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युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

21 अप्रैल 2026

स्व-गणना में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें आमजन


- सरपंचों, ग्राम सचिवों और विद्यार्थियों को स्व-गणना अभियान में योगदान के लिए किया प्रेरित
सिरसा, 21 अप्रैल।
जिले में जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान के अंतर्गत सीएमके महाविद्यालय में छात्राओं को, बीडीपीओ कार्यालय में सरपंचों व ग्राम सचिवों को तथा आरोही स्कूल नाथूसरी चौपटा में विद्यार्थियों को स्व-गणना अभियान में योगदान के लिए प्रेरित किया।
डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर हिमांशु शर्मा ने बताया कि नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल के माध्यम से सुरक्षित रूप से अपने परिवार का डाटा दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल 16 अप्रैल से शुरू हो चुका है और निर्धारित अवधि तक उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि सफलतापूर्वक फॉर्म जमा करने पर प्रत्येक परिवार को एक यूनिक 11 अंकों की स्व-गणना आईडी प्राप्त होगी, जिसे बाद में सत्यापन के दौरान जनगणना प्रगणक को दिखाना होगा। उन्होंने बताया कि स्व-गणना के लिए पहले मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा और लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर देकर 15 से 20 मिनट में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे घर-घर जाकर होने वाली जनगणना के दौरान लंबी पूछताछ से भी राहत मिलेगी।
सहायक ललित कुमार ने बताया कि जिलावासी 30 अप्रैल तक स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें। यह सुविधा पहली बार जनगणना में दी गई है, जिससे नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह भारत की पहली पूर्णतः: डिजिटल जनगणना होगी, इसमें जनगणना कर्मी मोबाइल ऐप के माध्यम से डाटा संग्रह करेंगे और जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपडेट होगी। जो लोग ऑनलाइन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे, उनके लिए पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। आमजन आधुनिक और सरल प्रक्रिया का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय रहते स्व-गणना कर जनगणना 2027 को सफल बनाने में अपना योगदान दें।

पीएम स्वनिधि योजना: रेहड़ी-फड़ी संचालकों के लिए आसान ऋण, सब्सिडी और डिजिटल प्रोत्साहन से आत्मनिर्भर बनाने की पहल

सिरसा, 21 अप्रैल।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शहरी क्षेत्रों में कार्यरत रेहड़ी-फड़ी (स्ट्रीट वेंडर्स) के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना विशेष रूप से छोटे कारोबारियों के लिए शुरू की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें वित्तीय समावेशन के तहत लाना और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आसान ऋण उपलब्ध करवाना है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जाता है। पहले चरण में 15 हजार तक का ऋण 12 महीनों के लिए, दूसरे चरण में 25 हजार तक का ऋण 18 महीनों के लिए और तीसरे चरण में 50 हजार तक का ऋण 36 महीनों के लिए दिया जाता है। यदि लाभार्थी समय पर ऋण चुकता करता है, तो वह अगले चरण के अधिक राशि वाले ऋण के लिए पात्र बन जाता है।
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है, जो सीधे उनके खाते में तिमाही आधार पर जमा की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक की सुविधा भी दी गई है, जिससे वेंडर्स को प्रति माह और प्रति वर्ष निर्धारित सीमा तक प्रोत्साहन मिलता है। योजना में यूपीआई से जुड़े रूपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी शामिल की गई है, जिसकी प्रारंभिक सीमा 10 हजार रुपये होती है और इसे बढ़ाकर 80 हजार रुपये तक किया जा सकता है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक है, जिसके माध्यम से लाभार्थियों के परिवारों को अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही, ‘सपोर्ट टू अर्बन स्ट्रीट वेंडर्स’ के तहत वेंडर्स की पहचान, प्रमाण पत्र जारी करना और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाते हैं। 

21 April. 2026





 

पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार दे रही लाखों की सहायता


सिरसा, 20 अप्रैल।
हरियाणा में बागवानी किसानों को उद्यान विभाग द्वारा फसल तुड़ाई के बाद प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना, फसल की उचित रखरखाव करना और उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाना है।
योजना के तहत विभिन्न प्रकार की इकाइयों पर लाखों की सहायता दी जाएगी। फार्म गेट पैक हाउस के लिए प्रति इकाई 25 लाख रुपये लागत निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 12.50 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं, ग्रेडिंग लाइन सहित एकीकृत पैक हाउस पर 160 लाख रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत सहायता दी जायेगी, जो अधिकतम प्रति इकाई 56 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड, इसके अलावा, भंडारण, ग्रेडिंग और पैकिंग इकाइयों पर 320 लाख रुपये की लागत के हिसाब से 35 प्रतिशत (अधिकतम 112 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) का प्रावधान है। प्री-कूलिंग यूनिट पर 5 लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन लागत के आधार पर 35 प्रतिशत सहायता दी जाएगी, जबकि चलित प्री-कूलिंग यूनिट पर 30 लाख रुपये प्रति इकाई लागत पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 10.5 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) तय किया गया है।
इसी तरह शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) के लिए भी इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं।  वहीं, सौर ऊर्जा आधारित शीत गृह को भी योजना में शामिल किया गया है, जिसे अन्य इकाइयों के साथ जोड़ा जा सकता है और इस पर भी 35 प्रतिशत सहायता बैंक ऋण के आधार पर उपलब्ध होगी।
इन योजनाओं से किसानों को फसल के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, भंडारण क्षमता बढ़ेगी और उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर दाम मिल सकेंगे। यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ते हुए उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।