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25 मार्च 2026

कम भाव मिलने की चिंता छोड़ें किसान, ‘भावांतर’ करेगी घाटे की भरपाई


- भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 फसलों के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित
- बाजार में फसल का कम भाव मिलने पर सरकार देगी संरक्षित मूल्य
सिरसा, 25 मार्च।
बागवानी किसानों की आय को सुरक्षित करने और उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग द्वारा भावांतर भरपाई योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न फसलों के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया है, ताकि बाजार में कम भाव मिलने की स्थिति में बागवानी किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी फसलों का समय अनुरूप  https://hortharyana.gov.in/  पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना आवश्यक है।
योजना के तहत कुल 21 फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से आलू, फूलगोभी, गाजर, मटर, टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च, बैंगन, भिंडी, मिर्च, घीया, करेला, बंदगोभी, मूली जैसी सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा फलों में किन्नू, अमरूद, आम, बेर और लीची जैसी फसलें भी योजना के दायरे में लाई गई हैं। मसाला फसलों में लहसुन और हल्दी को भी शामिल किया गया है।
सरकार द्वारा इन फसलों के लिए प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर आलू का 600 रुपये, फूलगोभी का 750 रुपये, मटर का 1100 रुपये तथा किन्नू का 1100 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार अमरूद, आम और अन्य फलों के लिए भी अलग-अलग दरें तय की गई हैं।
यदि बाजार में किसानों को उनकी फसल का मूल्य निर्धारित संरक्षित मूल्य से कम मिलता है, तो सरकार द्वारा अंतर की राशि सीधे किसानों को प्रदान की जाती है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल पाता है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनते हैं।
ऐसे मिलेगा योजना का लाभ
इस स्कीम का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार या किराये पर काश्तकार को भी मिलेगा। लाभ लेने के लिए जे-फार्म पर बिक्री अनिवार्य होगी। जे-फार्म पर बिक्री उपरांत बिक्री विवरण ई-पोर्टल (bby.hortharyana.gov.in) पर अपलोड होगा, जिसके लिए प्रत्येक संबंधित मार्केट कमेटी के कार्यालय में सुविधा उपलब्ध होगी। बिक्री की अवधि के दौरान यदि फसल उत्पादन का थोक मूल्य संरक्षित मूल्य से कम मिलता है, तो किसान फसल भाव के अंतर की भरपाई के लिए पात्र होगा। जे-फार्म पर बिक्री तथा निर्धारित उत्पादन प्रति एकड़ (जो भी कम होगा) को स्कीम की दिशा निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन देय होगा। भाव के अंतर से गुणा करने पर प्रोत्साहन देय होगा। प्रोत्साहन राशि किसान के आधार लिंक्ड बैंक खाते में दी जाएगी। औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड द्वारा चिन्हित मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर स्कीम के मानक और दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना और उन्हें न्यूनतम आय की सुरक्षा देना है। उन्होंने किसानों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक इस योजना का लाभ उठाएं और अपनी फसलों का पंजीकरण समय पर करवाएं, ताकि उन्हें योजना का पूरा फायदा मिल सके।

पंचायतों और नगर निकायों के विकास के रोडमैप में भागीदार बनें आम नागरिक

- सातवें राज्य वित्त आयोग ने मांगे सुझाव, गूगल फॉर्म के जरिए सब्मिट करें अपने आइडिया

सिरसा, 25 मार्च।

हरियाणा सरकार द्वारा सातवें राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है। आयोग के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए आम नागरिकों से सुझाव व विचार मांगे गए हैं। ताकि भविष्य का रोडमैप तैयार करते समय इन बहुमूल्य सुझावों को लागू करते हुए विकास योजनाएं तैयार की जा सके। जिले के नागरिक गूगल फॉर्म लिंक के जरिए अपने बहुमूल्य सुझाव दे सकते हैं।
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने बताया कि इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य हमारी पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की विकास परियोजनाओं को आमजन के द्वारा दिए गए बहुमूल्य सुझावों के साथ और अधिक सार्थक व मजबूत बनाना है। इसके लिए सरकार ने एक सहभागी और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाया है।
उन्होंने बताया कि अब जिले का कोई भी आम नागरिक, निर्वाचित प्रतिनिधि जैसे सरपंच, पंच, पार्षद, विषय विशेषज्ञ या समाजसेवी अपने अनुभव के आधार पर आयोग को सीधे अपनी राय भेज सकता है। इसके लिए आयोग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए विशेष गूगल फॉर्म तैयार किए हैं, ताकि सुझाव भेजने की प्रक्रिया सरल और सुलभ हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि आपके छोटे-छोटे सुझाव भविष्य में बड़े प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों का आधार बनेंगे, जिससे जन-जन का कल्याण सुनिश्चित होगा। इस पूरी प्रक्रिया में समन्वय और किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी के लिए आयोग के प्रतिनिधि युवराज सभ्रवाल से मोबाइल नंबर 94638-04009 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से इस महत्वपूर्ण कार्य में बढ़-चढक़र अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
शहरी व ग्रामीण विकास के लिए यहां दे सकते हैं अपनी राय
यदि आप शहरी क्षेत्र के विकास, स्वच्छता या बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए सुझाव देना चाहते हैं, तो आप इस लिंक  https://forms.gle/G5avsDt6QRGJtWLF8 का प्रयोग कर सकते हैं। वहीं, ग्राम पंचायतों के लिए और अधिक विकास और आत्मनिर्भर बनाने से जुड़े सुझाव देने के लिए  https://forms.gle/7nhzH7TBGdbydTAn6 लिंक जारी किया गया है।

25 March 2026





 

लसाड़ा नाला टूटने से डूमवाली में 125 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न, किसानों में हाहाकार

 

25 फीट चौड़ा पाड़ पड़ने से पकी हुई फसल बर्बाद; ग्रामीणों ने खुद ट्रैक्टर-ट्रालियों से भरा कटाव



डबवाली/डूमवाली (लहू की लौ): बेमौसमी बरसात और फैक्ट्रियों के गंदे पानी के दबाव के कारण ऐतिहासिक लसाड़ा नाला एक बार फिर कहर बनकर टूटा है। पंजाब के अंतिम छोर और हरियाणा की सीमा से सटे गांव डूमवाली में सोमवार देर रात नाला टूटने से करीब 25 फीट चौड़ा पाड़ (कटाव) लग गया, जिससे सवा सौ एकड़ में खड़ी गेहूं की पकी हुई फसल बर्बाद हो गई।

ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा: गांव डूमवाली के सरपंच दीपा के नेतृत्व में 100 से अधिक ग्रामीणों ने दिन-रात मेहनत कर ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से मिट्टी डालकर इस पाड़ को भरा। इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान भानू प्रताप सिंह, महिपाल सिंह, मनजीत सिंह और जगसीर सिंह की तैयार फसल पानी में डूब गई। सूचना मिलने पर बठिंडा प्रशासन की ओर से पटवारी और विभागीय अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया।

जोगेवाला में टला बड़ा खतरा: हरियाणा के गांव जोगेवाला के ग्रामीण पिछले सात दिनों से नाले पर पहरा दे रहे थे। ग्रामीण सुरजीत सिंह के अनुसार, यदि नाला हरियाणा की तरफ टूटता तो साल 2022 की तरह भारी तबाही मच सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल और थाना शहर प्रभारी देवीलाल ने भी मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

लसाड़ा नाले का इतिहास: 1963 में निर्मित 255 किमी लंबा यह नाला लुधियाना से शुरू होकर राजस्थान सीमा तक जाता है। इसका 200 किमी हिस्सा पंजाब और 55 किमी हरियाणा में आता है। हालांकि 1992 में हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में इसे बंद कर जमीन किसानों को लौटा दी थी, लेकिन हर साल ओवरफ्लो होने के कारण यह नाला विवादों और सुर्खियों में रहता है।