Adsense

Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

12 जुलाई 2026

पट्टे पर तालाब- जलाशय लेने वाले मत्स्य पालकों को दूसरे से पांचवें साल तक भी मिलेगी लीज राशि पर सब्सिडी

- अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेगा लाभ


सिरसा, 12 जुलाई।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा पंचायती तालाब और सरकारी जलाशयों को पट्टे पर लेने वाले पट्टेदारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। विभाग की तरफ से अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बंधित पट्टेदारों को पहले साल की लीज राशि पर तो सहायता दी ही जाती है, इसके अलावा दूसरे से पांचवें वर्ष की लीज़ राशि पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, ताकि मत्स्य पालक अपने व्यवसाय को जारी रखते हुए अपने कार्यक्षेत्र में और बेहतर आमदनी प्राप्त कर सके।

यह है अनिवार्य शर्त
योजना का लाभ लेने के लिए प्रार्थी के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा लाभार्थी हरियाणा राज्य का स्थाई निवासी व अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बन्धित होना चाहिए। लाभार्थी को पट्टा राशी पर अनुदान द्वितीय वर्ष से 5 वर्ष तक ही प्रदान किया जाएगा। प्रति लाभार्थी के हिसाब से अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही अनुदान योजना का लाभ दिया जाएगा। आवेदक की आयु 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। प्रार्थी किसी भी सरकारी या अर्ध सरकारी संस्था में कार्यरत भी नहीं होना चाहिए। लाभार्थी को इस योजना के तहत 40 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर अथवा पट्टे की वास्तविक राशि का 40 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा। यह अनुदान केवल पंचायती तालाबों व सरकारी जलाशयों पर ही प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा अधिसूचित जलक्षेत्र नदी नालों व नहरों की बोली उपरांत भी सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पाँच लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। 

यह चाहिए आवश्यक दस्तावेज़
योजना का लाभ लेने के लिए मत्स्य पालक एवं विभाग के बीच हुए अनुबंध पत्र की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा मत्स्य पालन के लिए मत्स्य पालक एवं पंचायत के बीच हुए अनुबंध पत्र भी लगाना होगा। वहीं जन्मतिथि व पहचान का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी के पास किसी भी सरकारी संस्थान से मत्स्य प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र भी होना चाहिए। इसके अलावा भूमि का रिकार्ड जैसे पंचायत का प्रस्ताव दस्तावेज और पंचायत की पट्टा रसीद, राजकीय व राष्ट्रीय मत्स्य बीज फार्म से मत्स्य बीज की खरीद की रसीद या वाउचर भी उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही साइट या तालाब से संबंधित फ़ोटो भी प्रस्तुत करनी होगी।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि इस योजना के तहत पट्टेदारों को लीज राशि पर सब्सिडी मिलने से उनकी कार्यक्षमता में विस्तार होगा और अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायक साबित हो सकती है।

12 July 2026





 

सजावटी मछली पालन के लिए आठ लाख रुपये की परियोजना लागत पर मिलेगी 4.80 लाख रुपये तक सब्सिडी

सिरसा, 11 जुलाई। 

स्वरोजगार को बढ़ावा देने और मत्स्य क्षेत्र में नए विकल्प विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 'मध्यम पैमाने की ताजा पानी की सजावटी मछली पालन' इकाइयों की स्थापना के लिए सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को शेड, प्रजनन इकाइयों और पालन एवं संवर्धन टैंकों जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत प्रति इकाई परियोजना लागत आठ लाख रुपये निर्धारित की गई है जिस पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को लागत का 40 प्रतिशत अर्थात अधिकतम 3 लाख 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं अनुसूचित जाति और महिला लाभार्थियों के लिए यह सहायता लागत का 60 प्रतिशत यानि अधिकतम 4 लाख 80 हजार रुपये तक होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पारंपरिक खेती के साथ सजावटी मछली पालन को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपना सकेंगे।

पर्याप्त जल आपूर्ति व 150 वर्ग मीटर खाली भूमि हो
योजना का लाभ केवल हरियाणा के स्थायी निवासियों को मिलेगा। आवेदक के पास वैध परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा पर्याप्त जल आपूर्ति के साथ कम से कम 150 वर्ग मीटर खाली भूमि उपलब्ध होनी चाहिए। भूमि स्वयं की हो या कम से कम सात वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत पट्टे पर ली गई हो, तभी आवेदन स्वीकार किया जाएगा। आवेदन के साथ लाभार्थी और विभाग के बीच समझौता पत्र, जन्म एवं पहचान प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मत्स्य पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि अभिलेख या पंजीकृत पट्टा विलेख, बिल एवं वाउचर, इकाई के साथ लाभार्थी का फोटो, बैंक खाते का विवरण, पैन कार्ड तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जमा करानी होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस वित्तीय सहायता से इच्छुक लोग कम निवेश में अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ सजावटी मछली उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। सजावटी मछली पालन पारंपरिक खेती के मुकाबले अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बन सकता है। कम भूमि में भी इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है और उचित प्रबंधन के साथ अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। सरकार की यह पहल युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सजावटी मछली उत्पादन को बढ़ावा देना, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना तथा मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। इच्छुक पात्र लाभार्थी जिले के मत्स्य पालन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।