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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

29 जून 2026

नेशनल टीचर अवॉर्ड-2026 के लिए पांच जुलाई तक करें आवेदन


अलग-अलग श्रेणी अनुसार दिए जाएंगे कुल 35 पुरस्कार,  विजेता को पदक, प्रमाण पत्र और 50,000 रुपये की दी जाएगी राशि


सिरसा, 29 जून।

शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण पेश करने वाले टीचर्स के योगदान को मान्यता देने और उनके समर्पण एवं परिश्रम का सम्मान करने हेतु राष्ट्रीय टीचर्स अवॉर्ड 2026 के तहत आवेदन मांगे गए हैं। यह पुरस्कार शिक्षण-अधिगम, सामुदायिक सेवा, संस्थागत सेवा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीनता लाने वाले कार्यों में शिक्षकों की अनूठी और पथप्रदर्शक उपलब्धियों को मान्यता और सम्मान प्रदान करता है। योजना के तहत चयनित विजेताओं को 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और एक असाधारण शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य पर सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार तकनीकी और गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थानों के उत्कृष्ट शिक्षकों/संकाय सदस्यों को प्रदान किया जाएगा। जिसमें व्यापक विषयों के आधार पर इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, फार्मेसी, कला एवं सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषाएँ, विधि अध्ययन, वाणिज्य, प्रबंधन आदि को शामिल किया गया है। इसमें उच्च शिक्षा से संबंधित कोई अन्य विषय या उभरता हुआ ज्ञान क्षेत्र भी शामिल होगा। यह पुरस्कार संस्थानों के अनुकरणीय शिक्षकों/संकाय सदस्यों को प्रदान किया जाएगा, जिनकी कुल संख्या 35 होगी।  प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक पदक, प्रमाण पत्र और 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।


यह रहेगी पात्रता

यह पुरस्कार देश में स्थित कॉलेजों/विश्वविद्यालयों/उच्च शिक्षण संस्थानों/पॉलीटेक्निक के सभी संकाय सदस्यों के लिए है, लेकिन उन्हें कुछ शर्तों का पालन करना होगा।जैसे- नामांकित व्यक्ति नियमित संकाय सदस्य होना चाहिए। पॉलिटेक्निक और/या स्नातक और/या स्नातकोत्तर स्तर पर कम से कम पांच वर्ष का पूर्णकालिक शिक्षण अनुभव होना चाहिए। पुरस्कारों के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि तक आवेदक की आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। कुलपति/निदेशक/प्रधानाचार्य (नियमित या कार्यवाहक) आवेदन करने के पात्र नहीं हैं। हालांकि, वे व्यक्ति जो पहले ऐसे पदों पर रह चुके हैं, लेकिन 55 वर्ष से कम आयु के हैं और अभी भी सक्रिय सेवा में हैं, वे आवेदन करने के पात्र हैं। पूर्व में यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले नागरिक आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।


पोर्टल पर होगा अप्लाई, इन पॉइंट का रखें ध्यान

इच्छुक टीचर्स राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल 222.ड्ड2ड्डह्म्स्रह्य.द्दश1.द्बठ्ठ पर पांच जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पुरस्कार से संबंधित सभी नियम व शर्तों की जानकारी भी इस पोर्टल के माध्यम से ले सकते हैं। योजना के तहत कैरियर प्रोफाइल, बेहतर समुदायों और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले नवाचार/स्टार्ट-अप, कक्षा शिक्षण और मूल्यांकन की प्रभावशीलता और वितरण में सुधार के लिए उठाए गए कदम, छात्रों को रटने की पद्धति से मुक्त और मौलिक विचारक बनाने के लिए किए गए प्रयास, शिक्षण और अधिगम में कोई भी नवाचार जो नियमित कक्षा व्याख्यानों से परे हो, पूर्व निदेशक/प्रिंसिपल/प्रमुख/डीन/वार्डन/प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रमुख/कार्यक्रम समन्वयक के रूप में या किसी अन्य प्रशासनिक कर्तव्य के निष्पादन/पूर्ण करने के दौरान दिया गया योगदान, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों/खेलकूद/एनएसएस/एनसीसी गतिविधियों में योगदान, क्षेत्रीय/ग्रामीण विकास/विस्तार सेवाओं आदि में योगदान राज्य- राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त मान्यता पुरस्कार/इनाम। (कॉलेज स्तर के पुरस्कारों पर विचार नहीं किया जाएगा।) जैसे पॉइंट्स के आधार पर विचार किया जाएगा। निर्णायक मंडल चयन-सह-स्क्रीनिंग समितियों की सिफारिशों पर विचार करेगी और चयनित उम्मीदवारों के साथ ऑनलाइन माध्यम से व्यक्तिगत बातचीत के बाद प्रत्येक पुरस्कार श्रेणी के तहत विजेताओं को अंतिम रूप देगी।


म्हारी योजना कॉलम के लिए 

29 June 2026





 

बेसहारा पशु फिर बना काल : आवारा जानवर को बचाने के चक्कर में भाखड़ा नहर में गिरे दो ममेरे-फुफेरे भार्र्ईंं, 23 वर्षीय मनीष की डूबने से मौत

> संगरिया से मजदूरी कर लौट रहे थे युवक, अबूबशहर के पास पुलिया की ग्रिल से टकराकर हुआ हादसा

> 5 माह के दुधमुंहे बच्चे के सिर से उठा पिता का साया, रविवार को गोताखोरों ने निकाला मनीष का शव


डबवाली (लहू की लौ) सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा और आवारा पशु किस कदर आम बेकसूर नागरिकों के लिए काल बनते जा रहे हैं, इसका एक और बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला मामला शनिवार रात को सामने आया। गांव अबूबशहर के पास आवारा पशु को बचाने के प्रयास में मोटरसाइकिल सवार दो युवक अनियंत्रित होकर सीधे भाखड़ा नहर में जा गिरे। इस भीषण हादसे में एक 23 वर्षीय युवक की नहर के गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका फुफेरा भाई झाडिय़ों में फंसने के कारण बाल-बाल बच गया। मृतक अपने पीछे महज 5 महीने का दुधमुंहा बच्चा और रोता-बिलखता परिवार छोड़ गया है।

पशु को बचाते समय पुलिया की ग्रिल से टकराई बाइक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान के संगरिया क्षेत्र में इन दिनों पाइप लाइन जोडऩे का काम चल रहा है। डबवाली के गांव राजपुरा माजरा निवासी मनीष (23) पुत्र पप्पू अपने बुआ के लडक़े विनोद के साथ वहीं मजदूरी करता था। शनिवार रात को दोनों भाई काम खत्म करने के बाद मोटरसाइकिल पर सवार होकर वापस अपने गांव राजपुरा माजरा लौट रहे थे। जैसे ही वे अबूबशहर के पास भाखड़ा नहर के पुल पर पहुंचे, तो अचानक एक बेसहारा पशु उनकी बाइक के सामने आ गया। पशु से बचाने के चक्कर में जैसे ही उन्होंने एकदम से ब्रेक लगाई, मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सीधे नहर के पुल पर लगी लोहे की ग्रिल से जा टकराई और दोनों भाई उछलकर नहर में जा गिरे।


झाडिय़ों में अटका विनोद, मनीष गहरे पानी में डूबा

हादसे के दौरान विनोद तो नहर मेें उगी केलियों में फंस गया, जिससे उसकी जान बच गई। लेकिन मनीष सीधे नहर के तेज बहाव और गहरे पानी में जा गिरा और पलक झपकते ही डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और भारी संख्या में ग्रामीण व पुलिस मौके पर पहुंचे।


लोहगढ़ के गोताखोरों ने निकाला शव

मनीष की तलाश के लिए तुरंत रविवार सुबह लोहगढ़ से गोताखोरों की विशेष टीम को बुलाया गया। गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद रविवार सुबह मनीष के शव को नहर से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। जवान बेटे का शव देख पिता पप्पू, चाचा दर्शन लाल व मुख्तियार सिंह सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था।


चौटाला पुलिस ने की इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई

इस दर्दनाक हादसे और मौत की सूचना पाकर चौटाला पुलिस चौकी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने रविवार को शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। पुलिस जांच अधिकारी के अनुसार, मृतक मनीष के पिता पप्पू और अन्य परिजनों के बयानों के आधार पर इस मामले में नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाने के बाद इत्तेफाकिया (हादसा) मौत की कार्रवाई अमल में लाई गई है और शव वारिसों को सौंप दिया गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात न दिलाने पर प्रशासन के प्रति गहरा रोष जताया है।


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