-28 सितंबर तक लागू रहेगी योजना, सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया देय राशियों के निपटान का होगा प्रावधान
सिरसा, 01 जून।
हरियाणा सरकार द्वारा व्यापारियों के लिए एकमुश्त निपटान योजना-2026 लागू की गई है जिसका उद्देश्य विभिन्न कर अधिनियमों के अंतर्गत लंबित बकाया कर मामलों का निपटान करना तथा अदालतों में लंबित विवादों को कम करना है। यह योजना एक जून से 28 सितंबर तक लागू रहेगी। योजना के तहत सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया देय राशियों के निपटान का प्रावधान किया गया है। जिन करदाताओं पर किसी संबंधित अधिनियम के तहत किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है, उन्हें आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में संबंधित वर्ष का पूरा कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: माफ कर दिया जाएगा।
हरियाणा सरकार द्वारा व्यापारियों के लिए एकमुश्त निपटान योजना-2026 लागू की गई है जिसका उद्देश्य विभिन्न कर अधिनियमों के अंतर्गत लंबित बकाया कर मामलों का निपटान करना तथा अदालतों में लंबित विवादों को कम करना है। यह योजना एक जून से 28 सितंबर तक लागू रहेगी। योजना के तहत सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया देय राशियों के निपटान का प्रावधान किया गया है। जिन करदाताओं पर किसी संबंधित अधिनियम के तहत किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है, उन्हें आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में संबंधित वर्ष का पूरा कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: माफ कर दिया जाएगा।
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त अंजू सिंह ने बताया कि कोई भी पात्र करदाता किसी भी अधिनियम के अंतर्गत किसी भी वर्ष के बकाया कर के निपटान के लिए आवेदन कर सकता है। विशेष रूप से हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत पुराने बकाया मामलों में एक लाख रुपये से अधिक कर बकाया वाले मामलों को 70 प्रतिशत तक कर छूट प्रदान की जाएगी, जबकि ब्याज एवं जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त अंजू सिंह ने व्यापारियों से अपील की कि वे इस योजना का अधिकतम लाभ उठाकर अपने पुराने कर विवादों और बकाया मामलों का निपटान करें।
वैधानिक प्रपत्रों के मामलों के समाधान के लिए विशेष प्रावधान
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने बताया कि विभिन्न वैधानिक प्रपत्रों जैसे फॉर्म-सी, फॉर्म-एफ, फॉर्म-एच, फॉर्म-ई1, फॉर्म-ई2, टैक्स इनवॉइस, वैट-सी4, वैट-डी1 तथा वैट-डी2 आदि जमा न होने के कारण बड़ी संख्या में कर बकाया लंबित हैं। ऐसे मामलों के समाधान के लिए योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि करदाता निर्धारित अवधि में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर देता है तो उसकी कर देयता में नियमानुसार राहत प्रदान की जाएगी। हालांकि यह लाभ फर्जी दस्तावेजों अथवा जिन मामलों में आपराधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है, उन पर लागू नहीं होगा।
लाख रुपये तक के कर बकाया पर 100 प्रतिशत कर छूट
अन्य अधिनियमों के अंतर्गत बकाया कर राशि पर भी चरणबद्ध छूट का प्रावधान किया गया है। एक लाख रुपये तक के कर बकाया पर 100 प्रतिशत कर छूट, एक लाख से 10 लाख रुपये तक के मामलों में 60 प्रतिशत, 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक के मामलों में 50 प्रतिशत, एक करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत, दस करोड़ से तीन करोड़ तक 35 प्रतिशत, तीस करोड़ से साठ करोड़ तक तीस प्रतिशत है। तथा साठ करोड़ से अधिक पर कर छूट का प्रावधान नहीं है, सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा।
तीन किस्तों में कर सकते हैं भुगतान
जिन मामलों में करदाता ने बकाया राशि निर्धारण आदेश के विरुद्ध अपील या मुकदमा दायर किया हुआ है, वे भी लंबित अपील या मुकदमे वापस लेने की शर्त पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना के अंतर्गत भुगतान की सुविधा भी आसान बनाई गई है। पांच लाख रुपये तक की निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा। पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की राशि के लिए दो समान किस्तों तथा 25 लाख रुपये से अधिक की राशि के लिए तीन किस्तों में भुगतान का प्रावधान रखा गया है।
जिन मामलों में करदाता ने बकाया राशि निर्धारण आदेश के विरुद्ध अपील या मुकदमा दायर किया हुआ है, वे भी लंबित अपील या मुकदमे वापस लेने की शर्त पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना के अंतर्गत भुगतान की सुविधा भी आसान बनाई गई है। पांच लाख रुपये तक की निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा। पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की राशि के लिए दो समान किस्तों तथा 25 लाख रुपये से अधिक की राशि के लिए तीन किस्तों में भुगतान का प्रावधान रखा गया है।



















































