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Lahoo Ki Lau

युवा दिलों की धड़कन, जन जागृति का दर्पण, निष्पक्ष एवं निर्भिक समाचार पत्र

25 मार्च 2026

कम भाव मिलने की चिंता छोड़ें किसान, ‘भावांतर’ करेगी घाटे की भरपाई


- भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 फसलों के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित
- बाजार में फसल का कम भाव मिलने पर सरकार देगी संरक्षित मूल्य
सिरसा, 25 मार्च।
बागवानी किसानों की आय को सुरक्षित करने और उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग द्वारा भावांतर भरपाई योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न फसलों के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया है, ताकि बाजार में कम भाव मिलने की स्थिति में बागवानी किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी फसलों का समय अनुरूप  https://hortharyana.gov.in/  पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना आवश्यक है।
योजना के तहत कुल 21 फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से आलू, फूलगोभी, गाजर, मटर, टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च, बैंगन, भिंडी, मिर्च, घीया, करेला, बंदगोभी, मूली जैसी सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा फलों में किन्नू, अमरूद, आम, बेर और लीची जैसी फसलें भी योजना के दायरे में लाई गई हैं। मसाला फसलों में लहसुन और हल्दी को भी शामिल किया गया है।
सरकार द्वारा इन फसलों के लिए प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर आलू का 600 रुपये, फूलगोभी का 750 रुपये, मटर का 1100 रुपये तथा किन्नू का 1100 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार अमरूद, आम और अन्य फलों के लिए भी अलग-अलग दरें तय की गई हैं।
यदि बाजार में किसानों को उनकी फसल का मूल्य निर्धारित संरक्षित मूल्य से कम मिलता है, तो सरकार द्वारा अंतर की राशि सीधे किसानों को प्रदान की जाती है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल पाता है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनते हैं।
ऐसे मिलेगा योजना का लाभ
इस स्कीम का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार या किराये पर काश्तकार को भी मिलेगा। लाभ लेने के लिए जे-फार्म पर बिक्री अनिवार्य होगी। जे-फार्म पर बिक्री उपरांत बिक्री विवरण ई-पोर्टल (bby.hortharyana.gov.in) पर अपलोड होगा, जिसके लिए प्रत्येक संबंधित मार्केट कमेटी के कार्यालय में सुविधा उपलब्ध होगी। बिक्री की अवधि के दौरान यदि फसल उत्पादन का थोक मूल्य संरक्षित मूल्य से कम मिलता है, तो किसान फसल भाव के अंतर की भरपाई के लिए पात्र होगा। जे-फार्म पर बिक्री तथा निर्धारित उत्पादन प्रति एकड़ (जो भी कम होगा) को स्कीम की दिशा निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन देय होगा। भाव के अंतर से गुणा करने पर प्रोत्साहन देय होगा। प्रोत्साहन राशि किसान के आधार लिंक्ड बैंक खाते में दी जाएगी। औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड द्वारा चिन्हित मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर स्कीम के मानक और दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना और उन्हें न्यूनतम आय की सुरक्षा देना है। उन्होंने किसानों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक इस योजना का लाभ उठाएं और अपनी फसलों का पंजीकरण समय पर करवाएं, ताकि उन्हें योजना का पूरा फायदा मिल सके।

पंचायतों और नगर निकायों के विकास के रोडमैप में भागीदार बनें आम नागरिक

- सातवें राज्य वित्त आयोग ने मांगे सुझाव, गूगल फॉर्म के जरिए सब्मिट करें अपने आइडिया

सिरसा, 25 मार्च।

हरियाणा सरकार द्वारा सातवें राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है। आयोग के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए आम नागरिकों से सुझाव व विचार मांगे गए हैं। ताकि भविष्य का रोडमैप तैयार करते समय इन बहुमूल्य सुझावों को लागू करते हुए विकास योजनाएं तैयार की जा सके। जिले के नागरिक गूगल फॉर्म लिंक के जरिए अपने बहुमूल्य सुझाव दे सकते हैं।
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने बताया कि इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य हमारी पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की विकास परियोजनाओं को आमजन के द्वारा दिए गए बहुमूल्य सुझावों के साथ और अधिक सार्थक व मजबूत बनाना है। इसके लिए सरकार ने एक सहभागी और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाया है।
उन्होंने बताया कि अब जिले का कोई भी आम नागरिक, निर्वाचित प्रतिनिधि जैसे सरपंच, पंच, पार्षद, विषय विशेषज्ञ या समाजसेवी अपने अनुभव के आधार पर आयोग को सीधे अपनी राय भेज सकता है। इसके लिए आयोग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए विशेष गूगल फॉर्म तैयार किए हैं, ताकि सुझाव भेजने की प्रक्रिया सरल और सुलभ हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि आपके छोटे-छोटे सुझाव भविष्य में बड़े प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों का आधार बनेंगे, जिससे जन-जन का कल्याण सुनिश्चित होगा। इस पूरी प्रक्रिया में समन्वय और किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी के लिए आयोग के प्रतिनिधि युवराज सभ्रवाल से मोबाइल नंबर 94638-04009 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से इस महत्वपूर्ण कार्य में बढ़-चढक़र अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
शहरी व ग्रामीण विकास के लिए यहां दे सकते हैं अपनी राय
यदि आप शहरी क्षेत्र के विकास, स्वच्छता या बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए सुझाव देना चाहते हैं, तो आप इस लिंक  https://forms.gle/G5avsDt6QRGJtWLF8 का प्रयोग कर सकते हैं। वहीं, ग्राम पंचायतों के लिए और अधिक विकास और आत्मनिर्भर बनाने से जुड़े सुझाव देने के लिए  https://forms.gle/7nhzH7TBGdbydTAn6 लिंक जारी किया गया है।

25 March 2026





 

लसाड़ा नाला टूटने से डूमवाली में 125 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न, किसानों में हाहाकार

 

25 फीट चौड़ा पाड़ पड़ने से पकी हुई फसल बर्बाद; ग्रामीणों ने खुद ट्रैक्टर-ट्रालियों से भरा कटाव



डबवाली/डूमवाली (लहू की लौ): बेमौसमी बरसात और फैक्ट्रियों के गंदे पानी के दबाव के कारण ऐतिहासिक लसाड़ा नाला एक बार फिर कहर बनकर टूटा है। पंजाब के अंतिम छोर और हरियाणा की सीमा से सटे गांव डूमवाली में सोमवार देर रात नाला टूटने से करीब 25 फीट चौड़ा पाड़ (कटाव) लग गया, जिससे सवा सौ एकड़ में खड़ी गेहूं की पकी हुई फसल बर्बाद हो गई।

ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा: गांव डूमवाली के सरपंच दीपा के नेतृत्व में 100 से अधिक ग्रामीणों ने दिन-रात मेहनत कर ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से मिट्टी डालकर इस पाड़ को भरा। इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान भानू प्रताप सिंह, महिपाल सिंह, मनजीत सिंह और जगसीर सिंह की तैयार फसल पानी में डूब गई। सूचना मिलने पर बठिंडा प्रशासन की ओर से पटवारी और विभागीय अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया।

जोगेवाला में टला बड़ा खतरा: हरियाणा के गांव जोगेवाला के ग्रामीण पिछले सात दिनों से नाले पर पहरा दे रहे थे। ग्रामीण सुरजीत सिंह के अनुसार, यदि नाला हरियाणा की तरफ टूटता तो साल 2022 की तरह भारी तबाही मच सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल और थाना शहर प्रभारी देवीलाल ने भी मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

लसाड़ा नाले का इतिहास: 1963 में निर्मित 255 किमी लंबा यह नाला लुधियाना से शुरू होकर राजस्थान सीमा तक जाता है। इसका 200 किमी हिस्सा पंजाब और 55 किमी हरियाणा में आता है। हालांकि 1992 में हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में इसे बंद कर जमीन किसानों को लौटा दी थी, लेकिन हर साल ओवरफ्लो होने के कारण यह नाला विवादों और सुर्खियों में रहता है।

24 मार्च 2026

पेयजल व सीवरेज संबंधी समस्या के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबरों पर करें संपर्क

सिरसा, 24 मार्च।

जिला में आम नागरिकों को पेयजल और सीवरेज से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान करवाने के उद्देश्य से जल एवं स्वच्छता सहयोग संगठन द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। संगठन के जिला सलाहकार राकेश सोगलान ने बताया कि लोग अपनी शिकायतें अब आसानी से घर बैठे दर्ज करवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की जल या सीवरेज से जुड़ी समस्या के लिए नागरिक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5678 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, सीवरेज व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए 01666-230455 और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के लिए 01666-234304 नंबर निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल नंबर भी उपलब्ध करवाए गए हैं। पेयजल व सीवरेज से संबंधित शिकायतों के लिए 9518092425 और 9306107528 नंबरों पर भी सीधे संपर्क किया जा सकता है। इन नंबरों पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पेयजल व सीवरेज से संबंधित समस्या होने पर इन हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें, ताकि समस्याओं का समय पर निवारण सुनिश्चित किया जा सके।

24 March 2026





 

23 मार्च 2026

सुकन्या समृद्धि योजना से बेटियों का भविष्य हो रहा सुरक्षित और उज्जवल


सिरसा, 23 मार्च।
बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही सुकन्या समृद्धि योजना आज के समय में बेहद कारगर साबित हो रही है। इस योजना के तहत जिले के किसी भी डाकघर या बैंक में आसानी से खाता खोला जा सकता है, जिससे माता-पिता अपनी बेटी के लिए छोटी-छोटी बचत कर भविष्य में बड़ी आर्थिक सहायता तैयार कर सकते हैं।

केंद्र सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है। योजना के अंतर्गत मात्र 250 रुपये की न्यूनतम राशि से खाता खोला जा सकता है, जबकि एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा करवाने की सुविधा दी गई है। सरकार द्वारा इस योजना में जमा की गई राशि और परिपक्वता पर मिलने वाली रकम पर आयकर में छूट भी प्रदान की जाती है।

इस योजना की एक खास विशेषता यह है कि इसमें जमा राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है, जिससे समय के साथ बचत में अच्छी वृद्धि होती है। वर्ष 2026 के अनुसार, इस योजना पर लगभग 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर दी जा रही है, जो इसे अन्य बचत योजनाओं की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती है।

योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर उसकी पढ़ाई के लिए खाते से 50 प्रतिशत राशि निकाली जा सकती है। वहीं, खाता 21 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर या बेटी के 18 वर्ष के बाद विवाह होने की स्थिति में बंद कराया जा सकता है। 

योजना के तहत बेटी का खाता किसी भी बैंक की शाखा या पोस्ट ऑफिस में खुलवाया जा सकता है। खाता खुलवाने के लिए अभिभावकों को आवेदन पत्र के साथ बेटी का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का फोटो, पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र जमा करवाना आवश्यक होता है। योजना का लाभ लेने के लिए बेटी की आयु 10 वर्ष से कम होनी चाहिए।

सुकन्या समृद्धि योजना न केवल बेटियों की शिक्षा और विवाह के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत करती है। यह योजना वास्तव में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

23 March 2026





 

21 मार्च 2026

सरकारी कर्मचारी लगवाएं रूफटॉप सौलर, ब्याज मुक्त मिलेगी वित्तीय सहायता

- सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना, 5 किलोवाट तक मिलेगा लाभ

सिरसा, 21 मार्च। 
राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना (एसयूपीवाई) लागू की है। इस योजना के तहत राज्य सरकार के कर्मचारी, निगम/बोर्ड/कॉर्पोरेशन के कर्मचारी तथा एचकेआरएन कर्मचारी (जिनकी नौकरी सुरक्षित है) अपने आवास पर 5 किलोवाट तक रूफटॉप सोलर (आरटीएस) सिस्टम स्थापित कर सकते हैं। योजना का लाभ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनका पिछले बिलिंग चक्र में कोई बकाया राशि नहीं है।                  
इस योजना के अंतर्गत पात्र उपभोक्ताओं को बिजली विभाग द्वारा ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे 24/12 बिजली बिलों के माध्यम से (मासिक/द्वैमासिक बिलिंग के अनुसार) वसूल किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को एकमुश्त बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।
सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना के तहत 1 किलोवाट से 5 किलोवाट तक की क्षमता पर निर्धारित बेंचमार्क लागत तय की गई है। 1 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत 55 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को केवल पांच हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 30 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 19 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार 02 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत एक लाख 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 11 हजार रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 60 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 39 हजार रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी।                    
इसके अलावा 03 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत एक लाख 65 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 16 हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 58 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 12 हजार रूपये वहन करने होंगे। इसी प्रकार 04 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत दो लाख 20 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 22 हजार रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 78 हजार रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 42 हजार रूपये वहन करने होंगे।
इसी प्रकार 05 किलोवाट सौलर सिस्टम की कुल लागत दो लाख 75 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें उपभोक्ता को 27 हजार 500 रुपये (10 प्रतिशत) अग्रिम भुगतान करना होगा। 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी। इसके अलावा बिजली विभाग द्वारा 97 हजार 500 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ता को 72 हजार रूपये वहन करने होंगे।
इस योजना के माध्यम से राज्य कर्मचारी उपभोक्ता अपनी बिजली लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सौर ऊर्जा से जोडकऱ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

21 March 2026





 

20 मार्च 2026

सोलर ऊर्जा को बढ़ावा: सरकार दे रही सब्सिडी, अतिरिक्त बिजली बेचकर होगी आय


- पीएम सूर्य घर - मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाएं पात्र नागरिक
सिरसा, 20 मार्च।
केंद्र सरकार द्वारा पीएम सूर्य घर - मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। अंत्योदय परिवार जिनकी सालाना आय 1.80 लाख से कम है व जिनकी सालाना बिजली खपत 2400 युनिट तक है, वे दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 60 हजार रुपये व हरियाणा सरकार की ओर से 50 हजार रुपये अनुदान यानी कि कुल 1.10 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। जिन परिवारों की सालाना आय तीन लाख रुपये तक है व जिनकी सालाना बिजली खपत 2400 युनिट तक है वो परिवार दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 60 हजार रुपये व हरियाणा सरकार की ओर से 20 हजार रुपये का अनुदान यानी कि कुल 80 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद तीन किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर भारत सरकार की ओर से 78 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
केंद्र सरकार का अनुदान सभी आय वर्गों के लोगों को दिया जाएगा यानि केंद्र का अनुदान लेने के लिए आय से संबंधित कोई शर्त नहीं है। इस योजना का लाभ लेने से बिजली बिल जीरो हो जाएगा और जो अतिरिक्त बिजली बचेगी, उस बिजली को भी सरकार खरीदेगी, जिससे उनकी अतिरिक्त आय होगा। केंद्र सरकार की यह बेहतरीन योजना है जिसके द्वारा समाज की हर वर्ग की ऊर्जा संबंधित जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। अगर खपत से ज्यादा बिजली का उत्पादन सोलर पैनल द्वारा किया जाता है तो वह बिजली के खाते में जाएगा जिसका भुगतान सरकार द्वारा उक्त मकान मालिक को किया जाएगा।  इस योजना से सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों को अपनाने में मदद मिलेगी।

20 March 2026





 

18 मार्च 2026

हैप्पी कार्ड से करें 1000 किलोमीटर तक नि:शुल्क यात्रा

एक लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के सदस्यों को मिलेगा लाभ

सिरसा, 18 मार्च।

हरियाणा सरकार द्वारा जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ‘हैप्पी कार्ड’ योजना के तहत अब वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम वाले परिवारों को हरियाणा रोडवेज की बसों में प्रतिवर्ष 1000 किलोमीटर तक नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है। योजना के तहत परिवार के प्रत्येक सदस्य को परिवहन विभाग की वेबसाइट  https://ebooking.hrtransport.gov.in/ पर ऑनलाइन अप्लाई करना होता है, प्रत्येक सफल आवेदन के बाद एक रैफरेंस नंबर जनरेट होता है, इसके उपरांत विभाग द्वारा प्रत्येक सदस्य को एक स्वाइप कार्ड जारी किया जाता है। जिसके आधार पर हरियाणा रोडवेज की बस में निशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलती हैं। प्रत्येक कार्ड धारक पूरे एक साल में एक हजार किलोमीटर की अधिकतम निशुल्क यात्रा कर सकता है। पात्र लाभार्थी के आय की गणना फैमिली आईडी के आधार पर की जाती है। स्वाइप कार्ड प्राप्ति के दौरान आवेदक को निर्धारित शुल्क देना होता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को राहत प्रदान करना तथा उनकी दैनिक आवाजाही को आसान बनाना है। हैप्पी कार्ड के माध्यम से पात्र परिवारों को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से यात्रा का लाभ मिल रहा है, जिससे व्यवस्था में सुगमता आई है।
हरियाणा रोडवेज के महाप्रबंधक अनीत कुमार ने पात्र परिवारों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और हैप्पी कार्ड बनवाकर नि:शुल्क यात्रा सुविधा का लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी यात्रियों की सुविधा के लिए नवीन पहलें जारी रखी जाएंगी।

म्हारी योजना कॉलम के लिए

18 March 2026





 

16 मार्च 2026

पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर दाह संस्कार के लिए श्रम विभाग द्वारा दी जाती है 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

सिरसा, 16 मार्च।

प्रदेश में श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हरियाणा श्रम विभाग द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके दाह संस्कार के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत मृतक श्रमिक के नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहयोग मिल सके।
कई बार श्रमिक परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में श्रमिक के अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा यह योजना शुरू की गई है, जिससे श्रमिक परिवारों को तत्काल राहत मिल सके। श्रमिक की मृत्यु होने के बाद उसका नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी विभाग में आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होते हैं, जिनके आधार पर सहायता राशि जारी की जाती है।
आवेदक के नामांकित या कानूनी उत्तराधिकारी को विभाग द्वारा निर्धारित क्लेम फॉर्म-17 में आवेदन करना भी अनिवार्य है। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र परिवार को 15 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

म्हारी योजना कॉलम के लिए

16 March 2026





 

मत्स्य पालन में क्षति का डर दूर करेगी पीएम-एमकेएसएस योजना

जलकृषि को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की पहल, पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत होगा जलकृषि बीमा

सिरसा, 15 मार्च।
मत्स्य पालन और जलकृषि से जुड़े किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के अंतर्गत जलकृषि बीमा योजना लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जलकृषि से जुड़े किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, रोगों और अन्य जोखिमों से होने वाले नुकसान से बचाना तथा उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसके माध्यम से मछली पालन करने वाले किसानों को बीमा सुरक्षा देकर उनके व्यवसाय को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस योजना के तहत जलकृषि बीमा करवाने पर किसानों को एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। बीमा प्रीमियम पर सरकार की ओर से लगभग 40 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मत्स्य पालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

योजना के अंतर्गत जलीय कृषि फार्म के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें जल फार्म के लिए बीमा प्रीमियम का लाभ किसानों को दिया जाता है, जिसमें प्रति हेक्टेयर बीमा कवर की सीमा 25 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र तक किसानों को एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिल सकता है। यदि किसी किसान का फार्म एक हेक्टेयर से कम है, तो उसे प्रो-राटा आधार पर सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अलावा योजना में गहन जलीय कृषि फार्म को भी शामिल किया गया है। इसके तहत केज कल्चर, आरएएस, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक तकनीकों से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। इन इकाइयों के लिए भी बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध है और पात्र इकाइयों के लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाता है। योजना के तहत पात्र इकाई का अधिकतम आकार लगभग 1800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है।

बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस कवर के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, दुर्घटनाओं और अन्य अनिश्चित घटनाओं से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। इसके साथ-साथ बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार अतिरिक्त जोखिमों को भी कवर किया जा सकता है, जिससे मत्स्य पालकों को व्यापक सुरक्षा मिलती है। योजना के लाभ के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूर करवाएं।

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि सरकार की यह पहल मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे जलकृषि से जुड़े किसानों को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसान राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-1660 पर संपर्क कर सकते हैं या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।