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युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

16 मार्च 2026

16 March 2026





 

मत्स्य पालन में क्षति का डर दूर करेगी पीएम-एमकेएसएस योजना

जलकृषि को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की पहल, पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत होगा जलकृषि बीमा

सिरसा, 15 मार्च।
मत्स्य पालन और जलकृषि से जुड़े किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के अंतर्गत जलकृषि बीमा योजना लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जलकृषि से जुड़े किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, रोगों और अन्य जोखिमों से होने वाले नुकसान से बचाना तथा उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसके माध्यम से मछली पालन करने वाले किसानों को बीमा सुरक्षा देकर उनके व्यवसाय को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस योजना के तहत जलकृषि बीमा करवाने पर किसानों को एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। बीमा प्रीमियम पर सरकार की ओर से लगभग 40 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मत्स्य पालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

योजना के अंतर्गत जलीय कृषि फार्म के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें जल फार्म के लिए बीमा प्रीमियम का लाभ किसानों को दिया जाता है, जिसमें प्रति हेक्टेयर बीमा कवर की सीमा 25 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र तक किसानों को एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिल सकता है। यदि किसी किसान का फार्म एक हेक्टेयर से कम है, तो उसे प्रो-राटा आधार पर सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अलावा योजना में गहन जलीय कृषि फार्म को भी शामिल किया गया है। इसके तहत केज कल्चर, आरएएस, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक तकनीकों से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। इन इकाइयों के लिए भी बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध है और पात्र इकाइयों के लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाता है। योजना के तहत पात्र इकाई का अधिकतम आकार लगभग 1800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है।

बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस कवर के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, दुर्घटनाओं और अन्य अनिश्चित घटनाओं से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। इसके साथ-साथ बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार अतिरिक्त जोखिमों को भी कवर किया जा सकता है, जिससे मत्स्य पालकों को व्यापक सुरक्षा मिलती है। योजना के लाभ के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूर करवाएं।

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि सरकार की यह पहल मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे जलकृषि से जुड़े किसानों को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसान राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-1660 पर संपर्क कर सकते हैं या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

15 मार्च 2026

15 March 2026





 

पानी बचाओ, 8000 रुपये प्रति एकड़ भी पाओ


जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना, किसानों को मिलेगी 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि
सिरसा, 14 मार्च।
हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूमिगत जल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को धान की पारंपरिक फसल के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि धान जैसी अधिक पानी खपत करने वाली फसलों के स्थान पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनमें पानी की कम आवश्यकता हो और किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त हो सके।

इस योजना के तहत जो किसान धान की फसल को छोड़कर उसकी जगह वैकल्पिक फसलों की बुवाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 8000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी।

योजना के अंतर्गत किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार, बागवानी फसलें, सब्जियां, खरीफ की दालें, खरीफ तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलें उगा सकते हैं। इसके अलावा यदि किसान खेत को खाली भी छोड़ते हैं तो भी उन्हें इस योजना का लाभ मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इन फसलों की खेती से पानी की खपत कम होगी और कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ बन सकेगी।

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के दौरान किसानों को अपनी भूमि और बोई जाने वाली फसल का पूरा विवरण देना होता है। इसके आधार पर ही कृषि विभाग द्वारा पात्र किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए धान की खेती की जगह वैकल्पिक फसलों को अपनाएं और सरकार की इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इससे न केवल प्रदेश में पानी की बचत होगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि संभव हो सकेगी।

प्रदेश सरकार की यह पहल भविष्य की खेती को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो हरियाणा में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

13 मार्च 2026

कार्यस्थल पर दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को मिलेगी 5 लाख की वित्तीय मदद

सिरसा, 13 मार्च।

हरियाणा श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत कामगारों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत यदि किसी पंजीकृत कामगार की कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है, तो श्रम विभाग द्वारा उसके नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
श्रम विभाग के अनुसार इस योजना के लिए केवल वहीं कामगारों पात्र होंगे जिनका विभाग में नियमित पंजीकरण होना आवश्यक है। दुर्घटना की स्थिति में सहायता राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित मामले में एफआईआर की प्रति तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट जमा करवाना अनिवार्य है। इसके साथ ही मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र भी आवश्यक दस्तावेजों में शामिल है।
विभागीय प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जाती है। जांच पूरी होने के बाद अधिकारी की अनुशंसा रिपोर्ट के आधार पर नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके लिए प्रार्थी को क्लेम फॉर्म-18 के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य होता है। सरकार की इस योजना का उद्देश्य संकट की घड़ी में श्रमिक परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करना है।

13 March 2026





 

हरी खाद व दलहन फसलों की बिजाई पर किसानों को मिलेंगे 1000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन


- फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू, ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर 15 अप्रैल तक करें पंजीकरण
सिरसा, 12 मार्च।
किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत धान की रोपाई से पहले खेत में हरी खाद (ढैंचा) या दलहनी फसलों की बिजाई करने वाले किसानों को प्रदेश सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह से शुरू हो चुकी है और किसान 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। योजना के तहत ढैंचा के अलावा समर मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन और ग्वार जैसी दलहन फसलें भी शामिल की गई हैं। किसान इन फसलों के बीज खुले बाजार से खरीदकर बिजाई कर सकते हैं। प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए किसानों को पोर्टल पर अपनी फसल की फोटो भी अपलोड करनी होगी।
पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 अप्रैल से 15 मई के बीच कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर फसल का भौतिक सत्यापन करेंगे। सत्यापन के बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी।
कृषि के उपनिदेशक डॉ. सुखदेव सिंह ने बताया कि हरी खाद और दलहन फसलों की बिजाई से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और भूमि की उर्वरता में सुधार होता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और फसल की पैदावार भी बेहतर होती है। कृषि विभाग ने किसानों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है।

11 मार्च 2026

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को प्रमाणित बीजों पर मिलता है अनुदान

सिरसा, 11 मार्च।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों पर अनुदान प्रदान किया जाता है। योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराकर फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस योजना के तहत किसानों को गेहूं, बाजरा और धान आदि के प्रमाणित बीजों पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाता है। वहीं जौ के प्रमाणित बीजों पर 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो पाते हैं, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बीज खरीद सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से पैक्स, सहकारी समितियां, हरियाणा सीड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को प्रमाणित बीज अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
कृषि विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि प्रमाणित बीजों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और रोगों से बचाव की संभावना भी बढ़ जाती है। साथ ही इससे किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
किसानों से अपील है कि वे योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और प्रमाणित बीजों का उपयोग करें। किसान अपने नजदीकी सहकारी संस्थान या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

11 March 2026





 

10 मार्च 2026

व्यापारियों को मिलेगी आर्थिक सुरक्षा, आगजनी या प्राकृतिक आपदा से नुकसान पर 20 लाख तक मिलेगी राशि

- हरियाणा सरकार की व्यापारियों के लिए बड़ी पहल: दो बीमा योजनाओं के लिए आवेदन शुरू, 31 मार्च तक करें पंजीकरण

सिरसा, 10 मार्च।
हरियाणा सरकार ने राज्य के व्यापारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और व्यापारिक माहौल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण बीमा योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के माध्यम से व्यापारियों को दुर्घटना या सामान के नुकसान की स्थिति में वित्तीय सहायता दी जाएगी।
सरकार द्वारा शुरू की गई पहली योजना मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना है। इस योजना के तहत यदि किसी व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो सरकार की ओर से उसके परिवार को 5 लाख रुपये तक की बीमा सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारी को केवल 50 रुपये शुल्क देकर पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।
दूसरी योजना मुख्यमंत्री व्यापारी क्षतिपूर्ति योजना है, जिसके अंतर्गत किसी व्यापारी के माल या स्टॉक को आगजनी या प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ राज्य के पंजीकृत व्यापारियों को उनके वार्षिक टर्नओवर के आधार पर मिलेगा। योजना के तहत 0 से 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जाएगा, जबकि 20 से 50 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 10 लाख रुपये तक का कवर मिलेगा।
इसी प्रकार 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 15 लाख रुपये तक और 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को 20 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इन श्रेणियों के अनुसार वार्षिक पंजीकरण शुल्क क्रमश: 100 रुपये, 500 रुपये, 1500 रुपये और 2500 रुपये निर्धारित किया गया है।
इन योजनाओं के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल  http://htwbhry.in के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार ने इन योजनाओं के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की है। इन योजनाओं से व्यापारियों को जोखिम से सुरक्षा मिलेगी और राज्य में व्यापार तथा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

10 March 2026





 

विपदा की घड़ी में सरकार बन रही सहारा, श्रमिक की मृत्यु पर मिलती है दो लाख की सहायता

सिरसा, 09 मार्च।

हरियाणा में श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए हरियाणा श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत कामगारों के परिवारों के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। इसी कड़ी में सरकार द्वारा पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि श्रमिक परिवारों को कठिन समय में आर्थिक सहारा मिले। इस योजना के तहत यदि किसी पंजीकृत श्रमिक की किसी भी कारण से मृत्यु हो जाती है, तो उसके नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
हरियाणा सरकार की इस पहल का लाभ उन कामगारों के परिवारों को मिलेगा जो श्रम विभाग में नियमित रूप से पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार, श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में परिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें तय की गई हैं ताकि सहायता राशि सही पात्र व्यक्ति तक पहुंच सके। योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि कामगार का श्रम विभाग में नियमित पंजीकरण हो। इसके साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जिस व्यक्ति को सहायता राशि दी जानी है, उसे नामांकित या कानूनी उत्तराधिकारी होने का प्रमाण पत्र भी देना होगा।
आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए क्लेम फॉर्म-18 में आवेदन करना अनिवार्य है। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करने के बाद विभाग द्वारा जांच की जाती है और पात्र पाए जाने पर लाभार्थी को दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह योजना श्रमिकों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। अचानक होने वाली मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में यह सहायता काफी मददगार साबित होती है।

06 मार्च 2026

प्राकृतिक खेती अपनाने पर मिल रहा आर्थिक प्रोत्साहन


सिरसा, 06 मार्च।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाली प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। इसके तहत किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे वे आसानी से प्राकृतिक खेती अपना सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी उपकरण और संसाधनों की खरीद पर भी सहायता उपलब्ध है। यदि किसान प्राकृतिक खेती के लिए चार ड्रम खरीदता है, तो उसे 3000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। योजना में देसी पशुपालन को भी बढ़ावा दिया गया है। यदि कोई किसान देसी गाय खरीदता है, तो उसे प्रति गाय 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। देसी गाय का गोबर और गौमूत्र प्राकृतिक खेती में जैविक खाद और कीटनाशक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को विभाग के पोर्टल एग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर पंजीकरण करना आवश्यक है। पंजीकरण के बाद किसान योजना से जुड़ी सहायता और अनुदान का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

6 March 2026





 

05 मार्च 2026

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सरकार दे रही 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन

सिरसा, 05 मार्च।

हरियाणा सरकार द्वारा श्रम विभाग के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद प्रतिमाह 1000 रुपये की पेंशन प्रदान की जाती है। सरकार की यह पहल उन श्रमिकों के लिए राहत भरी है, जो जीवन भर मेहनत करने के बाद बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं।
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा, जो हरियाणा श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण कामगार हैं। योजना के अनुसार, श्रमिक को कम से कम तीन वर्ष तक नियमित रूप से बोर्ड का सदस्य रहना अनिवार्य है और यह सदस्यता 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले की होनी चाहिए। इसके अलावा श्रमिक के पहचान पत्र में पंजीकरण शुल्क तथा अंशदान की अदायगी का रिकॉर्ड दर्ज होना भी आवश्यक है।
पंजीकरण के समय श्रमिक को अपनी आयु प्रमाणित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रति भी जमा करवानी होती है। इस योजना का उद्देश्य निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है। लंबे समय तक मेहनत करने वाले श्रमिकों के लिए यह पेंशन उनके जीवन-यापन में मददगार साबित होती है। इससे उन्हें बुढ़ापे में अपने खर्चों को पूरा करने में सहायता मिलती है।
गौरतलब है कि यह पेंशन सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग द्वारा दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन के अतिरिक्त दी जाती है। यानी पात्र श्रमिकों को राज्य सरकार की अन्य पेंशन योजनाओं के साथ-साथ इस योजना का लाभ भी मिल सकता है। हरियाणा सरकार की इस योजना से राज्य के हजारों निर्माण श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

5 March 2026