी कड़ी कार्रवाई
उन्होंने बताया कि जिन निजी प्ले स्कूलों ने अभी तक सरल पोर्टल पर पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है, वे बिना किसी विलंब के अपना ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें तथा यदि आवेदन में कोई कमी या आपत्ति लगाई गई है तो उसका समय रहते निराकरण करें, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण की जा सके। डॉ. दर्शना सिंह ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण संचालित किए जा रहे निजी प्ले स्कूलों अथवा निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सक्षम उच्च अधिकारियों की स्वीकृति उपरांत नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने सभी निजी प्ले स्कूल संचालकों से आग्रह किया कि छोटे बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास की जिम्मेदारी प्रत्येक संचालक की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संचालक बच्चों के सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए एनसीपीसीआर दिशा-निर्देशों एवं हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों की पालना सुनिश्चित करें तथा शीघ्र अपना पंजीकरण करवाएं।

22 July 2026





 

21 जुलाई 2026

21 July 2026





 

10 से 45 वर्ष की किशोरी और महिलाओं को मिलेंगे निःशुल्क सेनिटरी नैपकिन, 31 जुलाई तक करें आवेदन

-महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘महिला एवं किशोरी सम्मान योजना’ के तहत मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने की पहल, नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र से करें संपर्क

सिरसा, 20 जुलाई। 
महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘महिला एवं किशोरी सम्मान योजना’ के तहत एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देना, महिलाओं और किशोरियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक मासिक धर्म प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराना तथा समाज में मासिक धर्म से जुड़े मिथकों और झिझक को समाप्त करना है।
योजना के तहत बीपीएल परिवारों की 10 से 45 वर्ष आयु वर्ग की सभी पात्र किशोरियों एवं महिलाओं को निःशुल्क सेनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग ने सभी पात्र लाभार्थियों से अपील की है कि वे 31 जुलाई तक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल http://117.251.82.30/mksy/ पर सेनिटरी नैपकिन की मांग अनिवार्य रूप से दर्ज करें। इसके साथ ही अपने निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र पर जाकर भी मांग प्रस्तुत करें, ताकि विभाग द्वारा समय पर सेनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जा सकें।
मासिक धर्म को लेकर आज भी कई हिस्सों में संकोच, गलत धारणाएं और सामाजिक मिथक मौजूद हैं। यही कारण है कि अनेक किशोरियां और महिलाएं पर्याप्त जानकारी और स्वच्छता संबंधी संसाधनों के अभाव में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस योजना को न केवल निःशुल्क सेनिटरी नैपकिन वितरण तक सीमित नहीं रखा है। बल्कि योजना के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता, संक्रमण से बचाव, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और सम्मानजनक जीवन शैली के प्रति जागरूक किया जाएगा।

समय सीमा के भीतर करें आवेदन
महिला एवं बाल विकास विभाग सिरसा की डिप्टी डायरेक्टर डॉ दर्शना सिंह ने बताया कि पात्र लाभार्थियों को 31 जुलाई तक अपनी मांग ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।  या स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र पर संपर्क करके भी आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। समय पर मांग दर्ज करने वाले लाभार्थियों को विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निःशुल्क सेनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी माताओं से विशेष अपील है कि वे अपने परिवार की किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करें। साथ ही उन्हें सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।
 
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सेनिटरी नैपकिन की उपलब्धता महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को राहत देने के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी मजबूती प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि ‘महिला एवं किशोरी सम्मान योजना’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सशक्तिकरण की दिशा में एक व्यापक पहल है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति के कारण कोई भी किशोरी या महिला मासिक धर्म स्वच्छता के आवश्यक साधनों से वंचित न रहे और प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकार की यह सुविधा समय पर पहुंचे।

17 जुलाई 2026

पराली न जलाने वाले किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे कृषि यंत्र

- तीन अगस्त तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

सिरसा, 17 जुलाई।
प्रदेश सरकार द्वारा फसल अवशेष (पराली) प्रबंधन को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोडऩे के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, सिरसा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए सीआरएम स्कीम के तहत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। विभाग ने पात्र किसानों से तीन अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है। इस योजना का उद्देश्य खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा किसानों को ऐसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है, जिससे फसल अवशेषों का खेत में ही बेहतर प्रबंधन किया जा सके। आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग से किसानों की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और अगली फसल की बुवाई भी समय पर संभव होगी।
इन कृषि यंत्रों पर मिलेगा अनुदान
योजना के तहत किसानों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चॉपर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लॉव, जीरो टिल सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल, बेलर, स्ट्रा रेक, स्वचालित क्रॉप रीपर, ट्रैक्टर चालित क्रॉप रीपर, ट्रैक्टर चालित लोडर तथा टेडर मशीन सहित कई आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। इन मशीनों के उपयोग से धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है। इससे खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और वायु प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होता है।
रेड एंट्री पर पीपीपी के किसी भी सदस्य को नहीं मिलेगा लाभ
कृषि विभाग के अनुसार जिन किसानों के नाम पिछले दो सीजन में पराली जलाने के कारण किसान के फार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज है, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे। इतना ही नहीं, उनकी परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से जुड़े किसी भी सदस्य को भी इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए यह भी आवश्यक है कि पिछले तीन वर्षों में उसी पीपीपी आईडी के किसी सदस्य ने इन कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त न किया हो। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के मामले में जिस कृषि यंत्र पर आवेदन किया जा रहा है, उस विशेष यंत्र पर पहले अनुदान प्राप्त नहीं किया गया होना चाहिए।
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
योजना का लाभ लेने के लिए किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर खरीफ एवं रबी 2025-26 के लिए पंजीकरण होना अनिवार्य है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण वाले किसानों के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक पात्र किसान केवल एक कृषि यंत्र पर ही अनुदान के लिए आवेदन कर सकेगा। पात्र किसान तीन अगस्त तक कृषि विभाग की वेबसाइट  www.agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सहायक कृषि अभियंता विजय कुमार ने बताया कि योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए किसान सहायक कृषि अभियंता, सिरसा कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। विभाग की किसानों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाकर आधुनिक कृषि यंत्र अपनाएं और पराली मुक्त, प्रदूषण मुक्त तथा टिकाऊ खेती की दिशा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

17 July 2026





 

एमएसएमई मंत्रालय देगा निशुल्क आवासीय कौशल प्रशिक्षण, 20 जुलाई तक करें आवेदन

सिरसा, 16 जुलाई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय एससी/एसटी हब तथा एम/ओ एमएसएमई की ओर से वर्ष 2026 के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नि:शुल्क रोजगारोन्मुख आवासीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
जिला कल्याण अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत जूनियर टेक्नीशियन-कम्प्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण दो माह की अवधि का होगा, जिसमें कुल 390 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के लिए अभ्यर्थी का कम से कम 10वीं पास होना आवश्यक है तथा न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के साथ मैट्रिक प्रमाण पत्र, अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड तथा रंगीन पासपोर्ट आकार का फोटो जमा करना होगा।
जिला कल्याण अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी एवं ऑनलाइन पंजीकरण के लिए  www.msmetcrohtak.org वेबसाइट पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए 9780011220, 7073809811 और 8699476940 नंबरों पर भी संपर्क किया जा सकता है।
फाइल फोटो : राकेश कुमार

14 जुलाई 2026

अब 24 जुलाई तक बीएलओ को जमा करवा सकते हैं गणना प्रपत्र


-प्रारम्भिक मतदाता सूची 31 जुलाई को होगी प्रकाशित, इसके बाद 30 अगस्त तक कर सकेंगे दावे और आपत्तियां
सिरसा, 14 जुलाई।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 में गणना प्रपत्र बीएलओ को जमा करवाने तथा डिजिटाइज करने की अवधि को 14 जुलाई से बढ़ाकर 24 जुलाई तक कर दी गई है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता प्रारम्भिक मतदाता सूची में शामिल होने अथवा अपने विवरण का सत्यापन कराने से वंचित न रहे।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि पुनरीक्षण कार्यक्रम के अनुसार अब बूथ लेवल अधिकारी 24 जुलाई तक गणना प्रपत्र के वितरण, संग्रहण, सत्यापन एवं डिजिटाइजेशन का कार्य जारी रखेंगे और अपने-अपने मतदान क्षेत्रों के शेष पात्र मतदाताओं से संपर्क कर गणना प्रपत्र प्राप्त करेंगे । इसके अतिरिक्त, प्रारम्भिक मतदाता सूची 31 जुलाई को प्रकाशित की जाएगी तथा दावें एवं आपत्तियों की अवधि तिथि 31 जुलाई से 30 अगस्त रहेगी। वहीं मतदाता सूचियों का अन्तिम प्रकाशन तीन अक्टूबर को किया जाएगा। उन्होंने शेष सभी मतदाताओं से अपील की कि जिन्होने अभी तक अपना गणना प्रपत्र वापिस बीएलओ को जमा नहीं कराया है, वे विस्तारित तिथि का लाभ उठाते हुए शीघ्र अपना गणना प्रपत्र भरकर संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को उपलब्ध कराएं अथवा निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन माध्यम से भी जमा करें। 
उन्होंने बताया कि यदि इस विस्तारित अवधि में भी मतदाता द्वारा गणना प्रपत्र जमा नहीं करवाया गया तो 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली प्रारम्भिक मतदाता सूची में शामिल नही होगा । प्रवक्ता ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना तथा मतदाता सूची को अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाना है। इसलिए सभी मतदाता इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें और अपने परिवार के प्रत्येक पात्र सदस्य का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित कराएं। पुनरीक्षण कार्यक्रम एवं अन्य जानकारी के लिए संबंधित जिला निर्वाचन कार्यालय, बूथ लेवल अधिकारी अथवा 1950 पर संपर्क किया जा सकता है।

दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मिलेगा 50 लाख तक का शिक्षा ऋण

-हरियाणा पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम की योजना से जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

सिरसा, 14 जुलाई।
दिव्यांग विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने के लिए सरकार ने उच्च शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शिक्षा ऋण योजना लागू की है। हरियाणा पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम के माध्यम से पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को भारत और विदेश के शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए 50 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी दिव्यांग विद्यार्थी प्रवेश लेने के बाद अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। वर्तमान समय में उच्च शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार की यह योजना ऐसे विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें बेहतर शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ाने का प्रयास है। योजना का लाभ भारत के साथ-साथ विदेशों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों को भी मिलेगा।

आवेदन के लिए यह है पात्रता
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। उसकी दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए। सामान्य श्रेणी के आवेदकों की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जबकि मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष रखी गई है। आवेदक के पास भारत या विदेश के किसी मान्यता प्राप्त व्यावसायिक अथवा तकनीकी पाठ्यक्रम में प्रवेश होना चाहिए। इसके अतिरिक्त परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है। यदि शिक्षा ऋण की राशि 15 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तहत जारी यूडीआईडी पंजीकरण भी अनिवार्य रहेगा। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक की ऋण राशि के अनुसार उसके पास डेढ़ गुणा परिसंपत्ति भी होना आवश्यक है। योजना के तहत भारत और विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को ट्यूशन फीस, शैक्षणिक खर्च और अध्ययन से जुड़े अन्य आवश्यक व्ययों की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।

आवेदन के लिए चाहिए ये आवश्यक दस्तावेज
आवेदन करते समय आवेदक को पहचान, नागरिकता एवं आयु का प्रमाण, आधार कार्ड, हरियाणा का अधिवास प्रमाण-पत्र, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट फोटो, परिवार पहचान पत्र, प्रवेश पत्र, कोर्स की अवधि का विवरण, संबंधित संस्थान की फीस संरचना तथा पिछली शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्र जमा करने होंगे। निगम द्वारा समय-समय पर इस शिक्षा ऋण योजना के तहत आवेदन मांगे जाते हैं। योग्य आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे समय- समय पर विभाग की वेबसाइट https://hbews.org.in/ का विजिट करते हुए योजना संबंधित और अधिक जानकारी प्राप्त करते हुए निर्धारित आवेदन तिथि में अप्लाई करें।

पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम के जिला प्रबंधक धर्मेंद्र खोथ ने कहा कि यह योजना दिव्यांग को शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे और समाज की मुख्यधारा में अधिक प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे। निगम की पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हुए आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करें और इस योजना का लाभ उठाएं।

14 July 2026





 

12 जुलाई 2026

पट्टे पर तालाब- जलाशय लेने वाले मत्स्य पालकों को दूसरे से पांचवें साल तक भी मिलेगी लीज राशि पर सब्सिडी

- अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेगा लाभ


सिरसा, 12 जुलाई।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा पंचायती तालाब और सरकारी जलाशयों को पट्टे पर लेने वाले पट्टेदारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। विभाग की तरफ से अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बंधित पट्टेदारों को पहले साल की लीज राशि पर तो सहायता दी ही जाती है, इसके अलावा दूसरे से पांचवें वर्ष की लीज़ राशि पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, ताकि मत्स्य पालक अपने व्यवसाय को जारी रखते हुए अपने कार्यक्षेत्र में और बेहतर आमदनी प्राप्त कर सके।

यह है अनिवार्य शर्त
योजना का लाभ लेने के लिए प्रार्थी के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा लाभार्थी हरियाणा राज्य का स्थाई निवासी व अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बन्धित होना चाहिए। लाभार्थी को पट्टा राशी पर अनुदान द्वितीय वर्ष से 5 वर्ष तक ही प्रदान किया जाएगा। प्रति लाभार्थी के हिसाब से अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही अनुदान योजना का लाभ दिया जाएगा। आवेदक की आयु 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। प्रार्थी किसी भी सरकारी या अर्ध सरकारी संस्था में कार्यरत भी नहीं होना चाहिए। लाभार्थी को इस योजना के तहत 40 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर अथवा पट्टे की वास्तविक राशि का 40 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा। यह अनुदान केवल पंचायती तालाबों व सरकारी जलाशयों पर ही प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा अधिसूचित जलक्षेत्र नदी नालों व नहरों की बोली उपरांत भी सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पाँच लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। 

यह चाहिए आवश्यक दस्तावेज़
योजना का लाभ लेने के लिए मत्स्य पालक एवं विभाग के बीच हुए अनुबंध पत्र की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा मत्स्य पालन के लिए मत्स्य पालक एवं पंचायत के बीच हुए अनुबंध पत्र भी लगाना होगा। वहीं जन्मतिथि व पहचान का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी के पास किसी भी सरकारी संस्थान से मत्स्य प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र भी होना चाहिए। इसके अलावा भूमि का रिकार्ड जैसे पंचायत का प्रस्ताव दस्तावेज और पंचायत की पट्टा रसीद, राजकीय व राष्ट्रीय मत्स्य बीज फार्म से मत्स्य बीज की खरीद की रसीद या वाउचर भी उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही साइट या तालाब से संबंधित फ़ोटो भी प्रस्तुत करनी होगी।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि इस योजना के तहत पट्टेदारों को लीज राशि पर सब्सिडी मिलने से उनकी कार्यक्षमता में विस्तार होगा और अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायक साबित हो सकती है।

12 July 2026





 

सजावटी मछली पालन के लिए आठ लाख रुपये की परियोजना लागत पर मिलेगी 4.80 लाख रुपये तक सब्सिडी

सिरसा, 11 जुलाई। 

स्वरोजगार को बढ़ावा देने और मत्स्य क्षेत्र में नए विकल्प विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 'मध्यम पैमाने की ताजा पानी की सजावटी मछली पालन' इकाइयों की स्थापना के लिए सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को शेड, प्रजनन इकाइयों और पालन एवं संवर्धन टैंकों जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत प्रति इकाई परियोजना लागत आठ लाख रुपये निर्धारित की गई है जिस पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को लागत का 40 प्रतिशत अर्थात अधिकतम 3 लाख 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं अनुसूचित जाति और महिला लाभार्थियों के लिए यह सहायता लागत का 60 प्रतिशत यानि अधिकतम 4 लाख 80 हजार रुपये तक होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पारंपरिक खेती के साथ सजावटी मछली पालन को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपना सकेंगे।

पर्याप्त जल आपूर्ति व 150 वर्ग मीटर खाली भूमि हो
योजना का लाभ केवल हरियाणा के स्थायी निवासियों को मिलेगा। आवेदक के पास वैध परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा पर्याप्त जल आपूर्ति के साथ कम से कम 150 वर्ग मीटर खाली भूमि उपलब्ध होनी चाहिए। भूमि स्वयं की हो या कम से कम सात वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत पट्टे पर ली गई हो, तभी आवेदन स्वीकार किया जाएगा। आवेदन के साथ लाभार्थी और विभाग के बीच समझौता पत्र, जन्म एवं पहचान प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मत्स्य पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि अभिलेख या पंजीकृत पट्टा विलेख, बिल एवं वाउचर, इकाई के साथ लाभार्थी का फोटो, बैंक खाते का विवरण, पैन कार्ड तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जमा करानी होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस वित्तीय सहायता से इच्छुक लोग कम निवेश में अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ सजावटी मछली उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। सजावटी मछली पालन पारंपरिक खेती के मुकाबले अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बन सकता है। कम भूमि में भी इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है और उचित प्रबंधन के साथ अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। सरकार की यह पहल युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सजावटी मछली उत्पादन को बढ़ावा देना, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना तथा मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। इच्छुक पात्र लाभार्थी जिले के मत्स्य पालन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।