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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

17 अप्रैल 2026

स्व-गणना करने की प्रक्रिया, इसके महत्व के बारे में किया जागरूक

जनगणना 2027 : शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किए गए जागरूकता कार्यक्रम, अधिकारियों ने की अधिक से अधिक भागीदारी की अपील

सिरसा, 17 अप्रैल।
जनगणना-2027 के तहत जिला में स्व-गणना करने बारे जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत आम नागरिक घर बैठे मोबाइल के माध्यम से जानकारी भर सकते हैं। जनगणना से संबंधित डाटा स्वयं द्वारा भरे जाने की प्रक्रिया सरल सटीक और पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगी। इस प्रक्रिया के तहत 30 अप्रैल तक नागरिक अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। सांख्यकीय विभाग द्वारा इस संबंध में आमजन को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल, अनाजमंडी सिरसा तथा राजकीय महिला महाविद्यालय सहित विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों को स्व-गणना प्रक्रिया, इसके महत्व और पोर्टल के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। राजकीय महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शत्रुजीत सिंह ने बताया कि स्व-गणना से नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर मिलता है, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थी अपने अभिभावकों को स्व-गणना के लिए प्रेरित करें।
वहीं डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह पहल डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे जनगणना प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि स्व-गणना के तहत नागरिक स्वयं ही 30 अप्रैल तक पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण भर सकेंगे। उन्होंने बताया कि स्व गणना के उपरांत 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का आयोजन किया जाएगा।
यह है स्व-गणना की आसान प्रक्रिया:
सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (एसइडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन -  se.census.gov.in) पर जाएं। इसके बाद अपने मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लॉगिन करें। अपना राज्य, जिला और स्थानीय क्षेत्र चुनें। डिजिटल मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिन्हित करें। इसके बाद मकान एवं परिवार से संबंधित पूर्ण जानकारी भरें। तत्पश्चात सबमिशन करें। सबमिशन के बाद एक एसई आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखें और प्रगणक आने पर यह आईडी उनके साथ साझा करें। इसके बाद प्रगणक आप द्वारा दर्ज की गई जानकारी की पुष्टि करेंगे। यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रहेगी।
इस अवसर पर उपप्राचार्य डॉ. विक्रम जीत सिंह, प्रेस प्रवक्ता डॉ. कपिल कुमार सैनी, डॉ. रुपिंदर कौर, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. शिवानी, किरण बाला, डॉ. मनीषा गर्ग, किरण सरदाना, मुकेश कुमार, मुकेश सुथार और लिपिक ललित कुमार सहित अन्य स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे।

वर्टिकल फार्मिंग को बढावा देने, पॉली हाउस-ग्रीन हाउस के लिए सरकार दे रही 85 प्रतिशत तक अनुदान

सिरसा, 17 अप्रैल।

प्रदेश के किसानों के लिए संरक्षित खेती और वर्टिकल फार्मिंग को बढ़ावा देने, आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे पॉली हाउस, ग्रीन हाउस और हाइड्रोपोनिक्स अपनाने वाले किसानों को उद्यान विभाग द्वारा 85 प्रतिशत तक  अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके और वे बेमौसम सब्जियों व फलों का उत्पादन कर सकें।
इन योजनाओं के तहत प्राकृतिक रूप से पॉलीहाउस, हाई-टेक ग्रीन हाउस, वॉक-इन टनल, शेड नेट हाउस, प्लास्टिक टनल, एंटी-इंसेक्ट नेट हाउस और बंबू/बेलन आधारित नेट हाउस जैसी संरचनाओं पर 50 प्रतिशत से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित वर्ग के किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलेगा, जबकि अनुसूचित जाति के भूमि पट्टा धारकों को 65 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। अधिकतम अनुदान सीमा 2500 वर्ग मीटर तक निर्धारित की गई है।
इसके अतिरिक्त, संरक्षित खेती से जुड़े अन्य आवश्यक घटकों जैसे एरोपोनिक्स यूनिट, हाइड्रोपोनिक इकाई, हाई-टेक नर्सरी, एंटी हेल नेट, बेड तैयार करने का सामान, मल्चिंग प्लास्टिक, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक टनल आदि पर भी 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार संभव हो सके।
सहायता योजनाओं में मधुमक्खी पालन, फसल संरक्षण, जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत विभिन्न उपकरणों और सामग्रियों पर निर्धारित सीमा तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसानों का खर्च कम हो और उत्पादन लागत में कमी आए।
विभाग द्वारा किसानों के लिए बड़े स्तर पर संरचनाओं के निर्माण जैसे पौधशालाओं में वॉक-इन टनल और नेट हाउस स्थापित करने के लिए भी विशेष अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पुराने पॉलीहाउस और नेट हाउस की मरम्मत व क्लैडिंग शीट बदलने के लिए भी 70 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पहले से स्थापित संरचनाओं का पुन: उपयोग किया जा सके।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। संरक्षित खेती और नवीन तकनीकों के उपयोग से किसान कम भूमि पर अधिक उत्पादन कर सकते हैं और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

17 April. 2026





 

14 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के तहत मिलती है 5 लाख रुपये तक की सहायता

सिरसा, 14 अप्रैल।

हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से किसानों और खेतीहर मजदूरों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के अंतर्गत किसानों, खेतीहर मजदूरों, मार्केट यार्ड में काम करने वाले मजदूरों को कृषि मशीनरी पर कार्य करने के दौरान मृत्यु या अंगहानि होने पर 37,500 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है। इनमें कृषि मशीनरी, औजार, उपकरण या यंत्रों के उपयोग के दौरान हुई दुर्घटनाएं, कुआं खोदते या ट्यूबवेल लगाने के समय हादसे, गन्ना क्रशर, चाफ कटर या थ्रेशर चलाते समय दुर्घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कुआं खोदते या संचालन के दौरान जहरीली गैस से होने वाली दुर्घटनाएं, बिजली करंट लगने से होने वाली घटनाएं, कृषि उपज को वाहन में ले जाते समय पशु, बैलगाड़ी, ट्रक या अन्य वाहन से दुर्घटना, कीटनाशक, पेस्टिसाइड या खरपतवार नाशक दवाओं के उपयोग से नुकसान, मार्केट यार्ड में माल उतारते या तोलते समय दुर्घटनाएं तथा सांप या अन्य जहरीले जीवों के काटने से मृत्यु भी इस योजना में शामिल हैं।

सहायता राशि के रूप में विभिन्न स्थितियों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5,00,000 रुपये की सहायता दी जाती है। रीढ़ की हड्डी टूटने या अन्य कारणों से स्थायी अपंगता की स्थिति में 2,50,000 रुपये दिए जाते हैं। दो अंगों या दोनों आंखों की पूर्ण हानि या गंभीर चोट की स्थिति में 1,87,500 रुपये तथा एक अंग की हानि या स्थायी गंभीर चोट पर 1,25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा पूरी उंगली कटने पर 75,000 रुपये और आंशिक उंगली क्षति पर 37,500 रुपये की सहायता दी जाती है।

14 April. 2026





 

12 अप्रैल 2026

हरियाणा उद्यान विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन पर 75 से 85 प्रतिशत तक दिया जा रहा है अनुदान, किसानों के लिए सुनहरा अवसर

सिरसा, 12 अप्रैल।

प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग की इस योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन से जुड़े विभिन्न उपकरणों और इकाइयों पर 75 से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत मधुमक्खी बक्सों पर प्रति बक्सा 2,250 रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को लगभग 1,707.59 रुपये प्रति बक्सा अनुदान मिलेगा। इस योजना में अधिकतम 50 बक्सों तक अनुदान का लाभ लिया जा सकता है।
इसके अलावा, 8 फ्रेम वाली मधुमक्खी कॉलोनी के लिए प्रति कॉलोनी 2,000 रुपये की लागत तय की गई है। इस पर किसानों को करीब 1,700 रुपये प्रति कॉलोनी अनुदान दिया जाएगा। इस श्रेणी में भी अधिकतम 50 कॉलोनियों तक सहायता प्रदान की जाएगी।
मधुमक्खी पालन उपकरणों पर भी सरकार द्वारा विशेष सहायता दी जा रही है। उपकरणों की लागत 18 रुपये से लेकर 21,280 रुपये तक निर्धारित है, जिसमें किसानों को 11.44 रुपये से लेकर 14,250 रुपये प्रति यूनिट तक अनुदान मिलेगा।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि मधुमक्खी पालन न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत है, बल्कि यह फसलों के परागण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। इस योजना का लाभ लेकर किसान कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की यह योजना खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

12 April. 2026





 

11 अप्रैल 2026

बागवानी किसानों को एकीकृत पैक हाउस और फसल समूह केंद्र पर छह करोड़ तक मिलता है अनुदान

सिरसा,उद्यान विभाग हरियाणा द्वारा “खेती पर मदद व विपणन प्रोत्साहन योजना” के तहत बागवानी किसानों को भारी अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है।


इस योजना के अंतर्गत “एकीकृत पैक हाउस एवं फसल समूह केंद्र” स्थापित करने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजना की कुल लागत एक करोड रुपये से लेकर 6 करोड रुपये तक निर्धारित की गई है, जिसमें किसानों को इसी सीमा तक अनुदान राशि भी दी जाएगी।

योजना में किसानों के समूह (सदस्यों) के आधार पर अनुदान की अधिकतम सीमा तय की गई है। यदि किसी परियोजना में 25 सदस्य शामिल होते हैं तो उन्हें अधिकतम एक करोड रुपये तक का अनुदान मिलेगा। वहीं 50 सदस्यों के लिए यह सीमा दो करोड रुपये, 75 सदस्यों के लिए तीन करोड रुपये और 100 सदस्यों के लिए चार करोड रुपये तक होगी।

इसके अलावा, 125 सदस्यों वाले समूह को पांच करोड रुपये और 150 सदस्यों के समूह को अधिकतम छह करोड रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इस तरह अधिक सदस्यों के जुड़ने पर अनुदान की राशि भी बढ़ती जाएगी।

जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इस योजना से किसानों को अपनी फसल की बेहतर पैकेजिंग, भंडारण और मार्केटिंग में मदद मिलेगी। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य भी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि सरकार की यह पहल बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

11 April. 2026





 

09 अप्रैल 2026

वैकल्पिक खेती के तौर पर मशरूम को अपनाएं किसान, 85 प्रतिशत तक सरकार दे रही अनुदान

सिरसा, 09 अप्रैल।

किसानों की आय बढ़ाने और वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उद्यान विभाग, हरियाणा द्वारा मशरूम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनुदान सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग-अलग स्तर पर मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण और संरचना निर्माण के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
ट्रे आधारित मशरूम उत्पादन पर अनुदान, बटन मशरूम के अलावा अन्य किस्मों पर सहायता
मशरूम ट्रे पर 300 रुपये प्रति ट्रे की इकाई लागत निर्धारित की गई है। इस पर सामान्य क्षेत्रों में 75 प्रतिशत से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके तहत किसानों को 225 रुपये प्रति ट्रे की सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 100 ट्रे (सामान्य वर्ग) तथा 255 रुपये प्रति ट्रे (अनुसूचित वर्ग) तक निर्धारित है। बटन मशरूम के अलावा अन्य मशरूम ट्रे पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसमें 300 रुपये प्रति ट्रे की लागत पर 150 रुपये प्रति ट्रे की सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 100 ट्रे तक रखी गई है।
कम लागत वाली शेड संरचना पर अनुदान, मशरूम उत्पादन इकाई पर सहायता
सीजनल मशरूम की खेती के लिए कम लागत वाली फूस की झोपड़ी (साईज (30’म15’) 3 लाइन रैक प्रत्येक लाइन में 2 मंजिल) के निर्माण हेतु 30,000 रुपये प्रति यूनिट लागत निर्धारित है। इस पर सामान्य वर्ग को 75 प्रतिशत (22,500 रुपये) और अनुसूचित वर्ग को 85 प्रतिशत (25,500 रुपये) तक अनुदान दिया जाएगा। मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए 30 लाख रुपये की लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके तहत किसानों को 12 लाख रुपये प्रति इकाई की सहायता मिलेगी, जो बैंक ऋण से जुड़ी होगी।
मशरूम कवक निर्माण इकाई पर अनुदान, छोटे स्तर पर उत्पादन के लिए विशेष योजना
मशरूम कंपोस्ट निर्माण इकाई (20 लाख रुपये लागत) पर 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में 8 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, मशरूम खाद निर्माण इकाई (30 लाख रुपये लागत) पर 40 प्रतिशत अनुदान के तहत 12 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध होगी।
छोटे किसानों के लिए 2 लाख रुपये प्रति इकाई लागत (200 वर्ग फुट संरचना) पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इस योजना के तहत 1 लाख रुपये प्रति इकाई की सहायता मिलेगी तथा एक लाभार्थी को अधिकतम 5 इकाइयों तक लाभ दिया जा सकेगा।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि उद्यान विभाग की ये योजनाएं उन किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं, जो कम जमीन और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं। मशरूम उत्पादन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए सरकार लगातार प्रोत्साहन दे रही है। किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं और आधुनिक कृषि की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

9 April. 2026





 

08 अप्रैल 2026

सब्जी, मसालों व फूलों की करें खेती, 85 प्रतिशत तक पाएं सब्सिडी

सिरसा, 08 अप्रैल।

हरियाणा सरकार का उद्यान विभाग किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और विविध फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कई लाभकारी योजनाएं चला रहा है। इन योजनाओं के तहत किसानों को सब्जियों, मसालों, फूलों और सुगंधित पौधों की खेती के लिए भारी अनुदान दिया जा रहा है, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल सके।
सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50 से 85 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता दी जाती है, जबकि अनुसूचित वर्ग के किसानों को 25,500 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान का लाभ मिल रहा है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
मसालों की खेती में भी किसानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सामान्य मसालों जैसे धनिया और मेथी पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। वहीं, विशेष मसालों जैसे लहसुन, हल्दी और अदरक की खेती पर भी 50 प्रतिशत अनुदान की सुविधा उपलब्ध है, जिससे किसान कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं।
इसके अलावा फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार विशेष सहायता दे रही है। कट फ्लावर, कंदीय फूल जैसे लिलियम और ग्लैडियोलस तथा खुले फूलों की खेती पर किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इससे किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती से भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। सुगंधित पौधों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तुलसी, मेंथा और लेमन ग्रास जैसे पौधों पर भी किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि उद्यान विभाग हरियाणा की ये योजनाएं किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर प्रेरित कर रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और कृषि क्षेत्र में विविधता भी बढ़ रही है।

8 April 2026





 

07 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना : तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब नांदेड़ की नि:शुल्क यात्रा के लिए वरिष्ठ नागरिक 15 अप्रैल तक कराएं सरल पोर्टल पर पंजीकरण


-मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पांच मई को कुरुक्षेत्र से विशेष रेलगाड़ी को झंडी दिखाकर करेंगे रवाना
सिरसा, 7 अप्रैल।
 हरियाणा सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत श्री हजूर साहिब नांदेड़, महाराष्ट्र के लिए 5 मई को कुरुक्षेत्र से विशेष ट्रेन रवाना होगी। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी इस ट्रेन को झंडी दिखाकर प्रदेश के विभिन्न जिलों से जाने वाली संगत को रवाना करेंगे। योजना अनुसार वरिष्ठ नागरिक, जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है और उनकी पारिवारिक आय एक लाख 80 हजार रुपए से कम है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए सरल हरियाणा पोर्टल पर 15 अप्रैल तक पंजीकरण किया जा सकता है। पात्र व्यक्ति नजदीकी सीएससी सेंटर या अपने स्मार्ट फोन से सरल हरियाणा पोर्टल पर घर बैठे इस नि:शुल्क यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं ।
योजना का लाभ उठाने के लिए यह होगी पात्रता
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य सरकारी आईडी), परिवार पहचान पत्र (पीपीपी), शारीरिक रूप से यात्रा के लिए फिट होने की स्वयं घोषणा तथा पिछले तीन वर्षों में योजना का लाभ न लेने की घोषणा शामिल है। आवेदक का हरियाणा का निवासी होना और परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। वरिष्ठ नागरिक को एक सहायक को पूर्ण भुगतान पर साथ ले जाने की अनुमति है। वहीं 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग या 1.80 लाख से अधिक आय वाले लोग इस योजना का लाभ पूर्ण भुगतान पर उठा सकते हैं। योजना के नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति हर तीन वर्षों में केवल एक बार ही इस सुविधा का लाभ ले सकता है। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर संचालित इस योजना में आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है। योजना के तहत यात्रियों के रहने, खाने और स्थानीय परिवहन की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा अपने स्तर पर की जाएगी।
पंजीकरण के बाद डीआईपीआरओ कार्यालय में देनी होगी सूचना
आवेदन करने के उपरांत आवेदक को वाणिज्य भवन की चौथी मंजिल पर स्थित जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय सिरसा में अवश्य देनी होगी ताकि पात्र व्यक्तियों की सूचना समय पर आगे भेजी जा सके। पंजीकृत आवेदकों से अनुरोध है कि वे 16 अप्रैल से पहले यह सूचना डीआईपीआरओ कार्यालय में अवश्य दें।

7 April. 2026





 

06 अप्रैल 2026

16 अप्रैल से स्व-जनगणना की सुविधा, एक मई से शुरू होगा हाउस लिस्टिंग कार्य: नगराधीश अजय सिंह


- जनगणना के लिए 11 चार्ज अधिकारी नियुक्त, 700 से 800 की आबादी पर एक प्रगणक तैनात
- आई कार्ड धारक प्रगणकों को ही दें जानकारी, जनगणना के दौरान नहीं आएगा कोई ओटीपी
सिरसा, 06 अप्रैल।
नगराधीश अजय कुमार ने बताया कि देशभर में जनगणना कार्य की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और सिरसा जिला में भी इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिले में हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस का कार्य एक मई से 30 मई तक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्व-जनगणना की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, जिसके तहत नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी अपलोड कर सकेंगे। नगराधीश सोमवार को स्थानीय लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
नगराधीश ने बताया कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना का कार्य सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए 11 चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों की निगरानी में पूरे जिले में जनगणना प्रक्रिया संचालित होगी। उन्होंने बताया कि नगर परिषद सिरसा व डबवाली, नगर पालिका कालांवाली, रानियां और ऐलनाबाद सहित प्रत्येक तहसील को एक चार्ज के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां गणना कार्य किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए लगभग 700 से 800 की आबादी पर एक प्रगणक (एन्यूमरेटर) नियुक्त किया गया है, जबकि प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर तैनात किया गया है। इससे कार्य की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि 6 से 8 अप्रैल तक प्रगणकों को प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू हो गया है, जो 22 अप्रैल तक अंतिम शेड्यूल के रुप में रहेगा ताकि वे जनगणना के कार्य को सही और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रगणक को एक पहचान पत्र (आई-कार्ड) जारी किया जाएगा और बिना आई-कार्ड के कोई भी व्यक्ति जनगणना के लिए घर-घर नहीं जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे केवल आई-कार्ड धारक प्रगणक को ही अपनी जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
उन्होंने बताया कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी नागरिक के मोबाइल पर कोई ओटीपी नहीं आएगा। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है तो उससे सावधान रहें। किसी भी प्रकार के संदेह या जानकारी के लिए नागरिक नगराधीश कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
नगराधीश ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी से सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने से ही योजनाओं का लाभ आमजन तक सही तरीके से पहुंच सकेगा।