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16 जून 2026
मत्स्य पालन : ई-प्लेटफॉर्म से और बेहतर होगी मार्केटिंग, सरकार भी दे रही सब्सिडी
सिरसा, 16 जून।
मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार द्वारा "मछली और मत्स्य उत्पादों के ई-ट्रेडिंग और ई-मार्केटिंग के लिए ई-प्लेटफॉर्म हेतु सब्सिडी योजना" संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मछली पालकों, उद्यमियों और मत्स्य उत्पादों से जुड़े व्यवसायियों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध करवाना है, ताकि वे अपने उत्पादों की बिक्री व्यापक स्तर पर कर सकें और बेहतर आय अर्जित कर सकें।योजना के तहत ऐसे लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है जो मछली और मत्स्य उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल एवं ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना चाहते हैं। सरकार द्वारा परियोजना की लागत के आधार पर उचित सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे आधुनिक विपणन व्यवस्था को बढ़ावा मिल सके और मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हों।
योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) होना अनिवार्य है। साथ ही लाभार्थी को यह वचनबद्धता पत्र देना होगा कि ई-प्लेटफॉर्म से जुड़ी सभी परिसंपत्तियों का संचालन, रखरखाव और निगरानी अनुदान प्राप्त करने के बाद कम से कम पांच वर्षों तक सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना प्रस्तावों पर विचार डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) अथवा एससीपी मॉडल के आधार पर किया जाएगा तथा परियोजना का आकार एवं व्यवहार्यता विभाग द्वारा मामले-दर-मामले के आधार पर तय की जाएगी।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को सीधे खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल मछली पालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि योजना के लिए आवेदन करते समय लाभार्थियों को पहचान प्रमाण के रूप में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड अथवा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), विभाग और लाभार्थी के बीच अनुबंध पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), बैंक खाते एवं पैन कार्ड का विवरण सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। सभी दस्तावेज विधिवत एवं पूर्ण होने पर ही आवेदन पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार से मछली पालन व्यवसाय को नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। योजना का लाभ उठाकर लाभार्थी आधुनिक विपणन तंत्र से जुड़ सकते हैं और अपने व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
15 जून 2026
सरकार 30 टन क्षमता के आइस प्लांट स्थापना पर दे रही अनुदान, मछलियों के सुरक्षित भंडारण को मिलेगा बढ़ावा
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आइस प्लांट स्थापना पर दिया जाता है आकर्षक अनुदान
सिरसा, 15 जून। मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त बनाने और मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आइस प्लांट एवं कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। योजना के अंतर्गत न्यूनतम 30 टन क्षमता के आइस प्लांट अथवा कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने वाले पात्र लाभार्थियों को अनुदान प्रदान किया जाएगा। यह योजना मछलियों के सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता संरक्षण तथा विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत लाभार्थी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आइस प्लांट अथवा कोल्ड स्टोरेज के संचालन, रखरखाव एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी वह स्वयं वहन करेगा। साथ ही इकाई को नियमित रूप से चालू रखना भी अनिवार्य होगा। लाभार्थी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि केंद्रीय सहायता से स्थापित इकाई में उत्पादित बर्फ मछुआरों और मत्स्य किसानों को उचित एवं रियायती दरों पर उपलब्ध करवाई जाए, जिससे उन्हें सीधे तौर पर लाभ मिल सके।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत स्थापित की जाने वाली इस इकाई के लिए सरकार द्वारा आकर्षक अनुदान का प्रावधान किया गया है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा। योजना के अनुसार 30 टन क्षमता वाले आइस प्लांट/स्टोरेज की इकाई लागत लगभग 120 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) होना आवश्यक है। इसके अलावा लाभार्थी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अथवा स्व-निहित प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। यदि परियोजना पट्टे की भूमि पर स्थापित की जानी है तो पट्टे की अवधि कम से कम 10 वर्ष होना अनिवार्य है। भूमि संबंधी सभी रिकॉर्ड, स्वामित्व अथवा वैध पट्टा दस्तावेज भी आवेदन के साथ प्रस्तुत करने होंगे।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि आवेदन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), बैंक खाते का विवरण, पैन कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, जीएसटी संबंधित दस्तावेज, परियोजना स्थल के फोटो तथा अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करवाने होंगे। इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विद्युत विभाग, अग्निशमन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृति और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना भी जरूरी होगा। उन्होंने बताया कि इस योजना से मत्स्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विकास होगा और मछलियों के संरक्षण एवं विपणन में सुधार आएगा। इससे मत्स्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा तथा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
14 जून 2026
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनाः पिंजरा मत्स्य पालन के लिए तीन लाख की लागत पर 60 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
-एक मत्स्य पालक 5 जबकि सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह और संयुक्त दायित्व समूह अधिकतम 20 पिंजरों तक होंगे वित्तीय सहायता के पात्र
सिरसा, 14 जून।मत्स्य पालन विभाग हरियाणा द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जलाशयों में पिंजरा मत्स्य पालन (केज कल्चर) को बढ़ावा देने के लिए किसानों और मत्स्य पालकों को अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। योजना के अंतर्गत जलाशयों में पिंजरे स्थापित कर मछली पालन करने वाले लाभार्थियों को इकाई लागत पर अनुदान दिया जाएगा। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जबकि अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों के लिए यह अनुदान 60 प्रतिशत तक निर्धारित किया गया है। प्रति यूनिट पिंजरा स्थापना की इकाई लागत 3 लाख रुपये तय की गई है।
यह है अनिवार्य शर्त
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा राज्य सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होगी। जलाशयों में पिंजरे स्थापित करने के लिए निर्धारित क्षेत्र में लगभग 8 मीटर गहराई और पूरे वर्ष पर्याप्त पानी उपलब्ध होना चाहिए। विदेशी मछली प्रजातियों के पालन के लिए भी सरकार से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक रहेगा। व्यक्तिगत किसान अधिकतम 5 पिंजरों तक सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जबकि न्यूनतम 10 सदस्यों वाली सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह और संयुक्त दायित्व समूह अधिकतम 20 पिंजरों तक वित्तीय सहायता के पात्र होंगे।
परियोजना रिपोर्ट भी होगी सब्मिट
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि योजना के लिए आवेदन करते समय लाभार्थियों को पहचान संबंधी दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), विभाग के साथ अनुबंध पत्र, मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, बिल एवं रसीदें, पिंजरों के साथ फोटो, बैंक खाता एवं पैन कार्ड विवरण सहित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। उन्होंने बताया कि यह योजना जलाशयों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। योजना के माध्यम से मछली उत्पादन में बढ़ोतरी होने से प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति में औऱ सुधार आएगा।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
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