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Lahoo Ki Lau
22 मार्च 2026
21 मार्च 2026
सरकारी कर्मचारी लगवाएं रूफटॉप सौलर, ब्याज मुक्त मिलेगी वित्तीय सहायता
- सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना, 5 किलोवाट तक मिलेगा लाभ
सिरसा, 21 मार्च।
राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना (एसयूपीवाई) लागू की है। इस योजना के तहत राज्य सरकार के कर्मचारी, निगम/बोर्ड/कॉर्पोरेशन के कर्मचारी तथा एचकेआरएन कर्मचारी (जिनकी नौकरी सुरक्षित है) अपने आवास पर 5 किलोवाट तक रूफटॉप सोलर (आरटीएस) सिस्टम स्थापित कर सकते हैं। योजना का लाभ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनका पिछले बिलिंग चक्र में कोई बकाया राशि नहीं है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र उपभोक्ताओं को बिजली विभाग द्वारा ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे 24/12 बिजली बिलों के माध्यम से (मासिक/द्वैमासिक बिलिंग के अनुसार) वसूल किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को एकमुश्त बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।
सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना के तहत 1 किलोवाट से 5 किलोवाट तक की क्षमता पर निर्धारित बेंचमार्क लागत तय की गई है। 1 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत 55 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को केवल पांच हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 30 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 19 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार 02 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत एक लाख 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 11 हजार रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 60 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 39 हजार रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा 03 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत एक लाख 65 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 16 हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 58 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 12 हजार रूपये वहन करने होंगे। इसी प्रकार 04 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत दो लाख 20 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 22 हजार रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 78 हजार रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 42 हजार रूपये वहन करने होंगे।
इसी प्रकार 05 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत दो लाख 75 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 27 हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 97 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 72 हजार रूपये वहन करने होंगे।
इस योजना के माध्यम से राज्य कर्मचारी उपभोक्ता अपनी बिजली लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सौर ऊर्जा से जोडकऱ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
20 मार्च 2026
सोलर ऊर्जा को बढ़ावा: सरकार दे रही सब्सिडी, अतिरिक्त बिजली बेचकर होगी आय
सिरसा, 20 मार्च।
केंद्र सरकार द्वारा पीएम सूर्य घर - मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। अंत्योदय परिवार जिनकी सालाना आय 1.80 लाख से कम है व जिनकी सालाना बिजली खपत 2400 युनिट तक है, वे दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 60 हजार रुपये व हरियाणा सरकार की ओर से 50 हजार रुपये अनुदान यानी कि कुल 1.10 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। जिन परिवारों की सालाना आय तीन लाख रुपये तक है व जिनकी सालाना बिजली खपत 2400 युनिट तक है वो परिवार दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 60 हजार रुपये व हरियाणा सरकार की ओर से 20 हजार रुपये का अनुदान यानी कि कुल 80 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद तीन किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 78 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
केंद्र सरकार का अनुदान सभी आय वर्गों के लोगों को दिया जाएगा यानि केंद्र का अनुदान लेने के लिए आय से संबंधित कोई शर्त नहीं है। इस योजना का लाभ लेने से बिजली बिल जीरो हो जाएगा और जो अतिरिक्त बिजली बचेगी, उस बिजली को भी सरकार खरीदेगी, जिससे उनकी अतिरिक्त आय होगा। केंद्र सरकार की यह बेहतरीन योजना है जिसके द्वारा समाज की हर वर्ग की ऊर्जा संबंधित जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। अगर खपत से ज्यादा बिजली का उत्पादन सोलर पैनल द्वारा किया जाता है तो वह बिजली के खाते में जाएगा जिसका भुगतान सरकार द्वारा उक्त मकान मालिक को किया जाएगा। इस योजना से सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों को अपनाने में मदद मिलेगी।
19 मार्च 2026
18 मार्च 2026
हैप्पी कार्ड से करें 1000 किलोमीटर तक नि:शुल्क यात्रा
एक लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के सदस्यों को मिलेगा लाभ
सिरसा, 18 मार्च।
हरियाणा सरकार द्वारा जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ‘हैप्पी कार्ड’ योजना के तहत अब वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम वाले परिवारों को हरियाणा रोडवेज की बसों में प्रतिवर्ष 1000 किलोमीटर तक नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है। योजना के तहत परिवार के प्रत्येक सदस्य को परिवहन विभाग की वेबसाइट https://ebooking.hrtransport. gov.in/ पर ऑनलाइन अप्लाई करना होता है, प्रत्येक सफल आवेदन के बाद एक रैफरेंस नंबर जनरेट होता है, इसके उपरांत विभाग द्वारा प्रत्येक सदस्य को एक स्वाइप कार्ड जारी किया जाता है। जिसके आधार पर हरियाणा रोडवेज की बस में निशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलती हैं। प्रत्येक कार्ड धारक पूरे एक साल में एक हजार किलोमीटर की अधिकतम निशुल्क यात्रा कर सकता है। पात्र लाभार्थी के आय की गणना फैमिली आईडी के आधार पर की जाती है। स्वाइप कार्ड प्राप्ति के दौरान आवेदक को निर्धारित शुल्क देना होता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को राहत प्रदान करना तथा उनकी दैनिक आवाजाही को आसान बनाना है। हैप्पी कार्ड के माध्यम से पात्र परिवारों को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से यात्रा का लाभ मिल रहा है, जिससे व्यवस्था में सुगमता आई है।
हरियाणा रोडवेज के महाप्रबंधक अनीत कुमार ने पात्र परिवारों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और हैप्पी कार्ड बनवाकर नि:शुल्क यात्रा सुविधा का लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी यात्रियों की सुविधा के लिए नवीन पहलें जारी रखी जाएंगी।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को राहत प्रदान करना तथा उनकी दैनिक आवाजाही को आसान बनाना है। हैप्पी कार्ड के माध्यम से पात्र परिवारों को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से यात्रा का लाभ मिल रहा है, जिससे व्यवस्था में सुगमता आई है।
हरियाणा रोडवेज के महाप्रबंधक अनीत कुमार ने पात्र परिवारों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और हैप्पी कार्ड बनवाकर नि:शुल्क यात्रा सुविधा का लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी यात्रियों की सुविधा के लिए नवीन पहलें जारी रखी जाएंगी।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
17 मार्च 2026
16 मार्च 2026
पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर दाह संस्कार के लिए श्रम विभाग द्वारा दी जाती है 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता
सिरसा, 16 मार्च।
प्रदेश में श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हरियाणा श्रम विभाग द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके दाह संस्कार के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत मृतक श्रमिक के नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहयोग मिल सके।कई बार श्रमिक परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में श्रमिक के अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा यह योजना शुरू की गई है, जिससे श्रमिक परिवारों को तत्काल राहत मिल सके। श्रमिक की मृत्यु होने के बाद उसका नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी विभाग में आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होते हैं, जिनके आधार पर सहायता राशि जारी की जाती है।
आवेदक के नामांकित या कानूनी उत्तराधिकारी को विभाग द्वारा निर्धारित क्लेम फॉर्म-17 में आवेदन करना भी अनिवार्य है। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र परिवार को 15 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
मत्स्य पालन में क्षति का डर दूर करेगी पीएम-एमकेएसएस योजना
जलकृषि को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की पहल, पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत होगा जलकृषि बीमा
सिरसा, 15 मार्च।
मत्स्य पालन और जलकृषि से जुड़े किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के अंतर्गत जलकृषि बीमा योजना लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जलकृषि से जुड़े किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, रोगों और अन्य जोखिमों से होने वाले नुकसान से बचाना तथा उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसके माध्यम से मछली पालन करने वाले किसानों को बीमा सुरक्षा देकर उनके व्यवसाय को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस योजना के तहत जलकृषि बीमा करवाने पर किसानों को एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। बीमा प्रीमियम पर सरकार की ओर से लगभग 40 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मत्स्य पालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
योजना के अंतर्गत जलीय कृषि फार्म के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें जल फार्म के लिए बीमा प्रीमियम का लाभ किसानों को दिया जाता है, जिसमें प्रति हेक्टेयर बीमा कवर की सीमा 25 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र तक किसानों को एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिल सकता है। यदि किसी किसान का फार्म एक हेक्टेयर से कम है, तो उसे प्रो-राटा आधार पर सहायता प्रदान की जाती है।
इसके अलावा योजना में गहन जलीय कृषि फार्म को भी शामिल किया गया है। इसके तहत केज कल्चर, आरएएस, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक तकनीकों से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। इन इकाइयों के लिए भी बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध है और पात्र इकाइयों के लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाता है। योजना के तहत पात्र इकाई का अधिकतम आकार लगभग 1800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है।
बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस कवर के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, दुर्घटनाओं और अन्य अनिश्चित घटनाओं से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। इसके साथ-साथ बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार अतिरिक्त जोखिमों को भी कवर किया जा सकता है, जिससे मत्स्य पालकों को व्यापक सुरक्षा मिलती है। योजना के लाभ के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूर करवाएं।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि सरकार की यह पहल मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे जलकृषि से जुड़े किसानों को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसान राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-1660 पर संपर्क कर सकते हैं या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
15 मार्च 2026
पानी बचाओ, 8000 रुपये प्रति एकड़ भी पाओ
जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना, किसानों को मिलेगी 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि
सिरसा, 14 मार्च।
हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूमिगत जल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को धान की पारंपरिक फसल के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि धान जैसी अधिक पानी खपत करने वाली फसलों के स्थान पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनमें पानी की कम आवश्यकता हो और किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त हो सके।
इस योजना के तहत जो किसान धान की फसल को छोड़कर उसकी जगह वैकल्पिक फसलों की बुवाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 8000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी।
योजना के अंतर्गत किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार, बागवानी फसलें, सब्जियां, खरीफ की दालें, खरीफ तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलें उगा सकते हैं। इसके अलावा यदि किसान खेत को खाली भी छोड़ते हैं तो भी उन्हें इस योजना का लाभ मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इन फसलों की खेती से पानी की खपत कम होगी और कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के दौरान किसानों को अपनी भूमि और बोई जाने वाली फसल का पूरा विवरण देना होता है। इसके आधार पर ही कृषि विभाग द्वारा पात्र किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए धान की खेती की जगह वैकल्पिक फसलों को अपनाएं और सरकार की इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इससे न केवल प्रदेश में पानी की बचत होगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि संभव हो सकेगी।
प्रदेश सरकार की यह पहल भविष्य की खेती को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो हरियाणा में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
14 मार्च 2026
13 मार्च 2026
कार्यस्थल पर दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को मिलेगी 5 लाख की वित्तीय मदद
सिरसा, 13 मार्च।
हरियाणा श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत कामगारों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत यदि किसी पंजीकृत कामगार की कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है, तो श्रम विभाग द्वारा उसके नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।श्रम विभाग के अनुसार इस योजना के लिए केवल वहीं कामगारों पात्र होंगे जिनका विभाग में नियमित पंजीकरण होना आवश्यक है। दुर्घटना की स्थिति में सहायता राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित मामले में एफआईआर की प्रति तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट जमा करवाना अनिवार्य है। इसके साथ ही मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र भी आवश्यक दस्तावेजों में शामिल है।
विभागीय प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जाती है। जांच पूरी होने के बाद अधिकारी की अनुशंसा रिपोर्ट के आधार पर नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके लिए प्रार्थी को क्लेम फॉर्म-18 के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य होता है। सरकार की इस योजना का उद्देश्य संकट की घड़ी में श्रमिक परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करना है।
हरी खाद व दलहन फसलों की बिजाई पर किसानों को मिलेंगे 1000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
सिरसा, 12 मार्च।
किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत धान की रोपाई से पहले खेत में हरी खाद (ढैंचा) या दलहनी फसलों की बिजाई करने वाले किसानों को प्रदेश सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह से शुरू हो चुकी है और किसान 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। योजना के तहत ढैंचा के अलावा समर मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन और ग्वार जैसी दलहन फसलें भी शामिल की गई हैं। किसान इन फसलों के बीज खुले बाजार से खरीदकर बिजाई कर सकते हैं। प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए किसानों को पोर्टल पर अपनी फसल की फोटो भी अपलोड करनी होगी।
पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 अप्रैल से 15 मई के बीच कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर फसल का भौतिक सत्यापन करेंगे। सत्यापन के बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी।
कृषि के उपनिदेशक डॉ. सुखदेव सिंह ने बताया कि हरी खाद और दलहन फसलों की बिजाई से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और भूमि की उर्वरता में सुधार होता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और फसल की पैदावार भी बेहतर होती है। कृषि विभाग ने किसानों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है।
12 मार्च 2026
11 मार्च 2026
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को प्रमाणित बीजों पर मिलता है अनुदान
सिरसा, 11 मार्च।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों पर अनुदान प्रदान किया जाता है। योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराकर फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।इस योजना के तहत किसानों को गेहूं, बाजरा और धान आदि के प्रमाणित बीजों पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाता है। वहीं जौ के प्रमाणित बीजों पर 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो पाते हैं, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बीज खरीद सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से पैक्स, सहकारी समितियां, हरियाणा सीड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को प्रमाणित बीज अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
कृषि विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि प्रमाणित बीजों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और रोगों से बचाव की संभावना भी बढ़ जाती है। साथ ही इससे किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
किसानों से अपील है कि वे योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और प्रमाणित बीजों का उपयोग करें। किसान अपने नजदीकी सहकारी संस्थान या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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