-2009 में स्थापित की कंपनी, 12 बेलर से हर सीजन में दो लाख क्विंटल पराली का कर रहे प्रबंधन, 60 से अधिक लोगों को दिया रोजगार
सिरसा, 15 अक्टूबर।खेतों में धान के फसल अवशेषों को आग लगाने से होने वाले नुकसान को देखते हुए बरूवाली प्रथम निवासी जितेंद्र सिंह संधू ने पराली प्रबंधन को रोजगार का माध्यम बना लिया। वर्ष 2009 में उन्होंने संधु एग्री वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी बनाई। आज उनके पास 12 बेलर हैं, जिनकी मदद से वह हर सीजन में दो लाख क्विंटल से अधिक पराली एकत्रित करते हैं। पराली की गांठें बनाकर भादरा पावर प्लांट सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति की जाती है। इस व्यवसाय से उनका सालाना कारोबार करीब नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
लुधियाना में पहली बार देखा बेलर, 2009 में खरीदी मशीन
स्नातक पास जितेंद्र सिंह संधू ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले लुधियाना में एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम दौरान बेलर मशीन देखी थी। इसकी कार्यप्रणाली और फसल अवशेषों के प्रबंधन की संभावनाओं को देखकर उन्होंने बेलर खरीदने का निर्णय लिया। वर्ष 2009 में पहली मशीन खरीदकर लाने के साथ ही उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया। जितेंद्र के पास 12 बेलर के अलावा 25 ट्रैक्टर अपने हैं। सीजन के दौरान काम बढ़ने पर उन्हें लगभग इतने ही ट्रैक्टर किराये पर लेने पड़ते हैं। उनके पास 40 से अधिक ट्रेलर हैं, जिनके माध्यम से खेतों से एकत्रित फसल अवशेषों को संबंधित औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता है। इस व्यवसाय के माध्यम से 60 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। पराली के साथ-साथ वह गेहूं के अवशेषों को भी एकत्रित करते हैं और उनकी गांठें बनाकर उपयोग के लिए भेजते हैं। इस तरह धान और गेहूं, दोनों फसलों के अवशेषों का समुचित प्रबंधन किया जा रहा है।
35 एकड़ जमीन के मालिक, कभी नहीं जलाई फसल अवशेषों में आग
जितेंद्र सिंह संधू के पास अपनी 35 एकड़ जमीन है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपने खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाए। पहले भी वह अवशेषों को खेत में मिलाकर उनका उपयोग करते रहे हैं। जब पराली जलाने से वातावरण में धुआं फैलने और प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी तो उन्होंने इस चुनौती के समाधान में योगदान देने के साथ इसे रोजगार के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। आज वह लगातार अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं और किसानों को फसल अवशेषों के निपटान का एक विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।
पराली में आग न लगाएं किसान, मित्र कीट भी होते हैं नष्ट
सहायक कृषि अभियंता डॉ. विजय जैन ने किसानों से धान के फानों को आग नहीं लगाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से जमीन में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिसका फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा आग से निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित करता है और प्रदूषण की समस्या बढ़ाता है। उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन की तकनीकें अपनाने तथा फसल अवशेषों का उचित उपयोग करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

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